चिठ्ठा जगत के यक्ष प्रश्न

अब हिंदी चिठ्ठा जगत के पांच (कईयों के मामले में और भी ज्यादा) यक्ष प्रश्नों से कोई चिठ्ठाकार नहीं बच सका, यहां तक नीलिमा जी ने अपने वाद-संवाद में टैग कर के बताया कि मुजरिम हाजिर है और फिर डॉन ने अपने गुर्गो में हमारा नाम देकर गैंगवार में नाम शामिल कर एनकाउंटर का खतरा बढ़ा दिया है। डॉन को तो पकड़ना मुश्किल ही नहीं नामुमकिन है, लेकिन उसको गुर्गे तो पकड़े क्या एनकाउंटर में खलास भी हो जाते हैं। तो एनकाउंटर से बचने के लिये जरूरी है कि जल्द से जल्द नीलिमा जी और डॉन के प्रश्नों के उत्तर दिये जायें।
कि बड़े बड़े नामी और वरिष्ठ चिठ्ठाकार भी इसकी चपेट में आ गये तो मुझ जैसी नई चिठ्ठाकार की बिसात ही क्या? टैगियाने का यह बढ़ता हुआ छूत का रोग सबको गिरफ्त में लेता हुआ मेरे दरवाजे भी आ खड़ा हुआ। पहले

पहले मुजरिम बनने के कारण पूछे गये प्रश्न

प्रश्न : आपकी चिट्ठाकारी का भविष्य क्या है?
  • मेरे विचार में मेरे द्वारा की गई हिंदी चिठ्ठाकारी का भविष्य बहुत ही उज्जवल है, हालांकि यह बात अपने मुंह मियां मिट्ठू बनने वाली बात होगी परन्तु मेरा विचार तो यही है, क्योंकि हालांकि हिंदी चिठ्ठाकारी में नई ही हूं, फिर भी शुरुआत के दिनों और अबके दौर में बहुत फर्क आ गया है। आप सभी लोगों कि टिप्पणियां मेरे जैसे लोगों के लिये प्रोत्साहन का कार्य करती हैं, और अब आप सब के साथ मिल कर चिठ्ठाकारी करने में हिचक नहीं रही। अब जब भी कोई नई ज्ञानवर्धक जानकारी प्राप्त होती है तो बस उसे सब लोगों के साथ बांटने बैठ जाती हूं। अब तो यह आलम है कि कहीं कोई समाचार, कोई आलेख, कोई घटना देख मन में यह ख्याल आता है कि अगर इसके ऊपर ब्लॉग पोस्ट बनाई जाये तो कैसा रहे? आप लोग भी अपनी टिप्पणियों द्वारा खूब प्रोत्साहित करते हैं तो आगे भी हिम्मत कर पाती हूं। हिंदी में लिखने के शुरूआता दौर में यही नहीम समझ में आता था कि क्या लिखूं? इसीलिये शुरुआती दौर में इधर-उधर से देखे शेर और दिल्ली की हमारा बदनाम ब्लू लाइन बसों में चिपके हुये ड्राइवरों के सड़कछाप शेर-डॉयलॉग इत्यादि लिख कर देखा कि हिंदी लिख भी सकते हैं कि नहीं। पर शुरुआती दिनों कि झिझक तो अब खैर नहीं रही बल्कि अब तो लगता है कि हिंदी चिठ्ठा जगत तो एक परिवार की तरह है । इसलिये मैं मानती हूं कि यदि हिंदी चिठ्ठा ग्रुप इसी तरह कार्यरत रहा तो हिंदी चिठ्ठाकारी का भविष्य बहुत ही उज्जवल रहेगा और अन्य नये लोग भी इन चिठ्ठों को पढ़कर प्रोत्साहित होंगे।
प्रश्न : आपके पसंदीदा टिप्पणीकार?
  • सारे ही लोग टिप्पणी करके प्रोत्साहित करते हैं तो किसी विशेष का नाम लेना उचित नहीं होगा।
प्रश्न : तीसरा सवाल वही है जो प्रत्यक्षा जी का तीसरा सवाल था यानि किसी एक चिट्ठाकार से उसकी कौन सी अंतरंग बात जानना चाहेंगे ?
  • दरअसल बात ये है कि आप सब लोग इस बात से परिचित होंगे कि हमारे किस्से कहानियों में और खास तौर से हिंदी फिल्मों में अक्सर दिखाया जाता है कि किसी प्रसिद्ध कहानीकार या शायर को चाहने वाली कई लड़कियां होती हैं, जो कई बार तो खाली शायर के नाम से ही प्यार करने लगती हैं। तो मैं अपने हिंदी जगत के प्रसिद्ध और पुराने या जो लोग आजकल जीत रहे हैं, उनसे पूछना चाहूंगी कि क्या उनकी कोई गुमनाम प्रशंसिकायें है जो कि चिठ्ठों पर टिप्पणी न करके सीधे ई-मेल भेजती हों?


  • प्रश्न : वह बहुत मामूली बात जो आपको बहुत परेशान किए देती है?

    • मेरे अपने जब किसी भी कारणवश परेशान होते हैं तो मैं बहुत ज्यादा परेशान हो जाती हूँ। उस समय लगता है कि कोई जादू की छड़ी होती सब सही कर देती, पर ऐसा कहां मुमकिन है। मेरे बच्चे, पति, रिश्तेदार, अड़ोस-पड़ोस इत्यादि में जब कोई परेशान होता है तो मैं परेशान हो जाती हूँ। यानी यदि कोई दूसरा परेशान होता है तो मैं भी परेशान हो जाती हूँ।


  • प्रश्न : आपकी जिंदगी का सबसे खूबसूरत झूठ?
    • यूँ तो मैं भगवान की कृपा से झूठ नहीं बोलती हूँ। लेकिन ये भी नहीं मैं आजकल के जमाने में सत्यवादी हरिश्चंद्र हूँ। एक बार मजाक में बोला गया झूठ काफी मजेदार है। हुआ यूँ कि मैंनें अपनी बिटिया के लिये एक नई ड्रेस खरीदी थी। उसने जब उस ड्रेस को पहना तो वो बड़ी खुश हुई और मेरे से बार-बार पूछने लगी कि कहां से खरीदा है। टालने की गरज से और मजाक में मैंने कह दिया कि भीख में लाये हैं। उसने अड़ोस-पड़ोस सब जगह खुशी-खुशी बता दिया कि मेरी मम्मी ये ड्रेस भीख में लाई हैं। यह बात याद करके आज भी हंसी आ जाती है।

    और अब सीबीआई के वो प्रश्न जिनका जबाव देकर मैं क्वात्रोची की तरह बच जाउंगी।
    प्रश्न : हिन्दी चिट्ठाकारी ही क्यों?
    • हिंदी चिठ्ठाकारी इसलिये क्योंकि मैं हिंदी भाषी हूँ, हिंदी में ही सोचती हूँ और हिंदी की तरक्की चाहती हूँ।
    2.प्रश्न : जीवन में कब सबसे अधिक खुश हुए?
    • अपनी शादी पर। क्यों? कभी किसी पोस्ट में बताउंगी।
    3. प्रश्न : अगला जन्म मिले तो क्या नहीं बनना चाहोगे?
    • अ-भारतीय
    4. प्रश्न :कौन सा चिट्ठा सबसे अधिक पसन्द है, क्यों?
    • अपना (हिंदीबात).. हा. हा... (श्रीशजी की तरह - रावण वाली हंसी) , सभी अच्छे चिठ्टे हैं , किसी एक का नाम पूछकर गैगवार छिड़ने का खतरा है और मेरा एनकाउंटर पक्का है।
    5. प्रश्न : हिन्दी चिट्ठाजगत के प्रचार प्रसार में क्या योगदान दे सकते हैं?
    • अभी तो फिलहाल हिंदी चिठ्ठाकारी के माध्यम से ही कुछ सेवा हो सकती है, बाकि जैसा आदेश हिन्दी चिट्ठाजगत के 'भाई' लोगों का हो।
    मेरा ख्यांल है कि सभी चिठ्ठाकारों को टैगियाया जा चुका है इसलिये किसी को टैग नही करं रही हूँ। अगर कोई हैं, तो वो खुद को शिकार समझें और इन्हीं प्रश्नों का उत्तर दें।
  • Manisha मंगलवार, 27 फ़रवरी 2007
    शाबाश सौरव दादा!

    Saurav Completes 50! शाबाश सौरव दादा! आखिरकार तुमनें यह साबित कर दिया कि तुम यूं ही बंगाल टाइगर नहीं कहलाते हो। 20 दिन पहले कौन सोच सकता कि सौरव गांगुली भारतीय क्रिकेट टीम में वापसी करेंगे और अगर वापसी करेंगे तो टीम में अंतिम ग्यारह जगह मिलेगी या नहीं और सबसे बड़ी बात अगर जगह मिली भी तो गांगुली कैसा प्रदर्शन करेंगे। लेकिन बंगाल टाइगर ने सारी आशंकाओं को खारिज करते हुये जोहानसबर्ग में दक्षिण अफ्रीका के साथ हो रहे पहले टेस्ट मैच में न केवल जगह बनायी बल्कि अपने शानदार प्रदर्शन से भारत की स्थिति इस मैच में मजबूत कर दी है। भारत यह टैस्ट मैच जीतने के कगार पर पहुंच गया है। सौरव गांगुली ने जोहानसबर्ग टेस्ट मैच में पहली पारी में नाबाद रहते हुये शानदार 51 रन बनाये तथा दूसरी पारी में 25 रन बनाये। ये रन दिखने में शायद कम लगें लेकिन जिस तरह की मैच की पिच है और भारत के अन्य बललेबाजों ने जिस तरह का प्रदर्शन किया तथा सौरव गांगुली जिस तरह की विपरीत परिस्थिति में खेलने आये उसको देखते हुये इसे बहुत अच्छा प्रदर्शन ही माना जायेगा। सौरव गांगुली ने यह दिखाया कि आदमी को अपने उपर पूरा विश्स रखना चाहिये और विपरीत परिस्थितियों में धैर्य नहीं खोना चाहिये।
    चित्र क्रिकइंफो.कॉम के सौजन्य से

    Manisha शनिवार, 24 फ़रवरी 2007
    आदिवासियों का वेलेंटाइन डे भगोरिया


    पश्चिम मध्य प्रदेश के आदिवासी जनजातीय युवक युवतियों का वेलेंटाइन डे (प्रणय पर्व) भगोरिया 25 फरवरी को शुरू हो रहा है। आदिवासी अंचल झाबुआ और खारगौन जिलों में परंपरागत रूप से मनाए जाने वाले इस रंगीन पर्व में स्थालीय भील और भीलाला लोगों के युवक और युवतियां बड़े उत्साह के साथ शामिल होते हैं। इस मेले के प्रति विदेशियों में भी खासा आकर्षण है। भारत भ्रमण के दौरान वे भगोरिया मेलों में बड़ी तादाद में शामिल होते हैं। भगोरिया हाट में आने वाले आदिवासी युवक-युवती एक दूसरे को पसंद करने के बाद भागकर विवाह कर लेते हैं। इस भाग जाने की वजह से ही इसको भगोरिया कहते हैं। परंपरा के अनुसार अगर किसी लड़के को कोई लड़की पसंद आ जाती है तो वो उस लड़की के गालों पर गुलाल लगाकर अपनी चाहत का इजहार कर देता है। अगर लड़की को भी लड़का पसंद होता है तो वो भी लड़के को गुलाल लगा देती है। इसके बाद ये लोग वहां से भाग जाते हैं। इसके बाद आदिवासी समाज इनको पति-पत्नि का दर्जा दे देता है।

    इस भगोरिया को फसल पकने और होली की खुशी का भी प्रतीक माना जाता है। साल भर अलग-अलग स्थानों पर काम धंधा करने वाले आदिवासी भगोरिया पर्व पर अपने अपने घरों पर लौट आते हैं और गिले शिकवे भुलाकर मौज मस्ती के साथ इस पर्व को मनाते हैं। यह पर्व होली से पहले मनाया जाता है। बदलते जमाने के साथ भगोरिया पर भी आधुनिक संस्कृति का प्रभाव पड़ा है। आदिवासियों के पहनावे में बदलाव आया है तथा वाद्य यंत्रों ढोल और मृदंग का स्थान इलेक्ट्रानिक्स उपकरणों ने ले लिया है। झाबुआ के साथ ही धार और खरगोन जिलों में भी 25 फरवरी से होली दहन (तीन मार्च) तक भगोरिया पर्व मनाया जाएगा। झाबुआ जिले के 45 गांवों में भगोरिया हाट लगेंगे।

    कड़ियां:

    Manisha शुक्रवार, 23 फ़रवरी 2007
    मुगल गार्डन की सैर

    भारत के राष्ट्रपति के निवास राष्ट्रपति भवन में स्थित मुगल गार्डन को आम जनता के लिये खोल दिया गया है। मुगल गार्डन में स्थित स्परिचुअल गार्डन, हर्बल गार्डन एवं बैयोडाइवर्सिटी पार्क आदि को भी जनता के दर्शनार्थ खोला गया है। आम जनता के लिये मुगल गार्डन इस वर्ष 10 फरवरी से लेकर 18 मार्च तक सुबह 10.30 बजे से अपरान्ह 4.30 बजे तक खुला रहेगा। सोमवार को साप्ताहिक बंद है।

    मुगल गार्डन को सर एडविन लुटियन ने डिजाइन किया था। इस के डिजाइन की पेरणा उन्हें ताजमहल के बगीचों और जम्मू और कश्मीर के खूबसूरत मुगलिया बागों से मिली थी।

    मुगल गार्डन 15 एकड़ में फैला हुआ है। मुगल गार्डन के तीन भाग हैं। पहले भाग में आयताकार गार्डन है जो कि राष्ट्रपति भवन की मुख्य इमारत से लगा हुआ है। इस गार्डन में चार कोने हैं जिसके हर ओर टैरेस गार्डन है। यहां के सेन्ट्रल लॉन में राष्ट्रपति द्वारा कई पार्टीयों का आयोजन किया जा चुका है। दूसरा है लोन्ग गार्डन यानी लंबा बाग, इसी के साथ है तीसरा बाग सर्क्युलर गार्डन या गोल बाग। लंबे वाले बाग में गुलाब का बेहतरीन किस्में हैं। यह बाग इस बार का मुख्य आकर्षण है। गोल वाले बाग में एक फुव्वारा लगा है।

    मुगल गार्डन में 128 प्रकार के गुलाबों के फूल लगे हैं। अभी हाल ही में मुगल गार्डन में तीन नये फुव्वारे लगाये गये हैं। ये संगीतमय फुव्वारे हैं जो कि शहनाई और वंदेमातरम की धुनों पर घूमते हैं।

    इस रविवार को मैं अपने परिवार के साथ मुगल गार्डन घूम कर आई हूं, यह एक बहुत ही अविस्मरणीय अनुभव रहा। अगर आपने अभी तक मुगल गार्डन नहीं देखा तो यह एक सुनहरी मौका है, 18 मार्च तक आप प्रोग्राम बना सकते हैं। मुगल गार्डन आपको हमेशा याद रहेगा।

     मुगल गार्डन के बारे में और यहां पर जानें


    Manisha सोमवार, 19 फ़रवरी 2007
    बॉस - एक भारतीय ऑपरेटिंग सिस्टम

    BOSS (Bharat Operating System Solutions) ओपेन-सोर्स सोफ्टवेयर को देश में बढ़ावा देने के लिये C-DAC के
    फ्री/ओपेन सोर्स सोफ्टवेयर के राष्ट्रीय संसाधन केन्द्र (National Resource Centre for Free/Open Source Software (NRCFOSS)) द्वारा तैयार किया गया लाइनक्स का एक संस्करण है। इसे खास तौर पर भारतीय परिस्थितियों के लिये तैयार किया गया है। इसमे एक सुन्दर डेस्कटॉप है, जिसमें भारतीय भाषाओं का खास समावेश किया गया है। इसके अलावा इसमें भारत के सरकारी क्षेत्र में प्रयोग होने वाले साफ्टवेयर पैकेजों को शामिल किया गया है।

    विशेषतायें
    • चित्रमय इंस्टालर
    • सिस्टम की तेज शुरूआत और
    • दोस्ताना जी-नोम (GNOME) डेस्कटाप
    • वाडियो के लिये ज्यादा सहयोग
    • 3D डेस्कटाप
    • भारतीय-OO (BharatheeyaaOO) - ओपेन ऑफिस 2.0.1 का भारतीय संस्करण (इस समय केवल हिंदी और तमिल में उपलब्ध)
    • पेन ड्राइव, सीडी व अन्य मीडिया के लिये सहयोग
    • लाइफेरिया (Liferea) – RSS/RDF रीडर
    • टीवी ट्यूनर कार्ड सपोर्ट
    • ब्लूटूथ (Bluetooth) सपोर्ट
    • अच्छे इंटरनेट टूल – Firefox, Gaim, Xchat
    • Input Method - SCIM with Remington Keyboard Layout for Tamil, Hindi, Punjabi,and Marati
    • बोनफायर - एक CD/DVD Burning tool

    बॉस बनाने वालों उद्देश्य इसे भारत की सभी 22 राष्ट्रीय भाषाओं में काम करनेलायक बनाना है ताकि अंग्रेजी न जानने वालों तक भी सूचना प्रौद्योगिकी का फायदा पहुंच सके, जो कि अभी तक नहीं पहुंच पाया है।
    बॉस के बारे में और जानने के लिये इसके विकी पेज (BOSS Wiki) की यात्रा करें जहां आपको बॉस के चित्र तथा विवरण मिलेगा। आप अपने विचार भी व्यक्त कर सकते हैं। अगर आपकी इस बारे में कोई और जिज्ञासा है तो आप bosslinux@cdac.in पर ई-मेल कर सकते हैं। बॉस को निशुल्क उपलब्ध कराया जा रहा है। आप इसे सीधे डाउनलोड कर सकते हैं।

    कड़ियां:

    Manisha रविवार, 11 फ़रवरी 2007
    असली बॉस कौन है

    कल आशीष गुप्ता जी ने महिलाओं का रासायनिक विश्लेषण किया था। लेकिन उनको हम महिलाओं की सही पहचान नहीं है। हम रासायनिक ही नहीं बल्कि भौतिक रुप से भी पुरूषों पर भारी हैं। इस के लिये मैंने ढ़ूढ़कर ये चित्र निकाले हैं। अब इन चित्रों को आप भी देखिये। हास्य का जवाब हास्य से।

    Manisha शनिवार, 10 फ़रवरी 2007
    कुछ प्रसिद्ध हिंदी फिल्म सीन

    हमारी हिंदी फिल्मों में कुछ ऐसे सीन होते हैं जो लगभग हर दूसरी फिल्म में शामिल होते हैं। ऐसे ही कुछ सीन कुछ प्रसिद्ध हिंदी फिल्म सीन दृश्य यहां है:
      1. हीरो हमेशा फर्स्ट क्लास फर्स्ट पास होता है और हमेशा BA करता है। MA तो कभी भी नहीं। आजकल की फिल्मों में थोड़ा परिवर्तन हुआ है अब हीरो MBA करता है।
      2. अमीर प्रवासी भारतीय लड़के (हीरो) का नाम अधिकतर राज, आर्यन या राहुल होता है।
      3. भारत के किसी भी जगह के गांव की कहानी हो, वहां की बोली हमेशा पूर्वी उत्तर प्रदेश के गांवों की होती है।
      4. गांव की गोरी (हीरोईन) हमेशा चोली घाघरा ही पहनती है और उस पर हमेशा ही जमींदार या उसके बेटे की गंदी निगाह होती है।
      5. गांव में रिटार्यड फौजी होता है जो बात बात में डींगें मारता है।
      6. कहानी अगर शहर की तो रिटार्यड फौजी न होकर रिटार्यड कर्नल होगा जिसकी घनी मूंछें होती हैं और वो बात बात में गोली मारने की बात करता है तथा बर्मा की लड़ाई (कब हुई थी?) की कहानी सुनाता है।
      7. अगर फिल्म में दो हीरो हों तो दोनो एक ही लड़की को चाहेंगे, दोनों ही एक दूसरे के लिये अपना प्यार कुर्बान करने को तैयार रहते हैं।
      8. दो हीरो वाली फिल्मों में, दोनों हीरों में एक बार गलतफहमी तथा लड़ाई अवश्य होगी, यह लड़ाई हमेशा बराबरी पर छूटती है। अगर चाकू का इस्तेमाल इस लड़ाई में हो रहा है तो पहले एक हीरो की आंख या गर्दन तक चाकू जायेगा, फिर दूसरे हीरो की आंख और गर्दन तक।
      9. हीरो चाहे जो करता हो, वो कार चला सकता है तथा जरुरत पड़ने पर हैलीकॉप्टर तथा हवाई जहाज उड़ा सकता है।
      10. पुलिस हमेशा फिल्म के अन्त में आती है।
      11. विलेन पूरी फिल्म में मौज करता है तथा कोई भी बात करते समय या गलत काम करते समय जोर जोर से हंसता रहता है।
      12. अगर विलेन ऊंचे से या खास तौर पर हैलीकॉप्टर से भागते हुये हीरो पर गोली बरसाता है तो गोलियां हीरो के दोनो ओर लाइन बनाती हई गिरती हैं लेकिन हीरो को एक भी नहीं लगती है, अगर हीरो नीचे हैलीकॉप्टर पर निशाना लगाये तो एकदम निशाना लगता है। ये बात हॉलीवुड की फिल्मों पर भी लागू होती है।
      13. हिन्दी फिल्मों के विलेन को फाईटिंग नहीं आती है।
      14. हीरो जब विलेन को मार मार कर बाजी जीत रहा होता है तभी पता नहीं क्यों हीरो की हीरोईन, बहन एवं मां वहां आ जाती हैं जिन्हे विलेन के आदमी पकड़ लेते हैं तथा बाजी पलट जाती है।
      15. विलेन के नाम डागा, जेके, संग्राम, जगताप, शक्ति, राका, लॉयन होते हैं और उनके नीचे के गुन्डों के नाम शंकर, जग्गू, राबर्ट, माइकल, रघू, राजा इत्यादी होते हैं। विलेन की महिला साथियों के नाम रीटा, मोना, सोनिया तथा मोनिका होते हैं। ये महिलायें मन ही मन हीरो को चाहती हैं तथा जब विलेन हीरो पर गोली चलाता है तब बीच में आकर अपनी जान दे देती हैं।
      16. दारु का अड्डा हमेशा माइकल का होता है।
      17. विलेन का साथ देने वाले नेता कार्टून टाईप के होते हैं और हमेशा बिहारी बोलते हैं।
      18. पुरानी फिल्मों में जज साहब कोई फैसला सुना रहे होते थे तभी अदालत के दरवाजे के पास से कोई जोर से चिल्लाता था "ठहरो! जज साहब..."।
      19. विलेन की बहन या बेटी हीरो से प्यार करती है और इसको लेकर हीरो और विलेन में तनातनी रहती है।
      20. अगर विलेन कोई खतरनाक काम के मंसूबे बना रहा होता है या कोई बड़ी प्रयोगशाला टाईप की जगह होती है तो विलेन हीरो को अपने जाल में फंसा हुआ जानकर अपना पूरा प्लान बता देता है, या पूरी प्रयोगशाला घुमाकर सब कुछ बता देता है।
      21. विलेन हीरो को यह भी बता देता है कि उसके बाप का हत्या उसी ने की थी।
      22. कॉलेज के प्रोफेसर हमेशा कार्टून टाईप के होते हैं जो कि साथी महिला प्रोफेसरों को पटाने की कोशिश करते रहते हैं।
      23. कॉलेज का दादा हमेशा कॉलेज के ट्रस्टी का लड़का होता है, जो कि प्रिंसीपल को हमेशा धमकाता रहता है।
      24. देवर हमेशा भाभी का लाड़ला होता है तथा अपना प्रेमिका के बारे में सब से पहले भाभी को ही बताता है, वो भी पहली बार में ही उस लड़की को पसन्द कर लेती है।
      25. बुजुर्ग नौकर हमेशा रामू काका होता है।
      26. सस्पेंस फिल्मों में जिस पर शक दिखाया जाता है, वो कभी अपराधी नहीं निकलता तथा कई बार तो उसी का कत्ल हो जाता है।
      27. सस्पेंस फिल्मों में या खौफनाक फिल्मों में एक बूढ़ा चौकीदार होता जो कंबल ओढ़े रहता है और हाथ में लालटेन लेकर इधर से उधर घूमा करता है। इसका भी कत्ल हो जाता है।
      28. हीरो अगर पुलिस का इंस्पेक्टर होता है तो वो जेब में इस्तीफा निकाल कर कमिश्नर की मेज पर जब चाहे तब पटक देता है।
      29. पुलिस का इंस्पेक्टर हीरो गुन्डों के अड्डों पर अकेला ही जाता है और सब को मारकर हवालात में बंद कर देता है।
      30. शादी के सीन में छोटी लड़कियां हंसती हुई इधर से उधर भागती रहती हैं।
      31. हीरोईन बहू सुबह सुबह भजन गाती है। जबकि घर की बिगड़ी हुई औलादें पॉप म्यूजिक सुनती हैं।
      32. विलेन या उसके साथियों को यदि गोली लगती है तो तुरन्त ही मर जाते हैं, लेकिन यदि हीरो को गोली लगी और उसको मरना है तो वो बहुत देर तक डॉयलाग बोलता है।
      33. हीरो को यदि गोली लगेगी तो अस्पताल में डाक्टर हीरो के शरीर से गोली निकाल कर टीन के डब्बे में जोर से गिरायेगा।
    और भी बहुत से ऐसे सीन हैं जो हमारी हिंदी फिल्मी में अक्सर दोहराये जाते हैं, सारे इस समय याद नहीं आ रहे हैं। याद आने पर यहां लिखती जाउंगी। यदि आप लोगों को भी ऐसे सीन पता हों तो बताइये, और यदि आप फिल्म बनाना चाहते हों तो यहां से कोई 10-15 सीन उठा लीजिये और अपनी फिल्म बना लीजिये।

    Manisha शुक्रवार, 9 फ़रवरी 2007
    लाइव राइटर से पोस्ट होने लगी

    जब से मैं अपने सभी चिठ्टों को नये ब्लॉगर पर ले गई थी, तभी एक परेशानी से मुझे दो-चार होना पड़ रहा था। मैं नये चिठ्टों को बनाने के लिये विंडोज लाइव राइटर का प्रयोग करती हूं। लेकिन जब से नये ब्लोगर पर शिफ्ट किया था, तब से ही विंडोज लाइव राइटर से पोस्ट तो हो रहा था लेकिन ब्लॉगर पर पोस्ट नजर नहीं आती थी। हार कर खुद ही कॉपी करके पोस्ट करनी पड़ रही थी। समझ में नहीं आ रहा था कि क्या किया जाये। हिंदी जगत के अन्य सक्रिय चिट्टाकारो से सहयोग मांगा गया। पंडितजी के ब्लॉग पर मिश्राजी ने बताया कि मुझे विंडोज लाइव राइटर को अपडेट करना चाहिये। इसलिये मैंने कल विंडोज लाइव राइटर को दुबारा डाउनलोड किया और पुराने संस्करण के उपर ही इंस्टाल कर दिया। इसके बाद अब विंडोज लाइव राइटर ठीक तरह से पोस्ट कर रहा है। सहयोग करने वालों को धन्यवाद।

    Manisha शनिवार, 3 फ़रवरी 2007