क्यों भारत के नक्शे गलत छपते हैं?

पिछले एक या दोIndia-Wrong-Map सालों से ये देखने में आ रहा है कि भारत के राजनैतिक  नक्शे को गलत तरीके से विभिन्न स्तरों पर दिखाया जाता है। कई बार इस को लेकर हल्ला मचता है और  कई बार अनदेखा हो जाता है। पहले जब हम छोटे थे तब भी समाचार पत्रों में इस बारे में कुछ छपता था कि फलां-फलां जगह भारत का गलत नक्शा छापा गया है तब भारत सरकार की प्रतिक्रिया की खबर भी छपती थी। अब तो पता ही नहीं चलता कि भारत सरकार को गलत नक्शा छपने की चिन्ता है भी या नहीं। तो आखिर क्या कारण है कि पिछले कुछ समय से भारत के नक्शे गलत छपने या वेबसाइटों पर लगने की खबर आ रही हैं। शायद ये कारण हो सकते हैं -

  1. मीडिया कवरेज ज्यादा -  शायद अब इस तरह की घटनायें छुप नहीं पाती हैं और मीडिया माध्यमों में अच्छा कवरेज मिलता है जिससे हमें लगता है कि इस तरह की घटनायें बढ़ गई है
  2. कर्मचारियों की लापरवाही -  कई बार कर्मचारियों खासकर सरकारी कर्मचारियों द्वारा अपने खुद के कम सामान्य ज्ञान या फिर लापरवाही की वजह से ऐसा होता है कि गलत नक्शा छप जाता है या फिर वेबसाइट पर लग जाता है। अपना काम बचाने के लिये ये लोग शायद विभिन्न वेबसाइटों से भारत का गलत नक्शा डाउनलोड कर के लगा देते हैं।
  3. जानबूझ करये शायद सबसे बड़ा कारण है। भारत को जानबूझकर नीचा दिखाने के लिये विभिन्न देशों के प्रकाशक और वेबसाइटें भारत का गलत, भ्रामक और विवादास्पद नक्शा प्रदर्शित करते हैं। ऐसा इसलिये भी किया जाता है ताकि भारत की प्रतिक्रिया जानी जा सके। यदि भारत की जनता और सरकार कड़ा विरोध नहीं जतायेगी तो ये लोग धीरे-धीरे सभी जगह इसी तरह से भारत के गलत नक्शे लगाकर भारत को नुकसान पहुंचायेंगे।

दरअसल रणनातिक तौर पर दुश्मन देश इस तरह की घटनायें कर के भारत की प्रतिक्रिया को देखना चाहते हैं। इस तरह की घटनायें केवल कमजोर देशों के खिलाफ ही होती हैं। चीन के नक्शे को तोड़-मरोड़ कर प्रदर्शित करने की किसी प्रकाशक और वेबसाइट द्वारा हिम्मत नही होती है।  भारत सरकार की प्रतिक्रिया अक्सर कमजोर सी होती है अब समय है कि भारत सरकार को भी चीन की तरह से जोरदार ढंग से विरोध करना चाहिये।

SarkariNaukriBlog com गुरुवार, 28 जनवरी 2010
हो गई कोस्मेटिक देशभक्ति पूरी

आज देष को गणतंत्र बने हुये 60 वर्ष पूरे हो गये और इस अवसर पर जहां मन प्रफुल्लित और हर्षित है वहीं ये देख कर दुख होता है कि अधिकांश लोगो की देशभक्ति केवल दिखाने भर के लिये है। आज 61वें गणतंत्र दिवस के अवसर पर हमारी सोसाईटी में भी लोगो ने झंड़ारोहण, राष्ट्रीय गान का गायन एवं कई अन्य कार्यक्रम आयोजित किये थे। लेकिन मैने देखा कि सोसाईटी की दो बिल्डिंगों को लोग अलग-अलग जगह पर अपना अपना ये सब कार्यक्रम कर रहे थे यानी कि गंणतंत्र दिवस के अवसर पर भी लोग एक न रह सके और अपनी-अपनी देशभक्ति अलग से प्रदर्शित की।

दूसरी बात ये कि गाने गाये जा रहे थे कि देश के लिये ये कर देंगे वो कर देंगे लेकिन अधिकांश लोग वो है जो किसी न किसी प्रकार से देश को नुकसान पहुंचाने वाले लोग हैं। कोई अपने ऑफिस में भ्रष्टाचार में लिप्त हैं, किसी के बारे में सब को पता है कि वो बिना रिश्वत के कोई काम नहीं करता है, को बिल्डर है जो कि घटिया सामान लगाकर ज्यादा कमाता है, कोई दुकानदार है जो कि घटिया और मंहगा सामान बेचने कि फिराक में रहता है। कहने का मतलब ये हे कि ये सब लोग दिल से तो शायद देशभक्त हैं और अपनी देशभक्ति 26 जनवरी और 15 अगस्त को इसी तरह प्रदर्शित भी करते है लेकिन जो बाते देश को नुकसान पहुंचा रही हैं उनको छोड़ते नही हैं तो क्या ये न माना जाये कि ऐसी देशभक्ति दिखावटी (कोस्मेटिक) है।

दिल से देशभक्त बनिये और देश के लिये ऐसे काम करिये कि देश का और देश के लोगों को लाभ हो। आप सब को 61 वे गणतंत्र दिवस की ढेर सारी बधाई और शुभकामना कि ऐसे ही हमारा प्यारा भारत  देश हमेशा गणतंत्र दिवस मनाता रहे।

SarkariNaukriBlog com मंगलवार, 26 जनवरी 2010
एक झटके में मिट गई अमन की आशा !

भारत और पाकिस्तान के संबंधों में मुंबई के 26/11   हमलों को बाद जो Aman-Ki-Ashaगिरावट और  बातचीत में जो गतिरोध आया है उस को लेकर फिर से भारत में शांतिवादी सक्रिय हो रहे हैं। इसी सिससिले में भारत में टाइम्स ऑफ इंडिया अखबार पाकिस्तान के जंग नाम के अखबार के साथ मिल कर  अमन की आशा नाम से भारत और पाकिस्तान की दोस्ती के लिये अभियान चला रहा है। इसी तरह से कुछ पुराने शांतिवादी और बुद्धिजीवियों ने टीवी के अपने कार्यक्रमों में इस तरह के विषयों को लेकर ट्रेक-टू डिप्लोमेसी शुरु कर दी है।  हालांकि भारत की जनता और सरकार अभी तो इस प्रकार की किसी अमन की आशा की उम्मीद न रखते हुये इससे दुर ही बने हुये हैं। अमन की आशा  का यह कार्यक्रम अभी पूरा भी नहीं हुआ है कि आईपीएल-3 में क्रिकेट खिलाड़ियों के नीलामी कार्यक्रम में पाकिस्तानी खिलाड़ियों को किसी भी टीम द्वारा न लिये जाने से एक ही  झटके में अमन की आशा मिट गई है। अब पाकिस्तान में तरह-तरह की भारत विरोधी आवाजें सुनाई दे रही हैं और टाइम्स ऑफ इंडिया तथा जंग अखबार की अमन की आशा का प्रोग्राम बेकार की कवायद बन गया है।

इसी के साथ-साथ पाकिस्तान में अमेरिका के रक्षा मंत्री राबर्ट गेट्स ने यह कहकर अमन की आशा  को धक्का पहुंचाया है कि भारत का संयम खत्म हो सकता है यदि फिर से 26/11  की घटना दोहराई गई।  इससे भी भारत-पाक संबंधों में गिरावट और वाद-विवाद और गहरा सकता है। साथ-साथ ये भी पता चल रहा है कि अमेरिका दोनों देशों को डराकर दक्षिण एशिया के इस क्षेत्र में अपना रुतबा बढ़ी रहा है और भारत-पाक के आपसी संबंधों में चौधरी बन रहा है।

पर फिलहाल तो अमन की आशा मिट गई है। वैसे भी ऐसी आशा थी किसे?

SarkariNaukriBlog com गुरुवार, 21 जनवरी 2010
गूगल पूरा भारतीय हो रहा है – मकर-संक्रांति

ऐसे समय में जब भारतीय लोग पश्चिमी बातों के प्रभाव में अपनी भाषा,  संस्कार और त्यौहरों से दूर होते जा रहे हैं, भारतीयों का अंतर्राष्ट्रीयकरण होता जा रहा है, अपनी दुकाने लेकर भारत आई विदेशी कंपनियां भारत में हिंदी में प्रचार करती हैं और भारतीय त्यौहारों के माध्यम से अपना माल बेचने की कोशिश करती दिखती हैं। इसी का एक उदाहरण है गूगल का मकर संक्रांति को याद रखना और ये भी याद रखना की भारत में कई जगह इस अपसर पर पतंगे उड़ाई जाती हैं। हालांकि पढ़े-लिखे भारती अब अपने बच्चों को पतंग, कंचे, गिल्ली-डंडा खेलने के लिये मना करते हैं। गूगल ने मकर-संक्रांति के अवसर पर अपने भारतीय होम-पेज पर ये पतंगबाजी का चित्र लगाया है जोकि हमें ही याद दिला रहा है कि उठो भारतीयों अपनी ही बातों, संस्कारों को मनाओ और मजे लूटो।

kitefestival2009-hp

इसी अवसर पर मेरे मोबाइल पर आया हुआ एक छोटा संदेश (SMS) :

मीठे गुड़ में मिल गया तिल
उड़ी पतंग और खिल गया दिल ।।
हर पल सुख और हर दिन शान्ति
आपके लिये शुभ मकर संक्रांति ।।

SarkariNaukriBlog com गुरुवार, 14 जनवरी 2010
कहां गई ग्लोबल वार्मिंग?

दिल्ली और उसके आसपास जबर्दस्त ठंड पड़ रही है। सर्दी में न कुछ काम करने का मन करता है और न ही सामान्य जीवन जिया जा रहा है। बच्चों के स्कुल बंद कर दिये गये हैं। गलन वाली ठंडी हवा चल रही है। उत्तर भारत के हर पहाड़ी स्थान पर इस बार बर्फबारी हुई है। इसके साथ-साथ दुनिया के अधिकांश हिस्सों में भी जबर्दस्त ठंड पड़ रही है। कई जगह तो कई वर्षों के रिकार्ड टूट गये हैं। चीन, कोरिया, रुस, जर्मनी, इंग्लैंड, अमेरिका, कनाडा हर जगह बर्फ गिर रही है। भारत में भी पिछले 2-3 सालों में तो कोई खास ठंड नही पड़ी थी, लेकिन इस बार वापस अपने वास्तविक रुप में आ गई है। ऐसे में मैं सोच रही हूं कि धरती पर लोग जो ग्लोबल वार्मिंग को लेकर हल्ला कर रहे थे और अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन बुलाकर अपनी अपनी बात मनवा रहे थे उनको कहीं प्रकृति यानी भगवान ने तो जबाव नहीं दिया कि चिन्ता न करो प्रकृति अपने आप तुम्हारा ध्यान रखेगी। कोई बतायेगा कि कहां गई ग्लोबल वार्मिंग और उसका असर?

SarkariNaukriBlog com मंगलवार, 12 जनवरी 2010
भारतीय होटल व्यवसाय या इंड्स्ट्री पर्यटन सीजन में दाम बढ़ा देते हैं

पिछले साल के अंत और इस साल की शुरुआत के लिये हम लोग कुछ पर्यटन स्थलों पर परिवार के साथ घूमने भारतीय होटल इंडस्ट्री के लिये गये थे जहां पर नये साल का हमने स्वागत किया और अभी हम लोग छुट्टियां मना कर लौटे हैं। इन छुट्टियों के दौरान घूमते वक्त हमने देखा कि क्रिसमस के आसपास लगातार छुट्टियों की वजह से काफी भीड़ थी और ऐसा लग रहा था कि अधिकांश लोग घूमने निकले हुये हैं। खैर जिस बात ने मुझ सबसे ज्यादा हैरान और परेशान किया किया कि अधिकांध होटलों और गेस्ट हाउसों में कमरे उपलब्ध नहीं थे और उपलब्ध कमरों को काफी ज्यादा दाम बढ़ा कर उठाया जा रहा था, वो भी अहसान जता कर। हमने देखा कि कई परिवारों का घूमने का बजट इस वजह से बिगड़ गया और लोग अपना कार्यक्रम अधूरा छोड़ कर चले गये। कई होटल वालों को हमने पर्यटकों से बेरुखी से व्यवहार करते भी देखा। लोगों का कहना था कि पहले के वर्षों में साल के इसी समय इस तरह से कभी भी होटलों में कमरो की उपलब्धता की समस्या कभी नहीं रही फिर पता नहीं इस बार क्यों ऐसा है? खैर होटल वालों द्वारा इस प्रकार सरेआम पर्यटकों को लूटने से मैंने ये सोचा कि अगर ये लोग सीजन के नाम पर इस तरह बहुत ज्याद दाम बढ़ा सकते हैं तो फिर अन्य लोगों द्वारा भी इन होटल वालों से इसी सीजन के दौरान अलग तरह के दाम लेने चाहिये मसलन बिजली विभाग, जलकर, सीवर, आय कर, बिक्री कर त्यादि को भी सीजन के रेट बढ़ा कर इस तरह से इनसे वसूलना चाहिये अन्यथा पहले से ही सरकार को पक्का कराना चाहिये कि सीजन में क्या रेट लिये जायेंगे और बाद में क्या रेट लिये जायेंगे। वर्ना पर्यटक इसी प्रकार लुटते रहेंगे।

SarkariNaukriBlog com गुरुवार, 7 जनवरी 2010
भारत का नंबर एक ब्लॉग?

लगता है कि मेरा अंग्रेजी का सरकारी नौकरी को बताने वाला ब्लॉग कम से कम भारत में तो नंबर एक ब्लॉग बन गया है।  रोजाना पेज व्यू भी काफी ज्यादा है और अब तो फीड सब्सक्राइबर (फीड ग्राहक) की संख्या भी एक लाख के ऊपर हो गई है।

Sarkari-Naukri

SarkariNaukriBlog com बुधवार, 6 जनवरी 2010