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भारत के राज्य और उनकी भाषायें


भारत में इस समय (जून 2020) 28 राज्य और 9 केन्द्र शासित राज्य हैं। भारत में नये राज्यों का गठन और विलय होता रहता है और इसके लिये भारत के संविधान में भी आवश्यक संशोधन किया जाता है। सबसे बड़ा जो राज्यों का पुनर्गठन 1956-57 में किया गया था वो खास तौर पर भाषाओं के आधार पर ही किया गया था और उसके कारण नये राज्य भारत में बने थे। बाद के वर्षों में भी ये प्रक्रिया जारी रही और नये राज्य बनते रहे।





भारत का संविधान और भाषायें


भारत के संविधान में भारत संघ और उसके राज्यों की कोई आधिकृत भाषा नहीं बताई गई है। भारत के संविधान के अनुच्छेद 343 से 351 तक भारत की अधिकृत भाषाओं के बारे में बात की गई है। भारत के संविधान में अनुच्छेद 343 के अनुसार पहले भारत की राजभाषा का दर्जा हिंदी को दिया गया था परंतु 1963 के संविधान संशोधन करके हिंदी के साथ साथ अंग्रेजी को भी यह दर्जा दिया गया।


संविधान के आठवें अध्याय में भारत की 22 भाषाओं को अधिसूचित किया गया है जो कि आधिकारिक तौर पर भारत की राजभाषायें हैं (साथ ही साथ अंग्रेजी भी है यानी कि कुल 23 हैं)।  

भारत का संविधान राज्यों की आधिकारिक और शासकीय भाषाओं के बारे में मौन है लेकिन सभी राज्यों ने अपने अपने राज्य का प्रथम प्रमुख भाषा को अधिसूचित किया हुआ है। कई राज्यों ने तो दूसरी, तीसरी और चौथी भाषा तक को मान्यता दी हुई है।

भारत के राज्यों का भाषायें Indian State Languages

भारत का राज्यों की अधिकारिक भाषायें


यहां पर हम भारत के समस्त राज्यों की जून 2020 तक की स्थिति के अनुसार भाषायों की सूची बना रहे हैं। जम्मू कश्मीर और लद्दाख के बारे में स्थिति साफ होनी बाकी है।


  • पूर्ण राज्य

    1. आंध्र प्रदेश - तेलुगु
    2. अरुणाचल प्रदेश - हिंदी/अंग्रेजी
    3. असम - असमिया (तीन बाराक घाटी जिलों की भाषा बंगाली और बोडोलैंड काउंसिल क्षेत्र का भाषा बोडो है)
    4. बिहार - हिंदी
    5. छत्तीसगढ़  - हिंदी
    6. गुजरात - गुजराती
    7. हरियाणा - हिंदी
    8. हिमाचल प्रदेश - हिंदी
    9. झारखण्ड - हिंदी
    10. कर्नाटक - कन्नड़
    11. केरल - मलयालम
    12. मध्य प्रदेश - हिंदी
    13. महाराष्ट्र - मराठी
    14. गोवा - कोंकणी / मराठी
    15. मणिपुर - मणिपुरी
    16. मेघालय - हिंदी/अंग्रेजी
    17. मिजोरम - मिजो
    18. नागालैंड - हिंदी/अंग्रेजी
    19. त्रिपुरा - बंगाली
    20. ओडिशा - उड़िया
    21. पंजाब - पंजाबी
    22. राजस्थान - हिंदी
    23. तमिलनाडु - तमिल
    24. तेलंगाना - तेलुगु
    25. उत्तर प्रदेश - हिंदी
    26. उत्तराखण्ड - हिंदी
    27. पश्चिम बंगाल - बंगाली (दार्जिलिंग को छोढ़कर, दार्जिलिंग की भाषा - नेपाली/बंगाली, गोरखा क्षेत्र प्रशासन - नेपाली)
    28. सिक्किम - नेपाली/अंग्रेजी  

  • केन्द्र शासित राज्य

    1. अंडमान और निकोबार द्वीप समूह - हिंदी
    2. दिल्ली - हिंदी
    3. दादरा नागर हवेली - गुजराती
    4. दमन एवं दीव - गुजराती
    5. चंडीगढ़ - हिंदी/अंग्रेजी
    6. जम्मू एवं कश्मीर - उर्दू, कश्मारी, डोगरी एवं हिंदी
    7. पुड्डुचेरी - तमिल (माहै और यनम को छोढ़कर)
    8. लक्षद्वीप - मलयालम
    9. लद्दाख - लद्दाखी, तिब्बती, उर्दू, कश्मीरी, डोगरी एवं बाल्टी


भारत की 22 राजभाषायें


संविधान के आठवें अध्याय में अनुच्छेद 344(1) और 351 के अनुसार भारत की 22 भाषाओं को अधिसूचित किया गया है जो कि आधिकारिक तौर पर भारत की राजभाषायें हैं (साथ ही साथ अंग्रेजी भी है यानी कि कुल 23 हैं)।   As per Articles 344(1) and 351 of the Indian Constitution, the eighth schedule includes the recognition of the following 22 languages:
  1. असमिया Assamese
  2. बंगाली Bengali
  3. बोडो Bodo
  4. डोगरी Dogri
  5. गुजराती Gujarati
  6. हिंदी Hindi
  7. कन्नड़ Kannada
  8. कश्मारी Kashmiri
  9. कोंकणी Konkani
  10. मैथली Maithili
  11. मलयालम Malayalam
  12. मणिपुरी Manipuri
  13. मराठी Marathi
  14. नेपाली Nepali
  15. उड़िया Odia
  16. पंजाबी Punjabi
  17. संस्कृत Sanskrit
  18. संथाली Santali
  19. सिंधी Sindhi
  20. तमिल Tamil
  21. तेलुगु Telugu
  22. उर्दू Urdu
  23. अंग्रेजी English - ये 22 अनुसूचित भाषाओं की सूची में नहीं है पर 1963 के संविधान संशोधन के अनुसार इसे हिंदी के साथ जोड़ा गया था। This is not in the list but it is used and inserted by constitutional amendment of 1963

Manisha शनिवार, 13 जून 2020

अंग्रेजी और हिंदी के अखबार और पत्रिकायों में बहुत विरोधाभास हैं


अंग्रेजी और हिंदी के अखबार और पत्रिकायों  बहुत विरोधाभास हैं एनडीटीवी के पत्रकार एवं हिंदी के अच्छे चिठ्ठाकार श्री रवीश कुमार जी ने अपने चिठ्ठे कस्बा  में यह प्रश्न उठाया था कि हिंदी-अंग्रेजी के अख़बारों का किसान अलग क्यों होता है?  

दरअसल ये बहुत ही बुनियादी सवाल है और ये वास्तव में हिंदी और अंग्रेजी भाषा के द्वारा सोचने और समझने का भी अन्तर है और साथ ही संस्कृतियों का भी अंतर हैं। 

मैं हिंदी और अंग्रेजी की तमाम पत्रिकायें (खास कर महिलाओं की) एवं समाचार पत्र पढ़ती हूं और कई विषयों पर देखा है कि अंग्रेजी के अखबार और पत्रिकायों की सोच बिलकुल अलग है।

  • अंगेजी की पत्रिकाये हमेशा इस तरह के लेख छापती हैं – हाउ टू प्लीज योर मैन, नो हिज सेक्सी प्लेसेज, फिफ्टी वेज टू सेटिस्फाई हिम इत्यादि। इनमें योर मैन की बात की जाती है यानी ये बताया जाता है कि किसी से भी आप संबंध बना सकती हो। यहां कभी भी हसबैण्ड शब्द का इस्तेमाल नहीं किया जाता है। पूरा ध्यान पति-पत्नी पर न होकर मैन-वूमेन पर होता है।
  • अंगेजी के सारे अखबार मिलकर भी अकेले दैनिक जागरण से कम बिकते हैं (ताजा सर्वेक्षण 2009 के अनुसार) लेकिन फिर भी हिंदी समाचार पत्रों को भाषाई या वर्नाकुलर लिखते हैं और अपने आप को नेशनल (राष्ट्रीय) समाचार पत्र कहते हैं।
  • पश्चिम की हर बुराई जैसे कि प्रास्टीट्यूशन, लिव-इन-रिलेशनशिप, लेस्बियन और गे सेक्स इत्यदि के समर्थन में लेखों की अंग्रेजी पत्रिकाओं और समाचार पत्रों में बहुतायत रहती है और उसके पक्ष में माहौल बनाते रहते हैं।
  • शराब के किसी बन्दीकरण के विरोध में भी अंग्रेजी पत्रकारिता सबसे आगे है।
  • अब अंग्रेजी ही इनका जीवन-यापन का साधन है इसलिये ये अंग्रेजी को बढ़ावा देने के लिये हमेशा हल्ला करते रहते हैं। अंग्रेजी इनके अनुसार अंतर्राष्ट्राय भाषा है जिसके बिना भारत का विकास नहीं हो सकता।
  • हिंदी के पत्र-पत्रिका वाले पता नहीं किस हीन भावना से ग्रस्त रहते हैं कि वो खुद ही हिंदी वालों को अंग्रेजी वालों के समतर समझते हैं। हिंदी के अखबारों और पत्रिकायों में वैज्ञानिक व अंतर्राष्ट्रीय विषयों पर बहुत ही कम छपता है। उनके अनुसार हिंदी के पाठकों का स्तर कम है।
  • स्वतंत्र किस्म के लेख हिंदी पत्रिकायों और समाचार पत्रों मे कम ही आते है, अधिकांश समाचार ऐजेंसी से लिया हुआ होता है।
  • हिंदी के समाचार पत्र स्थानीय समाचारों को बहुत ही अच्छा कवर करते हैं।

Manisha बुधवार, 25 नवंबर 2009