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अच्छा वीडियो सम्मेलन सॉफ्टवेयर कैसा हो? Achcha Video Conference Software Kaisa ho?


कोरोना की महामारी के प्रकोप के चलते जब से पूरी दुनिया में लॉकडाउन हुआ है, लोगों को अपने घरों में रहना पड़ रहा है उससे लोगों को एक दूसरे से काट दिया है।  सभी लोग अपने परिवार के करीबी और संबंधियो से नहीं मिल पा रहे हैं। सामाजिक रुप से सब लोग अलग थलग पड़ गये हैं।

अधिकांश कंपनियों ने अपने कर्मचारियों को घर से काम करने को बोल दिया है। इस कोरोना कोविद -19 की वजह से पूरी दुनिया भर में हुये लॉकडाउन में छोटे और मध्यम आकार के व्यवसायों के साथ-साथ बड़े बड़े कॉरपोरेट भी सबसे ज्यादा प्रभावित हुये हैं। 

खुदरा क्षेत्र की शटडाउन, एक जगह से दूसरी जगह जाने के अंतर-राज्य परिवहन और वैश्विक यात्रा के बंद होने ने कॉर्पोरेट क्षेत्र की व्यापार करने की क्षमता पर व्यापक प्रभाव डाला है। 


हालांकि दुनिया के तमाम देशों ने और भारत में भी चरणबद्ध तरीके से प्रतिष्ठान खोलने शुरू कर दिए गये हैं। अब कॉरपोरेट्स को अपने ग्राहकों और विक्रेताओं के साथ बेहतर तरीके से संवाद करने, जुड़ने और सहयोग करने के लिए इस तरह से काम करना है कि काम कम से कम समय में हो, कम से कम लागत में हों और भौगोलिक स्थिति की कोई सीमा न हो। 


वीडियो कोन्फ्रेंस सम्मेलन सॉफ्टवेयर Video Conference Software


वीडियो सम्मेलन सॉफ्टवेयर क्या है


ऐसे कोरोना वाले कठिन समय में वीडियो कोन्फ्रेंस या वीडियो सम्मेलन सॉफ्टवेयर (Video Conference Software) बड़े काम के साबित हुये हैं। इन वीडियो सम्मेलन सॉफ्टवेयरों के जरिये लोग अपने पारिवारिक संबंधियो, पारिवारिक मित्रों या फिर अपने आस पड़ोस के लोगों से लॉकडाउन के घर में रहने के निर्देश का पालन करते हुये सभी लोगों के साथ संपर्क रख पा रहे हैं।

हम यहां पर ये जानने की कोशिश करेंगे कि अगर वीडियो कोन्फ्रेंस सॉफ्टवेयर की प्रयोग करना हो तो वो कैसा हो, वीडियो सम्मेलन सॉफ्टवेयर की क्या क्या विशेषतायें हों आदि आदि।

वीडियो सम्मेलन सॉफ्टवेयर छोटे बड़े सभी व्यवसायिक प्रतिष्ठानों और कॉरपोरेट्स के लिये भी वरदान साबित हुये हैं। वीडियो सम्मेलन सॉफ्टवेयर की कंपनियों की इस प्रकार की मदद करने के लिए प्रतिबद्ध हैं जिससे उन्हें डिजिटल सहयोग का उपयोग करके अपने व्यापार की निरंतरता को बनाए रखने में मदद मिले क्योंकि वीडियो सम्मेलन सॉफ्टवेयर भौगोलिक सीमाओं के पार व्यापार करने का साधन है। 

वीडियो सम्मेलन सॉफ्टवेयर कंपनियों को आंतरिक कर्मचारियों के साथ-साथ उनके बाहरी विक्रेताओं और ग्राहकों के साथ बैठकें, प्रशिक्षण, व्यवसाय समीक्षा, योजना सत्र आदि के संचालन के समाधान के लिए एक पूर्ण सुविधा प्रदान करता है।

वीडियो सम्मेलन कॉन्फ्रेंसिंग सॉफ्टवेयर ऑडियो, वीडियो और टेक्स्ट डेटा प्रसारित करने के लिए कंप्यूटर नेटवर्क का उपयोग करके विभिन्न साइटों पर दो या अधिक प्रतिभागियों के बीच लाइव कॉन्फ्रेंस शुरू करने और संचालित करने की सुविधा प्रदान करता है। अधिकांश वीडियो सम्मेलन कॉन्फ्रेंसिंग सॉफ़्टवेयर उपयोगकर्ताओं को संवाद करने और साझा करने और फ़ाइलों पर काम करने में सहयोग करने देते हैं। ये एक बहुत ही कारगर तकनीक है जिसका विकास हम सब के फायदे के लिये हो रहा है। हालांकि अभी भी इसमें विकास की और संभावना और गुंजाइश बाकी है।



वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग सॉफ्टवेयर का उपयोग कौन करता है?


सभी प्रकार और आकारों के व्यवसाय और कंपनियां और सामान्य जन भी अपनी सोसाइटी, रिश्तेदारी और मित्र मंडली में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग सॉफ़्टवेयर का  उपयोग करते हैं। यह अलग-अलग स्थानों में कई शाखाओं या कंपनियों के उपर के स्तर के प्रबंधन के लिए बहुत ही शक्तिशाली चेक-इन साधन साबित होता है। 

इन वीडियो सम्मेलन सॉफ्टवेयरो का उपयोग व्यवसायों को उनकी संभावनाओं का विस्तार करने और यात्रा की आवश्यकता के बिना कर्मचारियों के साथ जांच करने या कोई जानकारी लेने के लिए भी किया जाता है। यहां तक कि छोटे, मध्यम या बड़े आकार के व्यवसाय अपने साझेदारों, हितधारकों और व्यापार की नयी संभावनाओं से जुड़ने के लिए अपने दैनिक कार्यों में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग का उपयोग करते हैं।

इसके अलावा वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग उपकरण कभी-कभी शिक्षकों को उनके छात्रों के साथ जोड़ने के लिए एक माध्यम के रूप में या फिर ऑनलाइन शिक्षण प्लेटफार्मों या शिक्षण प्रबंधन के लिये प्रयोग होते हैं। ये सब वीडियो सम्मेलन सॉफ्टवेयर ऑनलाइन सीखने के माहौल के लिए बहत ही अधिक उपयोगी हैं, जो अक्सर फ़ाइल साझाकरण, मतदान और व्हाइटबोर्डिंग क्षमता प्रदान करते हैं ताकि सीखने का एक प्रभावी ढंग का वातावरण बन सके। 

सरकार मे भी वीडियो सम्मेलन सॉफ्टवेयर की प्रभावी ढंग से प्रयोग हो रहा है। आप सब ने देखा होगा कि किस प्रकार भारत के प्रधानमंत्री भारत के सभी राज्यों के मुख्यमंत्रियों के साथ वीडियो सम्मेलन करके कोरोना वायरस से लड़ने के लिये बातचीत कर रहे हैं। प्रशासन में भी रोजाना वीडियो सम्मेलन सॉफ्टवेयर की मदद से बैठकें की जा रही हैे और महतिवपूर्र सरकारी काम निपटाये जा रहे हैं। भारत के हर जिला प्रशासन, राज्य सचिवालय और केन्द्र सरकार के सभी  मंत्रालयों और महत्वपूर्ण विभागों में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग की सुविधा चल रही है जिससे समय और पैसे की भी बचत हो रही है।


प्रसिद्ध वीडियो सम्मेलन सॉफ्टवेयर (Famous Video Conference Software's)


भारत में जब 25 मार्च को अचानक से कोरोना को चलते लॉकडाउन लगाया तो लोगों ने वीडियो कोन्फ्रेंस सम्मेलन सॉफ्टवेयरों को खोजना शुरु कर दिया। अचानक से किसी ने जूम वीडियो सम्मेलन सॉफ्टवेयर को खोज लिया और  बस सब लोग इसी का प्रयोग करने लगे। हालांकि बाद में चीन का उत्पाद होने और खराब निजता सुरक्षा के चलते भारत के गृह मंत्रालय ने इसका प्रयोग न करने की सलाह दी तब लोगों ने अन्य वीडियो सम्मेलन सॉफ्टवेयरों को खोजना शुरू किया। 

अब लोग गूगल, माइक्रोसॉफ्ट, स्काइप, सिस्को इत्यादि कंपनियों के तमाम वीडियो सम्मेलन सॉफ्टवेयरों  का प्रयोग कर रहे हैं।


हालांकि कई मुफ्त वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग विकल्प भी उपलब्ध हैं, जो स्वतंत्र रूप से काम करने वालों, परामर्शदाताओ  या अन्य स्व-नियोजित व्यक्तियों के लिए एक आकर्षक वीडियो सम्मेलन साधन बनते हैं। वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग सॉफ्टवेयरों के मुफ्त संस्करण आमतौर पर ऐसे कम कम क्षमताओं वाले विकल्प होते हैं, जो एकल उपयोगकर्ताओं के लिए थोड़ी कम व्यापक कार्यक्षमता प्रदान करते हैं लेकिन काम चल जाता है।

यहां पर हमने कुछ प्रसिद्ध वीडियो सम्मेलन सॉफ्टवेयरों की सूची हमने बनाने की कोशिश की है। आप को जो भी पसंद हो उस वीडियो कोन्फ्रेंस सॉफ्टवेयर का अपने काम में उपयोग कर सकते हैं।


लाइव वीडियो कोन्फ्रेंस सम्मेलन Live Video Conference

अच्छे वीडियो सम्मेलन सॉफ्टवेयर की विशेषतायें


तो आप को जब यह देखना हो कि कौन सा वीडियो सम्मेलन सॉफ्टवेयर प्रयोग करें, उस से पहले ये आपको ये जानना जरूरी है कि एक अच्छा वीडियो कांफ्रेंस सॉफ्टवेयर कैसा हो, उसकी क्या विशेषतायें होनी चाहिये? हमारे विचार में एक अच्छे वीडियो सम्मेलन सॉफ्टवेयर में ये सारी विशेषतायें होनी चाहिये -

    • विंडोज, एपल, एन्ड्रायड, लाइनक्स आदि सभी कंप्यूटरों पर उपलब्ध होना
    • किसी भी प्रकार के उपकरण जैसे मोबाइल, टैब इत्यादि पर भी उपलब्ध होना
    • कई लोगों के साथ मल्टी पार्टी ऑडियो और वीडियो सम्मेलन की सुविधा देना
    • पहले से मौजूद वीडियो कांफ्रेंस सिस्टम के साथ जुड़ाव और एकीकरण
    • बैठकों की रिकॉर्डिंग करने की सुविधा प्रदान करना
    • एन्क्रिप्टेड डेटा ट्रैफ़िक के साथ अत्यधिक सुरक्षित होना
    • डाटा की गोपनीयता और सुरक्षा प्रदान करना
    • प्रस्तुतियों, पीडीएफ फाइलों और स्क्रीन आदि के रूप में सामग्री साझा करने की सुविधा देना
    • सहयोगी कार्यों के लिए टीमों और कार्य स्थान का निर्माण
    • भारत के इंटरनेट और भारत के टेलीफोन नंबर पर आवाज (जब कि इंटरनेट उपलब्ध नहीं है) की सुविधा देना
    • सफेद बोर्डिंग यानी कि कुछ लिख कर दिखाने की क्षमता देना
    • 100% उपस्थिति और भागीदारी के लिए सभी लोगों के पूर्ण सेट की दृश्यता सुनिश्चित करने वाली एकल खिड़की पर देखने की सुविधा देना
    • एन्क्रिप्टेड और सुरक्षित डाटा के यातायात का आवागमन
    • वीडियो की बहुत ही अच्छे स्तर की कांफ्रेंस सुविधा देना जिससे लोगो को वीडियो सम्मेलन के बाद संतुष्टि हो
    • वीडियो को बन्द करके खाली ऑडियो को प्रयोग करने की सुविधा देना
ये तो थीं साधारतया उपलब्ध होने वाली विशेषतायें जो कि एक अच्छे वीडियो सम्मेलन सॉफ्टवेयर में होनी ही चाहिये।    

वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग सॉफ्टवेयर के साथ होने वाली समस्यायें  


वीडियो सम्मेलन सॉफ्टवेयर के साथ सबसे आम मुद्दों में से एक उसकी कॉल गुणवत्ता है। यानी कि कितनी आसानी से आप किसी के साथ वीडियो सम्मेलन कर सकते हैं। उसकी गति कितनी है? वो कितनी कम बैंडविड्थ पर इंटरनेट पर काम कर सकता है। वीडियो सम्मेलन सॉफ्टवेयर अपने आप में मजबूत हो सकता है पर इस पर वीडियो या ऑडियो की गुणवत्ता शामिल लोगों की इंटरनेट गति पर अत्यधिक निर्भर होती है। 

अत: किसी संभावित हताशा या परेशानी से बचाने के लिये यह महत्वपूर्ण है कि वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग सॉफ़्टवेयर का उपयोग करते समय उपयोगकर्ताओं के पास विश्वसनीय इंटरनेट तक पहुंच हो और साथ ही साथ उसकी गति और गुणवत्ता वहुत अच्छी हो। नहीं तो लोगों को आपस में एक दूसरे से बातचीत के दौरान बहुत सारे व्यवधान होते रहेंगे।


वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग सॉफ्टवेयर के मुख्य लाभ


हमने देखा कि कंपनियों द्वारा अपने व्यवसाय में या फिर ऑनलाइन के माध्यम से पढ़ाई और कोचिंग के लिये या फिर लोगों द्वारा सामाजिक जुड़ाव के लिये वीडियो सम्मेलन सॉफ्टवेयर बहुत ही काम के हैं और इसके बहुत से लाभ और फायदे हैे जिसका लाभ सभी ले रहे हैं। मुख्य तौर पर एक अच्छे वीडियो सम्मेलन सॉफ्टवेयर से ये लाभ होते हैं (और भी अन्य कई लाभ हो सकते हैं) -

    1. सस्ते लंबी दूरी और अंतर्राष्ट्रीय संचार विकल्पों के साथ धन और संसाधनों को बचाता है।
    2. भौगोलिक बाधाओं को दूर करता है और अपनी टीम से दूरी को कम करके मऑनलाइन मिलजुल कर काम करने की सुविधा देता है।
    3. स्क्रीनशेयरिंग और फ़ाइल साझाकरण के माध्यम से आपस में मिलजुल कर काम करने की की अनुमति देकर टीम सहयोग को बढ़ाता है।
    4. लोगों को अपने कार्यालय में आराम से बैठे बैठे से बैठकों में शामिल होने की अनुमति देकर यात्रा की लागत को कम करता है।


निष्कर्ष


निष्कर्ष के तौर पर हम कह सकते हैं कि वीडियो सम्मेलन सॉफ्टवेयर अब लोगों की जरुरत बन गये हैं। अब कोरोना वायरस के माहौल में तो आम लोगों का भी ध्यान इन वीडियो कॉन्फ्रेंस सॉफ्टवेयरों की तरफ गया है और लोगों ने बहुत से विविध तरीकों से इनको प्रयोग करना आरम्भ कर दिया है। हाल ही मैंने वीडियो सम्मेलन सॉफ्टवेयर के द्वारा कई कवि सम्मेलनों और गोष्ठियों में भाग लिया और कुल मिलाकर ये एक मजेदार अनुभव रहा।

तो अब हम ये कह सकते हैं कि वीडियो सम्मेलन सॉफ्टवेयर एक बहुत ही अच्छी तकनाकि पहल है जो हमारे काम की आवश्यकता बनते जा रहे हैं और हम सब को ये अच्छी तरह से परख कर कि एक अच्छा वीडियो सम्मेलन सॉफ्टवेयर कैसा हो, उसके प्रयोग करके जांच लेने कि आवश्यकता है ताकि बाद में किसी कांफ्रेंस के बीच में कोई परेशानी न हो।

आप लोग भी कमेंट कर के बताये कि आपका अच्छा वीडियो सम्मेलन सॉफ्टवेयर पर अनुभव कैसा रहा?

Manisha सोमवार, 29 जून 2020

कोरोना काल में बहुत कुछ बदलेगा - स्वचालित नल लगाने होंगे

आपके मैं एक उदाहरण से बताना चाहूंगी कि कोरोना के समय और इसके बाद कैसे हम लोगों की दुनिया छोटी छोटी बातों में बदल जायेगी। 

Fully Automated Tap पूर्ण स्वचालित नल
हमारी सोसाइटी के क्लब में कुछ समय पहले तक जब कि कोरोना का कोई नाम भी नहीं जानता था तब इस क्लब के वाश रुम (सार्वजनिक शौचालय) में एक पूर्ण स्वचालित नल लगा था जिसके आगे हाथ करने से पानी लगभग एक मिनट तक अपने आप निकलता रहता था।

वो अच्छा चल रहा था पर कुछ दिनों के बाद उसके संवेदक (सेंसर) में कुछ खराबी आ गई और इन नलों ने काम करना बंद कर दिया।

तो इन के स्थान पर जो नये नल लगाये गये वो स्वचालित तो थे पर ऐसे थे कि पहले उन्हें दबाना पड़ता है और फिर उसमें से आने वाला पानी लगभग एक मिनट बाद बंद हो जाता है। इस व्यवस्था से भी किसी को कोई परेशानी नहीं थी और सब ठीक चल रहा था।


लेकिन अब मार्च के महीने में होली के आस पास से जब लोग कोरोना वायरस को लगकर जागरूक होने लगे और लोगों को यह हिदायत सरकार द्वारा दी गई कि उन्हें अपने हाथों को बार बार साबुन से धोना है और वो भी बीस सेकंड तक। 

अब इस नल पर अगर आप अपना हाथ धोने को लिये आते हैं
Automated Tap स्वचालित नल
तो पहली बात तो ये कि आपको इस नल को छूकर चलाना पड़ेगा, दूसरी बात जब आप हाथ गीला करके 20 सेकन्ड तक अपना हाथ साबुन से रगड़ते रहते हैं तब तक नल का स्वचालिच संवेदक उसको बंद कर देता है और फिर साबुन को हाथ से हटाने के लिये पानी के लिये नल को फिर से छू कर चलाना पड़ता है। 

इस कोरोना काल में वैसे ही हर कोई कुछ भी छूने से डर रहा है वहां पर नल वो भी सार्वजनिक शौचागार में तो बिलकुल ही अस्पृश्य बन जाता है।

अब लोग फिर से वहां पर पूर्ण स्वचालित नल की मांग कर रहे हैं।

ये तो मैंने एक उदाहरण दिया है। ऐसे कितनी ही जगह इस बात की आवश्यकता महसूस की जा रही होगी।

मैंने अब इस बात को महसुस किया है कि कोरोना काल के बाद स्वचालित वस्तुऔं और मशीनों की मांग ज्यादा बढ़ेगी और लोग अपने को सुरक्षित रखने के क्रम में किसी वस्तु या व्यक्ति को छूने से परहेज कर रहे हैं और शायद करते भी रहेंगे।  

 

Manisha शनिवार, 20 जून 2020

एयरकंडीशनर का तापमान 24 डिग्री रखने पर हमारे अनुभव


भारत में इस समय गर्मियों का मौसम है। अधिकांश जगहों पर दिन का तापमान 45-47 डिग्री के करीब चल रहा है। करीब-करीब हर घर में एसी (Air Conditioner - AC) का इस्तेमाल हो रहा है। गर्मियों से बचने के लिए लोग एयर कंडीशनर का सहारा ले रहे हैं।

आखिर लोग करें भी क्या जब इतनी गर्मी पड़ रही है। सब से बड़ी मुसीबत तो ये है कि कोरोना वायरस के चलते भारत में लॉकडाउन लगा हुआ है और लोगों को घरों मे ही रहना है।

ऐसे में देश में बिजली की खपत भी तेजी से बढ़ रही है। हालांकि घर-ऑफिस में एसी का आदर्श तापमान कितना रखा जाए, इसकी जानकारी भी लोगों को कम ही होती है इसीलिए अब भारत सरकार ने इसको लेकर एक नियम बना कर  एयर कंडीशनर (एसी) के लिए तापमान का सामान्य स्तर 24 डिग्री नियत कर दिया है

air-conditioner-24-degree-setting

सरकार के अनुसार अगर इससे देश भर में सालाना 20 अरब यूनिट सालाना बिजली की बचत होगी साथ ही लोगों के स्वास्थ्य पर भी सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।

सरकार के आधिकारिक बयान के अनुसार, बिजली मंत्रालय के अधीन आने वाला ऊर्जा दक्षता ब्यूरो (बीईई) ने इस संदर्भ में एक अध्ययन कराया था और एयर कंडीशनर में तापमान 24 डिग्री सेल्सियस निर्धारित करने की सिफारिश की थी। इस दिशा में शुरुआत करते हुए हवाईअड्डा, होटल, शापिंग मॉल समेत सभी वाणिज्यिक प्रतिष्ठानों और विनिर्माताओं को परामर्श जारी किया गया है।


विनिर्माताओं को एयर कंडीशन में 24 डिग्री सेल्सियस तापमान निर्धारित करने का सुझाव दिया गया। साथ ही उस पर लेबल लगाकर ग्राहकों को यह बताने को कहा गया है कि उनके पैसे की बचत और बेहतर स्वास्थ्य के नजरिए से कितना तापमान नियत करना बेहतर है. यह तापमान 24 से 26 डिग्री के दायरे में होगा।

इस अधिसूचना के द्वारा बीईई स्टार-लेबलिंग कार्यक्रम के दायरे में आने वाले सभी रूम एयर कंडीशनरों के लिए 24 डिग्री सेल्सियस डिफॉल्ट सेटिंग को अनिवार्य कर दिया गया है।

इस से कमरे के एयर कंडीशनरों (एसी) का डिफॉल्ट (अपने आप में तय) तापमान अब 24 डिग्री सेल्सियस होगा। इसका मतलब है कि कमरे का तापमान 24 डिग्री रखने के हिसाब से ही एसी चलेगा। हां, व्यक्ति जरूरत के हिसाब से इसे ऊपर नीचे कर सकता है। फिलहाल एसी का डिफाल्ट तापमान 18 डिग्री सेल्सियस है।




एयरकंडीशनर का तापमान 24 डिग्री करने का क्या फायदा होगा?

लेकिन असल सवाल है कि ऐसा करने से हासिल क्या होगा? क्या वाकई एसी के तापमान से बिजली की खपत निर्धारित होती है?

दरअसल ऊर्जा मंत्रालय का सुझाव था कि 'एसी पर 1 डिग्री सेल्सियस तापमान बढ़ाने से 6% एनर्जी बचती है। न्यूनतम तापमान को 21 डिग्री के बजाय 24 डिग्री पर सेट करने से 18% एनर्जी बचेगी।' 

भारत के ऊर्जा मंत्रालय के मुताबिक कमरे में तापमान कम पर रखने के लिए कम्प्रेसर ज़्यादा काम करेगा। 24 से 18 डिग्री पर सेट करने के पर एसी का तापमान कम करने से कंप्रेसर को ज्यादा लंबे समय तक काम करना पड़ता है। अगर एसी के तापमान को 25 डिग्री के बजाए 18 डिग्री पर कर दिया जाता है तो बिजली की खपत भी बढ़ जाती है।  एसी का तापमान 24 डिग्री पर रखने से बिजली की बचत भी होगी और आपकी सुविधा में भी कोई कमी नहीं आएगी।

किसी कमरे या जगह का तापमान 18 डिग्री करने के लिए एसी को लगातार काफी देर तक काम करते रहना पड़ता है। इससे एयर कंडीशनर की सेहत पर खराब असर के साथ बिजली की खपत भी ज्यादा होती है.

सबसे खास बात ये है कि इससे वहां मौजूद व्यक्ति के स्वास्थ्य पर भी बुरा असर पड़ सकता है। दरअसल एसी कमरे में मौजूद नमी को सोखता है। इसलिए इसका नकारात्मक प्रभाव आपकी त्वचा पर पड़ता है। ऊपर से यह आपके शरीर के तापमान को नियंत्रित रखने वाले प्राकृतिक तंत्र को प्रभावित करता है।

कई देशों में एयरकंडीशनर का तापमान 24 डिग्री करने के नियम पहले से लागू है

जापान और अमेरिका जैसे देशों ने एयर कंडीशनर के प्रदर्शन के लिए पहले ही इस तरह के नियम बना दिए हैं। जापान में एसी का डिफाल्ट तापमान 28 डिग्री सेल्सियस है। वहीं, अमेरिका में कुछ शहरों में एसी का तापमान 26 डिग्री सेल्सियस से कम पर नहीं चलाने की सीमा तय है।

हार्वर्ड के मुताबिक 23.3 और 25.6 डिग्री सेल्सियस और लंदन स्कूल इकनॉमिक्स के मुताबिक तापमान 24 डिग्री होना चाहिए।




एयर कंडीशनर को लेकर हमारे अनुभव


एयर कंडीशनर (एसी) का प्रयोग हम भी कई सालों से कर रहे हैं। हमारे अनुभव कुछ हद तक सरकार के साथ हैं और कई मामलों में सरकार से उलट हैं। 

सबसे पहले जब हम ने अपने घर पर एसी लगवाया था तब हम सबसे ऊपर के तल वाले घर पर रहते थे। यकीन मानिये 40-45 डिग्री के तापमान के समय छत इतनी गर्म हो जाती थी कि अधिकांश समय हमको अपना एयर कंडीशनर 18-20 डिग्री पर चलाना पड़ता था। 

दूसरी बात ये देखी कि अलग-अलग कंपनियों के समान एयर कंडीशनर (जैसे कि 1.5 या 2.0 टन) भी समान ठंडक नहीं करते हैं जिससे अलग-अलग तापमान पर  एसी चलाने पड़ते हैं। एयर कंडीशनर की बनावट का भी असर होता है, कोई एसी 2 कोईल वाला होता है कोई 3 कोईल वाला। इससे भी एयर कंडीशनर की ठंड़ पर असर पड़ता है।

तो अगर किसी का घर एक मंजिल का है या फिर कोई किसी बिल्डिंग में इस तरह की छत वाली सबसे ऊपरी  मंजिल पर रहता है तो उसके लिये तो सरकार का इस तरह 24 डिग्री वाला एयर कंडीशनर ज्यादा काम नहीं आयेगा। सरकार को इस ओर भी ध्यान देना चाहिये।

तीसरी बात जो हमने देखी वो ये थी कि जबसे सरकार मे एसी में स्टार श्रेणी मूल्यांकन (* रेटिंग) किया है तो हमने भी एक कमरे के लिये एक 5 स्टार श्रेणी का एसा खरीद लिया। लेकिन हमने पाया कि इस तरह के एसी कम ठंडा करते हैं। शायद इनको बनाया ही बिजली बचाने के लिये है।

चौथी बात ये कि हमारे अनुभव में खिड़की वाले एयर कंडीशनर की तुलना में दीवार पर लगने वाले स्प्लिट एसी (Split AC) ज्यादा ठंडा करते हैं। भले ही दोनो की समान क्षमता हो (1.5 Ton or 2.0 Ton).

आखिरी बात ये कि बाद में हमने एक बहुमंजिली इमारत में अपना घर ले लिया और वहां हमारा घर बीच की  मंजिलों पर है। यहां पर एसी 25 डिग्री में भी काफी ठंडा कर देता है। ऐसी बहुमंजिली इमारतों में भारत सरकार का 24 डिग्री तापमान वाला एसी कामयाब रहेगा।

अत: सरकार को सब प्रकार के घरों को ध्यान में रखकर इस नियम को बनाना चाहिये था। वैसे कुल मिलाकर बिजली बचाने की बात तो ठीक है।

Manisha शुक्रवार, 29 मई 2020

मोबाइल पर अग्रेजी मे सर्च का हिंदी में भी परिणाम दे रहा है गूगल


गूगल आजकल पूरी कोशिश कर रहा है कि भारतीय भाषाओं खास कर हिंदी में इंटरनेट पर पाठ्य सामग्री (कंटेंट) को
अग्रेजी मे सर्च पर भी हिंदी में परिणाम दे रहा है गूगल
बढ़ाया जाये। 

गूगल के अनुमान के अनुसार आने वाले कुछ समय में भारत के ग्रामीण इलाकों में स्मार्ट मोबाइल फोन के प्रचलन के बढ़ने से भारतीय भाषाओं खास कर हिंदी में इंटरनेट कंटेट की आवश्यकता रहेगी। 

इसी को ध्यान में रखते हुये गूगल ने मोबाइल पर अब अपने खोजक (सर्च इंजन) पर एक नई सुविधा शुरु की है। अब अपने मोबाइल पर गूगल सर्च करने वालों को हिंदी और अंग्रेजी के परिणाम एक साथ दिखाई दे रहे है। बस एक टैब पर क्लिक से मनचाहा परिणां देख सकेंगे।   

गूगल के अनुसार इस सुविधा से भारत में खोज बिलकुल रोजमर्रा की जिंंदगी जैसा हो जायेगा, जैसे लोग जरुरत के हिसाब से बोलचाल में भाषा बदलते हैं, ऐसे में सिर्फ एक टैब पर क्लिक करके अपनी पसंद की भाषा में सर्च के नताीजे देख सकेंगें।

मैंने अपने आईफोन पर गूगल में 'Who am I'  खोज के लिये टाइप किया तो देखा कि बगल के टैब में हिंदी में भी परिणांम दिख रहा था। अभी इसमें और सुधार की गुंजाइश है गूगल जरुर इसको सुधारेगा।

Manisha शनिवार, 9 जुलाई 2016

ये डिजिटल इंडिया क्या है?


केन्द्र सरकार  ने 2015 में आम आदमी के 'डिजिटल सशक्तिकरण' के  जरिये देश भर में 'सुशासन अभियान' को तीव्र गति देने के लिये  महत्वकांक्षी  'डिजिटल इंडिया' की शुरूआत की है', जिसके बारे में कहा जा रहा है कि इस योजना  से देश की तस्वीर बदल सकती है, आम आदमी की जिंदगी बेहतर और आसान हो सकती है। इस योजना को 'डिजिटल रूप से सशक्त भारत' की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है।


डिजिटल इंडिया Digital India



डिजिटल इंडिया योजना इस तरह से डिज़ाइन की गई है कि इसके क्रियान्वन से देश की तस्वीर बदल सकती है यानि यह योजना 'गेम चेंजर' होगी। इस के तहत पोस्ट ऑफिसों को कॉमन डिजिटल सर्विस सेंटर के रूप में विकसित किया जायेगा और छोटे शहरों में भी बीपीओ खोले जाएंगे।

मोदी सरकार चाहती है कि देश के हर नागरिक के लिए डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर बने। शासन, सेवाओं को आसानी से उपलब्ध कराना सरकार का मकसद है। भारतीयों के डिजिटल सशक्तीकरण के प्रयासों स्वरूप इस योजना का लक्ष्य इस क्षेत्र के बारे में जागरूकता बढ़ाना और लोगों को इससे जोड़ना है। 


इसका एक लक्ष्य कागजी कार्रवाई को कम-से-कम करके सभी सरकारी सेवाओं को आम जनता तक डिजिटली यानी इलेक्ट्रॉनिकली रूप से सीधे व सुगम तरीके से पहुचाना है।

डिजिटल विशेषज्ञों के अनुसार डिजिटल इंडिया कार्यक्रम के तहत भारत सरकार चाहती है कि तमाम सरकारी विभाग और देश की जनता एक-दूसरे से डिजिटल अथवा इलेक्ट्रॉनिक रूप से जुड़ जाएं ताकि वे सभी तरह की सरकारी सेवाओं से लाभ उठा सकें और देश भर में सुशासन सुनिश्चि‍त किया जा सके। 

चाहे किसी गांव में रहने वाला व्यक्ति हो शहर में रहने वाला, दोनों को ही सभी सरकारी सेवाएं समान रूप से डिजिटली अथवा ऑनलाइन हासिल हों, यही डिजिटल इंडिया कार्यक्रम का मुख्य लक्ष्य है। 

इस अहम सरकारी योजना को अमली जामा पहनाने के बाद आम जनता के लिए यह संभव हो जाएगा कि किस सरकारी सेवा को पाने के लिए उसे किस तरह एवं कहां ऑनलाइन आवेदन करना है और उससे किस तरह लाभान्वि‍त हुआ जा सकता है।   

दरअसल किसी भी सरकारी सेवा के डिजिटली उपलब्ध होने पर  आम आदमी के लिये उससे लाभान्वि‍त हो्ने के लिये सीधा रास्ता खुल जायेगा। जाहिर है, ऐसे में सरकारी सेवाओं के मामले में होने वाली लेट लतीफी और भ्रष्टाचार पर कारगर ढंग से लगाम लग सकेगी।

केंद्र सरकार द्वारा डिजिटल इंडिया अभि‍यान का शुभारंभ पिछले वर्ष 21 अगस्त को किया गया और इसका मुख्य उद्देश्य भारत को डिजिटली रूप से सशक्त समाज और ज्ञान अर्थव्यवस्था में तब्दील करना है। केंद्र सरकार की योजना यह है कि इस कार्यक्रम को अगले पांच सालों में पूरा कर लिया जाए। 

यह उम्मीद की जा रही है कि डिजिटल इंडिया कार्यक्रम वर्ष 2019 तक गांवों समेत देश भर में पूरी तरह से लागू हो जाएगा। दरअसल, इस कार्यक्रम के तहत सभी गांवों और ग्रामीण इलाकों को भी इंटरनेट नेटवर्क से जोड़ने की योजना है। डिजिटल इंडिया कार्यक्रम के तहत इंटरनेट को गांव-गांव पहुंचाया जाएगा।

इस कार्यक्रम के तीन प्रमुख अवयव हैं- बुनियादी डिजिटल सुविधाएं, डिजिटल साक्षरता और सेवाओं की डिजिटल डिलीवरी। इस कार्यक्रम के तहत परियोजनाओं से देश को ड़िजिटल आधारित सशक्त  सूचना अर्थव्यवस्था के रूप मे बदजाने का लक्ष्य है।

आम जनता को सरकारी सेवाएं आसानी से उपलब्ध कराना सरकार का मकसद है, ताकि लोगों को अत्याधुनिक सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी का लाभ मिल सके। इसके लिए आईटी, टेलीकॉम एवं डाक विभाग जोर-शोर से कार्यरत हैं। मोदी सरकार के महत्वाकांक्षी डिजिटल इंडिया अभियान के तहत सरकार अगले तीन वर्षों में 2.5 लाख ग्राम पंचायतों को राष्ट्रीय ऑप्टिकल फाइबर नेटवर्क से जोड़ेगी।

एक डिजिटल लॉकर सेवा का शुभारंभ किया गया है। इस बार 2016 का सीबीएसई के 12वीं के परिणामों को घोषित करते समय ही छात्रों के प्रमाण पत्रों को डिजिटल लॉकर में रखा गया है। 

डिजिटल लॉकर के  तहत लोग अपने प्रमाण पत्रों एवं अन्य दस्तावेजों को डिजिटल स्वरूप में सुरक्षित रख सकेंगे। इसमें आधार कार्ड नंबर व मोबाइल फोन के जरिये पंजीकरण कराना होगा। डिजिटल लॉकर में सुरक्षित रखे जाने वाले प्रपत्रों को सरकारी एजेंसियों के लिए भी हासिल करना आसान होगा।

किसी व्यक्ति के विभि‍न्न दस्तावेज अगर डिजिटल लॉकर में हैं, तो उसे सरकारी योजनाओं के लिए इनकी फोटोकॉपी देने की जरूरत नहीं होगी। जाहिर है, ऐसे में लोगों को काफी सहूलियत होगी।

इतना ही नहीं, इस दौरान ग्रामीण क्षेत्रों में बीपीओ खोलने की योजना का भी शुभारंभ हो गया है। दरअसल, सरकार ग्रामीण क्षेत्रों में नौजवानों को रोजगार उपलब्ध कराने के लिए कॉल सेंटरों की स्थापना करना चाहती है। इन क्षेत्रों में बीपीओ खोलने वालों को सरकार सब्सिडी देगी। 

इसके साथ ही ऐसी उम्मीद है कि डिजिटल इंडिया वीक के दौरान सरकार डिजिटल इंडिया के ब्रांड ऐंबैसडरों की भी घोषणा करेगी। भारत सरकार अनेक एप्लीकेशंस एवं पोर्टल विकसित करने के लिए भी ठोस कदम उठा रही है जो नागरिकों के जीवन को बेहतर बनाने में अहम भूमिका निभाएंगे। 

डिजिटल इंडिया कार्यक्रम को मिलने वाली कामयाबी भारत को डिजिटल रूप से सशक्त बनाने और स्वास्थ्य, शिक्षा, कृषि, बैंकिंग आदि क्षेत्रों से संबंधित सेवाओं की डिलीवरी में आईटी के इस्तेमाल में अग्रणी बनाएगी।

डिजिटल इंडिया कार्यक्रम के नौ प्रमुख उद्देश्य हैं जिनका ब्योरा इस प्रकार है : -
  • ब्रॉडबैंड हाईवेज :  इनके जरिए एक तय समय सीमा में बड़ी संख्या में सूचनाओं को प्रेषित किया जा सकता है।
  • सभी को मोबाइल कनेक्टिविटी सुलभ कराना :  शहरी इलाकों में भले ही मोबाइल फोन पूरी तरह से सुलभ हो गया हो, लेकिन देश के अनेक ग्रामीण इलाकों में अभी इस सुविधा का जाल वैसा नहीं हो पाया है। इससे ग्रामीण उपभोक्ताओं को इंटरनेट और मोबाइल बैंकिंग के इस्तेमाल में आसानी होगी।
  • पब्लिक इंटरनेट एक्सेस प्रोग्राम :  इस कार्यक्रम के तहत पोस्ट ऑफिस को मल्टी-सर्विस सेंटर के रूप में विकसित किया जाएगा। नागरिकों को विभि‍न्न सरकारी सेवाएं मुहैया कराने के लिए वहां अनेक तरह की गतिविधियों को अंजाम दिया जायेगा।
  • ई-गवर्नेंस - प्रौद्योगिकी के जरिये शासन में सुधार : इसके तहत विभिन्न विभागों के बीच सहयोग और आवेदनों को ऑनलाइन ट्रैक किया जाएगा। इसके अलावा स्कूल प्रमाण पत्रों, वोटर आईडी कार्ड्स आदि की जहां भी जरूरत पड़े, वहां उसका ऑनलाइन इस्तेमाल किया जा सकता है।
  • ई-क्रांति - सेवाओं की इलेक्ट्रॉनिक डिलीवरी : ई-एजुकेशन के तहत सभी स्कूलों को ब्रॉडबैंड से जोड़ने, सभी स्कूलों (ढाई लाख) में वाई-फाई की नि:शुल्क सुविधा मुहैया कराने और डिजिटल साक्षरता सुनि‍श्चि‍त करने की योजना है। किसानों को वास्तविक समय में मूल्य संबंधी सूचना, मोबाइल बैंकिंग आदि की ऑनलाइन सेवा प्रदान करना भी इनमें शामिल है। इसी तरह स्वास्थ्य क्षेत्र में ऑनलाइन मेडिकल परामर्श, रिकॉर्ड और संबंधित दवाओं की आपूर्ति समेत लोगों को ई-हेल्थकेयर की सुविधा देना भी इनमें शामिल है।
  • सभी के लिए सूचना : इस कार्यक्रम के तहत सूचनाओं और दस्तावेजों तक ऑनलाइन पहुंच कायम की जायेगी। इसके लिए ओपन डाटा प्लेटफॉर्म मुहैया कराया जाएगा।
  • इलेक्ट्रॉनिक्स निर्माण में आत्मनिर्भरता : इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र से जुड़े तमाम उत्पादों का निर्माण देश में ही किया जाएगा। इसके तहत ‘नेट जीरो इंपोर्ट्स’ का लक्ष्य रखा गया है, ताकि वर्ष 2020 तक इलेक्ट्रॉनिक्स के मामले में देश आत्मनिर्भरता हासिल कर सके।
  • रोजगार के लिए सूचना प्रौद्योगिकी :  कौशल विकास के मौजूदा कार्यक्रम को इस प्रौद्योगिकी से जोड़ा जाएगा। गांवों व छोटे शहरों में लोगों को आईटी से जुड़ी नौकरियों के लिए प्रशिक्षित किया जाएगा।
  • अर्ली हार्वेस्ट प्रोग्राम्स : डिजिटल इंडिया कार्यक्रम को लागू करने के लिए पहले कुछ बुनियादी ढांचागत सुविधाएं स्थापित करनी होंगी।
यह साफ जाहिर है कि डिजिटल इंडिया कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य देश के नागरिकों को सुशासन  सुलभ कराना और उनकी जिंदगी बेहतर और आसान बनाना है। इस के जरिये ग्राम पंचायतों, स्कूलों विश्वविद्यालयों  में वाय-फाय सुविधाओं से लेकर शहरो यानि सभी जगह आम आदमी डिजिटल रूप् से सशक्त किये जाने का लक्ष्य है, जिससे उसकी जिंदगी आसान हो सकेगी साथ ही इससे आई टी, दूर संचार तथा इलेक्ट्रोनिक्स आदि अनेक क्षेत्रों में बड़ी तादाद में लोगों को रोजगार मिल सकेगा।

लेकिन सरकार को  ये भी देखना चाहिये कि ये सब अपने निर्धारित समय में ही पूरा हो, अन्यथा ये भी सरकार की एक घोषणा बन कर रह जायेगी। 

दूसरी बात ये है कि डिजिटल इंडिया का नाम ही अंग्रेजी में है तो कहीं ऐसा न हो कि भारतीय भाषायें खास कर हिंदी को कोई पूछे ही नहीं और अंग्रेजी को ही बढ़ावा मिलता रहे। वैसे भी भारतीय भाषाओं को तकनीकी रूप से पिछड़ा रखा गया है। 

सरकार सुनिश्चित करे कि सारे कार्यक्रम में हिंदी की सहभागिता बराबर रहे। और ये नाम डिजिटल इंडिया खुद ही सही नहीं है. इस कार्यक्रम का कोई अच्छा सा हिंदी नाम रखना चाहिये था।

डिजिटल इंडिया के बारे मे और जानने के लिये इसकी वेबसाइट पर जायें।

Manisha बुधवार, 15 जून 2016

सरकारी नौकरियों में अब ठीक से ऑनलाईन फार्म भरने शुरु हुये हैं


सरकारी नौकरियों के बारे में जानकारी देने वाले अपने ब्लॉग को चलाने के पिछले कई वर्षों के दौरान मैंने देखा कि
Online Government Jobs Forms
अधिकांश सरकारी संस्थानों द्वारा नौकरी के लिये ऑनलाईन फार्म भरने की कोई सुविधा उम्मीदवारों को नहीं दी जाती है। 

कई सरकारी संस्थानों का तो अपनी वेबसाइट भी नहीं थी और कई की तो अभी तक नहीं है। ऐसे में कुछ सरकारी संस्थानों द्वारा  उम्मीदवारों को ऑनलाईन फार्म भरवा कर सुविधा देना संभव ही नहीं था। 

सबसे पहले कुछ सरकारी उपक्रमों (Public Sector Units) और सरकारी बैंकों द्वारा अपनी नौकरियों में इस तरह की सुविधा देने की कोशिश की गई थी। इस प्रक्रिया में उमीदवार को अपना फार्म को ऑनलाईन ही भरना होता था लेकिन उसके बाद उसको प्रिंट करके और मांगे गये परीक्षा शुल्क का बैंक ड्राफ्ट बनवाकर निर्धारित पते पर डाक द्वारा भेजना होता था। 

ये प्रकिया कहने को तो ऑनलाईन थी लेकिन उम्मीदवार को वो सारे काम करने पड़ते थे जो कि डाक द्वारा ऑफलाईन तरीके से फार्म भरने में करना पड़ता था साथ ही साथ किसी साइबर कैफे में जा कर ऑनलाईन फार्म भर कर उसे प्रिंट करने और अपना समय व पैसा खर्च करने का झंझट और रहता है।

कुछ सरकारी बैंको ने इसमें कुछ सुधार किया और कहा कि ऑनलाईन फार्म भरकर भेजने के साथ पैसा भेजने कि
  आवश्यकता नहीं है बल्कि संबंधित बैंक की किसी भी शाखा में जाकर जमा करा सकते हो और बस उसका रसीद नंबर, दिनांक और रकम को ऑनलाईन फार्म में भर दो और भेज दो। 

बैंकों ने अब कुछ समय के बाद और सुधार करते ये कहना शुरु कर दिया है कि उम्मीदवार को अपना ऑनलाईन फार्म भर कर भेजने की जरुरत नही हैं, बस उसको प्रिंट करके अपने पास रख लो और परीक्षा या साक्षात्कार के समय जमा कराना या दिखाना पड़ेगा। 

इससे उमीदवारों का कम से कम डाक से फार्म भेजने की परेशानी तो खत्म हो गई। लेकिन इसमें अभी भी ऑनलाईन तरीके से नेट बैंकिग या क्रेडिट कार्ड द्वारा पैसे लेने की को सुविधा के बारे में नहीं सोचा गया था।

इसके बाद हालांकि अब अब अलग बैंकों द्वारा अपनी चयन प्रकिया के लिये अपने अपने आवेदन मंगाने के झंझट से बचाने के लिये IBPS (The Institute of Banking Personnel Selection) द्वारा केंद्रीय चयन प्रक्रिया हो रही है। हालांकि स्टेट बैंक अभी भी अपनी अलग चयन प्रक्रिया का आवेदन मंगाता है।

आखिरकार सरकारी नौकरियों के असली वाहक संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) , कर्मचारी चयन आयोग (SSC) व कुछ राज्यों के लोक सेवा आयोगों (Public Service Commission) ने भी ऑनलाईन परीक्षा फार्म भरवाने की प्रक्रिया आरम्भ कर दी है। 

इसमें उम्मीदवार परीक्षा शुल्क नेट बैंकिग, क्रेडिट कार्ड व किसी बैंक के द्वारा या निर्धारित डाकघर के द्वारा पैसा जाम करा सकते हैं और साथ ही साथ प्रिंट करके  करके फार्म भी नहीं भेजने हैं यानी की परीक्षा फार्म भरने की पूरी प्रक्रिया का ठीक से कंप्यटरीकरण शुरू कर दिया गया है। 

अब अगले चरण में शायद ऑनलाईन परीक्षा के बारे में सोचा जायेगा।

वैसे सबसे पहले तो सभी संस्थानों की अपनी वेबसाइट होनी चाहिये और साथ ही सरकारी संस्थानों को ऑनलाईन फार्म भरवाना आवश्य़क कर देना चाहिये और आने वाले समय में जब यूनिक आइडेंटिफिकेशन का काम सरकार द्वारा कर लिया जाये तब ये परीक्षा फार्म भरने का पुराना ढंग बदल दिया जाना चाहिये और उम्मीदवार से सिर्फ उसका पहचान नंबर लेना चाहिये क्योंकि सारी की सारी जानकारी  तो सरकार के डेटाबेस में होगी ही।

Manisha मंगलवार, 9 फ़रवरी 2016

आपका ब्लॉग इस तरह हैक हो सकता है


आजकल हैकर विभिन्न वेबसाइटों को हैक करने के लिये कई तरीके अपनाते रहते हैं। किसी साइट को हैक करने का एक पुराना और अजमाया हुआ तरीका कदाचित पासवर्ड का पता लगाना होता है जिसके बाद पूरी साइट पर हैकर का कब्जा है जाता है। 

आज मेरे जीमेल (Gmail)  खाते में एक ऐसी ईमेल आई जो देखने में तो लगती थी कि ब्लॉगर (Blogger) की तरफ से आई है और मैनें इस ईमेल में बताई गई साइट को खोल भी लिया था। 

लेकिन मैं किसी भी ईमेल या साइट द्वारा पासवर्ड मांगे जाने पर उसे पहले शक की निगाह से देखती हूं और फिर उसकी जांच करती हूं, इसलिये मैंने इस साइट का सोर्स कोड (Source Code) देख लिया जो कि पता चला कि कि ये तो ब्लॉगर पर न ले जा कर किसी और साइट पर ले जा रहा है यानी कि अगर गलती से अपना पासवर्ड और साइट बता दी तो समझिये कि आपकी साइट हैक हो गई। 

अगर चिठ्ठाकारों को इस तरह की ईमेल मिले तो कृपया सावधान रहें, आपका ब्लॉग हैक हो सकता है.

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अगर आप इस साइट का सोर्स कोड देखेंगे तो आपको पता चल जायेगा कि किस तरह से हैकर किसी भी तरह आपके विभिन्न चिठ्ठों का पता व पासवर्ड जानने की कोशिश कर रहै हैं। सावधान रहें।

Manisha मंगलवार, 19 अक्तूबर 2010