अन्तर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर प्रतिनिधित्व में आरक्षण

Women Reservation in India महिला होने  के नाते मुझे खुशी है कि आखिरकार 14 वर्षों के बाद संसद और राज्यों की विधानसभाओं  में 33 प्रतिशत आरक्षण महिलाओं के लिये बिल पेश हो जायेगा। ये एक ऐतिहासिक क्षण है। इस प्रकार के आरक्षण के बाद बहुत कुछ बदलेगा। हालांकि व्यक्तिगत आधार पर मैं किसी भी प्रकार के आरक्षण के विरूद्ध हूं क्योंकि ये लोगो का प्राकृतिक और वास्तविक विकास नहीं करता है बल्कि ये अन्य लोगों के साथ अन्याय करता है, लेकिन फिर भी महिलाओं के लिये संसद और विधानसभा में आरक्षण एक अच्छा कदम है।  इसके विरोधी महिलाओं को पिछड़े, दलित, धार्मिक आधार पर बांट कर विरोध कर रहे हैं लेकिन ये बिल अब पास हो कर रहेगा। ये कोई पुरुषों और महिलाओं के बाच की लड़ाई नहीं है बल्कि महिलाओं के वास्तविक विकास की बात है।

Manisha सोमवार, 8 मार्च 2010
आईपीएल के चाहने वाले दीवाने होते है क्या?

दिल्ली में आजकल एफएम रेडियो पर और टीवी पर भी विभिन्न चैनलों पर आईपीएल-3 (IPL-3) के लिये टिकटों की बिक्री के लिये विज्ञापन बज रहे हैं, और दिखाये जा रहे हैं। इन विज्ञापने को देख सुन कर तो ऐसा लगता है मानो आईपीएल देखने वालों को होश ही नहीं है कहां पर क्या बात करनी है? मसलन एक विज्ञापन में कुछ लड़के रेल से उतर कर जा रहे हैं और रेलवे के टिकट परीक्षक को देखकर उसे टिकट नहीं दिखाकर उसे आईपीएल का टिकट दिखाते हैं, दुसरे इसी तरह के विज्ञापन में एक आदमी सिनेमा हॉल की टिकट खिड़की पर जाली के पास की आईपीएल की टिकट मांग रहा है यानी आईपीएल के टिकट खरीदने वाले दीवानों (पागलों) की तरह कहीं भी आईपीएल का टिकट खरीदने पहुंच रहे हैं। एक और विज्ञापन में एक आदमी जिसकी पत्नी ने सिंगापुर भ्रमण के लिये टिकट खरीदने के लिये व्रत रखा होता है, आईपीएल का टिकट खरीद लाता है। मैं सोच रही हूं कि फागुन और बसंत के बौराने के मौसम का प्रभाव है या फिर अप्रैल फूल डे आने वाला है उसका असर है कि लोग आईपीएल के टिकट के लिये बौराये से घूम रहे हैं और दीवानों जौसी हरकते कर रहे हैं।

Manisha गुरुवार, 4 मार्च 2010
इन सेवाओं के प्रयोक्ताओं के नाम कब जाहिर होंगे?

हाल ही में दिल्ली में एक एक और कालगर्ल गैकेट का पर्दाफाश हुआ है जिसे एक बाबा शिवेन्द्र उर्फ राजीव रंजन द्विवेदी उर्फ इच्छाधारी बाबा चला रहा था। इसके गिरोह में तमाम अच्छे घरों की लड़कियां शामिल थीं। जैसे ही बाबा के पकड़े जाने की खबर आई वैसे ही मीडिया ने चटखारे लेकर खबर को दिखाना शुरु कर दिया। बताया जाने लगा कि बाबा का कारोबार पूरे भारत में फैला था, कि कालगर्ल के इस धंधें में कई पढ़ी-लिखी लड़कियां और महिलायें शामिल था, कि कैसे बाबा ने अपने आश्रम में व्यवस्थायें कर रखीं थीं, कि बाबा का कारोबार 2000 करोड़ रुपयो का है, इत्यादि इत्यादि। कुछ टीवी चैनलों ने बाबा की कोई डायरी भी दिखा दी जिसमें लेनदेन और सेवा लेने वालों के नाम लिखे थे। अपराधियों के नाम सार्वजनिक किये जाने चाहिये लेकिन इन नामो को कभी नहीं बताया जाता है। मीडिया भी इन नामों को छुपा जाता है। पुलिस जब भी किसी इस तरह के रैकेट को पकड़ती है तो उसके सरगना और पकड़े जाने वाली लड़कियों और औरतों के नाम तो बता दिये जाते हैं लेकिन कभी भी उनका नाम सामने नहीं आता जिन्होंने कॉलगर्लों की सेवायें ली थीं। बाबा का 2000 करोड़ का कारोबार बताया जा रहा है, जाहिर सी बात ये सब पैसा काला धान है जिसे कमाने वालों ने ही बाबा को दिया है उनकी सेवा के बदले में। यदि उन लोगों के नाम भी सार्वजनिक कर दिये  जायें जिन्होंने बाबा या अन्य किसी के द्वारा सेक्स के लिये लड़कियां मंगायी थी तो सब को पता चलेगा और सार्वजनिक बदनामी के डर से इस तरह के धंधे कुछ कमा भी होंगे और सरकार को बता चलेगा कि कौन लोग अपना काला धन कहां प्रयोग कर रहे हैं। दर्असल कालगर्ल संस्कृति के प्रयोक्ता अधिकांश बड़े सरकारी अधिकारी, नेता व समाज के बड़े-बड़े लोग है और इसीलिये हमेशा लड़कियों के नाम ही बाहर आते है लेकिन कभी उन पुरुषों के नाम बाहर नहीं आ पाते जो लोग ऐसे काम को प्रयोग कर उसे बढ़ावा दे रहे हैं। मेरे विचार में देश में जगह जगह पकड़ जा रहै सेक्स रैकेटों को चलाने वालों के अलावा उनके ग्राहकों को भी पकड़ कर उनके नाम सार्वजनिक किये जाने चाहिये।

Manisha बुधवार, 3 मार्च 2010