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चिठ्ठा जगत ब्लॉगिंग के यक्ष प्रश्न


अब हिंदी चिठ्ठा जगत ब्लॉगिंग के पांच (कईयों के मामले में और भी ज्यादा) यक्ष प्रश्नों से कोई चिठ्ठाकार नहीं बच सका, यहां तक नीलिमा जी ने अपने वाद-संवाद में टैग कर के बताया कि मुजरिम हाजिर है और फिर डॉन ने अपने गुर्गो में हमारा नाम देकर गैंगवार में नाम शामिल कर एनकाउंटर का खतरा बढ़ा दिया है। 

डॉन को तो पकड़ना मुश्किल ही नहीं नामुमकिन है, लेकिन उसको गुर्गे तो पकड़े क्या एनकाउंटर में खलास भी हो जाते हैं। 

तो एनकाउंटर से बचने के लिये जरूरी है कि जल्द से जल्द नीलिमा जी और डॉन के प्रश्नों के उत्तर दिये जायें।

चिठ्ठा जगत ब्लॉगिंग


बड़े बड़े नामी और वरिष्ठ चिठ्ठाकार भी इसकी चपेट में आ गये तो मुझ जैसी नई चिठ्ठाकार की बिसात ही क्या? 

टैगियाने का यह बढ़ता हुआ छूत का रोग सबको गिरफ्त में लेता हुआ मेरे दरवाजे भी आ खड़ा हुआ। 

पहले पहले मुजरिम बनने के कारण पूछे गये प्रश्न

प्रश्न : आपकी चिट्ठाकारी का भविष्य क्या है?
  • मेरे विचार में मेरे द्वारा की गई हिंदी चिठ्ठाकारी का भविष्य बहुत ही उज्जवल है, हालांकि यह बात अपने मुंह मियां मिट्ठू बनने वाली बात होगी परन्तु मेरा विचार तो यही है, क्योंकि हालांकि हिंदी चिठ्ठाकारी में नई ही हूं, फिर भी शुरुआत के दिनों और अबके दौर में बहुत फर्क आ गया है। आप सभी लोगों कि टिप्पणियां मेरे जैसे लोगों के लिये प्रोत्साहन का कार्य करती हैं, और अब आप सब के साथ मिल कर चिठ्ठाकारी करने में हिचक नहीं रही। अब जब भी कोई नई ज्ञानवर्धक जानकारी प्राप्त होती है तो बस उसे सब लोगों के साथ बांटने बैठ जाती हूं। अब तो यह आलम है कि कहीं कोई समाचार, कोई आलेख, कोई घटना देख मन में यह ख्याल आता है कि अगर इसके ऊपर ब्लॉग पोस्ट बनाई जाये तो कैसा रहे? आप लोग भी अपनी टिप्पणियों द्वारा खूब प्रोत्साहित करते हैं तो आगे भी हिम्मत कर पाती हूं। हिंदी में लिखने के शुरूआता दौर में यही नहीम समझ में आता था कि क्या लिखूं? इसीलिये शुरुआती दौर में इधर-उधर से देखे शेर और दिल्ली की हमारा बदनाम ब्लू लाइन बसों में चिपके हुये ड्राइवरों के सड़कछाप शेर-डॉयलॉग इत्यादि लिख कर देखा कि हिंदी लिख भी सकते हैं कि नहीं। पर शुरुआती दिनों कि झिझक तो अब खैर नहीं रही बल्कि अब तो लगता है कि हिंदी चिठ्ठा जगत तो एक परिवार की तरह है । इसलिये मैं मानती हूं कि यदि हिंदी चिठ्ठा ग्रुप इसी तरह कार्यरत रहा तो हिंदी चिठ्ठाकारी का भविष्य बहुत ही उज्जवल रहेगा और अन्य नये लोग भी इन चिठ्ठों को पढ़कर प्रोत्साहित होंगे।
प्रश्न : आपके पसंदीदा टिप्पणीकार?
  • सारे ही लोग टिप्पणी करके प्रोत्साहित करते हैं तो किसी विशेष का नाम लेना उचित नहीं होगा।
प्रश्न : तीसरा सवाल वही है जो प्रत्यक्षा जी का तीसरा सवाल था यानि किसी एक चिट्ठाकार से उसकी कौन सी अंतरंग बात जानना चाहेंगे ?
  • दरअसल बात ये है कि आप सब लोग इस बात से परिचित होंगे कि हमारे किस्से कहानियों में और खास तौर से हिंदी फिल्मों में अक्सर दिखाया जाता है कि किसी प्रसिद्ध कहानीकार या शायर को चाहने वाली कई लड़कियां होती हैं, जो कई बार तो खाली शायर के नाम से ही प्यार करने लगती हैं। तो मैं अपने हिंदी जगत के प्रसिद्ध और पुराने या जो लोग आजकल जीत रहे हैं, उनसे पूछना चाहूंगी कि क्या उनकी कोई गुमनाम प्रशंसिकायें है जो कि चिठ्ठों पर टिप्पणी न करके सीधे ई-मेल भेजती हों?


  • प्रश्न : वह बहुत मामूली बात जो आपको बहुत परेशान किए देती है?

    • मेरे अपने जब किसी भी कारणवश परेशान होते हैं तो मैं बहुत ज्यादा परेशान हो जाती हूँ। उस समय लगता है कि कोई जादू की छड़ी होती सब सही कर देती, पर ऐसा कहां मुमकिन है। मेरे बच्चे, पति, रिश्तेदार, अड़ोस-पड़ोस इत्यादि में जब कोई परेशान होता है तो मैं परेशान हो जाती हूँ। यानी यदि कोई दूसरा परेशान होता है तो मैं भी परेशान हो जाती हूँ।


  • प्रश्न : आपकी जिंदगी का सबसे खूबसूरत झूठ?
    • यूँ तो मैं भगवान की कृपा से झूठ नहीं बोलती हूँ। लेकिन ये भी नहीं मैं आजकल के जमाने में सत्यवादी हरिश्चंद्र हूँ। एक बार मजाक में बोला गया झूठ काफी मजेदार है। हुआ यूँ कि मैंनें अपनी बिटिया के लिये एक नई ड्रेस खरीदी थी। उसने जब उस ड्रेस को पहना तो वो बड़ी खुश हुई और मेरे से बार-बार पूछने लगी कि कहां से खरीदा है। टालने की गरज से और मजाक में मैंने कह दिया कि भीख में लाये हैं। उसने अड़ोस-पड़ोस सब जगह खुशी-खुशी बता दिया कि मेरी मम्मी ये ड्रेस भीख में लाई हैं। यह बात याद करके आज भी हंसी आ जाती है।

    और अब सीबीआई के वो प्रश्न जिनका जबाव देकर मैं क्वात्रोची की तरह बच जाउंगी।
    प्रश्न : हिन्दी चिट्ठाकारी ही क्यों?
    • हिंदी चिठ्ठाकारी इसलिये क्योंकि मैं हिंदी भाषी हूँ, हिंदी में ही सोचती हूँ और हिंदी की तरक्की चाहती हूँ।
    2.प्रश्न : जीवन में कब सबसे अधिक खुश हुए?
    • अपनी शादी पर। क्यों? कभी किसी पोस्ट में बताउंगी।
    3. प्रश्न : अगला जन्म मिले तो क्या नहीं बनना चाहोगे?
    • अ-भारतीय
    4. प्रश्न :कौन सा चिट्ठा सबसे अधिक पसन्द है, क्यों?
    • अपना (हिंदीबात).. हा. हा... (श्रीशजी की तरह - रावण वाली हंसी) , सभी अच्छे चिठ्टे हैं , किसी एक का नाम पूछकर गैगवार छिड़ने का खतरा है और मेरा एनकाउंटर पक्का है।
    5. प्रश्न : हिन्दी चिट्ठाजगत के प्रचार प्रसार में क्या योगदान दे सकते हैं?
    • अभी तो फिलहाल हिंदी चिठ्ठाकारी के माध्यम से ही कुछ सेवा हो सकती है, बाकि जैसा आदेश हिन्दी चिट्ठाजगत के 'भाई' लोगों का हो।
    मेरा ख्यांल है कि सभी चिठ्ठाकारों को टैगियाया जा चुका है इसलिये किसी को टैग नही करं रही हूँ। अगर कोई हैं, तो वो खुद को शिकार समझें और इन्हीं प्रश्नों का उत्तर दें।
  • Manisha मंगलवार, 27 फ़रवरी 2007

    शाबाश सौरव दादा! 


    आखिरकार तुमनें यह साबित कर दिया कि तुम यूं ही बंगाल टाइगर नहीं कहलाते हो। 20 दिन पहले कौन सोच सकता कि सौरव गांगुली भारतीय क्रिकेट टीम में वापसी करेंगे और अगर वापसी करेंगे तो टीम में अंतिम ग्यारह जगह मिलेगी या नहीं और सबसे बड़ी बात अगर जगह मिली भी तो गांगुली कैसा प्रदर्शन करेंगे।

    लेकिन बंगाल टाइगर ने सारी आशंकाओं को खारिज करते हुये जोहानसबर्ग में दक्षिण अफ्रीका के साथ हो रहे पहले टेस्ट मैच में न केवल जगह बनायी बल्कि अपने शानदार प्रदर्शन से भारत की स्थिति इस मैच में मजबूत कर दी है।

    सौरव गांगुली Sourav Ganguly


    भारत यह टैस्ट मैच जीतने के कगार पर पहुंच गया है। सौरव गांगुली ने जोहानसबर्ग टेस्ट मैच में पहली पारी में नाबाद रहते हुये शानदार 51 रन बनाये तथा दूसरी पारी में 25 रन बनाये। 

    ये रन दिखने में शायद कम लगें लेकिन जिस तरह की मैच की पिच है और भारत के अन्य बललेबाजों ने जिस तरह का प्रदर्शन किया तथा सौरव गांगुली जिस तरह की विपरीत परिस्थिति में खेलने आये उसको देखते हुये इसे बहुत अच्छा प्रदर्शन ही माना जायेगा। 

    सौरव गांगुली ने यह दिखाया कि आदमी को अपने उपर पूरा विश्स रखना चाहिये और विपरीत परिस्थितियों में धैर्य नहीं खोना चाहिये।

    चित्र क्रिकइंफो.कॉम के सौजन्य से

    Manisha शनिवार, 24 फ़रवरी 2007

    आदिवासियों का वेलेंटाइन डे भगोरिया


    पश्चिम मध्य प्रदेश के आदिवासी जनजातीय युवक युवतियों का वेलेंटाइन डे (प्रणय पर्व) भगोरिया 25 फरवरी को शुरू हो रहा है। आदिवासी अंचल झाबुआ और खारगौन जिलों में परंपरागत रूप से मनाए जाने वाले इस रंगीन पर्व में स्थालीय भील और भीलाला लोगों के युवक और युवतियां बड़े उत्साह के साथ शामिल होते हैं। 


    Bhagoria आदिवासियों का वेलेंटाइन डे भगोरिया


    इस मेले के प्रति विदेशियों में भी खासा आकर्षण है। भारत भ्रमण के दौरान वे भगोरिया मेलों में बड़ी तादाद में शामिल होते हैं। भगोरिया हाट में आने वाले आदिवासी युवक-युवती एक दूसरे को पसंद करने के बाद भागकर विवाह कर लेते हैं। इस भाग जाने की वजह से ही इसको भगोरिया कहते हैं

    परंपरा के अनुसार अगर किसी लड़के को कोई लड़की पसंद आ जाती है तो वो उस लड़की के गालों पर गुलाल लगाकर अपनी चाहत का इजहार कर देता है। अगर लड़की को भी लड़का पसंद होता है तो वो भी लड़के को गुलाल लगा देती है। 

    इसके बाद ये लोग वहां से भाग जाते हैं। इसके बाद आदिवासी समाज इनको पति-पत्नि का दर्जा दे देता है।

    इस भगोरिया को फसल पकने और होली की खुशी का भी प्रतीक माना जाता है। साल भर अलग-अलग स्थानों पर काम धंधा करने वाले आदिवासी भगोरिया पर्व पर अपने अपने घरों पर लौट आते हैं और गिले शिकवे भुलाकर मौज मस्ती के साथ इस पर्व को मनाते हैं। 

    यह पर्व होली से पहले मनाया जाता है। बदलते जमाने के साथ भगोरिया पर भी आधुनिक संस्कृति का प्रभाव पड़ा है। आदिवासियों के पहनावे में बदलाव आया है तथा वाद्य यंत्रों ढोल और मृदंग का स्थान इलेक्ट्रानिक्स उपकरणों ने ले लिया है। झाबुआ, धार और खरगोन जिलों प्रमुख हैं जहां भगोरिया पर्व मनाया जाता है। इन जिलों के कई जिलो के गांवों में भगोरिया हाट लगते हैं।

    कड़ियां:

    Manisha शुक्रवार, 23 फ़रवरी 2007

    राष्ट्रपति भवन में स्थित मुगल गार्डन की सैर


    भारत के राष्ट्रपति के निवास राष्ट्रपति भवन में स्थित मुगल गार्डन को आम जनता के लिये खोल दिया गया है। मुगल गार्डन में स्थित स्परिचुअल गार्डन, हर्बल गार्डन एवं बैयोडाइवर्सिटी पार्क आदि को भी जनता के दर्शनार्थ खोला गया है। 

    Mughal Garden Delhi मुगल गार्डन


    आम जनता के लिये मुगल गार्डन  फरवरी से लेकर मार्च तक सुबह 10.30 बजे से अपरान्ह 4.30 बजे तक खुला रहता है। सोमवार को साप्ताहिक बंद है।

    मुगल गार्डन को सर एडविन लुटियन ने डिजाइन किया था। इस के डिजाइन की पेरणा उन्हें ताजमहल के बगीचों और जम्मू और कश्मीर के खूबसूरत मुगलिया बागों से मिली थी।

    मुगल गार्डन 15 एकड़ में फैला हुआ है। मुगल गार्डन के तीन भाग हैं। पहले भाग में आयताकार गार्डन है जो कि राष्ट्रपति भवन की मुख्य इमारत से लगा हुआ है। इस गार्डन में चार कोने हैं जिसके हर ओर टैरेस गार्डन है। 

    यहां के सेन्ट्रल लॉन में राष्ट्रपति द्वारा कई पार्टीयों का आयोजन किया जा चुका है। दूसरा है लोन्ग गार्डन यानी लंबा बाग, इसी के साथ है तीसरा बाग सर्क्युलर गार्डन या गोल बाग। 

    लंबे वाले बाग में गुलाब का बेहतरीन किस्में हैं। यह बाग इस बार का मुख्य आकर्षण है। गोल वाले बाग में एक फुव्वारा लगा है।

    मुगल गार्डन में 128 प्रकार के गुलाबों के फूल लगे हैं। अभी हाल ही में मुगल गार्डन में तीन नये फुव्वारे लगाये गये हैं। ये संगीतमय फुव्वारे हैं जो कि शहनाई और वंदेमातरम की धुनों पर घूमते हैं।

    इस रविवार को मैं अपने परिवार के साथ मुगल गार्डन घूम कर आई हूं, यह एक बहुत ही अविस्मरणीय अनुभव रहा। अगर आपने अभी तक मुगल गार्डन नहीं देखा तो यह एक सुनहरी मौका है, 18 मार्च तक आप प्रोग्राम बना सकते हैं। मुगल गार्डन आपको हमेशा याद रहेगा।

     मुगल गार्डन के बारे में और यहां पर जानें।

    Manisha सोमवार, 19 फ़रवरी 2007

    बॉस - एक भारतीय ऑपरेटिंग सिस्टम


    BOSS (Bharat Operating System Solutions) ओपेन-सोर्स सोफ्टवेयर को देश में बढ़ावा देने के लिये C-DAC के
    फ्री/ ओपेन सोर्स सोफ्टवेयर के राष्ट्रीय संसाधन केन्द्र (National Resource Centre for Free/Open Source Software (NRCFOSS)) द्वारा तैयार किया गया लाइनक्स का एक संस्करण है। इसे खास तौर पर भारतीय परिस्थितियों के लिये तैयार किया गया है। इसमे एक सुन्दर डेस्कटॉप है, जिसमें भारतीय भाषाओं का खास समावेश किया गया है। इसके अलावा इसमें भारत के सरकारी क्षेत्र में प्रयोग होने वाले साफ्टवेयर पैकेजों को शामिल किया गया है।

    विशेषतायें

    • चित्रमय इंस्टालर
    • सिस्टम की तेज शुरूआत और
    • दोस्ताना जी-नोम (GNOME) डेस्कटाप
    • वाडियो के लिये ज्यादा सहयोग
    • 3D डेस्कटाप
    • भारतीय-OO (Bharatheeyaa OO) - ओपेन ऑफिस 2.0.1 का भारतीय संस्करण (इस समय केवल हिंदी और तमिल में उपलब्ध)
    • पेन ड्राइव, सीडी व अन्य मीडिया के लिये सहयोग
    • लाइफेरिया (Liferea) – RSS/RDF रीडर
    • टीवी ट्यूनर कार्ड सपोर्ट
    • ब्लूटूथ (Bluetooth) सपोर्ट
    • अच्छे इंटरनेट टूल – Firefox, Gaim, Xchat
    • Input Method - SCIM with Remington Keyboard Layout for Tamil, Hindi, Punjabi,and Marati
    • बोनफायर - एक CD/DVD Burning tool

    बॉस बनाने वालों उद्देश्य इसे भारत की सभी 22 राष्ट्रीय भाषाओं में काम करनेलायक बनाना है ताकि अंग्रेजी न जानने वालों तक भी सूचना प्रौद्योगिकी का फायदा पहुंच सके, जो कि अभी तक नहीं पहुंच पाया है। 

    बॉस के बारे में और जानने के लिये इसके विकी पेज (BOSS Wiki) की यात्रा करें जहां आपको बॉस के चित्र तथा विवरण मिलेगा। आप अपने विचार भी व्यक्त कर सकते हैं। 

    अगर आपकी इस बारे में कोई और जिज्ञासा है तो आप bosslinux@cdac.in पर ई-मेल कर सकते हैं। बॉस को निशुल्क उपलब्ध कराया जा रहा है। आप इसे सीधे डाउनलोड कर सकते हैं।

    कड़ियां:

    Manisha रविवार, 11 फ़रवरी 2007

    असली बॉस कौन है?

    कल आशीष गुप्ता जी ने महिलाओं का रासायनिक विश्लेषण किया था। लेकिन उनको हम महिलाओं की सही पहचान नहीं है। हम रासायनिक ही नहीं बल्कि भौतिक रुप से भी पुरूषों पर भारी हैं। इस के लिये मैंने ढ़ूढ़कर ये चित्र निकाले हैं। अब इन चित्रों को आप भी देखिये। हास्य का जवाब हास्य से।


    Manisha शनिवार, 10 फ़रवरी 2007

    कुछ प्रसिद्ध हिंदी फिल्म सीन 


    पहले हमने हिंदी फिल्मों के कुछ सदाबहार डॉयलाग के बारे में बताया था। इधर अपनी हिंदी फिल्मों में कुछ ऐसे सीन होते हैं जो लगभग हर दूसरी फिल्म में शामिल होते हैं। इस सभी दृश्यों जो अब सिनेमा हॉल के पर्दे पर देखते हैं तो समझ जाते हैं कि अब क्या होने वाला है। कुछ तो इतने घिसे पिटे दृश्य हैें कि लगभग हर फिल्म में ही होते है। ऐसे ही कुछ सीन कुछ प्रसिद्ध हिंदी फिल्म सीन दृश्य यहां प्रस्तुत हैं।

    • हीरो हमेशा फर्स्ट क्लास फर्स्ट पास होता है और हमेशा BA करता है। MA तो कभी भी नहीं। आजकल की फिल्मों में थोड़ा परिवर्तन हुआ है अब हीरो MBA करता है।
    • अमीर प्रवासी भारतीय लड़के (हीरो) का नाम अधिकतर राज, आर्यन या राहुल होता है।
    • भारत के किसी भी जगह के गांव की कहानी हो, वहां की बोली हमेशा पूर्वी उत्तर प्रदेश के गांवों की होती है।
    • गांव की गोरी (हीरोईन) हमेशा चोली घाघरा ही पहनती है और उस पर हमेशा ही जमींदार या उसके बेटे की गंदी निगाह होती है।
    • गांव में रिटार्यड फौजी होता है जो बात बात में डींगें मारता है।
    • कहानी अगर शहर की तो रिटार्यड फौजी न होकर रिटार्यड कर्नल होगा जिसकी घनी मूंछें होती हैं और वो बात बात में गोली मारने की बात करता है तथा बर्मा की लड़ाई (कब हुई थी?) की कहानी सुनाता है।
    • अगर फिल्म में दो हीरो हों तो दोनो एक ही लड़की को चाहेंगे, दोनों ही एक दूसरे के लिये अपना प्यार कुर्बान करने को तैयार रहते हैं।
    • दो हीरो वाली फिल्मों में, दोनों हीरों में एक बार गलतफहमी तथा लड़ाई अवश्य होगी, यह लड़ाई हमेशा बराबरी पर छूटती है। अगर चाकू का इस्तेमाल इस लड़ाई में हो रहा है तो पहले एक हीरो की आंख या गर्दन तक चाकू जायेगा, फिर दूसरे हीरो की आंख और गर्दन तक।
    • हीरो चाहे जो करता हो, वो कार चला सकता है तथा जरुरत पड़ने पर हैलीकॉप्टर तथा हवाई जहाज उड़ा सकता है।
    • पुलिस हमेशा फिल्म के अन्त में आती है।
    • विलेन पूरी फिल्म में मौज करता है तथा कोई भी बात करते समय या गलत काम करते समय जोर जोर से हंसता रहता है।
    • अगर विलेन ऊंचे से या खास तौर पर हैलीकॉप्टर से भागते हुये हीरो पर गोली बरसाता है तो गोलियां हीरो के दोनो ओर लाइन बनाती हई गिरती हैं लेकिन हीरो को एक भी नहीं लगती है, अगर हीरो नीचे हैलीकॉप्टर पर निशाना लगाये तो एकदम निशाना लगता है। ये बात हॉलीवुड की फिल्मों पर भी लागू होती है।
    • हिन्दी फिल्मों के विलेन को फाईटिंग नहीं आती है।
    • हीरो जब विलेन को मार मार कर बाजी जीत रहा होता है तभी पता नहीं क्यों हीरो की हीरोईन, बहन एवं मां वहां आ जाती हैं जिन्हे विलेन के आदमी पकड़ लेते हैं तथा बाजी पलट जाती है।
    • विलेन के नाम डागा, जेके, संग्राम, जगताप, शक्ति, राका, लॉयन होते हैं और उनके नीचे के गुन्डों के नाम शंकर, जग्गू, राबर्ट, माइकल, रघू, राजा इत्यादी होते हैं। विलेन की महिला साथियों के नाम रीटा, मोना, सोनिया तथा मोनिका होते हैं। ये महिलायें मन ही मन हीरो को चाहती हैं तथा जब विलेन हीरो पर गोली चलाता है तब बीच में आकर अपनी जान दे देती हैं।
    • दारु का अड्डा हमेशा माइकल का होता है।
    • विलेन का साथ देने वाले नेता कार्टून टाईप के होते हैं और हमेशा बिहारी बोली बोलते हैं।
    • पुरानी फिल्मों में जज साहब कोई फैसला सुना रहे होते थे तभी अदालत के दरवाजे के पास से कोई जोर से चिल्लाता था "ठहरो! जज साहब..."।
    • विलेन की बहन या बेटी हीरो से प्यार करती है और इसको लेकर हीरो और विलेन में तनातनी रहती है।
    • अगर विलेन कोई खतरनाक काम के मंसूबे बना रहा होता है या कोई बड़ी प्रयोगशाला टाईप की जगह होती है तो विलेन हीरो को अपने जाल में फंसा हुआ जानकर अपना पूरा प्लान बता देता है, या पूरी प्रयोगशाला घुमाकर सब कुछ बता देता है।
    • विलेन हीरो को यह भी बता देता है कि उसके बाप का हत्या उसी ने की थी।
    • कॉलेज के प्रोफेसर हमेशा कार्टून टाईप के होते हैं जो कि साथी महिला प्रोफेसरों को पटाने की कोशिश करते रहते हैं।
    • कॉलेज का दादा हमेशा कॉलेज के ट्रस्टी का लड़का होता है, जो कि प्रिंसीपल को हमेशा धमकाता रहता है।
    • देवर हमेशा भाभी का लाड़ला होता है तथा अपना प्रेमिका के बारे में सब से पहले भाभी को ही बताता है, वो भी पहली बार में ही उस लड़की को पसन्द कर लेती है।
    • बुजुर्ग नौकर हमेशा रामू काका होता है।
    • सस्पेंस फिल्मों में जिस पर शक दिखाया जाता है, वो कभी अपराधी नहीं निकलता तथा कई बार तो उसी का कत्ल हो जाता है।
    • सस्पेंस फिल्मों में या खौफनाक फिल्मों में एक बूढ़ा चौकीदार होता जो कंबल ओढ़े रहता है और हाथ में लालटेन लेकर इधर से उधर घूमा करता है। इसका भी कत्ल हो जाता है।
    • हीरो अगर पुलिस का इंस्पेक्टर होता है तो वो जेब में इस्तीफा निकाल कर कमिश्नर की मेज पर जब चाहे तब पटक देता है।
    • पुलिस कमिश्नर अक्सर कार्टून टाइप का होता है।
    • पुलिस का इंस्पेक्टर हीरो गुन्डों के अड्डों पर अकेला ही जाता है और सब को मारकर हवालात में बंद कर देता है।
    • शादी के सीन में छोटी लड़कियां हंसती हुई इधर से उधर भागती रहती हैं।
    • हीरोईन बहू सुबह सुबह भजन गाती है। जबकि घर की बिगड़ी हुई औलादें पॉप म्यूजिक सुनती हैं।
    • विलेन या उसके साथियों को यदि गोली लगती है तो तुरन्त ही मर जाते हैं, लेकिन यदि हीरो को गोली लगी और उसको मरना है तो वो बहुत देर तक डॉयलाग बोलता है।
    • हीरो को यदि गोली लगेगी तो अस्पताल में डाक्टर हीरो के शरीर से गोली निकाल कर टीन के डब्बे में जोर से गिरायेगा।


    और भी बहुत से ऐसे सीन हैं जो हमारी हिंदी फिल्मी में अक्सर दोहराये जाते हैं, सारे इस समय याद नहीं आ रहे हैं। याद आने पर यहां लिखती जाउंगी। यदि आप लोगों को भी ऐसे सीन पता हों तो बताइये, और यदि आप फिल्म बनाना चाहते हों तो यहां से कोई 10-15 सीन उठा लीजिये और अपनी फिल्म बना लीजिये।

    Manisha शुक्रवार, 9 फ़रवरी 2007

    लाइव राइटर से पोस्ट होने लगी

    जब से मैं अपने सभी चिठ्टों को नये ब्लॉगर पर ले गई थी, तभी एक परेशानी से मुझे दो-चार होना पड़ रहा था। मैं नये चिठ्टों को बनाने के लिये विंडोज लाइव राइटर का प्रयोग करती हूं। 

    लेकिन जब से नये ब्लोगर पर शिफ्ट किया था, तब से ही विंडोज लाइव राइटर से पोस्ट तो हो रहा था लेकिन ब्लॉगर पर पोस्ट नजर नहीं आती थी। हार कर खुद ही कॉपी करके पोस्ट करनी पड़ रही थी। 

    समझ में नहीं आ रहा था कि क्या किया जाये? 

    हिंदी जगत के अन्य सक्रिय चिट्टाकारो से सहयोग मांगा गया। 

    पंडितजी के ब्लॉग पर मिश्राजी ने बताया कि मुझे विंडोज लाइव राइटर को अपडेट करना चाहिये। 

    इसलिये मैंने कल विंडोज लाइव राइटर को दुबारा डाउनलोड किया और पुराने संस्करण के उपर ही इंस्टाल कर दिया। 

    इसके बाद अब विंडोज लाइव राइटर ठीक तरह से पोस्ट कर रहा है। 

    सहयोग करने वालों को धन्यवाद।

    Manisha शनिवार, 3 फ़रवरी 2007

    सदाबहार हिंदी फिल्म डॉयलाग


    हिंदी फिल्मों में संवाद अदायगी या डॉयलाग डिलीविरी पर काफी जोर रहा है। कई कलाकार तो अपनी संवाद डॉयलाग अदायगी के बल पर ही प्रसिद्धि पा गये। 

    पुराने जमाने में हिंदी फिल्मों में कलाकार  मुख्यत: नाटकों व रंगमंच से ही आये थे, इस कारण उनकी संवाद अदायगी का तरीका थोड़ा नाटकीय था। सोहराब मोदी इस के उदाहरण हैं।

    Manisha बुधवार, 24 जनवरी 2007

    नवजोत सिद्धू की बातें - Siddhuism Navjot


    Singh Siddu - Famous Indian cricketer and Member of Parliament of India is now commenting on regular cricket shows on the TV. He is famous for his utterness. His quotes are now very much in the news. Everybody hates it and enjoy it. 


    नवजोत सिद्धू की बातें - Siddhuism


    श्री नवजोत सिद्धू की बातें इस समय काफी चर्चा में हैं। सिद्धू अंग्रेजी और हिन्दी दोनो भाषाओं में अपनी बातें कहते हैं। यहां पर उनकी कुछ मशहूर हिन्दी और अंग्रेजी की कहावतें प्रस्तुत हैं।
    • कौवों के चिल्लाने से ढोल नहीं फटते ।
    • That ball went so high it could have got an air hostess down with it.
    • Experience is like a comb that life gives you when you are bald
    • Statistics are like miniskirts, they reveal more than what they hide
    • The Sri Lankan score is running like an Indian taxi meter
    • चाची के मंछें होती तो उन्हें चाचा न कहते

    Manisha
    भारत में आधिकांश तौर पर माल ढोने के लिये ट्रकों का इस्तेमाल होता है और इन ट्रकों को चलाने वाले अपने ट्रकों को बहुत ही प्यार से सजाते हैं। ट्रकों को चलाने वाले ड्राइवर अपने ट्रकों पर खूब अच्छी अच्छी शेरो-शायरी लिखवाते हैं। ट्रक ड्राइवरों की ये शेरो-शायरी कई बार बड़ी ही मजेदार होती है। 


    ट्रकों पर की गई इस शायरी के कुछ शेर तो बहुत ही गहरी बात कह जाते हैं, वहीं कुछ शेर आपके चेहरे पर मुस्कान ला देते हैं। हमने यहां पर भारतीय ट्रकों की शेरो-शायरी को संकलित करा है। उम्मीद है कि ट्रक ड्राइवरों की ये शेर शायरी आपको पसंद आयेगी -


    ट्रक ड्राइवरों के शेर शायरी और वाक्य


    "आगे वाला कभी भी खड़ा हो सकता है।"


    "तेरह के फूल सत्रह की माला, बुरी नजर वाले तेरा मुंह काला।"


    "सावधानी हटी, दुर्घटना घटी"


    "सावधानी हटी, सब्जी पूड़ी बंटी"


    "खूबसूरती देख कर नजरें ना हटाना,
    सावधानी हटी, दुर्घटना घटी"


    "बुरी नजर वाले तेरे बच्चे जियें, बड़े होकर तेरा खून पियें।"


    "बुरी नजर वाले तेरा मुंह काला"


    "बुरी नजर वाले नसबंदी करा ले"


    "बुरी नजर वाले तू सौ साल जिये, तेरे बच्चे दारु पी पी कर मरें।"


    "पहले जय शंकर की बोलो, फिर दरवाजा खोलो"


    "हम तो दरिया हैं समंदर में जायेंगे, चमचों का क्या होगा वो कहां जायेंगे"


    "मालिक तो महान है, चमचों से परेशान है"


    "मालिक का पैसा, ड्राइवर का पसीना, 
    चलती है सड़क पर, बन कर हसीना।"


    "13 मेरा 7"


    "अपनी सवारी जान से प्यारी"


    "चलती है गाड़ी तो उड़ती है धूल
    जलते हैं कोंग्रेसी तो खिलते हैं फूल"


    "ज़िंदगी है मुख़्तसर आहिस्ता चल, 
    कट ही जाएगा सफ़र आहिस्ता चल..."


    "मुसीबतें लाख आएंगी जिंदगी की राहों में,
    रखना तू सबर,
    मिल जाएगी तुझे मंजिल इक दिन
    बस जारी रखना तू सफ़र।"


    "उम्र बीत गयी लेकिन सफ़र ख़त्म न हुआ,
    इन अजनबी सी राहों में जो, खुद को ढूँढने निकला।"


    "जल्दी बुकिंग करो अपने सामान की, 
    चाहे वह हल्का हो या भारी..
    अभी ध्यान नहीं, बाद में लिखूंगा शायरी"


    "मैं भर के चली जाऊंगी, तू देखते रहियो।"


    ट्रक ड्राइवरों के शेर शायरी
    ट्रक ड्राइवर शेर शायरी 👆


    "धीरे चलोगे तो बार बार मिलोगे, तेज चलोगे तो हरिद्वार मिलोगे"


    "वाहन चलाते समय, सौंदर्य दर्शन न करें
    वर्ना देव दर्शन हो सकते हैं"


    "हंस मत पगली, प्यार हो जायेगा"


    "लोन भरना बाकी है थोड़ा दूरी बनाये रखे"


    "राम युग में घी मिला, कृष्ण युग में घी, इस युग में दारु मिली, खूब दबा के पी।"


    "ये नीम का पेड़, चन्दन से कम नहीं, हमारा लखनऊ लन्दन से कम नहीं"


    "जिन्हें जल्दी थी वो चले गये, तुझे जल्दी है तो तू भी जा"


    "ग़मों से चूर हूं फिर भी नसे से दूर हूं
    बच कर चलता हूं इसलिए क्योंकि
    मैं भी किसी की मांग का होने वाला सिंदूर हूँ"


    "मत कर मोहब्बत ड्राइवर से, उनका ठिकाना दूर होता है
    वो बेवफा नहीं होते उन्हें जाना जरूरी होता है।"


    "नींद चुराती है होश उड़ाती है, फलनवा की बेटी सपनवा में आती है।"


    "बंगाल का रूट पसंद है, बिहार डरा देती है
    भाई से प्यार होता है, भाभियां लड़ा देती हैं।"


    "करोना, फ़ॉलो ना"


    "जलो मत, बराबरी करो"


    "अभी जाती हूं फिर आऊँगी"


    "गड्डी जांदी आ छलांगा मारदी
    जदों याद आवे सोहने यार दी..!"


    "ना बोलूं मैं तो कलेजा फूंके,  
    जो बोल दूँ तो ज़बाँ जले है.."


    ट्रक ड्राइवरों के शेर शायरी
    ट्रक ड्राइवरों के शेर शायरी👆


    "रेशमी सलवार चप्पल बाटा की, छींक मारती जाये गाड़ी टाटा की"


    "वक्त से पहले नसीब से ज्यादा कभी नहीं मिलता"


    "मां मेरी दुनिया तेरे  आंचल में"


    "जरा कम पी मेरी रानी, बहुत मंहगा है इराक का पानी"


    "Use Dipper at Night"


    "भगवान बचाये तीनों से, डाक्टर पुलिस हसीनों से"


    "ऐ मालिक क्यों बनाया गाड़ी बनाने वाले को, घर से बेघर कर दिया गाड़ी चलाने वाले को"


    "फानूस बन कर जिसकी हिफाजत  हवा करे, वो शमा क्या बुझेगी जिसे रोशन खुदा करे"
    "नीयत तेरी अच्छी है तो, किस्मत तेरी दासी है। कर्म तेरे अच्छे हैं तो घर में मथुरा काशी है।।"


    "हमारी चलती है, लोगों की जलती है"


    "कीचड़ में पैर रखोगी तो धोना पड़ेगा, ड्राइवर से शादी करोगी तो रोना पड़ेगा"


    "अपनों से बचो गैरों से निपट लेंगे"


    "क्यों मरते हो बेवफा सनम के लिये, दो गज जमीन मिलेगी दफन के लिये।
    मरना है तो मरो वतन के लिये, हसीना भी दुपट्टा उतार देगी कफन के लिये।।"


    "दुल्हन वही जो पिया मन भाये, पिया वही जो पी कर आये"


    "मैं खूबसूरत हुं मुझे नजर न लगाना, जिन्दगी भर साथ दूंगी पीकर मत चलाना"


    "गलत ओवरटेक से यमराज बहुत खुश होता है"


    "जगह मिलने पर साइ़़ड दिया जायेगा"


    "भूत प्रेत और मासूम बीवी मन का वहम है, ऐसा कुछ नहीं होता"


    "घूमता हुँ गली गली मुझसे प्यार न करना
    कभी भी गले मिल लूं बस सावधान ही रहना"


    "कृपया हार्न न बजाऐं साहब ने पहले से ही सबकी बजा रखी है..!"


    "माई नेम इस मीनाकुमारी, मुझे चाहिए ब्यूटीफुल सवारी"


    "मीना कुमारी का लाल दुपट्टा, गाड़ी को कोसने वाला उल्लू का पट्ठा"


    "जलो मत दोस्तों, ये तो मीना की गड्डी है ऐसे ही चलेगी"


    "दूरी बना के चल, वरना टपक जाएगा"


    "यारो सफर है सुहाना , चाल मेरी तूफानी,
    खतरों से है खेलना, मैं झारखण्ड की रानी"


    यह भी देखिये -

    Manisha

    पुरानी दुनिया की छुक-छुक रेलगाड़ी का आनंद


    याद कीजिये बचपन के वो दिन जब रेलगाड़ी के सफर का मतलब आज की तरह तेज दौड़ती विद्युत या डीजल ट्रेन नहीं बल्कि कोयले से चलने वाली अपना ही एक आकर्षण लिये हुये छुक-छुक करती हुई एक रेलगाड़ी हुआ करती थी। आज भी सभी को वो छुक-छुक रेलगाड़ी का सफर और सफर के बीच सांसों से टकराती धीमे-धीमे जलते कोयले की महकती गंध तथा उस सबके बीच खिड़की वाली सीट पर बैठने का आनन्द याद आता है। 


    Steam Rail Engine भाप वाला रेल इंजन
    भाप वाला रेल इंजन



    बच्चों को तो आज भी रेलगाड़ी की आवाज छुक-छुक बतायी जाती है। तो वापस कुछ ऐसा ही अनुभव लोगों को, खासकर स्कूली बच्चों को देने के लिए उत्तर रेलवे ने सफदरजंग रेलवे स्टेशन (नई दिल्ली) से रिंग रेलवे लाइन पर शनिवार को हैरिटेज रेल शुरू किया। 

    रेल चलाने का मुख्य उद्देश्य उत्तर रेलवे द्वारा मनाए जा रहे हैरिटेज मंथ के तहत आने वाले पीढ़ी को बीते कल की कोयले से चलने वाली छुक-छुक रेलगाड़ी के अलावा रेल से जुड़े अन्य ऐतिहासिक महत्व से अवगत कराना है।

    दिल्ली भ्रमण के लिए चलाई गई कोयले के इंजन से चलने वाली इस रेलगाड़ी के प्रमुख आकर्षण में से एक यह है कि यह इंजन वर्ष 1947 का बना है और वर्ष 1985 में इसे रिटायर कर दिया गया था। अब यह इंजन रेवाड़ी स्थित स्टीम इंजन शेड में ऐसे छह अन्य इंजन के साथ खड़ा होता है, जहां से इसे अधिकतर फिल्म की शूटिंग के लिए निकाला जाता है। इसके लिए फिल्मकारों से नब्बे हजार से एक लाख रुपये प्रतिदिन ली जाती है।

    अंग्रेजों के कर्मचारियों के लिए बनाई गई जगह सफदरजंग रेलवे स्टेशन से इसका सफर शुरू होगा। इसके बाद यह मुसलमानों के पुराने शहर निजामुद्दीन, दिल्ली के नए विस्तार यमुनापार के इलाकों से होते हुए औरंगजेब के बेटों शाह और दारा की रियासतों शाह और दारा जिसे आज शाहदरा कहते हैं वहां जाएगी। वहां से यह असली दिल्ली कही जाने वाली पुरानी दिल्ली आएगी। उसके बाद इसका ठहराव नई दिल्ली होगा। इसके अलावा नई दिल्ली के रेलवे एक्सटेंशन के तौर पर बनाए गए तिलक ब्रिज से यह वापस सफदजंग रेलवे स्टेशन आएगी। 

    सफदरजंग से इसका सफर शुरू होने का समय हालांकि सवा दस बजे सुबह रखा गया है लेकिन उसमें बदलाव होने पर उसकी घोषणा की जाएगी। सफर के दौरान जवाहर लाल नेहरू स्टेडियम, पावर हाउस आईटीओ, आनंद विहार रेलवे स्टेशन, यमुना नदी, कनाट प्लेस के इलाके भी रेलगाड़ी की खिड़की से नजर आएंगे।

    तो अगर आप इन दिनों में दिल्ली या उसके आस पास हैं तो इस पुरानी दुनिया की (Old world charm) छुक-छुक रेलगाड़ी का आनंद लीजिये।

    Manisha मंगलवार, 23 जनवरी 2007

    सालाना 80 हजार घूस देता है हर ट्रक वाला


    लीजिये भारत में व्याप्त भ्रष्टाचार के ऊपर एक और मुहर लग गई। एक अध्ययन के अनुसार भारत में हर ट्रक वाला सालाना 80 हजार रुपये की रिश्वत विभिन्न सरकारी एजेंसियों के लोगों को देता है। 
    Bribe -  घूस

    देश में तकरीबन 36 लाख ट्रक हैं। ऐसे में ट्रक ऑपरेटरों की करीब 22 हजार करोड़ की कमाई भ्रष्ट सरकारी अमले की भेंट चढ़ जाती है। 

    ट्रांसपोर्ट क्षेत्र की इस बदसूरत तस्वीर को उजागर किया है ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल की रिपोर्ट ने।


    रिपोर्ट के मुताबिक यदि इस भ्रष्टाचार पर काबू पा लिया जाए तो इससे सबसे ज्यादा फायदा उपभोक्ताओं को होगा, क्योंकि रिश्वत की यह राशि येन-केन-प्रकारेण अंतत: उन्हीं की जेब से वसूली जाती है। 

    श्रीराम समूह की वित्तीय मदद से एमडीआरए द्वारा कराए गए अध्ययन पर आधारित रिपोर्ट को ट्रांसपरेंसी इंटरनेशनल की भारत शाखा के अध्यक्ष एडमिरल (सेवानिवृत्त) आरएच तहलियानी ने जारी किया। 

    उन्होंने कहा कि एक ट्रक ऑपरेटर रोजाना 211 से 266 रुपये की घूस टोल प्लाजा, चेक-प्वाइंट्स तथा राज्यों की सीमा चौकियों पर अदा करता है। 

    यह रिश्वत पुलिस, आरटीओ के अलावा वन विभाग, बिक्रीकर व चुंगी कर्मचारियों को दी जाती है। इसका मकसद चेकिंग से बचना होता है।

    "काश भारत के लोग नैतिक रुप से श्रेष्ठ होते।"

    Manisha मंगलवार, 2 जनवरी 2007

    गुरूजी - एक भारतीय सर्च इंजन


    गुरूजी.कॉम - जी हां यह नाम है एक सर्च इंजन (search engine) का जो कि भारतीय लोगों द्वारा भारत के लोगों के लिये बनाया गया है । 

    गुरूजी - एक भारतीय सर्च इंजन - Guru Ji Indian Search Engine


    सर्च इंजन बनाने वालों का दावा है कि यह सर्च इंजन भारतीय सामग्री को दुनिया तक पहुंचायेगा। गुरूजी.कॉम जीवन से जुड़ी हर चीज तक पहुंजने में मदद का एक माध्यम बनना चाहा है।

    गुरूजी.कॉम भारत और भारतीय सामग्री के लिये पहला क्रॉलर (crawler) आधारित सर्च इंजन है। 

    इसकी रचना (algorithm) इस प्रकार की गई है कि यह इंटरनेट पर भारत से संबंधित जानकारी और सामग्री को ढूंढ़ कर उसे इस प्रकार व्यवस्थित करता है कि सबसे नवीनतम सामग्री पहले प्रदर्शित होती है।

    देखने वाली बात यह होगी की जब गूगल (google.com) ही सर्च इंजन का पर्यायवाची हो और हर व्यक्ति ढूंढ़ने के लिये गूगल की साईट पर जाता हो वहां यह सर्च इंजन कितना कामयाब हो पायेगा।

    Manisha सोमवार, 1 जनवरी 2007

    जिन्दगी की शायरी और शेर


    अक्सर जब हम किसी महफिल, समारोह या फिर किसी भी प्रकार के आयोजन में जाते हैं तो हम देखते हैं कि कुछ लोग बहुत ही जल्दी सबको अपनी बातों से प्रभावित कर के वहां पर अपना प्रभाव छोड़ जाते हैं। 

    ऐसे लोग जिन्दगी की बातों के उपर कुछ ऐसे शेर शायरी वाक्य या सूक्ति का प्रयोग करते हैं जिससे लोग उनसे अत्यंत ही प्रभावित हो जाते हैं। 


    मैने भी कई ऐसे सामाजिक, राजनैतिक, तकनीकी या फिर पारिवारिक आयोजनों मे भाग लिया है जहां पर कोई वक्ता अपने संबोधन में कुछ ऐसी लच्छेदार बाते करते हैं कि लोग वाह वाह कर उठते हैं। 

    कुछ लोग उर्दू भाषा की ऐसी शेरो शायरी का प्रयोग करते हैं जो कि जिन्दगी के कई पहलूओं को छू जाती है, कई लोग हिंदी और अंग्रेजी के कुछ प्रसिद्ध वाक्यों को बोलते हैं।


    अक्सर मंच पर बोलने वाले लोग, टीवी पर किसी बहस में बोलने वाले लोग और संसद या राज्यों की विधान सभाओं में बोलने वाले राजनीतिज्ञ लोग  ऐसी ही जिन्दगी की शेरो-शायरी को बोलते हैं और अपनी बात के वजन को हजार गुना बढ़ा देते हैं। 

    संसद में तो कई बहस अपनी शेरो शायरी और जबाबी शेरो-शायरी के लिये प्रसिद्ध हैं जैसे कि मनमोहन सिंह और सुषमा स्वराज की बहस, हाल के दिनों मे मोदी जी भी संसद में अपनी बात में शेर शायरी के रखने लगे हैं।

    जिन्दगी की शेरो शायरी के कुछ शेर तो अत्यंत ही प्रसिद्ध है बहुत ही ज्यादा प्रयोग होते हैं। मेरा आप लोगों के लिये अनुरोध रहेगा कि इस प्रकार के कम से कम 40-50 शेर तो आप याद कर ही लीजिये और हम महफिल में अपनी धाक जमाइये।


    जिन्दगी की शायरी



    दो पल की है जिन्दगी
    उसको तू मुस्करा के जी


    कौन कहता है आसमां में सुराख नहीं हो सकता
    एक पत्थर तो जरा तबियत से उछालो यारो ।


    यार जरा माहौल बना
    हर पल में उठा सदियों का मजा
    जो बीत गया सो बीत गया
    जो बीतना है वो हंस के बिता
    यार जरा माहौल बना
    हर पल में पी बस एक दवा
    जी खोल के जी, जी जान से जी
    कुछ कम ही सही पर शान से जी



    कभी किसी को मुकम्मल जहां नहीं मिलता,
    कहीं जमीं तो कहीं आसमां नहीं मिलता,
    जिसे भी देखिये वो अपने आप में गुम है,
    जुबां मिली है मगर हमजुबां नहीं मिलता,
    बुझा सका है कौन भला वक्त के शोले,
    ये एसी आग है चिसमें धुवां नहीं निकलता
    तेरे जहां में ऐसा नहीं के प्यार नहीं ना हो
    जहां उम्मीद हो वहां नहीं मिलता
    निदा फाजली



    हजारों जवाबो से अच्छी है मेरी खामोशी,
    न जाने कितने सवालों की आबरू रखी


    मुल्क ने मांगी थी एक चिंगारी, फकत रोशनी के लिए 
    निज़ाम ने हुक्म दिया, चलो आग लगा दी जाए


    ना इधर-उधर की तू बात कर, 
    ये बता कि काफिला क्यों लुटा, 
    हमें रहज़नों से गिला नहीं, 
    तेरी रहबरी का सवाल है


    माना कि तेरे दीद के काबिल नहीं हूं मैं, 
    तू मेरा शौक देख, मेरा इंतजार देख


    खुदी को कर बुलंद इतना के हर तकदीर से पहले
    खुदा बंदे से खुद पूछा तेरी रजा क्या है?


    उम्र-ए-दराज़ मांग के लाई थी चार दिन
    दो आरज़ू में कट गए दो इंतिज़ार में


    कितना है बद-नसीब 'ज़फ़र' दफ़्न के लिए
    दो गज़ ज़मीन भी न मिली कू-ए-यार में


    तम मुझको न चाहो, तो कोई बात नहीं
    तुम किसी और को चाहो तो मुश्किल होगी 


    कुछ तो मजबूरियां रही होंगी, 
    यूं ही कोई बेवफा नहीं होता


    तुम्हें वफा याद नहीं हमें जफा याद नहीं, 
    जिंदगी और मौत के दो ही तराने हैं 
    एक तुम्हें याद नहीं, एक हमें याद नहीं


    हमको है उनसे वफा की उम्मीद
    जो नहीं जानते वफा क्या है 


    चमन को सींचने में कुछ पत्तियां झड़ गई होंगी,
    यहीं इल्जाम लग रहा है हम पर वेवफाई का,
    चमन को रौंद डाला जिन्होंने अपने पैरों से,
    वही दावा कर रहे हैं इस चमन की रहनुमाई का। 


    फ़ानूस बन के जिस की हिफ़ाज़त हवा करे 
    वो शमा क्या बुझे जिसे रौशन ख़ुदा करे।


    ज़ाहिद शराब पीने दे मस्जिद में बैठ कर 
    या वो जगह बता दे जहाँ पर ख़ुदा न हो 


    और भी ग़म हैं ज़माने में मोहब्बत के सिवा
    राहतें और भी हैं वस्ल की राहत के सिवा


    दिल के फफूले जल उठे सीने के दाग़ से 
    इस घर को आग लग गई घर के चराग़ से 


    ग़रज़ कि काट दिए ज़िंदगी के दिन ऐ दोस्त
    वो तेरी याद में हों या तुझे भुलाने में


    ज़िंदगी रोक के अक्सर यही कहती है मुझे
    तुझ को जाना था किधर और किधर आ गया है


    बड़े लोगों से मिलने में हमेशा फ़ासला रखना
    जहाँ दरिया समुंदर से मिला दरिया नहीं रहता


    वक़्त दो मुझ पर कठिन गुज़रे हैं सारी उम्र में
    इक तेरे आने से पहले इक तेरे जाने के बाद


    हो जाए जहाँ शाम वहीं उन का बसेरा
    आवारा परिंदों के ठिकाने नहीं होते


    तुम को आता है प्यार पर ग़ुस्सा 
    मुझ को ग़ुस्से पे प्यार आता है 


    इस सादगी पे कौन न मर जाए ऐ ख़ुदा 
    लड़ते हैं और हाथ में तलवार भी नहीं 


    कभी किसी को मुकम्मल जहाँ नहीं मिलता 
    कहीं ज़मीन, कहीं आसमाँ नहीं मिलता


    बर्बाद गुलिस्ताँ करने को बस एक ही उल्लू काफ़ी था
    हर शाख़ पे उल्लू बैठा है अंजाम-ए-गुलिस्ताँ क्या होगा


    कश्ती चलाने वालों ने जब हार कर दी पतवार हमें
    लहर लहर तूफान मिले और मौज-मौज मझधार हमें,
    फिर भी दिखाया है हमने और फिर ये दिखा देंगे, सबको, 
    इन हालात में आता है दरिया पार करना हमें 


    हजारों ख्वाहिशें ऐसी, कि हर ख्वाहिश पे दम निकले 


    नजर को बदलो तो नजरें बदल जाती हैं
    सोच को बदलो तो सितारे बदल जाते हैं,
    कश्तियां बदलने कि जरूरत नहीं, 
    दिशा को बदलो तो किनारे खुद-ब-खुद बदल जाते हैं


    बझ जाते हैं दिये, कभी तेल की कमी से भी
    हर बार कुसूर हवा के झोंके का नहीं होता


    चमन में इख्तिलात-ए-रंगोबू से बात बनती है
    हम ही हम हैं तो क्या हम हैं, तुम ही तुम हो तो क्या तुम हो


    इस मोड़ पर घबरा के थम न जाइये आप
    जो बात नयी है उसे अपनाइए आप
    डरते हैं नयी राह पे क्यों चलने से
    हम आगे-आगे चलते हैं आजाइए आप


    यूनान-ओ-मिस्र-ओ-रोम सब मिट गए जहां से
     अब तक मगर है बाकी, नाम-ओ-निशां हमारा 


    कुछ ऐसे भी मंजर हैं तारीख की नजरों में, 
    लम्हों ने खता की थी, सदियों ने सजा पाई


    हम आह भी भरते हैं तो हो जाते हैं बदनाम
     वो कत्ल भी करते हैं तो चर्चा नहीं होता


    तकाजा है वक्त का कि तूफान से जूझो, 
    कहां तक चलोगे किनारे किनारे 


    ता उम्र ये भूल मैं करता रहा
    धूल चेहरे पर थी और आइना साफ़ करता रहा


    मुक्तसर सी जिंदगी के अजब से अफसाने हैं,
    यहां तीर भी चलाने हैं और परिन्दे भी बचाने हैं


    तुम तहज़ीब को भी इखलास समझते हो
    दोस्त होता नहीं हर शख्स, हाथ मिलाने वाला



    गुलाचीं ने तो कोशिश कर डाली, सूनी हो चमन की हर डाली
    कांटों ने मुबारक काम किया, फूलों की हिफ़ाजत कर बैठे



    रंज कि जब गुफ्तगू होने लगी
    आप से तुम, तुम से तू होने लगी



    मैं अकेला ही चला था जानिबे-मंजिल, मगर
    लोग साथ आते गये, कारवां बनता गया



    मौत का भी इलाज हो शायद
    जिन्दगी का कोई इलाज नहीं
    ज़माना बढ़े शौक से सुन रहा था
    हमीं सो गये, दास्तां कहते कहते



    लहरों की जिन्दगी पर कुर्बान हजार जाने,
    हमको नहीं गवारा साहिल की मौत मरना


    यकीन जानिये इस तरह के जिन्दगी के शेर और शायरी को यदि हम याद कर लें और अपनी रोजाना की बाेलचाल में इस्तेमाल करना शुरू कर दें तो आप देखेंगे कि लोग आप से प्रभावित होने लगे हैं और आप की लोकप्रियता बढ़ने लगी है। ये भी देखें - ट्रक ड्राईवरों के द्वारा ट्रकों पर शेर और शायरी

    Manisha शुक्रवार, 7 जुलाई 2006