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अच्छा सफल ब्लॉगर कैसा होता है? कैसे बनें?


Good and Successful Blogger अच्छा सफल ब्लॉगर


ब्लॉगिंग (Blogging) के बारे में बहुत कुछ लिखा जाता है। ब्लॉगिंग कैसे करें इसको लेकर बहुत सारे ब्लॉग पोस्ट और यूट्यूब  वीडियो (YouTube Videos) इंटरनेट पर उपलब्ध हैं। पर ब्लॉगिंग करने वाले ब्लॉगर (चिट्ठाकार) में क्या खूबियां होनी चाहिये या फिर एक अच्छा ब्लॉगर (चिट्ठाकार) कैसा होना चाहिये या फिर एक अच्छा और सफल ब्लॉगर (चिट्ठाकार) कैसा होता है (Ek Achcha Safal Blogger Kaisa hota hai aur kaun hota hai), इस पर बहुत कम लिखा गया है।  How to become Good and Successful Blogg in Hindi?


तो हम लोग यहां पर अपने पिछले कई सालों के अनुभव के आधार पर देखते हैं कि एक ब्लॉगर (चिट्ठाकार) के क्या गुण होने चाहिये और उसकी कौन कौन सी खूबियां और कमियां होती हैं। यदि आप भी एक सफल ब्लॉगर बनना चाहते हैं तो यहां पर लिखे गये बिन्दुओं को जानकर एक सफल ब्लॉगर (चिट्ठाकार) बन सकते हैं।



अच्छे ब्लॉगर के गुण और खूबियां


1. अच्छा पाठक होना


एक अच्छे ब्लॉगर को सबसे पहले तो एक अच्छा पाठक होना चाहिये। उसमें ज्ञान की भूख होनी चाहिये और इसके लिये वो अच्छे समाचार पत्र, किताबें और विभिन्न प्रकार के ब्लॉगों को नियमित रूप से पढ़ता है। बाद में यही ज्ञान अच्छा ब्लॉगर अपने पाठकों को संशोधित और परिवर्तित रूप में दे पाता है। अच्छे पाठक होने की वजह से ही अच्छे ब्लॉगर अपने ब्लॉग पर नियमित रूप से कुछ न कुछ उपयोगी और नया दे पाते हैं।


2. अपनी भाषा पर अच्छी पकड़


अच्छे ब्लॉगर की अपने ब्लॉग की भाषा (अंग्रेजी या हिंदी) पर अच्छी पकड़ होती है। क्योंकि अच्छा ब्लॉगर खूब पढ़ने वाला होता है इसलिये वो कई प्रकार के ब्लॉग लेखों की भाषाओं के तरीकों को जान पाता है। वो स्वतः ही जान जाता है कि अच्छी भाषा कैसे लिखी जाती है, कैसे पाठकों को अपने लिखने के तरीके से बांधा जाता है?  

अच्छे ब्लॉगर आपको अपनी पहली लाईन की भाषा से ही अपनी ओर खींच लेते हैं। अच्छे ब्लॉगर अपनी भाषा के जानकार होते हैं, उनकी भाषा स्पष्ट और सीधी तथा व्याकरण सधा हुआ होता है। 

अपनी भाषा से ही वे समझदारी की झलक देते हैं। अच्छे चिट्ठाकार के पास हमेशा आपको कुछ कहने के लिये होगा और यही आपको पढ़ने पर मजबूर कर देगा। सफल ब्लॉगर का लिखने का अपना खुद का अंदाज (स्टाइल) होता है।


3. पाठकों के साथ संवाद रखना


अच्छा सफल ब्लॉगर हमेशा अपने पाठकों से संवाद बनाये रखने की कोशिश करता है। ब्लॉगिंग है ही दो तरफा संवाद का माध्यम। अच्छे ब्लॉगर अपने पाठकों की इज्जत करते हैं। वे आपकी टिप्पणियों का जवाब देते हैं। वो आपकी कई प्रकार से सहायता करने की भी कोशिश करते हैं। कई ब्लॉगर सोशल मीडिया वेबसाइटों पर समान विचारधारा के पाठकों का समूह (Group) बना लेते हैं और विचारों का आदान प्रदान करते हैं।


4. अच्छा ब्लॉगर हमेशा सीखता रहता है


अच्छे ब्लॉगर हमेशा कुछ न कुछ नया सीखते रहते हैं। जैसा कि हम उपर बता चुके हैं कि सफल ब्लॉगर दूसरों के ब्लॉग पढ़ते रहते हैं हैं और उनसे कुछ न कुछ सीखते हैं। वे नयी और अच्छी पुस्तकें पढ़ते हैं। वे नया सीखने और नया करने को हमेशा तत्पर रहते हैं। 

उनके अपने ब्लाॉगिग के क्षेत्र में जो भी गतिविधि होती है उसके बारे में हमेशा जानने की कोशिश करते रहते हैं। उदाहरण के लिये अगर किसी चिठ्ठाकार का ब्लॉग इंटरनेट पर पैसा कमाने के बारे में है तो वो ब्लॉगर हमेशा इस क्षेत्र में जो कुछ भी नया होता रहता है उसके बारे में जानकारी रखेगा। 

Good and Successful Blogger


5. अपने ब्लॉग के प्रति जूनून और समर्पण


जैसा कि हम पहले भी बचा चुके हैं कि एक अच्छा ब्लॉग उसको उसको चलाने वाले ब्लॉगर के जुनून और जज्बे से चलता है। दरअसल आप अपने विषय को लेकर ब्लॉग इसीलिये बनाते हैं क्योंकि आप चाहते हैं कि आप के पास जो भी उस क्षेत्र की जो कुछ जानकारी है वो आप सभी लोगों के साथ साझा करना चाहते हैं। 

अपने ब्लॉग विषय क्षेत्र (Blog niche) के लिये सफल ब्लॉगर का जूनून उसके चिठ्ठे के पाठक को नयी नयी और उच्च कोटि की जानकारी पाने का जरिया बन जाता है। अपने चिठ्ठे के लिये समर्पण और जनून के कारण अच्छा सफल ब्लॉगर अपने ब्लॉग को अपने विषय क्षेत्र का सबसे बड़ा ब्लॉग बना देता है।  

6. अच्छा मददगार इंसान होना 


एक अच्छा इंसान ही सकारात्मक सोच रख सकता है। सफल ब्लॉगर के गुण में उसका अच्छा इंसान होना भी है। एक अच्छा इंसान ही तो अपने ब्लॉग के जरिये लोगों की सहायता करना चाहता है। अच्छे ब्लॉगर खुले दिल के होते हैं। वे जानते हैं कि हर चिट्ठे का अपना एक स्थान है। जो चिट्ठे उन्हे अच्छे लगते हैं वे उनका लिंक अपने चिट्ठे पर देते हैं, बिना यह देखे कि दूसरा चिट्ठा उनसे छोटा है या बड़ा। नया या पुराना।

अच्छा सफल ब्लॉगर अपनी बात से ही समझदारी की झलक देते हैं। वे इस समूह में दूसरों की मदद करते हैं, नये लोगों का स्वागत करते हैं, उनका उत्साह बढ़ाते हैं तथा उनकी सहायता करते हैं। हम ने हिंदी चिठ्ठाकारी के शुरुआत के दिनों में देखा है कि किस तरह हिंदी चिठ्ठाकार एक परिवार की तरह काम करते रहे हैं।


7. अपनी SEO and Technical जानकारी को बढ़ाना


एक अच्छा सफल ब्लॉगर अपने ब्लॉग पर पोस्ट लिखने के साथ ही साथ ब्लॉग से संबंधित सभी प्रकार की SEO  और तकनीकी जानकारी को भी बढ़ाता रहता है। जब तक गूगल की खोज में ब्लॉग पोस्ट रैंक नही होगा तो ब्लॉग पर कोई पाठक नही आएगा और जब पाठक नही आएगा तो ब्लॉग को कौन पढ़ेगा? और फिर ब्लॉगर पैसे कैसे कमाएंगे?

इसके अलावा अन्य तकनाकी पक्षों की जानकारी भी एक ब्लॉगर को होनी चाहिये ताकि आने वाले पाठकों को किसी प्रकार की कोई तकनीकी परेशानी न हो। उदाहरण के लिये ब्लॉग का Responsive न होना या फिर ब्लॉग की लोड होने की गति तेज न होना (blog load speed) इत्यादि।

8. लगातार लिखना


अच्छे सफल ब्लॉगर बिना दिग्भ्रमित हुये अपने ध्येय पर ध्यान देते हुये और अपने पाठकों को नई नई जानकारी देने के लिये लगातार दैनिक रूप से या कम से कम सप्ताह में एक बार तो लिखते ही हैं। 

इससे ब्लॉग के पाठकों की रूचि भी बनी रहती है और सर्च इंजन वेबसाइटें (खोजक वेबसाइटें) जैसे कि गूगल, बिंग इत्यादि भी लगातार ब्लॉग पोस्ट प्रकाशन को पसंद करते हैं और ब्लॉग की कोटि (रैंक) बढ़ाते हैं। 

9. पैसे के लिये नहीं विषय के लिये लेखन


हालाकि सभी लोग पैसा कमाना चाहते हैं बल्कि खूब कमाना चाहते हैं और ब्लॉगर भी कोई अपवाद नहीं हैं। वो भी पैसे कमाना चाहते हैं और किसी ब्लॉगर की ब्लॉगिंग करने का कारण काफी हद तक पैसा कमाना भी होता है। पर अच्छा सफल ब्लॉगर केवल पैसे के लिये नहीं लिखता। 

खाली कीवर्ड खोज कर लिखना तो एक तरह से व्यवसायिक लेखन होता है। 

ब्लॉगर कई बार अपने मन की बात लिखने के लिये भी लिखता है या फिर कई बार अपने पाठकों की रूचि के लिये भी लिखता है। जरूरी नहीं है कि हर बात गूगल या बिंग में लोग खोजें ही और केवल खोजने वाले कीवर्ड पर ही लिखा जाये। 

अच्छा सफल ब्लॉगर अपने शौक, जुनून और उत्साह के लिये भी लिखता है। लेखन के हर विषय को केवल पैसे कमाने के लिये नही छोड़ जा सकता। और क्या पता, जो बात एक ब्लॉगर आज लिख रहा है कल को वो नहीं खोजी जायेगी? अगर सब कुछ केवल पैसे के लिये होगा तो कला खत्म हो जायेगी खासकर ब्लॉगिंग और लेखन कला।

हिंदी भाषा के अधिकांश ब्लॉगर ज्यादा पैसा न कमा पाने के बावजूद केवल अपने हिंदी भाषा की सेवा करने या अपने जूनून के लिये लिख रहे है। हिंदी ब्लॉगर तो पैसे कमाकर आजीविका चलाने की सोच भी नहीं सकते हैं

अंतिम बात (निष्कर्ष)


तो यदि आप भी एक सफल और अच्छे ब्लॉगर (Good and Successcul Blogger) बनना चाहते हैं तो उपर लिखे गये गुणों मे से कुछ को अपनाने का प्रयास कीजिये, मेहनत कीजिये और देखिये कैसै आप बहुत बड़े और अच्छे ब्लॉगर बन जायेंगे।

Manisha मंगलवार, 1 सितंबर 2020

हिंदी को बढ़ावा देने के लिये हम सब क्या करें?


भारत सरकार की राजभाषा नीति के अनुसार हिंदी को राजभाषा का दर्जा प्राप्त है। सरकार हिंदी को बढ़ावा देने के लिये हर साल 14 सितम्बर को हिंदी दिवस का सभी सरकारी कार्यालयों में आयोजन करती है। सरकार तो हिंदी को बढ़ावा देने के लिये जो कुछ कर सकती है वो करती है पर हिंदी को बढ़ावा देने के लिये सबसे ज्यादा ये जरुरी है कि हम हिंदी भाषी लोग भी कुछ प्रयत्न करें। 


हिंदी को बढ़ावा


ये बात सर्वमान्य है कि हिंदी को हम हिंदी वालों ने ही छोड़ दिया है। हमें हिंदी से तो प्यार है लेकिन नौकरी के बाजार में अंग्रेजी की महत्ता देखकर हम सब हिंदी के प्रति उदासीन होते जा रहे हैं। जबकि हमें हिंदी को ही हर क्षेत्र में बढ़ाना चाहिये। 


ध्यान रहे कि आजादी के आन्दोलन में हिंदी का बहुत बड़ी योगदान है, बहुत लोगों ने अपनी कुर्बानी दी है।

चलिये अंग्रेजी की जो महत्ता आज के जमाने में है वो तो रहेगी ही और समय के साथ कम भी होगी, लेकिन तब तक हम कुछ छोटे छोटे उपाय करके अपने अपने लेवल पर हिंदी को थोड़ा थोड़ा बढ़ावा तो दे ही सकते हैं।

हिंदी को बढ़ावा देने के विभिन्न उपाय


आइये देखें कि किन छोटे छोटे उपायों से हिंदी को बढ़ावा दे सकते हैं - 


  1. अगर हम कोई व्यवसाय करते है तो हम कोशिश कर सकते हैं कि समस्त साइन बोर्ड, नाम पट्टिकायें, काउन्टर बोर्ड, सूचना पट्ट आदि को हिंदी में अवश्य ही लिखें भले ही साथ में आप अंग्रेजी या अन्य किसी भाषा में भी लिखवा लें। महाराष्ट्र में सरकार ने हर बोर्ड पर मराठी में लिखने का नियम बना रखा है जिससे हिंदी वालों को भी वहां कुछ पढ़ने में दिक्कत नहीं आती है (मराठी देवनागरी लिपि में लिखी जाती है)। जबकि अगर आप लखनऊ जायें तो आप देखेंगे कि दुकानों के बोर्ड अधिकांशतः अंग्रेजी में लिख हुये हैं।
  2. सभी पपत्रो, दस्तावेजों, मुद्रित सामग्री तथा अन्य लेखन सामग्री को हिंदी में मुद्रित (प्रिंट) करवाया जाये।
  3. हो सके तो व्यवसायिक और व्यक्तिगत पत्रो को हिंदी में ही लिखा जाये।
  4. विजिटिंग कार्ड पूर्ण रुप से आकर्षक हिंदी में लिखे जायें। अगर पूर्ण रुप से हिंदी में लिखना संभव नहीं है तो कुछ तो हिंदी मे होना ही चाहिये (कम से कम आप का नाम तो आकर्षक हिंदी में हो सकता है)।
  5. संभव हो तो कंप्यूटर पर यूनीकोड एनकोजिंड वाली टाईपिंग सीख लीजिय। यकीन मानिये हिंदी टाइपिंग सीखना बहुत ही आसान है, आप 2-3 दिन में ही अच्छी खासी टाइपिंग सीख जायेंगे।
  6. लिखने में आसान हिंदी पा प्रयोग करें ताकि सभी लोग समझ सकें।
  7. अच्छी हिंदी जानने वाले कभी कभी उन लोगों की कठिनाई नहीं समझ नहीं समझ पाते जिन्होंने हाल ही में थोड़ी बहुत हिंदी सीखा है। ऐसे लोगों की कठिनाई का पूरा ध्यान रखना चाहिये और अपने पांडित्य का प्रदर्शन नहीं करना चाहिये।
  8. हिंदी का वाक्यों में संस्कृत के कठिन शब्दों का अनावश्यक प्रयोग न करें।
  9. हिंदी के वाक्यों में अंग्रेजी की वाक्य संरचना से बचें अर्थात वाक्य रचना हिंदी भाषा की प्रकृति के अनुसार ही होनी चाहिये। वह अंग्रेजी मूल का अटपटा अनुवाद नहीं होना चाहिये।
  10. जहां कहीं भी यह लगे कि पढ़ने वाले को हिंदी में लिखे किसी शब्द या पदनाम को समझे में कठिनाई हो सकती है, तब कोष्ठक में अंग्रेजी रुपान्तर भी लिख देना उपयोगी रहेगा।
  11. अगर आप को हिंदी में लिखने में कठिनाई या झिझक है तो इसके लिये शुरूआत छोटी-छोटी टिप्पणियों को हिंदी में लिख कर करनी चाहिये। आप हिम्मत करेंगे तो धीरे-धीरे सब हिंदी में काम करने लगेंगे।
  12. खास बात ये है कि हमें अंग्रेजी में सोचकर हिंदी में नहीं लिखना चाहिये। कोशिश यह होनी चाहिये कि हिंदी में ही सोच कर हिंदी में  लिखें।
  13. हिंदी मे लिखते समय शब्दों के लिये अटकिये मत, किसी भी शैली के लिये रुकिये नहीं और अशुद्धियों से घबरायें नहीं।
  14. कोशिश करें कि मौलिक रुप से हिंदी लेखन करें। अंग्रेजी से हिंदी अनुवाद का सहारा बहुत कम लेना चाहिये क्योंकि दोनों भाषाओं की शैली अलग-अलग है। खासकर मशीनी अनुवाद जैसे कि गूगल अनुवाद में काफी गलतियां हो सकती हैं। ऐसी मशीनी भाषा से बचें।
  15. हो सकता है कि शुरू में हिंदी में काम करने में आपको झिझक महसूस हो सकती है किन्तु काम करते-करते आप देखेंगे कि अंग्रेजी की तुलना में हिंदी सरल भाषा है, इसमें समय बचता है, हिंदी भाषा हमारी अभिव्यक्ति को स्पष्ट और प्रभावी बनाती है।

तो हम सब को प्रण लेना चाहिये कि हम हिंदी में ही काम करेंगे और हिंदी को बढ़ावा देने के सभी प्रकार के उपाय करेंगे ताकि हमारी प्यारी हिंदी भाषा का प्रसार और प्रचार हो सके।

Manisha रविवार, 26 जुलाई 2020

अच्छा वीडियो सम्मेलन सॉफ्टवेयर कैसा हो? Achcha Video Conference Software Kaisa ho?


कोरोना की महामारी के प्रकोप के चलते जब से पूरी दुनिया में लॉकडाउन हुआ है, लोगों को अपने घरों में रहना पड़ रहा है उससे लोगों को एक दूसरे से काट दिया है।  सभी लोग अपने परिवार के करीबी और संबंधियो से नहीं मिल पा रहे हैं। सामाजिक रुप से सब लोग अलग थलग पड़ गये हैं।

अधिकांश कंपनियों ने अपने कर्मचारियों को घर से काम करने को बोल दिया है। इस कोरोना कोविद -19 की वजह से पूरी दुनिया भर में हुये लॉकडाउन में छोटे और मध्यम आकार के व्यवसायों के साथ-साथ बड़े बड़े कॉरपोरेट भी सबसे ज्यादा प्रभावित हुये हैं। 

खुदरा क्षेत्र की शटडाउन, एक जगह से दूसरी जगह जाने के अंतर-राज्य परिवहन और वैश्विक यात्रा के बंद होने ने कॉर्पोरेट क्षेत्र की व्यापार करने की क्षमता पर व्यापक प्रभाव डाला है। 


हालांकि दुनिया के तमाम देशों ने और भारत में भी चरणबद्ध तरीके से प्रतिष्ठान खोलने शुरू कर दिए गये हैं। अब कॉरपोरेट्स को अपने ग्राहकों और विक्रेताओं के साथ बेहतर तरीके से संवाद करने, जुड़ने और सहयोग करने के लिए इस तरह से काम करना है कि काम कम से कम समय में हो, कम से कम लागत में हों और भौगोलिक स्थिति की कोई सीमा न हो। 


वीडियो कोन्फ्रेंस सम्मेलन सॉफ्टवेयर Video Conference Software


वीडियो सम्मेलन सॉफ्टवेयर क्या है


ऐसे कोरोना वाले कठिन समय में वीडियो कोन्फ्रेंस या वीडियो सम्मेलन सॉफ्टवेयर (Video Conference Software) बड़े काम के साबित हुये हैं। इन वीडियो सम्मेलन सॉफ्टवेयरों के जरिये लोग अपने पारिवारिक संबंधियो, पारिवारिक मित्रों या फिर अपने आस पड़ोस के लोगों से लॉकडाउन के घर में रहने के निर्देश का पालन करते हुये सभी लोगों के साथ संपर्क रख पा रहे हैं।

हम यहां पर ये जानने की कोशिश करेंगे कि अगर वीडियो कोन्फ्रेंस सॉफ्टवेयर की प्रयोग करना हो तो वो कैसा हो, वीडियो सम्मेलन सॉफ्टवेयर की क्या क्या विशेषतायें हों आदि आदि।

वीडियो सम्मेलन सॉफ्टवेयर छोटे बड़े सभी व्यवसायिक प्रतिष्ठानों और कॉरपोरेट्स के लिये भी वरदान साबित हुये हैं। वीडियो सम्मेलन सॉफ्टवेयर की कंपनियों की इस प्रकार की मदद करने के लिए प्रतिबद्ध हैं जिससे उन्हें डिजिटल सहयोग का उपयोग करके अपने व्यापार की निरंतरता को बनाए रखने में मदद मिले क्योंकि वीडियो सम्मेलन सॉफ्टवेयर भौगोलिक सीमाओं के पार व्यापार करने का साधन है। 

वीडियो सम्मेलन सॉफ्टवेयर कंपनियों को आंतरिक कर्मचारियों के साथ-साथ उनके बाहरी विक्रेताओं और ग्राहकों के साथ बैठकें, प्रशिक्षण, व्यवसाय समीक्षा, योजना सत्र आदि के संचालन के समाधान के लिए एक पूर्ण सुविधा प्रदान करता है।

वीडियो सम्मेलन कॉन्फ्रेंसिंग सॉफ्टवेयर ऑडियो, वीडियो और टेक्स्ट डेटा प्रसारित करने के लिए कंप्यूटर नेटवर्क का उपयोग करके विभिन्न साइटों पर दो या अधिक प्रतिभागियों के बीच लाइव कॉन्फ्रेंस शुरू करने और संचालित करने की सुविधा प्रदान करता है। अधिकांश वीडियो सम्मेलन कॉन्फ्रेंसिंग सॉफ़्टवेयर उपयोगकर्ताओं को संवाद करने और साझा करने और फ़ाइलों पर काम करने में सहयोग करने देते हैं। ये एक बहुत ही कारगर तकनीक है जिसका विकास हम सब के फायदे के लिये हो रहा है। हालांकि अभी भी इसमें विकास की और संभावना और गुंजाइश बाकी है।



वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग सॉफ्टवेयर का उपयोग कौन करता है?


सभी प्रकार और आकारों के व्यवसाय और कंपनियां और सामान्य जन भी अपनी सोसाइटी, रिश्तेदारी और मित्र मंडली में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग सॉफ़्टवेयर का  उपयोग करते हैं। यह अलग-अलग स्थानों में कई शाखाओं या कंपनियों के उपर के स्तर के प्रबंधन के लिए बहुत ही शक्तिशाली चेक-इन साधन साबित होता है। 

इन वीडियो सम्मेलन सॉफ्टवेयरो का उपयोग व्यवसायों को उनकी संभावनाओं का विस्तार करने और यात्रा की आवश्यकता के बिना कर्मचारियों के साथ जांच करने या कोई जानकारी लेने के लिए भी किया जाता है। यहां तक कि छोटे, मध्यम या बड़े आकार के व्यवसाय अपने साझेदारों, हितधारकों और व्यापार की नयी संभावनाओं से जुड़ने के लिए अपने दैनिक कार्यों में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग का उपयोग करते हैं।

इसके अलावा वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग उपकरण कभी-कभी शिक्षकों को उनके छात्रों के साथ जोड़ने के लिए एक माध्यम के रूप में या फिर ऑनलाइन शिक्षण प्लेटफार्मों या शिक्षण प्रबंधन के लिये प्रयोग होते हैं। ये सब वीडियो सम्मेलन सॉफ्टवेयर ऑनलाइन सीखने के माहौल के लिए बहत ही अधिक उपयोगी हैं, जो अक्सर फ़ाइल साझाकरण, मतदान और व्हाइटबोर्डिंग क्षमता प्रदान करते हैं ताकि सीखने का एक प्रभावी ढंग का वातावरण बन सके। 

सरकार मे भी वीडियो सम्मेलन सॉफ्टवेयर की प्रभावी ढंग से प्रयोग हो रहा है। आप सब ने देखा होगा कि किस प्रकार भारत के प्रधानमंत्री भारत के सभी राज्यों के मुख्यमंत्रियों के साथ वीडियो सम्मेलन करके कोरोना वायरस से लड़ने के लिये बातचीत कर रहे हैं। प्रशासन में भी रोजाना वीडियो सम्मेलन सॉफ्टवेयर की मदद से बैठकें की जा रही हैे और महतिवपूर्र सरकारी काम निपटाये जा रहे हैं। भारत के हर जिला प्रशासन, राज्य सचिवालय और केन्द्र सरकार के सभी  मंत्रालयों और महत्वपूर्ण विभागों में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग की सुविधा चल रही है जिससे समय और पैसे की भी बचत हो रही है।


प्रसिद्ध वीडियो सम्मेलन सॉफ्टवेयर (Famous Video Conference Software's)


भारत में जब 25 मार्च को अचानक से कोरोना को चलते लॉकडाउन लगाया तो लोगों ने वीडियो कोन्फ्रेंस सम्मेलन सॉफ्टवेयरों को खोजना शुरु कर दिया। अचानक से किसी ने जूम वीडियो सम्मेलन सॉफ्टवेयर को खोज लिया और  बस सब लोग इसी का प्रयोग करने लगे। हालांकि बाद में चीन का उत्पाद होने और खराब निजता सुरक्षा के चलते भारत के गृह मंत्रालय ने इसका प्रयोग न करने की सलाह दी तब लोगों ने अन्य वीडियो सम्मेलन सॉफ्टवेयरों को खोजना शुरू किया। 

अब लोग गूगल, माइक्रोसॉफ्ट, स्काइप, सिस्को इत्यादि कंपनियों के तमाम वीडियो सम्मेलन सॉफ्टवेयरों  का प्रयोग कर रहे हैं।


हालांकि कई मुफ्त वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग विकल्प भी उपलब्ध हैं, जो स्वतंत्र रूप से काम करने वालों, परामर्शदाताओ  या अन्य स्व-नियोजित व्यक्तियों के लिए एक आकर्षक वीडियो सम्मेलन साधन बनते हैं। वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग सॉफ्टवेयरों के मुफ्त संस्करण आमतौर पर ऐसे कम कम क्षमताओं वाले विकल्प होते हैं, जो एकल उपयोगकर्ताओं के लिए थोड़ी कम व्यापक कार्यक्षमता प्रदान करते हैं लेकिन काम चल जाता है।

यहां पर हमने कुछ प्रसिद्ध वीडियो सम्मेलन सॉफ्टवेयरों की सूची हमने बनाने की कोशिश की है। आप को जो भी पसंद हो उस वीडियो कोन्फ्रेंस सॉफ्टवेयर का अपने काम में उपयोग कर सकते हैं।


लाइव वीडियो कोन्फ्रेंस सम्मेलन Live Video Conference

अच्छे वीडियो सम्मेलन सॉफ्टवेयर की विशेषतायें


तो आप को जब यह देखना हो कि कौन सा वीडियो सम्मेलन सॉफ्टवेयर प्रयोग करें, उस से पहले ये आपको ये जानना जरूरी है कि एक अच्छा वीडियो कांफ्रेंस सॉफ्टवेयर कैसा हो, उसकी क्या विशेषतायें होनी चाहिये? हमारे विचार में एक अच्छे वीडियो सम्मेलन सॉफ्टवेयर में ये सारी विशेषतायें होनी चाहिये -

    • विंडोज, एपल, एन्ड्रायड, लाइनक्स आदि सभी कंप्यूटरों पर उपलब्ध होना
    • किसी भी प्रकार के उपकरण जैसे मोबाइल, टैब इत्यादि पर भी उपलब्ध होना
    • कई लोगों के साथ मल्टी पार्टी ऑडियो और वीडियो सम्मेलन की सुविधा देना
    • पहले से मौजूद वीडियो कांफ्रेंस सिस्टम के साथ जुड़ाव और एकीकरण
    • बैठकों की रिकॉर्डिंग करने की सुविधा प्रदान करना
    • एन्क्रिप्टेड डेटा ट्रैफ़िक के साथ अत्यधिक सुरक्षित होना
    • डाटा की गोपनीयता और सुरक्षा प्रदान करना
    • प्रस्तुतियों, पीडीएफ फाइलों और स्क्रीन आदि के रूप में सामग्री साझा करने की सुविधा देना
    • सहयोगी कार्यों के लिए टीमों और कार्य स्थान का निर्माण
    • भारत के इंटरनेट और भारत के टेलीफोन नंबर पर आवाज (जब कि इंटरनेट उपलब्ध नहीं है) की सुविधा देना
    • सफेद बोर्डिंग यानी कि कुछ लिख कर दिखाने की क्षमता देना
    • 100% उपस्थिति और भागीदारी के लिए सभी लोगों के पूर्ण सेट की दृश्यता सुनिश्चित करने वाली एकल खिड़की पर देखने की सुविधा देना
    • एन्क्रिप्टेड और सुरक्षित डाटा के यातायात का आवागमन
    • वीडियो की बहुत ही अच्छे स्तर की कांफ्रेंस सुविधा देना जिससे लोगो को वीडियो सम्मेलन के बाद संतुष्टि हो
    • वीडियो को बन्द करके खाली ऑडियो को प्रयोग करने की सुविधा देना
ये तो थीं साधारतया उपलब्ध होने वाली विशेषतायें जो कि एक अच्छे वीडियो सम्मेलन सॉफ्टवेयर में होनी ही चाहिये।    

वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग सॉफ्टवेयर के साथ होने वाली समस्यायें  


वीडियो सम्मेलन सॉफ्टवेयर के साथ सबसे आम मुद्दों में से एक उसकी कॉल गुणवत्ता है। यानी कि कितनी आसानी से आप किसी के साथ वीडियो सम्मेलन कर सकते हैं। उसकी गति कितनी है? वो कितनी कम बैंडविड्थ पर इंटरनेट पर काम कर सकता है। वीडियो सम्मेलन सॉफ्टवेयर अपने आप में मजबूत हो सकता है पर इस पर वीडियो या ऑडियो की गुणवत्ता शामिल लोगों की इंटरनेट गति पर अत्यधिक निर्भर होती है। 

अत: किसी संभावित हताशा या परेशानी से बचाने के लिये यह महत्वपूर्ण है कि वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग सॉफ़्टवेयर का उपयोग करते समय उपयोगकर्ताओं के पास विश्वसनीय इंटरनेट तक पहुंच हो और साथ ही साथ उसकी गति और गुणवत्ता वहुत अच्छी हो। नहीं तो लोगों को आपस में एक दूसरे से बातचीत के दौरान बहुत सारे व्यवधान होते रहेंगे।


वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग सॉफ्टवेयर के मुख्य लाभ


हमने देखा कि कंपनियों द्वारा अपने व्यवसाय में या फिर ऑनलाइन के माध्यम से पढ़ाई और कोचिंग के लिये या फिर लोगों द्वारा सामाजिक जुड़ाव के लिये वीडियो सम्मेलन सॉफ्टवेयर बहुत ही काम के हैं और इसके बहुत से लाभ और फायदे हैे जिसका लाभ सभी ले रहे हैं। मुख्य तौर पर एक अच्छे वीडियो सम्मेलन सॉफ्टवेयर से ये लाभ होते हैं (और भी अन्य कई लाभ हो सकते हैं) -

    1. सस्ते लंबी दूरी और अंतर्राष्ट्रीय संचार विकल्पों के साथ धन और संसाधनों को बचाता है।
    2. भौगोलिक बाधाओं को दूर करता है और अपनी टीम से दूरी को कम करके मऑनलाइन मिलजुल कर काम करने की सुविधा देता है।
    3. स्क्रीनशेयरिंग और फ़ाइल साझाकरण के माध्यम से आपस में मिलजुल कर काम करने की की अनुमति देकर टीम सहयोग को बढ़ाता है।
    4. लोगों को अपने कार्यालय में आराम से बैठे बैठे से बैठकों में शामिल होने की अनुमति देकर यात्रा की लागत को कम करता है।


निष्कर्ष


निष्कर्ष के तौर पर हम कह सकते हैं कि वीडियो सम्मेलन सॉफ्टवेयर अब लोगों की जरुरत बन गये हैं। अब कोरोना वायरस के माहौल में तो आम लोगों का भी ध्यान इन वीडियो कॉन्फ्रेंस सॉफ्टवेयरों की तरफ गया है और लोगों ने बहुत से विविध तरीकों से इनको प्रयोग करना आरम्भ कर दिया है। हाल ही मैंने वीडियो सम्मेलन सॉफ्टवेयर के द्वारा कई कवि सम्मेलनों और गोष्ठियों में भाग लिया और कुल मिलाकर ये एक मजेदार अनुभव रहा।

तो अब हम ये कह सकते हैं कि वीडियो सम्मेलन सॉफ्टवेयर एक बहुत ही अच्छी तकनाकि पहल है जो हमारे काम की आवश्यकता बनते जा रहे हैं और हम सब को ये अच्छी तरह से परख कर कि एक अच्छा वीडियो सम्मेलन सॉफ्टवेयर कैसा हो, उसके प्रयोग करके जांच लेने कि आवश्यकता है ताकि बाद में किसी कांफ्रेंस के बीच में कोई परेशानी न हो।

आप लोग भी कमेंट कर के बताये कि आपका अच्छा वीडियो सम्मेलन सॉफ्टवेयर पर अनुभव कैसा रहा?

Manisha सोमवार, 29 जून 2020

कोरोना काल में बहुत कुछ बदलेगा - स्वचालित नल लगाने होंगे

आपके मैं एक उदाहरण से बताना चाहूंगी कि कोरोना के समय और इसके बाद कैसे हम लोगों की दुनिया छोटी छोटी बातों में बदल जायेगी। 

Fully Automated Tap पूर्ण स्वचालित नल
हमारी सोसाइटी के क्लब में कुछ समय पहले तक जब कि कोरोना का कोई नाम भी नहीं जानता था तब इस क्लब के वाश रुम (सार्वजनिक शौचालय) में एक पूर्ण स्वचालित नल लगा था जिसके आगे हाथ करने से पानी लगभग एक मिनट तक अपने आप निकलता रहता था।

वो अच्छा चल रहा था पर कुछ दिनों के बाद उसके संवेदक (सेंसर) में कुछ खराबी आ गई और इन नलों ने काम करना बंद कर दिया।

तो इन के स्थान पर जो नये नल लगाये गये वो स्वचालित तो थे पर ऐसे थे कि पहले उन्हें दबाना पड़ता है और फिर उसमें से आने वाला पानी लगभग एक मिनट बाद बंद हो जाता है। इस व्यवस्था से भी किसी को कोई परेशानी नहीं थी और सब ठीक चल रहा था।


लेकिन अब मार्च के महीने में होली के आस पास से जब लोग कोरोना वायरस को लगकर जागरूक होने लगे और लोगों को यह हिदायत सरकार द्वारा दी गई कि उन्हें अपने हाथों को बार बार साबुन से धोना है और वो भी बीस सेकंड तक। 

अब इस नल पर अगर आप अपना हाथ धोने को लिये आते हैं
Automated Tap स्वचालित नल
तो पहली बात तो ये कि आपको इस नल को छूकर चलाना पड़ेगा, दूसरी बात जब आप हाथ गीला करके 20 सेकन्ड तक अपना हाथ साबुन से रगड़ते रहते हैं तब तक नल का स्वचालिच संवेदक उसको बंद कर देता है और फिर साबुन को हाथ से हटाने के लिये पानी के लिये नल को फिर से छू कर चलाना पड़ता है। 

इस कोरोना काल में वैसे ही हर कोई कुछ भी छूने से डर रहा है वहां पर नल वो भी सार्वजनिक शौचागार में तो बिलकुल ही अस्पृश्य बन जाता है।

अब लोग फिर से वहां पर पूर्ण स्वचालित नल की मांग कर रहे हैं।

ये तो मैंने एक उदाहरण दिया है। ऐसे कितनी ही जगह इस बात की आवश्यकता महसूस की जा रही होगी।

मैंने अब इस बात को महसुस किया है कि कोरोना काल के बाद स्वचालित वस्तुऔं और मशीनों की मांग ज्यादा बढ़ेगी और लोग अपने को सुरक्षित रखने के क्रम में किसी वस्तु या व्यक्ति को छूने से परहेज कर रहे हैं और शायद करते भी रहेंगे।  

 

Manisha शनिवार, 20 जून 2020

घिसी पिटी भारतीय नीतियां जिनसे भारत को घाटा हो रहा है


जब से भारत ने अंग्रेजों से स्वाधीनता प्राप्त करी है तब से ही हम भारत के लोग एक ऐसी काल्पनिक दुनिया की सोच में रहते हैं जहं पर सब कुछ अच्छा होता है और सारे देश और वहां के लोग सीधे और सच्चे होते हैं। इन्हीं ख्यालों में हमने कुछ नीतियां और जुमले बनाये हुये हैं और समय समय पर उनकी बात करते रहते हैं।


आजादी के बाद से दुनिया कहां से कहां पहुंच गई पर हम अभी भी इन्हीं नीतियों और जुमलों के जाल में फंसे हुये हैं। एक-आधा नीति को शायद हमने छोड़ा होगा या नई कोई नीति बनाई होगी वर्ना तो बस पुराने रिकार्ड की तरह हम हमेशा वही बातें दोहराते रहते हैं।


Outdated Indian Policies घिसी पिटी भारतीय नीतियां


घिसी पिटी नीतियां और जुमले


आइये आपको बताते हैं ऐसी ही कुछ घिसी पिटी नीतियां और जुमले जो भारत में चलती हैं -

  1. हम दुनिया के जिम्मेदार लोकतांत्रिक देश हैं - जब आप पिट गये और कोई कार्रवाई न करने का बहाना है
  2. वसुधैव कुटुंबकम - इस का फायदा उठा कर सब देशों के लोग अवैध तरीके से भारत में रह रहे हैं
  3. पंचशील और हिंदी-चीनी भाई भाई - ये बात तो 1962 में ही पिट गई
  4. गुट निरपेक्षता नीति - अब  ये तो बिलकुल ही समाप्त होने को आई लेकिन हम अभी भी इसका जिक्र करते रहते हैं
  5. गुजराल डॉक्टरिन - पाकिस्तान हमेशा फायदा उठाता है
  6. पहले परमाणु हथियारों का प्रयोग न करने की नीति - तो क्या जब हमारे ऊपर कोई परमाणु बम गिर जायेगा तब हम प्रयोग करेंगे तो हमें उससे पहले भयानक नुकसान तो हो चुका होगा
  7. भारत ने आज तक किसी देश पर हमला नहीं किया - ये बात हम बार बार बताते हैं पर इसको भारत के दुश्मन भारत की कमजोरी समझते हैं
  8. भारत सब को साथ लेकर चलना चाहता है - अरे भाई सबको कभी साथ नहीं लिया जा सकता, पहले अपना फायदा देखो
  9. भारत समस्या का समाधान बातचीत और शांति से चाहता है - बातचीत और शांति से तो आजतक अपनी बढ़त को गंवाया ही है, बेहतर है एक-दो बार अशांति से भी समस्या समाधान निकालें
  10. पाकिस्तान की जनता तो शाति चाहती है पर वहां के शासक नहीं - अरे भाई जनता तो यहां से ही गई है न, जो कि साथ नहीं रहना चाहती थी, शासक तो राजनीतिक लोग होते हैं वो लोगों की नब्ज पहचानते हैं, अगर जनता भारत के साथ शांति से रहना चाहेगी तो कोई भी शासन में हो वो वाेट लेने के लिये जनता की बात को ही मानेगा। असल ये है कि पाकिस्तानी जनता ही भारत विरोधी है
  11. दुनिया के लोकतांत्रिक देशों को एक साथ आना चाहिये - अगल अलग परिस्थितियों और भौगोलिक स्थिति के अनुसार सब देश निर्णय लेते हैं
  12. हम अहिंसा को मानने वाले देश हैं - यही तो सारी कमजोरी का कारण है
  13. आतमकवाद को कई धर्म नहीं है - बताइये? क्या सचमुच?
  14. हम विश्व आध्यात्मिक गुरू हैं - हो सकता है कभी रहे हों या वास्तव में हों पर दुनिया तभी मानेगी जब हम आर्थिक और सामरिक तौर पर भी सशक्त हों


और भी कई ऐसी नीतियां और जुमले जिन्हें हम ढो रहे हैं।

अच्छा हो यदि हम इन रुमानी बातों से निकल कर ठोस धरातल पर होने वाले घटनाकृम को देख कर नीतियां बनायें और भारत देश को सशक्त बनायें।

Manisha शुक्रवार, 19 जून 2020

एयरकंडीशनर का तापमान 24 डिग्री रखने पर हमारे अनुभव


भारत में इस समय गर्मियों का मौसम है। अधिकांश जगहों पर दिन का तापमान 45-47 डिग्री के करीब चल रहा है। करीब-करीब हर घर में एसी (Air Conditioner - AC) का इस्तेमाल हो रहा है। गर्मियों से बचने के लिए लोग एयर कंडीशनर का सहारा ले रहे हैं।

आखिर लोग करें भी क्या जब इतनी गर्मी पड़ रही है। सब से बड़ी मुसीबत तो ये है कि कोरोना वायरस के चलते भारत में लॉकडाउन लगा हुआ है और लोगों को घरों मे ही रहना है।

ऐसे में देश में बिजली की खपत भी तेजी से बढ़ रही है। हालांकि घर-ऑफिस में एसी का आदर्श तापमान कितना रखा जाए, इसकी जानकारी भी लोगों को कम ही होती है इसीलिए अब भारत सरकार ने इसको लेकर एक नियम बना कर  एयर कंडीशनर (एसी) के लिए तापमान का सामान्य स्तर 24 डिग्री नियत कर दिया है

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सरकार के अनुसार अगर इससे देश भर में सालाना 20 अरब यूनिट सालाना बिजली की बचत होगी साथ ही लोगों के स्वास्थ्य पर भी सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।

सरकार के आधिकारिक बयान के अनुसार, बिजली मंत्रालय के अधीन आने वाला ऊर्जा दक्षता ब्यूरो (बीईई) ने इस संदर्भ में एक अध्ययन कराया था और एयर कंडीशनर में तापमान 24 डिग्री सेल्सियस निर्धारित करने की सिफारिश की थी। इस दिशा में शुरुआत करते हुए हवाईअड्डा, होटल, शापिंग मॉल समेत सभी वाणिज्यिक प्रतिष्ठानों और विनिर्माताओं को परामर्श जारी किया गया है।


विनिर्माताओं को एयर कंडीशन में 24 डिग्री सेल्सियस तापमान निर्धारित करने का सुझाव दिया गया। साथ ही उस पर लेबल लगाकर ग्राहकों को यह बताने को कहा गया है कि उनके पैसे की बचत और बेहतर स्वास्थ्य के नजरिए से कितना तापमान नियत करना बेहतर है. यह तापमान 24 से 26 डिग्री के दायरे में होगा।

इस अधिसूचना के द्वारा बीईई स्टार-लेबलिंग कार्यक्रम के दायरे में आने वाले सभी रूम एयर कंडीशनरों के लिए 24 डिग्री सेल्सियस डिफॉल्ट सेटिंग को अनिवार्य कर दिया गया है।

इस से कमरे के एयर कंडीशनरों (एसी) का डिफॉल्ट (अपने आप में तय) तापमान अब 24 डिग्री सेल्सियस होगा। इसका मतलब है कि कमरे का तापमान 24 डिग्री रखने के हिसाब से ही एसी चलेगा। हां, व्यक्ति जरूरत के हिसाब से इसे ऊपर नीचे कर सकता है। फिलहाल एसी का डिफाल्ट तापमान 18 डिग्री सेल्सियस है।




एयरकंडीशनर का तापमान 24 डिग्री करने का क्या फायदा होगा?

लेकिन असल सवाल है कि ऐसा करने से हासिल क्या होगा? क्या वाकई एसी के तापमान से बिजली की खपत निर्धारित होती है?

दरअसल ऊर्जा मंत्रालय का सुझाव था कि 'एसी पर 1 डिग्री सेल्सियस तापमान बढ़ाने से 6% एनर्जी बचती है। न्यूनतम तापमान को 21 डिग्री के बजाय 24 डिग्री पर सेट करने से 18% एनर्जी बचेगी।' 

भारत के ऊर्जा मंत्रालय के मुताबिक कमरे में तापमान कम पर रखने के लिए कम्प्रेसर ज़्यादा काम करेगा। 24 से 18 डिग्री पर सेट करने के पर एसी का तापमान कम करने से कंप्रेसर को ज्यादा लंबे समय तक काम करना पड़ता है। अगर एसी के तापमान को 25 डिग्री के बजाए 18 डिग्री पर कर दिया जाता है तो बिजली की खपत भी बढ़ जाती है।  एसी का तापमान 24 डिग्री पर रखने से बिजली की बचत भी होगी और आपकी सुविधा में भी कोई कमी नहीं आएगी।

किसी कमरे या जगह का तापमान 18 डिग्री करने के लिए एसी को लगातार काफी देर तक काम करते रहना पड़ता है। इससे एयर कंडीशनर की सेहत पर खराब असर के साथ बिजली की खपत भी ज्यादा होती है.

सबसे खास बात ये है कि इससे वहां मौजूद व्यक्ति के स्वास्थ्य पर भी बुरा असर पड़ सकता है। दरअसल एसी कमरे में मौजूद नमी को सोखता है। इसलिए इसका नकारात्मक प्रभाव आपकी त्वचा पर पड़ता है। ऊपर से यह आपके शरीर के तापमान को नियंत्रित रखने वाले प्राकृतिक तंत्र को प्रभावित करता है।

कई देशों में एयरकंडीशनर का तापमान 24 डिग्री करने के नियम पहले से लागू है

जापान और अमेरिका जैसे देशों ने एयर कंडीशनर के प्रदर्शन के लिए पहले ही इस तरह के नियम बना दिए हैं। जापान में एसी का डिफाल्ट तापमान 28 डिग्री सेल्सियस है। वहीं, अमेरिका में कुछ शहरों में एसी का तापमान 26 डिग्री सेल्सियस से कम पर नहीं चलाने की सीमा तय है।

हार्वर्ड के मुताबिक 23.3 और 25.6 डिग्री सेल्सियस और लंदन स्कूल इकनॉमिक्स के मुताबिक तापमान 24 डिग्री होना चाहिए।




एयर कंडीशनर को लेकर हमारे अनुभव


एयर कंडीशनर (एसी) का प्रयोग हम भी कई सालों से कर रहे हैं। हमारे अनुभव कुछ हद तक सरकार के साथ हैं और कई मामलों में सरकार से उलट हैं। 

सबसे पहले जब हम ने अपने घर पर एसी लगवाया था तब हम सबसे ऊपर के तल वाले घर पर रहते थे। यकीन मानिये 40-45 डिग्री के तापमान के समय छत इतनी गर्म हो जाती थी कि अधिकांश समय हमको अपना एयर कंडीशनर 18-20 डिग्री पर चलाना पड़ता था। 

दूसरी बात ये देखी कि अलग-अलग कंपनियों के समान एयर कंडीशनर (जैसे कि 1.5 या 2.0 टन) भी समान ठंडक नहीं करते हैं जिससे अलग-अलग तापमान पर  एसी चलाने पड़ते हैं। एयर कंडीशनर की बनावट का भी असर होता है, कोई एसी 2 कोईल वाला होता है कोई 3 कोईल वाला। इससे भी एयर कंडीशनर की ठंड़ पर असर पड़ता है।

तो अगर किसी का घर एक मंजिल का है या फिर कोई किसी बिल्डिंग में इस तरह की छत वाली सबसे ऊपरी  मंजिल पर रहता है तो उसके लिये तो सरकार का इस तरह 24 डिग्री वाला एयर कंडीशनर ज्यादा काम नहीं आयेगा। सरकार को इस ओर भी ध्यान देना चाहिये।

तीसरी बात जो हमने देखी वो ये थी कि जबसे सरकार मे एसी में स्टार श्रेणी मूल्यांकन (* रेटिंग) किया है तो हमने भी एक कमरे के लिये एक 5 स्टार श्रेणी का एसा खरीद लिया। लेकिन हमने पाया कि इस तरह के एसी कम ठंडा करते हैं। शायद इनको बनाया ही बिजली बचाने के लिये है।

चौथी बात ये कि हमारे अनुभव में खिड़की वाले एयर कंडीशनर की तुलना में दीवार पर लगने वाले स्प्लिट एसी (Split AC) ज्यादा ठंडा करते हैं। भले ही दोनो की समान क्षमता हो (1.5 Ton or 2.0 Ton).

आखिरी बात ये कि बाद में हमने एक बहुमंजिली इमारत में अपना घर ले लिया और वहां हमारा घर बीच की  मंजिलों पर है। यहां पर एसी 25 डिग्री में भी काफी ठंडा कर देता है। ऐसी बहुमंजिली इमारतों में भारत सरकार का 24 डिग्री तापमान वाला एसी कामयाब रहेगा।

अत: सरकार को सब प्रकार के घरों को ध्यान में रखकर इस नियम को बनाना चाहिये था। वैसे कुल मिलाकर बिजली बचाने की बात तो ठीक है।

Manisha शुक्रवार, 29 मई 2020

आरक्षण अभी और कई तरीकों से लागू होगा


जिस तरह से सरकार अपने खर्चे कम न करके जनता पर और बोझा डालने के लिये नये नये कर (टैक्स) लगाने के तरीके ढूंढ़ती रहता है उसी तरह से राजनैतिक पार्टियां और नेता लोग अपना वोट बैंक बनाने के लिये नये नये वर्गों को आरक्षण का रास्ता दिखाते रहते हैं। और इसी क्रम में संविधान में वर्णित आरक्षण को और कई तरीकों से लागू करने के तरीके ढूंढ कर लोगो को लुभाते रहते हैं। 

देश में जरुरत अच्छी काम करने वाली सरकारों की है क्यों कि अगर सरकारें अच्छा काम करें तो सभी वर्गों का भला होगा और कोई भी ये नहीं कहेगा कि मुझे मौका नहीं मिला। लेकिन अपनी नाकामियों को छिपाने और नये नये वोट बैंक बनाने के चक्कर में राजनैतिक दल आरक्षण के नये नये जुमले उछालते रहते हैं ताकि लोगों को ये लगे कि राजनैतिक दल उनका कितना भला चाहते हैं। 

ये दल गरीब, मुस्लिम, पिछड़े, एससी-एसटी, युवा कई तरह के आरक्षण की मांग करते रहते हैं लेकिन अपनी बनाई हुई सरकारों द्वारा कुछ भी ऐसा नहीं करते हैं जिससे की आरक्षण की नौबत ही न आये। 

मुझे महिला आरक्षण के पास होने की तो खुशी है लेकिन मुझे आने वाले समय की तस्वीर दिख रही है कि अभी आरक्षण की ये बात बहुत आगे तक जायेगी। देखिये कैसे अभी आरक्षण होगा -

  • महिलाओं के लिये लोकसभा और राज्यों की विधानसभाओं में 33 प्रतिशत आरक्षण के बाद राज्यसभा में भी आरक्षण की मांग तो अभी से उठने लगी है।
  • महिलाओं के लिये लोकसभा और राज्यों की विधानसभायों में 33 प्रतिशत आरक्षण में से भी पिछड़े, दलित और मुस्लिमों को आरक्षण की मांग कई दल कर रहे हैं।
  • इसके बाद शिक्षा में महिलाओं के लिये आरक्षण की मांग उठेगी।
  • इसके बाद सरकारी नौकरियों में महिलाओं के लिये आरक्षण की मांग उठेगी।
  • मुस्लिमों के लिये रंगनाथ मिश्र आयोग ने आरक्षण देने की बात कही है और इस पर भाजपा को छोड़कर सभी दल तैयार हैं। देश की राजनीति को देखते हुये ये मांग सबसे पहले पूरी होगी।
  • अनूसुचित जति और जनजाति के आरक्षण में परिवर्तित मुस्लिमों और ईसाइयों को आरक्षण देने की मांग पिछले कुछ समय से हो रही है।
  • समय समय पर न्याय पालिका में आरक्षण देने की वकालत की जा रही है।
  • निजी संस्थानों (प्राइवोट सेक्टर) में आरक्षण के लिये काफी समय से प्रयास किये जा रहे हैं और सरकार इसके लिये प्रयत्नशील है।
  • हाल ही में राजस्थान हाईकोर्ट नें पंचायतों में युवा के नाम पर एक नये प्रकार का आरक्षण देने पर रोक लगाई है।
 
यानी सब प्रकार के आरक्षण के बाद युवा के लिये आरक्षण, बुजुर्गों के लिये आरक्षण इत्यादि की मांग उठाई जायेगी और अपने आप को इनका हितैषी बताया जायेगा।

आरक्षण  Reservation



आरक्षण से सभी लोग प्रभावित होते हैं। लेकिन जिस वर्ग को मिल जाता है वो आरक्षण के पक्ष में बाते करने
लगता है और इसको अपना हक बताने लगता है भले ही ये माना जाता हो कि आरक्षण कुछ समय के लिये देना है। 

दरअसल वास्तविकता में आरक्षण असली जरुरतमंद को नहीं मिल रहा है, इसका फायदा  वही लोग उठा रहे हैं जो कि पहले से ही आगे हैं। 

वास्तव में भारत में दो ही वर्ग हैं संपन्न एवम गरीब और पिछड़े, जिसमें संपन्न वर्ग गरीबों-पिछड़ों को आगे लाने के नाम पर अपने लोगों को फायदा पहूंचा रहे हैं। 

सोचने वाली बात है कि अगर देश में सरकारें अपना काम अच्छे से करें तो ये बात ही क्यों आये कि कुछ वर्ग पिछड़ गये हैं।


संपादन - 1


जैसी कि ऊपर आशंका व्यक्त की गई थी, हाल ही में कई प्रकार का आरक्षण लागू हुआ है और कई अन्य प्रकार के आरक्षण के लिये या तो लोग संघर्षरत हैं या फिर सरकारें ही प्रयास कर रहीं हैं। 

महाराष्ट्र में मराठों से लिये 18 प्रतिशत का आरक्षण सरकारी नौकरियों में किया गया है। भारत सरकार द्वारा सरकारी नौकरियों में बकायदा भारतीय संविधान में संशोधन करके सरकारी नौकरियों और शिक्षा संस्थानों में 10 प्रतिशत का आरक्षण आर्थिक तौर से कमजोर (Economically Weaker Section - EWS) वर्गों को दिया गया है। 

राजस्थान में गूर्जर जाति के लोगों के लिये 5 प्रतिशत का आरक्षण सरकारी नौकरियों में दिया जा रहा है।

New Reservation नया आरक्षण

आप देखते जाइये किसी न किसी प्रकार से पूरा 100 प्रतिशत किसी न किसी को आरक्षण दिया जायेगा। कुछ हिस्सा सब को मिलेगा  इसलिये कोई विरोध नहीं करेगा।

Manisha गुरुवार, 14 फ़रवरी 2019