कोचिंगों का जाल तो नहीं ही टूटा

पिछले कुछ दिनों से इंजीनियरिंग और मेडिकल के प्रवेश के लिये होने वाली विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं के परिणामो को घोषित किये जाने का दौर जारी है। राष्ट्रीय स्तर की आईआईटी-जेईई, एआईईईई, सीपीएमटी परीक्षाओं के अलावा राज्य स्तरीय इसी प्रकार की विभिन्न विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं के परिणाम आ रहे हैं जिनमें जो लोग सफल हैं वो आगे की सोच रहे है कि किस कॉलेज और संस्थान में दाखिला लें और जिनका नहीं हुआ वो या तो दुबार तैयारी करना चाहते हैं या फिर किसी अन्य कोर्स में दाखिला लेंगे।

Coaching
इन  प्रतियोगी परीक्षाओं के परिणामों के घोषित होते ही विभिन्न कोचिंग संस्थानों द्वारा समाचार पत्रों में बड़े-बड़े विज्ञापन द्वारा ये बताने का दौर शुरु हो गया है जिसमें दावा किया जा रहा है कि उनके यहां से इतने बच्चों का चयन हो गया है इत्यादि इत्यादि। अब कि कुछ  पहले आईआईटी की परीक्षा के लिये केवल दो बार की बाध्यता और 12वीं में कम से कम 60 प्रतिशत नबंरों को पास होने की शर्क ये कह कर लगाई गई थी कि इससे परीक्षार्थी 12वीं कक्षा पर ज्यादा ध्यान देंगै और कोचिंग पर लगाम लगेगी, लेकिन लगता नहीं है कि कोचिंग का जाल टुट पाया है बल्कि और बढ़ गया है। ऐसे में सरकार को ध्यान देना चाहिये कि इन परीक्षायो को इस तरह से लिया जाये कि छात्र बिना कोचिंग के भी इन परीक्षायों को पास कर सकें।

SarkariNaukriBlog com गुरुवार, 10 जून 2010