Results for " मौका "
सही मौके को गंवाते लोग
आजकल झारखंड के भूतपूर्व मुख्यमंत्री मधु कोड़ा द्वारा 4000 करोड़ रुपये से ज्यादा के भ्रष्टाचार का मामला चर्चा में है। पता नहीं कभी आरोप सही भी सावित होंगे या नहीं, या फिर पुराने मामलों की तरह इसमें भी कुछ नहीं होगा और जनता सब जानकर भी कुछ नहीं कर पायेगी।
Never Loose a chance

लेकिन मै इस मामले को किसी और नजरिये से देखती हूं। मेरे विचार में मधु कोड़ा ने ये भ्रष्ट आचरण करके इतिहास में मिले एक सुनहरी मौके को गंवा दिया है। सोचिये कि एक खनिज खान में काम करने  वाला आदमी, एक गरीब घर का आदमी एक राज्य का मुख्यमंत्री बन गया वो भी निर्दलीय हो कर। ये कहानी कुछ मंबईया फिल्मों की तरह की है जो कि लोक गाथा बन सकती थी अगर मधु कोड़ा ने कुछ काम दिल से किये होते। गरीब आदमी से मुख्यमंत्री तक के सफर में मधु कोड़ो ने जो कुछ देखा और जाना उसके बाद वो कुछ ऐसे काम कर सकते थे जिससे झारखंड की जनता का बहुत फायद हो सकता था। लेकिन करोड़ों लोगो मे किसी एक आदमी को मिलने वाले इस मौके को मधु कोड़ा ने गंवा दिया और अपने साथ-साथ अपने राज्य के लोगो को भी निराश किया।

यों इस तरह से अच्छे भले मौकों को गंवाने के किस्से हजारों सालों से हैं, लेकिन मैं पिछले 10-12 सालों के अपने सामने गंवाये गये कुछ मौकों को यहं पर बताना चाहूंगी।
  1. रूबईया और आईसी 814 विमान अपहरण केस – ये ऐसे वाक्ये थे जब देश के लोग और  सरकार एक सख्त रुख अपना कर दुनिया को दिखा सकते थे कि भारत  गलत बातों पर समझौता नहीं करेगा लेकिन ऐसा नहीं हुआ और दुनिया में और खास कर आतंकियों को संदेश मिल गया कि भारत लड़ना नहीं जानता।
  2. मध कोड़ा – जैसा कि मै उपर बता ही चुकी हूं कि किस प्रकार मधु कोड़ा ने मौका गंवा दिया।
  3. लालू प्रसाद यादव -  लालू प्रसाद ने भी कुछ कुछ मधु जैसा ही काम किया। लालू ने भी अपनी जिंदगी मे वो सब खुद देखा है जिसको जानने के लिये पुराने जमाने के राजा भेष बदल कर अपने राज्यों में घूमा करते था, या फिर आजकल राहुल गांधी जानने के लिये घूम रहे हैं। लालू प्रसाद के पास बिहार और दबे, कुचले, पिछड़े गरीब लोगों के लिये काम करने का बहुत ही अच्छा मौका मिला था। जनता ने भी 15 साल तक इसी उम्मीद में लगातार उनको सत्ता में रखा लेकिन बिहार का विकास दूर वो बिहार को और पीछे कर गये। लालु चाहते तो बिहार कहां से कहां पहुंच जाता।
  4. अटल बिहारी बाजपेई और भाजपा -  आजादी के बाद से ही भाजपाई (पहले के जनसंघी) कांग्रेस को अपने निशाने पर लेते रहे कि कांग्रेस ने ये गलत किया, वो गलत किया आदि आदि लेकिन जब भारत की जनता ने तमाम राज्यों में और केन्द्र में भाजपा को मौका दिया तो शासन तंत्र उसी तरह चलता रहा जैसे कि पहले गैर भाजपाई शासन में चलता था। क्या कोई बता सकता है कि  कांग्रेस शासित और भाजपा शासित राज्यों की शासन संरचना और तंत्र में क्या अलग है?  भाजपाईयों ने जिस बात के लिये इतने साल संघर्ष किया और अपनी बारी का इंतजार किया, लेकिन मौका मिलने पर उससे कुछ भी अलग न कर के दिखाया और इतिहास द्वारा मिला सुनहरी मौका गंवा दिया।  
  5. मायावती – मायावती दलितों की एक सशक्त नेता हैं इसमें कोई दो राय नहीं। इसी बात की वजह से उत्तर प्रदेश की जनता ने खास कर दलितों ने पूरे बहुमत से जिता कर सरकार बनाने का मौका दिया है। और ये मौका ऐसा हो कि मायावती चाहे तो इतिहास में हमेशा के लिये स्थान बना सकती हैं। लेकिन मुझे लगता है  वो ये जबर्दस्त मौका गंवा रही हैं। दलितों, गरीबो, पिछड़ों के विकास के लिये जी जान से न लग कर वो बस मूर्तियां और पार्कों के निर्माण में ज्यादा रुचि दिखा रही हैं।  प्रदेश की जनता खासकर दलित वहीं हैं जहां पहले थे, आज भी सड़क, बिजली, पानी, सफाई, शिक्षा वैसी ही है जैसी कि मायावती के मुख्यमंत्री बनने से पहले थी।
  6. राजीव गांधी – राजीव गांधी को भारत की जनता ने लोकसभा में 425 सांसदो का भारी बहुमत दिया था। ऐसा बहुमत को नेहरु और इंदिरा गांधी को भी नहीं मिला था। राजीव गांधी ने नया जमाना  देखा था, उम्र उनके साथ थी, वो भारत के सिस्टम ने काफी परिवर्तन कर सकते थे लेकिन उन्होंने तो एक तरह से हारी हुई सरकार की तरह से भ्रष्ट्राचार पर ये कह कर मुहर लगा दी कि सरकार द्वारा खर्च किये गये 1 रुपये में से केवल 15 पैसे ही जनता तक पहुंचते हैं। राजीव गांधी ने इतिहास का सबसे बहुमत लेकर भी मौका गंवा दिया।
  7. विनोद कांबली – सचिन तेंदुलकर आज भी खेल रहे हैं और रन बना रहे है लेकिन उन्ही का बचपन का साथी और उन्ही की तरह का प्रतिभावान क्रिकेट खिलाड़ी विनोज कांबली मौके गंवा चुका है। विनोद कांबली का रिकोर्ड तेंदुलकर से भी अच्छा था और वो भी लंबे समय तक खेल कर अनेक रिकार्ड बनाते लेकिन उन्होंने गैर क्रिकेट बातों में पड़ कर मौका गंवा दिया।
इसी प्रकार के बहुत सारे अन्य लोग हैं जिन्हें मौका तो मिला लेकिन उसक फायदा न उठा सके। जहां एक ओर सनुहरी मौके गंवाने वाले लोग हैं वहीं दुनिया ऐसे लोगो से भी भरी हुई है जिन्होंने उनको मिले मौके का फायदा उठाकर दुनिया को बहुत कुछ दिया। 

Manisha गुरुवार, 12 नवंबर 2009