जाना हुआ अपोलो हॉस्पिटल में

पिछले दिनों हमारे एक परिचित दिल्ली के इंद्रप्रस्थ अपोलो अस्पताल में सीने में दर्द के कारण भर्ती थे और सबसे अच्छी बात मुझे जो लगी जिसका वजह से मैं ये पोस्ट लिख रही हूं कि वहां पर हर बोर्ड पर अंग्रेजी के साथ-साथ हिंदी में जरुर लिखा हुआ है और इसका ध्यान हर जगह रखा गया है। अधिकांश प्राइवोट संस्थानों में केवल अंग्रेजी में ही सब कुछ लिखा मिलता है लेकिन अपोलो अस्पताल शायद अपवाद है मुझे ये देख बहुत ही अच्छा लगा और इसके लिये मैं अपोलो अस्पताल की प्रशंसा करना चाहुंगी। अपोलो हॉस्पिटल उनका इलाज ह्रदय रोग विभाग में चल रहा था, तो हम लोग उनको देखने और मिलने के लिये वहां पर गये थै। अपोलो अस्पताल के बारे में हमने पहले काफी सुन रखा था जिस में से अधिकांश नकारात्मक था। ये अस्पताल काफी मंहगा है और पांच सितारा स्तर की सुविधायें हैं। बहरहाल हम जब वहां पहुंचे तो पता चला कि पार्किंग वैसे तो काफी बड़ी है लेकिन पूरी भरी हुई थी और प्रति आगमन 25 रूपये का शुल्क लगता है। खैर किसी तरह जगह मिली और गाड़ी खड़ी करके हम लोग अपोलो अस्पताल के अन्दर गये।  अस्पताल के अन्दर की लॉबी काफी अच्छी बनी हुई है और वहां पर लोगो के बैठने के लिये बहुत सारी कुर्सियां लगी हुई हैं। यहीं पर लोगो के खाने पीने के लिये काफी हॉउस व अन्य दुकाने भी हैं।

मैने देखा कि अफगनिस्तान के लोगों के लिये अपोलो में एक विशेष काउंटर खोला हुआ है और इस अस्पताल में बहुत सारे विदेशी लोग इलाज कराने आते हैं खास कर अफगानी और इराकी लोग। हम ने बहुत सारे विदेशियों को वहां देखा।  अपने परिचित से मिलने के समय मैंने देखा कि वहां पर मेडिकल से संबंधित काफी सुविधायें हैं बहुत सारे उपकरण हैं हालांकि इलाज काफी मंहगा है। लेकिन इसके बावजूद अपोलो अस्पताल में काफी भीड़ दिखी। इससे ये पता चलता है कि लोगो को अच्छा इलाज चाहिये भले ही वो मंहगा हो।  लेकिन आम आदमी क्या करे? क्या उसके लिये बिना सुविधाओं के सरकारी अस्पताल ही बने हैं?

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4 टिप्‍पणियां

  1. बहुत अच्छी जानकारी दी है आपने...शुक्रिया
    नीरज

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  2. भोपाल में रोजाना पचास-साठ बच्चों का इलाज करनेवाला जाना-माना डॉ. दो सौ रुपये में 15 दिन इलाज करता है और हर समय सुलभ रहता है. दिल्ली में एक डॉ. 500 रुपये पर विजिट लेता है और अपना फोन नंबर भी नहीं देता, जबकि वह रोज़ सिर्फ 20 पेशेंट देखता है. इनमें से ज्यादा अनुभवी कौन कहलायेगा? खैर, महंगा इलाज हमेशा अच्छा इलाज नहीं होता.

    जिन अफगानी और इराकी लोगों को आपने देखा है वे बहुधा भारत में शरणार्थी होते हैं जिनके इलाज का जिम्मा संयुक्त राष्ट्र संस्था ने लिया होता है. वैसे, मेडिकल टूरिज्म को ये अस्पताल ही बढ़ावा दे रहे हैं.

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  3. Sarkari hospital acche nahi hote ye kon kahta hai. AIIMS kya accha hospital nahi hai. Ek baat aur. Agar acche se matlab saaf safai se hai to sarkari aspatal accha nahi hain. Lekin treatment ko dekhein to wo private aspatal se bahut acche hain.

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