हो गई कोस्मेटिक देशभक्ति पूरी

आज देष को गणतंत्र बने हुये 60 वर्ष पूरे हो गये और इस अवसर पर जहां मन प्रफुल्लित और हर्षित है वहीं ये देख कर दुख होता है कि अधिकांश लोगो की देशभक्ति केवल दिखाने भर के लिये है। आज 61वें गणतंत्र दिवस के अवसर पर हमारी सोसाईटी में भी लोगो ने झंड़ारोहण, राष्ट्रीय गान का गायन एवं कई अन्य कार्यक्रम आयोजित किये थे। लेकिन मैने देखा कि सोसाईटी की दो बिल्डिंगों को लोग अलग-अलग जगह पर अपना अपना ये सब कार्यक्रम कर रहे थे यानी कि गंणतंत्र दिवस के अवसर पर भी लोग एक न रह सके और अपनी-अपनी देशभक्ति अलग से प्रदर्शित की।

दूसरी बात ये कि गाने गाये जा रहे थे कि देश के लिये ये कर देंगे वो कर देंगे लेकिन अधिकांश लोग वो है जो किसी न किसी प्रकार से देश को नुकसान पहुंचाने वाले लोग हैं। कोई अपने ऑफिस में भ्रष्टाचार में लिप्त हैं, किसी के बारे में सब को पता है कि वो बिना रिश्वत के कोई काम नहीं करता है, को बिल्डर है जो कि घटिया सामान लगाकर ज्यादा कमाता है, कोई दुकानदार है जो कि घटिया और मंहगा सामान बेचने कि फिराक में रहता है। कहने का मतलब ये हे कि ये सब लोग दिल से तो शायद देशभक्त हैं और अपनी देशभक्ति 26 जनवरी और 15 अगस्त को इसी तरह प्रदर्शित भी करते है लेकिन जो बाते देश को नुकसान पहुंचा रही हैं उनको छोड़ते नही हैं तो क्या ये न माना जाये कि ऐसी देशभक्ति दिखावटी (कोस्मेटिक) है।

दिल से देशभक्त बनिये और देश के लिये ऐसे काम करिये कि देश का और देश के लोगों को लाभ हो। आप सब को 61 वे गणतंत्र दिवस की ढेर सारी बधाई और शुभकामना कि ऐसे ही हमारा प्यारा भारत  देश हमेशा गणतंत्र दिवस मनाता रहे।

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5 टिप्‍पणियां

  1. बहुत ही अच्छा आलेख

    आपको गणतंत्र दिवस की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनायें ।

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  2. सही कहा,जब तक आपस में,सामजंस्य न हो,तो कैसी देशभक्ति,आपको गणतन्त्र दिवस की शुभकामनायें ।

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  3. really, its true, we are not living here in corporate nature.....
    At first we should try our best efforts to becoming great India then we can say that "MERA BHARAT MAHAN"

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