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मौसम विभाग से मौसम मजाक कर रहा है
लगता है मौसम और मौसम विभाग में छत्तीस का आंकड़ा है। मौसम विभाग कुछ भविष्यवाणी करता है और मौसम कुछ और गुल खिलाता है। पहले अप्रैल के महीने में मौसम विभाग  ने कहा कि इस बार देश में अच्छी बारिश होगी तो मौसम ने मानसून को ही देश से गायब कर दिया। इधर मौसम विभाग  ने मानसून की समाप्ति की घोषणा की तैयारी की तो अब ऐसी बारिश हो रही है कि भयंकर बाढ़ आ गई है। कर्नाटक, आंध्र और उड़ीसा की बारिश के बारे में मौसम विभाग कोई भविष्यवाणी नहीं कर पाया और जबर्दस्त बारिश ने इन प्रदेशों में बाढ़ कर दी। इधर दिल्ली के आस-पास भी बारिश का मौसम है। क्या मौसम विभाग कुछ बता पायेगा कि क्या होने वाला है।

अब अपनी खिसियाहट मिटाने के लिये हम ये क्यों न कहें कि मौसम विभाग से मौसम मजाक कर रहा है?

Manisha सोमवार, 5 अक्तूबर 2009
शुक्र मनाइये कि आप दिल्ली में नहीं रहते

कल शाम दिल्ली और आस-पास के इलाके में हुई 74 मिलीमीटर बारिश ने दिल्ली वालों jam-in-delhi को रुला दिया। जन मानस बारिश का बेसब्री से इंतजार करता है। कवियों नें और साहित्यकारों ने बारिश को लेकर अनेक रूमानी और मनोहर बाते लिखीं हैं. लेकिन कल शाम को हमने जो झेला वो इन सब से अलग था। कल शाम को हम लोग 5.30 बजे से लेकर रात 11 बजे तक जबर्दस्त जाम में फंसे रहे। एक जगह तो हम लोग साढ़े तीन घंटे तक फंसे रहे और एक इंच भी नहीं खिसके। इसी से आप अंदाज लगा सकते हैं किस कदर जाम था। आम तौर पर बारिश होने पर दिल्ली का सड़कों पर जाम लग जाता है और वाहन रेंगते हुये चलते हैं लेकिन कल तो सारे वाहन वहीं के वहीं फंस गये थे। दिल्ली और आसपास के इलाकों में रहने वालों को ये सब बाते रोज ही झेलनी पड़ती है। संसद के सत्र के दौरान राजनैतिक पार्टियों द्वारा किये जाने वाली रैलियों और धरनों से भी अक्सर जाम लगता है। गणतंत्र दिवस, स्वतंत्रता दिवस के अवसरों पर भी यही होता है। जो लोग छोटे और मंझोले शहरों में रहते हैं उन्हें शुक्र मनाना चाहिये कि वो दिल्ली में नहीं रहते और कम परेशानी में जिन्दगी बिताते हैं।

Manisha शनिवार, 22 अगस्त 2009