खेल की संस्कृति बढ़ाने की जिम्मेदारी सरकार की है

खेल की संस्कृति बढ़ाने की जिम्मेदारी सरकार की है


भारत सरकार के खेल मंत्री किरन रिजिजू को लगता है कि भारतीयों में खेल की समझ न के बराबर है इसके लिये उनके खेद है। माननीय  मंत्री जी का कहना है कि भारत में खेल संस्कृति को बढ़ावा देने की जरूरत है। उन्होंने ये भी कहा कि आम भारतीयों में और यहां तक कि संसद के सदस्यों को भी खेलों जी ज्यादा समझ नहीं है। मंत्री जी को मलाल  है कि भारतीय समाज में खेल ज्ञान बहुत कम है। केवल क्रिकेट के खेल को ही अधिकांश भारतीय जानते हैं। 


मंत्री जी बात तो आपकी कुछ हद तक सही है पर आपको ये भी मानना पड़ेगा कि खेल की संस्कृति बढ़ाने की जिम्मेदारी आप ही की है। आप ही लोग केवल क्रिकेट के खेल को बढ़ाते हो। क्या कारण है कि भारत के हर जिले और शहर में ढंग के स्टेडियम तक नहीं हैं? क्यों भारत के अधिकांश स्टेडियमों में हॉकी के खेल के लिये एस्ट्रो टर्फ नहीं है? 

ये एक मानी हुई बात है कि खेलों में भारत को प्रतिभायें छोटे शहरों, कस्बों और गांवों से ही मिलती हैं। लेकिन वहां पर उनको ढंग की खेल सुविधाओं का अभाव ही मिलते है। मंत्री जी, खेलों की सुविधाओं को छोटी जगह तक ले जाओ फिर देखो कैसे खेलो को बढ़ावा मिलता है।


आप को ये याद दिला दूं कि हरियाणा को लड़को ने मुक्केबाजी (बॉक्सिंग) कुश्ती और झारखण्ड की लड़कियों ने हॉकी में सुविधाओं के बल पर पदक लाने शुरु किये तो कैसे एकदम से वहां प्रतिभाये भी विकसित होने लगीं और खेलों को लेकर लोगों में विश्वास भी पैदा हुआ।

मंत्री जी, खेलों की संस्कृति का विकास खेलों की जबर्दस्त सुविधाओं के बूते ही हो सकता जो कि केवल सरकार ही कर सकती है।



विज्ञापन

कोई टिप्पणी नहीं