इंटरनेट पर क्रेडिट कार्ड को पासवर्ड चाहिये

भारतीय रिजर्व बैक के आदेश के अनुसार कल से इंटरनेट पर क्रेडिट कार्ड इस्तेमाल करते समय पासवर्ड चाहिये होग जो कि कार्ड नंबर, कार्ड का आखिरी तारीख और सावीसी2 (CVC2) के अलावा होगा। ये एक अच्छा कदम है जिससे इंटरनेट पर चोरी के क्रेडिट कार्ड का प्रयोग करने पर रोक लगेगी। लोकिन इसके साथ-साथ दुकानों में क्रेडिट कार्ड के इस्तेमाल में भी कोई ऐसा ही पासवर्ड का प्रयोग अनिवार्य करना चाहिये क्योंकि क्रेडिट कार्ड का अधिकांश अनधिकृत प्रयोग दुकानों में जैसे कि ज्वेलरी या मोबाईल की दुकानों में ज्यादा होता है। वैसे भी ये समझ में न आने वाली बात है कि अपना पैसा एटीएम से निकालने के लिये हमें पिन का इस्तेमाल करना पड़ता है लेकिन अगर कोई हमारा क्रेडिट कार्ड चुरा ले तो वो बिना किसी पिन नंबर के लाखों रुपये की खरीदारी कर सकता है और बिल हमारे नाम पर।
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Manisha शुक्रवार, 31 जुलाई 2009
स्टार प्लस का ट्रंप कार्ड – सच का सामना

Sach-Ka-Samna सच का सामना रियलिटी शो के रुप में स्टार प्लस के हाथ एक बड़ा ट्रंप कार्ड लग गया है। पिछले कुछ समय से स्टार प्लस की पहले नंबर की पोजीशन को केवल आठ महाने पुराने मनोरंजन चैनल कलर ने  छीन लिया था और तभी से स्टार प्लस वापस अपनी इस स्थ्ति को हथियाने के लिये बेताब था। इस समय सच का सामना ने एक प्रकार का मौका स्टार प्लस को दे दिया है।  सच का सामना शायद इतना प्रसिद्ध होते लेकिन उस से विवादों के जुड़ जाने से बहुत फायदा मिला है। मुझे तो लगता हे कि पहले स्थान को पाने के लिये ही स्टार प्लस जानबूझ कर विवादों को हवा दे रहा है ताकि लोग जिज्ञासावश सच का सामना को देखें और स्टार प्लस को अच्छी टीआरपी मिल सके।

Manisha सोमवार, 27 जुलाई 2009
परमाणु पनडुब्बी आईएनएस अरिहंत भारतीय नौसेना में शामिल

अपने ही देश में ही बनी पहली परमाणु संपन्न पनडुब्बी 'आईएनएस अरिहंत' भारतीय नौसेना में शामिल हो गई है। भारत अब स्वनिर्मित परमाणु संपन्न पनडुब्बी वाले गिने चुने देशों की कतार में शामिल हो गया।

अरिहंत पनडुब्बी 'सागरिका' [के 15] प्रक्षेपास्त्र से लैस होगी, जिसकी मारक क्षमता 700 किलोमीटर है। अरिहंत का मुख्य हथियार इसकी मारक क्षमता है। यह समुद्र में आधे किलोमीटर की गहराई या उससे अधिक में रहकर समुद्र के भीतर से मिसाइल दागने में सक्षम है। छह हजार टन की पनडुब्बी में 85 मैगावाट क्षमता का परमाणु रिएक्टर है और इसकी सतह पर गति 12 से 15 नोट्स तथा पानी में गति 24 नोट्स तक जा सकती है। इस पनडुब्बी में 95 लोग सवार होंगे तथा यह तारपीडो और 12 बैलेस्टिक मिसाइलों समेत अन्य मिसाइलों से लैस होगी।

यह ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल करने के लिए कार्यक्रम से जुड़े हरेक व्यक्ति को बधाई और इसके कुशल चालन के लिये शुभकामना ।

Manisha रविवार, 26 जुलाई 2009
कारगिल लड़ाई के 10 वर्ष : हमें चाहिये मुशर्रफ जैसे लीडर

आज पाकिस्तान द्वारा भारत पर थोपे गये कारगिल की लड़ाई की 10वीं वर्षगांठ है। अमर शहीद सैनिकों और उनके अफसरों की बहादुरी और कुशलता और शहादत को भल कौन भारतीय भुला सकता है? कैप्टन सौरभ कालिया, कैप्टन विक्रम बत्रा, कैप्टन विजय थापर, कर्नल वांगचुक, मेजर बलवंत सिंह, हवलदार योगेंद्र सिंह यादव, तोपखाने के कई कई वीर सपूतों ने अपनी जान देकर भारत का मान रखा। बिलकुल सीधी चढ़ाई चढ़ते हुये दुश्मन का मुकाबला विरले वीर, साहसी और जीवट के पक्के सैनिक ही कर सकते हैं। और इस तरह की लड़ाई को जीतना वास्तव में एक अनोखी गौरव गाथा है। कारगिल में वीरता की इतनी कहानियां लिख गईं हैं जो सदियों तक कही जाती रहेंगी। General Musharrafलेकिन सैनिकों के इस वीरता पूर्वक कारनामे को नमन करने के वावजूद उस समय के खलनायक मुशर्रफ को एक दूसरी ही वजह से याद कर रही हूं। पहली वजह से तो वो पिटने लायक है  और भर्त्सना के लायक है। लेकिन दूसरी वजह है उसका चाणक्य की नीतियो पर चलते हुये जबर्दस्त रणनीतिकार होना। आखिर ये उसी के दिमाग की उपज थी कि भारत की सोती हुई सेना को पता ही नहीं चला कि उनकी खाली की हुई चौकियों पर पाकिस्तानी घुसपैठियों (छद्म सैनिक) ने कब्जा कर लिया और जो लड़ाई हुई उसमें भारत के वीर जवाव तो हताहत हुये ही, भारत की रक्षा तैयारियों का भी जायजा लिया गया, कश्मीर समस्या पर दुनिया का ध्यान भी खींच लिया और साथ ही पाकिस्तान की लोकतांत्रिक सरकार को भी फंसा दिया। यानी की एक तीर से कई शिकार। मुशर्रफ और वहां की सेना चाणक्य की नीतियों पर चल कर गुप्त और छद्म गतिविधियां करके अपने दुश्मन (भारत) तो हमेशा परेशान करते रहते हैं और भारत को कभी चैन से नहीं बैठने देते हैं। क्या हमें ऐसा नेता नहीं चाहिये जो इस तरह से अपने दुश्मनों के परेशान करता रहे? क्या हमें ऐसे लीडर नहीं चाहिये जो रणनीतिक तौर पर दूर की सोंचे और कार्यवाही करें। अभी हाल ही में चीन के एक प्रंत में दंगा हो गया तो वहां के राष्ट्रपति ने तुरंत चेतावनी दे दी कि कोई दखलंदाजी न करे वर्ना अच्छा नहीं होग, तो क्या हमें ऐसे नेता नहीं चाहिये जो दुनिया में आंखों में आंखे डाल कर अपनी बात कह सकें? यहां तो हलत ये है कि इन्ही मुशर्रफ साहब को एक नेता ने अपने यहां बिना बात के न्यौत लिया और एक नेता ने लिखित में मान लिया कि भारत बलूचिस्तान में गड़बड़ियों मे शामिल है। आखिरी बार इस तरह की कुछ खूबियों वाला लीडर इंदिरा गांधी के रूप में जरुर मिला था। वैसे भारत को प्रभावशाली नेता काफी लंबे समय से नहीं मिले हैं। याद कीजिये कृष्ण, समुद्रगुप्त, चंद्रगुप्त, अशोक, शेरशाह सूरी, अकबर जैसे कितने नाम हैं भारत में जो गिने जा सकते हैं। हम भारतीय सब प्रकार से सक्षम हैं, सबसे अच्छे हैं बस अच्छे नेतृत्व से वंचित हैं।

आज भी कारगिल की दसवीं वर्षगांठ पर नेता गायब हैं।

Manisha
भारत आतंकवाद फैला रहा है

भारत की जनता चाहे कितना भी पाकिस्तान को नापसंद करे, कितनी ही कड़ी कार्यवाही पाकिस्तान के खिलाफ चाहे, पाकिस्तान चाहे कितना ही भारत के खिलाफ आतंकवाद फैलाता रहे, भारत के हर पार्टी के नेता (पार्टी विद डिफरेंस के भी!), मीडिया का एक सशक्त वर्ग तथा कुछ बुद्धीजीवियों को  पाकिस्तान से विशेष प्रेम है। अब इसका नया उदाहरण है भारत द्वारा बकायदा लिखित समझौते में ये स्वीकरना की भारत पाकिस्तान के बलूचिस्तान में हो रही गड़बड़ियों के लिये जिम्मेदार है। भारत के नेता हमेशा नोबेल शांति पुरस्कार पाने के लिये कुछ न कुछ उपाय करते रहते हैं और समझौते की मेज पर भारत के हितो को दांव पर लगाते रहते हैं। 60 साल से भारत पाकिस्तान से परेशान है। 25 साल से भारत पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद झेल रहा है, सबको पता है लेकिन पाकिस्तान ने कभी नहीं स्वीकारा कि वो ऐसा कर रहा है, लेकिन हमारे महान देश ने लिखित में मान लिया कि भारत पाकिस्तान के बलूचिस्तान नें आतंकवाद फैला रहा है। बस अब तैयार रहिये वहां पर कुछ भी घटना होने पर पाकिस्तान सीधे-सीधे भारत का नाम लेगा और हम दुनिया में आतंकवाद फैलाने वाले माने जायेंगे।
भारत आतंकवाद

Manisha शुक्रवार, 24 जुलाई 2009
हमारे – उनके विश्वास और अंधविश्वास

21 जुलाई को चांद पर मानव के कदम रखने के 40 साल पूरे होने जा रहे हैं। दुनिया भर में इस अद्भुत घटना को याद किया जा रह है। चांद पर पहुंच कर धरता के लोगों मे अपनी मनवीय श्रेश्ठता का परिचय दिया था लेकिन कई लोगों को ये विश्वास कभी नहीं हुआ कि इंसान चांद पर पहुंच गया है। अमेरिका के ही कई लोग ऐसे थे जो इस बात पर विश्वास नहीं करते थे। कई लोगो ने ये प्रमाणित करने के लिये किताबें लिख डाली कि कोई चांद पर नहीं गया था बल्कि वहां की फोटो नकली हैं। घूम-फिर कर कई ईमेल मेरे पास भी आये हैं जिसमें ये दिखाया गया है कि कैसे अमेरिका का झंड़ लहरा रहा है जबकि चांद पर तो हवा नहीं है, या फिर की की यात्रियों की परछांई गलत दिशा में आ रही है इत्यादि। अपने देश में भा कई लोग है जिन्हें इस बात पर कभी विश्वास नहीं हुआ। मेरी दादीजी कहती थी किम चांद पर कोई नहीं गया, वहां इंसान जायेगा को प्रलय आ जायेगी। लेकिन मुझे विश्वास है कि इंसान चांद पर गया था।

विश्वास
इसी तरह की कई बाते दुनिया भर के लोगों में चलती रहती हैं। मुस्लिम जगत के अधिकांश लोग  आज तक 9/11 की घटना को अमेरिकी की साजिश मानते हैं। पाकिसेतान के लोग 26/11  की घटना को भारत और अमेरिका तथा इस्राइल द्वारा प्रायोजुत मानते हैं। भारत के लोग पाकिस्तान के किसी भी आश्वासन कर विश्वास नहीं कते हैं।

हमारे देश में भी कई इसी प्रकार की बातें हैं। कई लोग ताजमहल को विष्णु मंदिर मान कर प्रमाण जुचाते रहते हैं। कुतुब मीनार में भी कई लोग ऐसे ही प्रमाण खोजते है। पहले भारत में कोई भी घटना घटने पर लोग केवल बीबीसी से प्रसारित खबरों पर ही विश्वास करते थे। भारत के अधिकांश लोग आज भी किसी घटना में मारे गये लोगों की सरकार द्वारा बताई गई संख्या पर विश्वास  नहीं करते हैं और उसस् बढ़-चढ़ कर आने वाली संख्या की अफवाहों पर विश्वास करते हैं।  कई लोगो को ज्योतिष पर पूरा विश्वास है कई लोग उसका मजाक बनाते हैं। लोगों को नेताओं के भ्रष्ट होने का पूरा भरोसा है जबकि सारे नेता ऐसे नहीं होते हैं।

कहने के मतलब हे कि कुछ लोग हमेशा ऐसे रहेंगे जो कि किसी बात पर विश्वास पर भरोसा न करके अपनी ही दुनिया में रह कर कुछ बातों को मानते रहते हैं। 

लगे हाथों में ये भी बता दूं कि मुझे भगवान के होने  और भूतों  के न होने पर पूरा विश्वास है।

अपने विश्वासों को भी आप यहां बताईये।

Manisha सोमवार, 20 जुलाई 2009
बलजीत के लिये दुआ कीजिये

हम सब के लिये भारतीय हॉकी टीम के बेहतरीन गोलकीपर बलजीत सिहं के लिये ये दुआ करने का समय है। बलजीत को अभ्यास के दौरान आंख में गेंद लग गई थी जिससे उन्हें दाहिनी आंख में गंभीर चोट लग गई है और उनके दोबारा खेलने की संभावना कम है। बेहतरीन गोलकीपर बलजीत सिहं को खोना हमारी हॉकी और देश के लिये काफी बड़ा झटका रहेगा लिहाजा हम लोगों की दुआ से भगवान उनको वापस खेलने लायक बनायें, ऐसी हम सब को भगवान से प्रार्थना करनी चाहिये।

Manisha
आखिर किस बात की खुशी है इन्हें?

न्यायालय द्वारा सबूतों के अभाव में उज्जैन के प्रोफेसर सबरवाल के हत्यारों को छोड़ने के बाद अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के कार्यकर्ताओं द्वारा देखिये किस प्रकार से प्रसन्नता व्यक्त की जा रही है। आखिर किस बात की खुशी है इन्हें? क्या अपने गुरु के मारे जाने की (अभी गुरु पूर्णिमा को गुजरे कुछ ही दिन हुये हैं) या उनके हत्यारों के छूट जाने की? क्या ये हमारी हिंदु संस्कृति है? हिदूवादियों के गिरावट का इससे कोई निकृष्ट उदाहरण हो सकता है क्या?
New-Low-In-Hindu-Politics

Manisha मंगलवार, 14 जुलाई 2009
अब तो कुछ करो पत्रकारों

आज छत्तीसगढ़ के जिला राजनांदगांव के मदनवाड़ा इलाके मे नक्सलियों ने पुलिस पार्टी पर हमला करके  30 पुलिस वालों को मार डाला है और अभी प्राप्त समाचार के अनुसार एक और हमला करके 8 और पुलिस वालों को मार डाला है। इसमें एक एसपी भी हैं। हर 15-20 दिन में इस प्रकार का समाचार मिलता है जिमसें हमें देश के पुलिस वालों की जान बड़ी संख्या में नक्सलियों द्वारा लिये जाने के समाचार प्राप्त होते रहते है।  नक्सली पुलिस वालों को शहीद किये जा रहे हैं और हमारा दिल्ली का राष्ट्रीय माडिया नक्सलियों  तालीबान और गे – समलैंगिकों के समाचारो को अहमियत दे रहा है। अरे पत्रकारों तालीबान ने भी इतने पुलिस वालो की हत्या नहीं की होगी जितनी नक्सलियों ने की है। आखिर कब इन पुलिस वालों के उपर कार्यक्रम बनाओगे और अपनी जिम्मेदारी निभाओगे? छोड़ों तालीबान और समलैगिकों को। लगातार खबरें दिखा कर सरकार पर दबाव डालो कि वो कुछ करे। क्या नक्सलवाद की समस्या समलैगिको की समस्या सै ज्यादा बड़ी है? अब तो कुछ करो पत्रकारों!!!!

बहरहाल शहीद पुलिस वालों को मेरा सलाम और उनसे निवेदन की वो खुद ही कुछ करें यहां की सरकार और मीडिया आपकी चिन्ता करने वाले नहीं है।

Manisha सोमवार, 13 जुलाई 2009
शराब अमृत पीकर मरते लोग

Sharab Wineआज गुजरात के अहमदाबाद में जहरीली शराब पीकर जान गंवाने वालों का आंकड़ा बढ़ता ही जा रहा है। प्रशासन ने  अब तक 86 लोगों की मौत की पुष्टि कर दी है। लेकिन, यह आंकड़ा 100 के पार पहुंचने की आशंका जताई जा रही है। इससे पहले कुछ दिन पूर्व में ये किस्सा दिल्ली में हुआ था। मैं तो बचपन से अखबारों में इस तरह के समाचार रह रह कर पढ़ती आ रही हूं। हर बार यही होता है कुछ लोग शराब पीकर मर जाते हैं, हल्ला मचता है, कुछ गिरफ्तारियां होती हैं, कोई जांच आयोग बैठता है, मामला ठंडा पड़ जाता है और फिर किसी अन्य राज्य में इस तरह की घटना की खबर आ जाती है। दर्सल इस तरह की घटनायें सरकारों द्वारा नहीं रोकी जा सकती हैं ल रोकी जा रही हैं। सरकारें, नेता और अधिकारी तो अवैध शराब के खेल में शामिल हैं। इसको केवल समाज ही रोक सकता है, लोग खुद रोक सकते हैं। शराब सरकारों के लिये सोने की खान है। लोग शराब पीते है, सरकारें राजस्व कमाती हैं। इसलिय शराब ज्यादा बिके इसके लिये प्रयास किये जाते हैं। शराब का महिमांडन किया जा रहा है। शराब पार्टियों मे अनिवार्य है ऐसा माहौल बन चुका है। अब शराब न पीने वाले अल्पसंख्यक हो चुके हैं। शराब न पीने वालों का मजाक उड़ाया जाता है। शराब अमृत मान ली गई जिसको पीना अनिवार्य है। शराब की खराबियों को बताने वाला कोई नहीं है। शराब हर प्रकार के माहौल के लिये हैं। कोई भी घटना हो इसके पीछे शराब है, लेकिन ये बात न बताकर घटना के बारे मं बात की जाती है। ऐसे लोग अगर खुद ही संयम रख कर शराब से बचें तो ठीक वर्ना इस शराब रुपी अमृत से बचना मुश्किल है और लोगों के इसी तरह अलग-अलग राज्यों से मरने की खबरें आती रहेंगी। आज शराब अमृत मानी जाती है, जिसे सब पीना चाहते हैं।

Manisha गुरुवार, 9 जुलाई 2009
बात यहीं तक रहेगी या आगे भी जायेगी

दिल्ली हाईकोर्ट के फैसले के बाद गे और उनके जैसे तमाम लोगों ने राहत की सांस ली होगी। अब उन्हें अपने हिसाब जिन्दगी जीने की कानूनी छूट रहेगी। हमें भी अब रोज - रोज की बिना मतलब की बहस और रोज-रोज समलैंगिकों के समर्थन में छपने वाले लेखों से छूट मिल जायेगी। बस अब देखना यही रहेगा कि ये बात यहीं तक रहेगी या फिर समलैंगिकों की शादी की आजादी, वेश्यावृति को भी व्यक्तिगत आजादी की मांग पर कानूनी मान्यता देने व अन्य बातों की ओर भी जायेगी। दिल्ली हाईकोर्ट के फैसले से मेरी असहमति है लेकिम देश को और हमें इस आदेश को मानना चाहिये। उम्मीद है बात यहीं खत्म हो जायेगी।

Manisha शुक्रवार, 3 जुलाई 2009