एक उपाधि का नाम है ओसामा बिन लादेन

हम लोग बचपन में वेताल (फैन्टम) की कहानियां कामिक्स  में पढ़ा करते थे जिसमें  बताया जाता था कि  पिछले 400 सालों से वेताल का अस्तित्व है और जंगल के लोग उसको अपना रक्षक मानते थे, लेकिन वास्तविकता में वेताल एक मुखौटा और उपाधी थी जिसमें परम्परागत तौर अगली पीढ़ी वेताल बनती रहती था। मेरे विचार में अल-कायदा का सरगना ओसामा बिन लादेन भी किसी तरह की एक उपाधि लगता है। असल में  अपनी मौत की चर्चाओं के बीच दुनिया का सबसे कुख्यात आतंकवादी और अल कायदा सरगना ओसामा बिन लादेन एक बार फिर प्रकट हुआ है। रविवार को लादेन का नया वीडियो टेप सामने आया है, जिसमें उसकी तस्वीर इस्तेमाल की गई है। अल कायदा की मीडिया इकाई की ओर से जारी इस टेप को अमेरिकी जनता के नाम संबोधन करार दिया गया है। अल कायदा की मीडिया इकाई का दावा है कि इसमें सुनाई देने वाली आवाज लादेन की है। लादेन ने टेप में अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा की नीतियों को जमकर कोसा है। लादेन ने ओबामा को शक्ततहीन बताते हुए कहा है कि वह अफगान युद्ध को रोक पाने में पूरी तरह नाकाम साबित हुए। अमेरिका की साइट इंटेलीजेंस ग्रुप ने लादेन की इस टेप का अनुवाद जारी किया है।

दरअसल इस तरह के टेप और बयान वेताल की परंपरा का ही एक रुप लगता है। पाकिस्तान कहता है ओसामा बिन लादेन मर गया है, अमेरिका कहता है कि वो जिन्दा है और पाकिस्तान में छुपा हुआ है, अल कायदा उसके टेप जारी करके दुनिया को डराता रहता है।

भले ही ओसामा बिन लादेन मर गया हो, लेकिन उसको जिन्दा रखने की खबर बनाये रखने में सबका फायदा है।  अमेरिका को ओसामा बिन लादेन के जिन्दा होने की कबर के सहारे अपने आतंकवाद विरोधी अभियान को चलाये रखने का बहाना मिल जाता है, पाकिस्तान को अमेरिका से डालर और हथियार बटोरने का मौका मिल जाता है, अल कायदा को अपने आतंक के साम्राज्य को फैलाने में मदद मिल जाती है, तालीबान ओसामा बिन लादेन से प्रेरणा लेता है, यानी ओसामा बिन लादेन के बने रहने में सबका फायदा है। इसलिये मुझे लगता है कि ओसामा बिन लादेन  के मरने की आने वाले 20-25 सालों में भी कोई खबर आने वाली नहीं है और उसके नाम को उपाधि की तरह इस्तेमाल करके कुछ मिथक तैयार करके उसके नाम का फायदा लिया जाता रहेगा।  उसी की तरह के मुखौटे बना कर नये टेप जारी होते रहेंगे, अमेरिका उन्हें प्रमाणित करता रहेगा। वेताल की तरह ओसामा बिन लादेन भी अमर चरित्र रहेगा।

अंतिम पंक्ति :  ओसामा बिन लादेन 2 मई 2011 को पाकिस्तान को एबेटोबाबाद में मारा  गया

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2 टिप्‍पणियां

  1. ये उपाधि नहीं, व्याधी है...जो खत्म होने का नाम ही नहीं ले रही.

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  2. माफ करें, लेकिन लादेन की खबर के पीछे आज दुनिया की तमाम खुफिया एजेंसियां पड़ी हुई है और यह उसकी काबिलियत है कि वह इन खुफिया एजेंसियों को चकमा दे पा रहा है। वर्लड टावरर्स की घटना के बाद से लादेन को लेकर कम से कम अमेरिका अगंभीर नही हो सकता है। किसी भी चीज को लेकर समझ विकसित करना अच्छी बात है, लेकिन खुफिया दुनिया तंत्र तबतक शांत नहीं बैठ सकता जबतक लादने की मरने की पुष्टि नहीं हो जाती। सद्दाम जब गिरफ्तार हुआ था तब उसके दांत चेक किये गये थे, कन्फर्म होने के लिए यह असली सद्दाम है या नहीं। हिटलर की मौत आज तक रहस्य बनी हुई है....दुनिया इंद्रजाल कामिक्स का वेताल वाला जंगल नहीं है, जहां के आदिवासी सहजता से इस बात पर यकीन कर लेते हैं कि वेताल एक चलता फिरता प्रेत है। इंटेलिजेंस अधिकारियों की एक पूरी फौज तालमेल के साथ लादेन का सुराग लगाने में लगी हुई है।

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