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भरमाने वाले चित्र

कुछ चित्र ईमेल के जरिये अक्सर देखने को मिलते रहते हैं। इम बार किसी मित्र ने भरमाने वाले ऐसे चित्र भेजे कि देख कर सिर चकरा गया। हालांकि उस दिन होली थी और थोड़ी सी ठंडाई (भांग वाली) पी थी, लेकिन वो तो बहुत थोड़ी थी। इसलिये पक्का करना पड़ा कि ये चित्र ही घुमावदार हैं। कुछ चित्र इनमें से पहले देखे हुये थे, लेकिन कुछ नये और अनदेखे हैं। लिहाजा इनको चिठ्ठे में समाहित करके सार्वजनिक करने का इरादा कर लिया। तो आप सब भी इन चित्रों को देखिये और कुछ देर तक भ्रम की स्थिति में रहिये।

बैंगनी लाईने सीधी हैं या घूमी हुई?

बीच का कौन सा गोला बड़ा है?

चौकोरों के बीच में गोले किस रंग के हैं?

आदमी का चेहरा और अंग्रेजी का L से शुरू होता शब्द

क्या ये संभव है?

ध्यान से लगातार देखिये।

Manisha मंगलवार, 6 मार्च 2007
आदिवासियों का वेलेंटाइन डे भगोरिया

पश्चिम मध्य प्रदेश के आदिवासी जनजातीय युवक युवतियों का वेलेंटाइन डे (प्रणय पर्व) भगोरिया 25 फरवरी को शुरू हो रहा है। आदिवासी अंचल झाबुआ और खारगौन जिलों में परंपरागत रूप से मनाए जाने वाले इस रंगीन पर्व में स्थालीय भील और भीलाला लोगों के युवक और युवतियां बड़े उत्साह के साथ शामिल होते हैं। इस मेले के प्रति विदेशियों में भी खासा आकर्षण है। भारत भ्रमण के दौरान वे भगोरिया मेलों में बड़ी तादाद में शामिल होते हैं। भगोरिया हाट में आने वाले आदिवासी युवक-युवती एक दूसरे को पसंद करने के बाद भागकर विवाह कर लेते हैं। इस भाग जाने की वजह से ही इसको भगोरिया कहते हैं। परंपरा के अनुसार अगर किसी लड़के को कोई लड़की पसंद आ जाती है तो वो उस लड़की के गालों पर गुलाल लगाकर अपनी चाहत का इजहार कर देता है। अगर लड़की को भी लड़का पसंद होता है तो वो भी लड़के को गुलाल लगा देती है। इसके बाद ये लोग वहां से भाग जाते हैं। इसके बाद आदिवासी समाज इनको पति-पत्नि का दर्जा दे देता है।

इस भगोरिया को फसल पकने और होली की खुशी का भी प्रतीक माना जाता है। साल भर अलग-अलग स्थानों पर काम धंधा करने वाले आदिवासी भगोरिया पर्व पर अपने अपने घरों पर लौट आते हैं और गिले शिकवे भुलाकर मौज मस्ती के साथ इस पर्व को मनाते हैं। यह पर्व होली से पहले मनाया जाता है। बदलते जमाने के साथ भगोरिया पर भी आधुनिक संस्कृति का प्रभाव पड़ा है। आदिवासियों के पहनावे में बदलाव आया है तथा वाद्य यंत्रों ढोल और मृदंग का स्थान इलेक्ट्रानिक्स उपकरणों ने ले लिया है। झाबुआ के साथ ही धार और खरगोन जिलों में भी 25 फरवरी से होली दहन (तीन मार्च) तक भगोरिया पर्व मनाया जाएगा। झाबुआ जिले के 45 गांवों में भगोरिया हाट लगेंगे।

कड़ियां:

Manisha शुक्रवार, 23 फ़रवरी 2007
असली बॉस कौन है

कल आशीष गुप्ता जी ने महिलाओं का रासायनिक विश्लेषण किया था। लेकिन उनको हम महिलाओं की सही पहचान नहीं है। हम रासायनिक ही नहीं बल्कि भौतिक रुप से भी पुरूषों पर भारी हैं। इस के लिये मैंने ढ़ूढ़कर ये चित्र निकाले हैं। अब इन चित्रों को आप भी देखिये। हास्य का जवाब हास्य से।

Manisha शनिवार, 10 फ़रवरी 2007