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क्या सचमुच रिटायरमेंट के लिए भारतीय नहीं कर रहे बचत

रिटायरमेंट के लिए 47% भारतीय नहीं कर रहे बचत 

भारतीय नहीं कर रहे बचत


एचएसबीसी की एक रिपोर्ट में यह बात कही गई है कि भारत में कार्यशील लोगों में 47 फीसद ने सेवानिवृत्ति के लिए या तो बचत शुरू नहीं की है या फिर बंद कर दी अथवा ऐसा करने में उन्हें मुश्किल पेश आ रही है। यह ग्लोबल औसत 46 फीसद से अधिक है।  इस रिपोर्ट को ऑनलाइन सर्वे के आधार पर इपसोस मोरी ने तैयार किया। यह सर्वे सितंबर और अक्टूबर 2015 में किया गया। इसमें 17 देशों के 18,207 लोगों की प्रतिक्रिया ली गई। इन देशों में अर्जेटीना, ऑस्ट्रेलिया, ब्राजील, कनाडा, चीन, मिस्र, फ्रांस, हांगकांग, भारत, इंडोनेशिया, मलेशिया, मेक्सिको, सिंगापुर, ताइवान, संयुक्त अरब अमीरात, ब्रिटेन और अमेरिका शामिल हैं। 

रिपोर्ट में चिंताजनक पहलू यह है कि भारत में जिन 44 फीसद लोगों ने भविष्य के लिए बचत शुरू की थी, उन्होंने उसे रोक दिया है या ऐसा कर पाने में कठिनाइयों का सामना कर रहे हैं। करीब 80 फीसद ने सेवानिवृत्त होने से पहले मित्रों और परिवार से सलाह ली। जबकि 82 फीसद को रिटायरमेंट के बाद इनकी सलाह मिली। केवल 40 फीसद सेवानिवृत्त होने से पहले और 53 फीसद सेवानिवृत्त होने के बाद पेशेवरों से सलाह प्राप्त करते हैं। इनमें वित्तीय सलाहकार, सरकारी एजेंसी, इंश्योरेंस ब्रोकर्स सहित अन्य शामिल हैं।

रिटायरमेंट  के बाद वित्तीय सुरक्षा की अहमियत बढ़ जाती है। मेरे विचार में इस तरह की रिपोर्ट्स किसी न किसी उद्देश्य से प्रकाशित की जाती हैं। खास कर जब किसी अंतर्राष्ट्रीय कंपनी की कोई उत्पाद भारत में लांच होने वाला हो। भारत में सामाजिक सुरक्षा नाम मात्र की है और जो कुछ है भी वो भी केवल सरकारी क्षेत्र के कर्मियों और संगठित क्षेत्र के कर्मियों के लिये ही है। तो अगर इन क्षेत्रों के कर्मियों को अगर रिटायरमेंट के बाद पेंशन और प्रोविडेंट फंड अगर मिल रहा है तो वे क्यों बचत करेंगे? दूसरी ओर असंगठित क्षेत्र के कर्मियों का तो कोई रिटायरमेंट होता ही नहीं है तो उनकी बचत कहां होगी।

दरअसल भारत के लोगों को  पहले से ही पता है कि किसी के भरोसे नहीं रहा जा सकता। अपने काम करने के वर्षों के दौरान लोग बाग अपना पैसा सोने और अन्य वस्तुओं में निवेश करते चलते हैं। दूसरी ओर सामाजिक ढांचा इस प्रकार बनाया गया है कि लोगो के बुढापे में उनके पुत्र उनका ध्यान रखते हैं। भारत में लोग कम पैसे में भी आराम से दिन काट लेते हैं।

अब ये सब बाते तो इन रिपोर्ट प्रकाशित करने वालों को नहीं पता, इसलिये वो ये कहते हैं कि भारतीय रिटायरमेंट के बाद के लिये बचत नहीं करते, वास्तविकता कुछ और ही है। 

SarkariNaukri Blog मंगलवार, 16 अगस्त 2016
मोबाइल पर अग्रेजी मे सर्च का हिंदी में भी परिणाम दे रहा है गूगल
अग्रेजी मे सर्च पर भी हिंदी में परिणाम दे रहा है गूगल गूगल आज कल पूरी कोशिश कर रहा है कि भारतीय भाषाओॆ खास कर हिंदी में इंटरनेट पर पाठ्य सामग्री (कंटेंट) को बढ़ाया जाये। गूगल के अनुमान के अनुसार आने वाले कुछ समय में भारत के ग्रामीण इलाकों में स्मार्ट मोबाइल फोन के प्रचलन के बढ़ने से भारतीय भाषाओं खास कर हिंदी में इंटरनेट कंटेट की आवश्यकता रहेगी। इसी को ध्यान में रखते हुये गूगल ने मोबाइल पर अब अपने खोजक (सर्च इंजन) पर एक नई सुविधा शुरु की है।  अब  अपने मोबाइल पर गूगल सर्च करने वालों को हिंदी और अंग्रेजी के परिणाम एक साथ दिखाई दे रहे है। बस एक टैब पर क्लिक से मनचाहा परिणां देख सकेंगे।   गूगल के अनुसार इस सुविधा से भारत में खोज  बिलकुल रोजमर्रा की जिंंदगी जैसा हो जायेगा, जैसे लोग जरुरत के हिसाब से बोलचाल में भाषा बदलते हैं, ऐसे में सिर्फ एक टैब पर क्लिक करके अपनी पसंद की भाषा में सर्च के नताीजे देख सकेंगें।

मैंने अपने आईफोन पर गूगल में 'Who am I'  खोज के लिये टाइप किया तो देखा कि बगल के टैब में हिंदी में भी परिणांम दिख रहा था। अभी इसमें और सुधार की गुंजाइश है गूगल जरुर इसको सुधारेगा।

SarkariNaukri Blog शनिवार, 9 जुलाई 2016
हिंदीडायरी पर ब्लॉग लेखक आमंत्रित हैं
आप में से जो लोग भी इस ब्लॉग (www.HindiDiary.com) पर अपने लेख और किसी भी विषय पर अगर लिखना चाहते हैं तो आप का आमंत्रित हैं।

आप के नाम के साथ साथ आप के अपने ब्लॉग के लिंक भी लेख के साथ दिया जायेगा। जो लोग पहले से ही अपने हिंदी में ब्लॉग चला रहे हैं, उनके लिये ये एक अच्छा मौका है। और उदीयमान ब्लॉग लेखक भी यहां ब्लॉग लिख कर अपनी ब्लॉगिंग को  तराश सकते हैं। आप अपना ब्लॉग लेख manisha2106ATindia.com पर ईमेल से भेज सकते हैं।


SarkariNaukri Blog रविवार, 26 जून 2016
ये डिजिटल इंडिया क्या है?
केन्द्र सरकार  ने 2015 में आम आदमी के 'डिजिटल सशक्तिकरण' के  जरिये देश भर में 'सुशासन अभियान' को तीव्र गति देने के लिये  महत्वकांक्षी  'डिजिटल इंडिया' की शुरूआत की है', जिसके बारे में कहा जा रहा है कि इस योजना  से देश की तस्वीर बदल सकती है, आम आदमी की जिंदगी बेहतर और आसान हो सकती है। इस योजना को 'डिजिटल रूप से सशक्त भारत' की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है।
डिजिटल इंडिया Digital India


डिजिटल इंडिया योजना इस तरह से डिज़ाइन की गई है कि इसके क्रियान्वन से देश की तस्वीर बदल सकती है यानि  यह योजना 'गेम चेंजर' होगी। इस के तहत पोस्ट ऑफिसों को कॉमन डिजिटल सर्विस सेंटर के रूप में विकसित किया जायेगा और छोटे शहरों में भी बीपीओ खोले जाएंगे।

मोदी सरकार चाहती है कि देश के हर नागरिक के लिए डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर बने। शासन, सेवाओं को आसानी से उपलब्ध कराना सरकार का मकसद है। भारतीयों के डिजिटल सशक्तीकरण के प्रयासों स्वरूप इस योजना का लक्ष्य इस क्षेत्र के बारे में जागरूकता बढ़ाना और लोगों को इससे जोड़ना है। इसका एक लक्ष्य कागजी कार्रवाई को कम-से-कम करके सभी सरकारी सेवाओं को आम जनता तक डिजिटली यानी इलेक्ट्रॉनिकली  रूप् से सीधे व सुगम तरीके से पहुचाना है।

डिजिटल विशेषज्ञों के अनुसार डिजिटल इंडिया कार्यक्रम के तहत भारत सरकार चाहती है कि तमाम सरकारी विभाग और देश की जनता एक-दूसरे से डिजिटल अथवा इलेक्ट्रॉनिक रूप से जुड़ जाएं ताकि वे सभी तरह की सरकारी सेवाओं से लाभ उठा सकें और देश भर में सुशासन सुनिश्चि‍त किया जा सके। चाहे किसी गांव में रहने वाला व्यक्ति हो शहर में रहने वाला, दोनों को ही सभी सरकारी सेवाएं समान रूप से डिजिटली अथवा ऑनलाइन हासिल हों, यही डिजिटल इंडिया कार्यक्रम का मुख्य लक्ष्य है। इस अहम सरकारी योजना को अमली जामा पहनाने के बाद आम जनता के लिए यह संभव हो जाएगा कि किस सरकारी सेवा को पाने के लिए उसे किस तरह एवं कहां ऑनलाइन आवेदन करना है और उससे किस तरह लाभान्वि‍त हुआ जा सकता है।   दरअसल किसी भी सरकारी सेवा के डिजिटली उपलब्ध होने पर  आम आदमी के लिये उससे लाभान्वि‍त हो्ने के लिये सीधा रास्ता खुल जायेगा। जाहिर है, ऐसे में सरकारी सेवाओं के मामले में होने वाली लेट लतीफी और भ्रष्टाचार पर कारगर ढंग से लगाम लग सकेगी।

केंद्र सरकार द्वारा डिजिटल इंडिया अभि‍यान का शुभारंभ  पिछले वर्ष 21 अगस्त को किया गया और इसका मुख्य उद्देश्य भारत को डिजिटली रूप से सशक्त समाज और ज्ञान अर्थव्यवस्था में तब्दील करना है। केंद्र सरकार की योजना यह है कि इस कार्यक्रम को अगले पांच सालों में पूरा कर लिया जाए। यह उम्मीद की जा रही है कि डिजिटल इंडिया कार्यक्रम वर्ष 2019 तक गांवों समेत देश भर में पूरी तरह से लागू हो जाएगा। दरअसल, इस कार्यक्रम के तहत सभी गांवों और ग्रामीण इलाकों को भी इंटरनेट नेटवर्क से जोड़ने की योजना है। डिजिटल इंडिया कार्यक्रम के तहत इंटरनेट को गांव-गांव पहुंचाया जाएगा।

इस कार्यक्रम के तीन प्रमुख अवयव हैं- बुनियादी डिजिटल सुविधाएं, डिजिटल साक्षरता और सेवाओं की डिजिटल डिलीवरी। इस कार्यक्रम के तहत परियोजनाओं से देश को ड़िजिटल आधारित सशक्त  सूचना अर्थव्यवस्था के रूप मे बदजाने का लक्ष्य है।

 आम जनता को सरकारी सेवाएं आसानी से उपलब्ध कराना सरकार का मकसद है, ताकि लोगों को अत्याधुनिक सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी का लाभ मिल सके। इसके लिए आईटी, टेलीकॉम एवं डाक विभाग जोर-शोर से कार्यरत हैं। मोदी सरकार के महत्वाकांक्षी डिजिटल इंडिया अभियान के तहत सरकार अगले तीन वर्षों में 2.5 लाख ग्राम पंचायतों को राष्ट्रीय ऑप्टिकल फाइबर नेटवर्क से जोड़ेगी।

एक डिजिटल लॉकर सेवा का शुभारंभ किया गया है। इस बार 2016 का सीबीएसई के 12वीं के परिणामों को घोषित करते समय ही छात्रों के प्रमाण पत्रों को डिजिटल लॉकर में रखा गया है। डिजिटल लॉकर के  तहत लोग अपने प्रमाण पत्रों एवं अन्य दस्तावेजों को डिजिटल स्वरूप में सुरक्षित रख सकेंगे। इसमें आधार कार्ड नंबर व मोबाइल फोन के जरिये पंजीकरण कराना होगा। डिजिटल लॉकर में सुरक्षित रखे जाने वाले प्रपत्रों को सरकारी एजेंसियों के लिए भी हासिल करना आसान होगा। किसी व्यक्ति के विभि‍न्न दस्तावेज अगर डिजिटल लॉकर में हैं, तो उसे सरकारी योजनाओं के लिए इनकी फोटोकॉपी देने की जरूरत नहीं होगी। जाहिर है, ऐसे में लोगों को काफी सहूलियत होगी।

इतना ही नहीं, इस दौरान ग्रामीण क्षेत्रों में बीपीओ खोलने की योजना का भी शुभारंभ हो गया है। दरअसल, सरकार ग्रामीण क्षेत्रों में नौजवानों को रोजगार उपलब्ध कराने के लिए कॉल सेंटरों की स्थापना करना चाहती है। इन क्षेत्रों में बीपीओ खोलने वालों को सरकार सब्सिडी देगी। इसके साथ ही ऐसी उम्मीद है कि डिजिटल इंडिया वीक के दौरान सरकार डिजिटल इंडिया के ब्रांड ऐंबैसडरों की भी घोषणा करेगी। भारत सरकार अनेक एप्लीकेशंस एवं पोर्टल विकसित करने के लिए भी ठोस कदम उठा रही है जो नागरिकों के जीवन को बेहतर बनाने में अहम भूमिका निभाएंगे। डिजिटल इंडिया कार्यक्रम को मिलने वाली कामयाबी भारत को डिजिटल रूप से सशक्त बनाने और स्वास्थ्य, शिक्षा, कृषि, बैंकिंग आदि क्षेत्रों से संबंधित सेवाओं की डिलीवरी में आईटी के इस्तेमाल में अग्रणी बनाएगी।

डिजिटल इंडिया कार्यक्रम के नौ प्रमुख उद्देश्य हैं जिनका ब्योरा इस प्रकार है : -
  • ब्रॉडबैंड हाईवेज :  इनके जरिए एक तय समय सीमा में बड़ी संख्या में सूचनाओं को प्रेषित किया जा सकता है।
  • सभी को मोबाइल कनेक्टिविटी सुलभ कराना :  शहरी इलाकों में भले ही मोबाइल फोन पूरी तरह से सुलभ हो गया हो, लेकिन देश के अनेक ग्रामीण इलाकों में अभी इस सुविधा का जाल वैसा नहीं हो पा्या है। इससे ग्रामीण उपभोक्ताओं को इंटरनेट और मोबाइल बैंकिंग के इस्तेमाल में आसानी होगी।
  • पब्लिक इंटरनेट एक्सेस प्रोग्राम :  इस कार्यक्रम के तहत पोस्ट ऑफिस को मल्टी-सर्विस सेंटर के रूप में विकसित किया जाएगा। नागरिकों को विभि‍न्न सरकारी सेवाएं मुहैया कराने के लिए वहां अनेक तरह की गतिविधियों को अंजाम दिया जायेगा।
  • ई-गवर्नेंस - प्रौद्योगिकी के जरिये शासन में सुधार : इसके तहत विभिन्न विभागों के बीच सहयोग और आवेदनों को ऑनलाइन ट्रैक किया जाएगा। इसके अलावा स्कूल प्रमाण पत्रों, वोटर आईडी कार्ड्स आदि की जहां भी जरूरत पड़े,  वहां उसका ऑनलाइन इस्तेमाल किया जा सकता है।
  • ई-क्रांति - सेवाओं की इलेक्ट्रॉनिक डिलीवरी : ई-एजुकेशन के तहत सभी स्कूलों को ब्रॉडबैंड से जोड़ने, सभी स्कूलों (ढाई लाख) में वाई-फाई की नि:शुल्क सुविधा मुहैया कराने और डिजिटल साक्षरता सुनि‍श्चि‍त करने की योजना है। किसानों को वास्तविक समय में मूल्य संबंधी सूचना, मोबाइल बैंकिंग आदि की ऑनलाइन सेवा प्रदान करना भी इनमें शामिल है। इसी तरह स्वास्थ्य क्षेत्र में ऑनलाइन मेडिकल परामर्श, रिकॉर्ड और संबंधित दवाओं की आपूर्ति समेत लोगों को ई-हेल्थकेयर की सुविधा देना भी इनमें शामिल है।
  • सभी के लिए सूचना : इस कार्यक्रम के तहत सूचनाओं और दस्तावेजों तक ऑनलाइन पहुंच कायम की जायेगी। इसके लिए ओपन डाटा प्लेटफॉर्म मुहैया कराया जाएगा।
  • इलेक्ट्रॉनिक्स निर्माण में आत्मनिर्भरता : इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र से जुड़े तमाम उत्पादों का निर्माण देश में ही किया जाएगा। इसके तहत ‘नेट जीरो इंपोर्ट्स’ का लक्ष्य रखा गया है, ताकि वर्ष 2020 तक इलेक्ट्रॉनिक्स के मामले में देश आत्मनिर्भरता हासिल कर सके।
  • रोजगार के लिए सूचना प्रौद्योगिकी :  कौशल विकास के मौजूदा कार्यक्रम को इस प्रौद्योगिकी से जोड़ा जाएगा। गांवों व छोटे शहरों में लोगों को आईटी से जुड़ी नौकरियों के लिए प्रशिक्षित किया जाएगा।
  • अर्ली हार्वेस्ट प्रोग्राम्स : डिजिटल इंडिया कार्यक्रम को लागू करने के लिए पहले कुछ बुनियादी ढांचागत सुविधाएं स्थापित करनी होंगी।
यह साफ जाहिर है कि डिजिटल इंडिया कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य देश के नागरिकों को सुशासन  सुलभ कराना और उनकी जिंदगी बेहतर और आसान बनाना है .इस के जरिये ग्राम पंचायतों, स्कूलों विश्वविद्यालयों  में वाय-फाय सुविधाओं  से लेकर शहरो  यानि सभी जगह आम आदमी डिजिटल रूप् से सशक्त किये जाने का लक्ष्य है, जिससे उसकी जिंदगी आसान हो सकेगी साथ ही इससे आई टी, दूर संचार तथा इलेक्ट्रोनिक्स आदि अनेक क्षेत्रों में बड़ी तादाद में लोगों को रोजगार मिल सकेगा।

लेकिन सरकार को  ये भी देखना चाहिये कि ये सब अपने निर्धारित समय में ही पूरा हो, अन्यथा ये भी सरकार की एक घोषणा बन कर रह जायेगी। दूसरी बात ये है कि डिजिटल इंडिया का नाम ही अंग्रेजी में है तो कहीं ऐसा न हो कि भारतीय भाषायें खास कर हिंदी को कोई पूछे ही नहीं और अंग्रेजी को ही बढ़ावा मिलता रहे। वैसे भी भारतीय भाषाओं को तकनीकी रूप से पिछड़ा रखा गया है। सरकार सुनिश्चित करे कि सारे कार्यक्रम में हिंदी की सहभागिता बराबर रहे। और ये नाम डिजिटल इंडिया खुद ही सही नहीं है. इस कार्यक्रम का कोई अच्छा सा हिंदी नाम रखना चाहिये था।

डिजिटल इंडिया के बारे मे और जानने के लिये इसकी वेबसाइट पर जायें।

SarkariNaukri Blog बुधवार, 15 जून 2016
हिंदी ब्लॉगरों के लिये डॉट कॉम लाइफ स्टाइल अभी संभव नहीं
हिंदी ब्लॉगिंग अभी भी शैशव अवस्था में ही है। 2006-2009 के दौरान हिंदी में काफी ब्लॉग शुरू किये गये थे और हिंदी ब्लॉगिंग ने एक आंदोलन का रुप ले लिया था। ब्लॉग के लिये हिंदी में चिठ्ठा शब्द ईजाद किया गया जो कि अपने आप में काफी प्रचलित हुआ।

इसी दौरान अंग्रेजी में भी कई भारतीय और विदेशी ब्लॉगरों ने अलग अलग विषयों पर ब्लॉग बना कर ब्लॉगिंग को नई ऊंचाइयों पर पहुंचा दिया। इन लोगों ने ब्लॉगिंग की इस विधा को पूर्ण समय के लिये अपनाया और कइयों ने तो अपनी अच्छी खासी नौकरियां छोड़ कर ब्लॉगिंग को अपनाया और ब्लॉगिंग ने भी इनके निराश नहीं किया और इन सभी ब्लॉगरों को अच्छा खासा नाम और मिला और लाखों रुपये की मासिक आमदनी भी मिली।  ब्लॉगिंग के इस काम से ब्लॉगरों को कहीं भी कहीं भी काम करने की सुविधा मिली और अपने समय को वो लोग अपने परिवार और अपने शौक को दे पा रहे हैं। इसी से डॉट कॉम लाइफ स्टाइल शब्द ने जन्म लिया। इस  डॉट कॉम लाइफ स्टाइल में आदमी अपने समय का खुद मालिक है और अपने आराम करने और सोने के समय में भी पैसा कमा रहा है।  अपने समय का अपने हिसाब से प्रयोग कर सकता है।  हालांकि ऐसी स्थिति पाने के लिये अच्छी खासी मेहनत और किस्मत भी चाहिये।
Dot Com Life Style for Hindi Bloggers

पर हिंदी ब्लोगिंग वालो के लिये ये अभी बहुत दूर की कौड़ी है। एक तो हिंदी ब्लॉगिंग में उच्च स्तरीय ब्लॉग नहीं हैं, वहीं ब्लॉग से पर्याप्त मात्रा में आय न हो पाना भी एक कारण है। दरअसल हिंदी ब्लगिंग की सबसे बड़ी समस्या अभी भी पाठकों की कम संख्या है।  कम ब्लॉग ट्रैफिक के कारण हिंदी ब्लॉगरों उतनी  कमाई भी नहीं कर पाते है। साथ ही साथ हिंदी ब्लॉगरों ने पिछले 2-3 सालों में इन सब हालातों को देखते हुये हिंदी के तमाम ब्लॉगरों ने  सोशल मीडियी जैसे कि फेसबुक और ट्विटर पर अपने आपको स्थानान्तरित कर लिया जहां  पर तुरंत कमेंट और लाइक के द्वारा उनको पसंद किया जा रहा है ओर हिदी ब्लॉगरों ने अपने आपको सोशल माडिया पर स्थापित कर लिया है।  अपने मोबाइल से हिंदी ब्लॉगर कहीं से भी अपनी बात लिख पा रहे हैं। इससे हिन्दी ब्लॉगरों को पाठक मिले हैं। लेकिन हिन्दी ब्लॉगिंग के विकास के लिये कोई ज्यादा अच्छी बात नहींं है। इस कारण हिंदी मे प्रोफेशनल या पेशेवराना ब्लॉगिंग का स्वतंत्र विकास नहीं हो पा रहा है। दरअसल सोशल मीडिया से पैसा कमाना तो अभी संभव नहीं है। भविष्य में शायद हो सकता है।

एक और अन्य बात ये है कि सोशल मीडिया में लिखे गये ब्लॉग को पेज खोजी इंजन जैसे कि गूगल और बिंग इत्यादि द्वारा नहीं सहेजा जाता है। जिसकी वजह से इंटरनेट संसार पर हिंदी के पेजों की संख्या अन्य भाषा के पेजों के मुकाबले में कम है। इसी वजह से विज्ञापन देने वाले संस्थान हिंदी के वेब पेजों पर अभी हिंदी में विज्ञापन नहीं दे रहे हैं। और इसी वजह से इंटरनेट पर विज्ञापनों का प्रबंधन करने वाली लगभग सभी कंपनियां हिंदी ब्लॉगरों को अपने विज्ञापन के लिये अयोग्य घोषित कर देती हैं। हालंकि गूगल ऐडसेंस ने अब हिंदी के वेब पेजों के लिये अपना दरवाजा खोल दिया है। पर हिंदी विज्ञापन अभी भी न के बराबर हैं।

मार्च 2016 में गूगल ने गूगल ऐडसेंस के ऊपर एक कार्याशाला का आयोजन किया था, जिसमें मुझे भी जाने के लिये निमंत्रण  मिला था। इस कार्याशाला में गूगल की एक प्रस्तुति हिंदी वेब पेजों के लिये थी। गूगल के अनुसार आने वाले समय में भारत में स्मार्ट फोन बढ़ने वाले हैं और ये बढ़ोत्तरी अधिकांशतया छोटे शहरों, कस्बों और ग्रामीण इलाकों में होने वाली है, ऐसे समय में वो अपनी भाषा यानी कि मुख्य रुप से हिंदी में ही इंटरनेट पर रहना चाहेंगे। गूगल का ये मानना है कि इन भाषाओं में कंटेट की जबर्दस्त मांग आने वाली है। गूगल ने अपनी तरफ से इसके लिये काफी तैयारी कर रखी है। गूगल ऐडसेंस को पहले ही हिंदी के लिये खोल दिया गया है, और गूगल ने अनुवादक और टाइपिंग टूल दिये हैं। अब गूगल ने अपने सर्च  इंजन में भी हिंदी, हिंगलिश, अंग्रेजी हिंदी मिश्रित भाषा, अंग्रेजी में लिखी गई हिंदी को समझ कर उससे हिंदी को जानने वाले कलन विधि (अलगोरिदम) का विकास कर लिया है। लेकिन गूगल के अनुसार हिंदी में इटरनेट पर अभी कथन (कंटेंट) कम है और ये काम तो केवल हिंदी वाले ही कर सकते हैं। गूगल की इस बात को पहले से स्थापित अंग्रेजी के कई बड़े और नामी विषय आधारित वाले ब्लॉगरों ने समझ लिया है और वो अपनी विषय सामग्री को ब्लॉग के हिंदी संसकरणों को भी शुरु कर रहे हैं या करने वाले हैं।

ऐसे में जब तक हिंदी ब्लॉगर इंटरनेट पर हिंदी में कथन का विकास नहीं करते तब तक हिंदी ब्लॉगरों की कमाई बढ़ने वाली नहीं है और हिंदी ब्लॉगरों के लिये  डॉट कॉम लाइफ स्टाइल तब तक संभव नहीं है। पर आने वाले समय में तय है।    इसलिये हम सब हिंदी ब्लॉगरों को इंटरनेट पर खूब लिखना चाहिये और हिंदी के प्रसार प्रचार में योगदान देना चाहिये।

SarkariNaukri Blog सोमवार, 13 जून 2016
तेंदुए के साथ साथ रहना सीखना होगा
पिछले कुछ समय से भारत के तमाम शहरों, कस्बों और गांवो से  तेंदुए के घरों में या लोगों की बस्तियों में घुस आने की खबरें आती रहती हैं। कुछ समय पहले बैंगलुरु के एक स्कूल में  तेंदुए के घुसने की खबर सुर्खी बनी थी। इससे पहले आगरा, मुम्बई, लखनऊ, देहरादून इत्यादि तमाम शहरों से  तेंदुए के लोगों के घरों और बस्तियों में घुस आने के समाचार रह रह कर आते रहते हैं। दरअसल रिहायशी इलाके लगातार बढ़ रहे हैं साथ ही साथ आधुनिक विकास ले लिये भी तमाम जमीन घेर ली जा रही हैं और जंगल क्षेत्र लगातार घट रहे हैं। इस वजह से छोटे जंगली जानवर भी कम होते जा रहे हैं और इन पर निर्भर बड़े जंगली जानवरों को अपनी भूख मिटाने के लिये बचे खुचे छोटे जंगली जानवर कम पड़ रहे हैं।

वनस्पतियों के कम होने से अन्य जानवर भी मानव बस्तियों में धावा बोलने लगे हैं। बंदर इसका एक उदाहरण है जो कि खाने की तलाश में मानव बस्तियों पर निर्भर हो गये हैं और तमाम शहर और कस्बे इन बंदरों से परेशान हैं।

बैंगलुरू के स्कूल में तेंदुआ
बैंगलुरू के स्कूल में तेंदुआ
तो  तेंदुए भी खाने की तलाश में और सुरक्षित पनाहघर ढूंढने के लिये मानव बस्तियों की और आ रहे हैं और रोजाना हमको ये  तेंदुए के घरों में घुसने का समाचार मिलता है।

तेंदुए के साथ साथ रहना सीखना होगा (Living with Leopards -  लिविंग विद लियोपार्डस) 

तो समस्या ये है कि अब क्या किया जाये?  एक तो ये कर सकते हैं कि जैसे चल रहा है वैसे ही चलने दें और कोशिश की जाये कि  तेंदुए मानव बस्तियों में ना आ पायें, दूसरा ये हो सकता है कि हम उनकी स्थिति को समझें और  तेंदुओं के साथ सामन्जस्य बैठाया जाये। लोगों को   तेंदुओं  के खतरे को कम करने की व्यावहारिक सलाह दी जानी चाहिये । यह  व्यावहारिक सलाह  उन सभी लोगों के लिये मुफीद रहेगी जो कि ऐसे इलाकों में रहते हैं जो तेंदुआ बहुल हैं और जहां से तेंदुओं के लोगों के घरों में घुसने के समाचार आते रहते हैं।  यहां लोगों के घरों में आए दिन तेंदुओं के घुसने के मामले सामने आते रहते हैं।

तेंदुओं के साथ रहते हुए खतरे को कम करने के व्यावहारिक उपाय
  • यह समझें कि तेंदुए इस इलाके स्वाभाविक निवासी हैं, और सिर्फ इनका दिखना खतरा नहीं है
  • तेंदुए हमारी बनाई हुई बाड़, वन क्षेत्र और कॉलोनियों को नहीं समझते।
  • यह सुनिश्चित करें कि अंधेरा होने के बाद बच्चे बड़ों की निगरानी में रहें। 
  • अंधेरा होने के बाद अकेले न निकलें। अगर जरूरी हो मोबाइल हो तो इस पर संगीत बजाएं। तेंदुओं को यह लगना चाहिए कि आसपास लोग हैं। तेंदुएं लोगों को संपर्क में आने से बचते हैं।
  • अगर कोई तेंदुआ दिख जाता है तो उसे चुपचाप वहां से जाने दें।
  • अगर कोई तेंदुआ दिख जाए तो उसके चारों ओर भीड़ न लगाएं। भीड़ लगने से वह डर जाएगा और भागने के क्रम में किसी को नुकसान पहुंचा सकता है।
  • कूड़ा निपटान की सही व्यवस्था सुनिश्चित करें और कुत्तों को घर के अंदर रखें।
  • तेंदुओं से निपटने का एक मात्र अधिकार वन विभाग को है। किसी भी आपात स्थिति में कंट्रोल रूम को फोन करें।

SarkariNaukri Blog शुक्रवार, 10 जून 2016
मसूरी की ऐतिहासिक इमारतें
उत्तराखंड के देहरादून जिले में स्थित प्रसिद्ध हिल स्टेशन मसूरी की स्थापना अंग्रेजों (कैप्टन यंग) द्वारा 1827 में की गई थी। यह देहरादून से 38 किलोमीटर दूर है और यहां पर कई प्रसिद्ध पर्यटन स्थल हैं और यहां की मौसम गर्मियेों नें सुहावना और सर्दियों में ठंडा रहता है, जिसकी वजह से यहां साल भर पर्यटकों की भीड़ लगी रहती है, खास तौर पर राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली के लोगों द्वारा क्योंकि यो दिल्ली से सिर्फ 285 किलोमीटर है।  चूकि मसूरी को अंग्रेजों द्वारा अपने रहने के स्थान पर विकसित किया गया था, आज भी यहां उनकी बनाई हुई पुरानी  इमारते शान से खड़ीं है। पिछले दिनों हम भी मसूरी की यात्रा पर परिवार सहित गये थे। वहीं पर कुछ ऐसी ही कुछ इमारतों की फोटो हमने खींची थी, तो मसूरी की मनोरम फोटो के साथ वहां कि कुछ ऐतिहासिक इमारतों को भी दखिये।
मसूरी का मनोरम दृश्य
मसूरी का मनोरम दृश्य
मसूरी का मनोरम दृश्य - कंपनी गार्डन
मसूरी का मनोरम दृश्य - कंपनी गार्डन में स्थित कृत्रिम झील
मसूरी का सेंट जार्ज कॉलेज
मसूरी का सेंट जार्ज कॉलेज
मसूरी का मेथोडिस्ट चर्च
मसूरी का मेथोडिस्ट चर्च

मसूरी का मेथोडिस्ट चर्च
मसूरी का मेथोडिस्ट चर्च

मसूरी का मेथोडिस्ट चर्च
मसूरी का मेथोडिस्ट चर्च
मसूरी का रेलवे रिजर्वेशन आरक्षण केंद्र
मसूरी का रेलवे रिजर्वेशन आरक्षण केंद्र

मसूरी लाइब्रेरी
मसूरी लाइब्रेरी पुस्तकालय
मसूरी में महाराजा कपूरथला का महल
मसूरी में महाराजा कपूरथला का महल
मसूरी की एक्सचेंज बिल्डिंग The-Exchange-Mussoorie
मसूरी की एक्सचेंज बिल्डिंग The Exchange Mussoorie
मसूरी की एक्सचेंज बिल्डिंग The-Exchange-Mussoorie
मसूरी की एक्सचेंज बिल्डिंग The Exchange Mussoorie

SarkariNaukri Blog सोमवार, 6 जून 2016
स्मार्ट ट्रैवलर कैसे बनें?
गर्मियों का मौसम है और बच्चों की छुट्टियां शुरू हो चुकी हैं। जब से भारत में औसत आय में बढ़ोतरी हुई है और स्मार्ट ट्रैवलर कैसे बनें? विभिन्न वेबसाइटों द्वारा ऑनलाइन होटल और रेल या हवाई यात्रा बुक करने की सुविधा हुई है, भारत में पर्यटन को जबर्दस्त बढ़ावा मिला है। भारतीय अब अधिक यात्रायें करने लगे हैंं। ऐसे में स्वाभाविक है कि गर्मियों की इन छुट्टियों में लोग कहीं न कहीं घूमनें का कार्यक्रम बना ही रहे होंगे। लेकिन घूमनें का कार्यक्रम बनाने के लिये कई बातों का ध्यान रख कर आप  स्मार्ट ट्रैवलर बन सकते हैं।  स्मार्ट ट्रैवलर बनने के लिये प्रमुख रूप से इन बातों का  ध्यान रखें : 
  • पहले से ही रेल या हवाई यात्रा और होटल को बुक करें -  पहले से आरक्षण कराने से आपको पैसे की भी बचत होगी और यात्रा में किसी प्रकार की परेशानी भी नहीं होगी। 
  • कम सामान पैक करें -  अगर आप ज्यादी समान ले जा सकते हैं तो ठीक है, यध्द्यपि कम सामान ही ले जाना बेहतर है। आपको कोशिश ये करनी चाहिये कि सामान आधा और धन दुगना लेकर यात्रा करें। दूसरी जगह पर कुछ सामान खरीद पर कुछ नया किया जा सकता है। आजकल शोपिंग भी यात्राओं का जरुरी भाग है।    
  • स्लीप मास्क और ईयर प्लग रखें -  ये खास तौर पर हवाई जहाज, रेल या आपके होटल के कमरे में काम आ सकते हैं।  
  • सूटकेस का आदर्श उपयोग करें -  कपड़ों को को तह करके रखने के बजाय लपेट कर रखें। मोजे और अंडरवियर इत्यादि को जूतों के अंदर रखा जा सकता है। कोई भी जगह खाली न छोड़ें।  
  • एक शॉल रखें -  यह हवाई जहाज, रेल  या फिर शाम को घूमते समय में  आपको हल्की ठंड से बचाने में काम आ सकता है। सामान में रखने में भी हल्कंका होता है और कम जगह घेरता है।  
  • बैग रखें - किचन में सेैडविच रखने वाल छोटा लिफाफा और अन्य प्रकार के कई छोटे छोटे बैगआपकी यात्रा का कुछ सामान रखने में काम आ सकते हैं। इनको किसी भी बैग में रखा जा सकता है। जूते और गंदे कपड़े इत्यादि भी इन्हीं प्रकार के बैगों में रखे जा सकते हैं।   
  • हवाई अड्डे और रेलवे स्टेशन से खाने का समान न खरीदकर अपना खाने का सामान लेकर जायें -  आप अपने पैसे को इस प्रकार बचा सकते हैं और साथ ही साथ अगर रेल या हवाई जहाज के देर से चलने की स्थिति में ये खाना का सामान आपके काम आ सकता है।
  • सामान को अलग अलग पैक में रखें अगर आप यात्रा में एक से अधिक शहरों में जा रहे हों तो सामान को अलग अलग इस प्रकार पैक करें कि आप को अलग अलग शहरों में सामान एक ही पैक में मिल जाये और   आप को सारा सामान ऊपर नीचे न करना पड़े और कई बार पैकिंग न करनी पड़े।  साथ ही अगर आप दो या अधिक लोग जा रहे हैं तो सामान को एक दूसरे के सामान के साथ साझा कर सकते हैं इससे अगर कोई बैंग खो जाये तो आपका कुछ सामान दूसरे के बैग में मिल जायेगा।    
  • कई पोर्ट वाला एक्सटेंन्शन यूएसबी और बिजली का बोर्ड लेकर चलें अपने मोबाइल, टैबलेट और कैमरा के लिये कई पोर्ट वाला एक्सटेंन्शन य़ूएसबी और बिजली का बोर्ड लेकर चलें। ये तो आजकल के डिजिटल जीवन में तो सबसे आवश्यक है। इसके अलावा अगर हो सके तो अतिरिक्त बैटरी और डाटा कार्ड भी रखें।   
  • घर छोड़ने से पहले अपने कागजातों की फोटोकॉपी करें - अगर आप विदेश में जा रहें हैं तो अपने पासपोर्ट की दो फोटोकॉपी  करके रख लें। इसमें से एक कॉपी  हमेशा अपने पास रखें।
  • पुराना सामान वहीं छोड़े - अपने पुराने टी-शर्ट, अंडरवीयर, मोजे और इसी तरह की छोड़ने लायक पुरानी वस्तुओं को पहनने के बाद उसी जगह पर अगर आप छोड़ कर आयेंगे तो एक तो पुराने पहनने वाले कपड़ों से छुटकारा पायेंगे साथ ही साथ आपके बैग का वजन भी कम हो जायेगा। 
तो सोचना क्या? ऊपर लिखी बातों पर अमल करें और अपनी यात्री की तैयारी करें और स्मार्ट ट्रैवलर बनें।

SarkariNaukri Blog मंगलवार, 31 मई 2016
बचपन की ये लाइन्स याद कीजिये
Bachpan ki Lines बचपन कि ये लाइन्स बचपन की ये लाइन्स .
जिन्हे हम दिल से गाते
गुनगुनाते थे ..
और खेल खेलते थे ..!!
तो याद ताज़ा कर लीजिये ...!!


▶  मछली जल की रानी है,
       जीवन उसका पानी है।
       हाथ लगाओ डर जायेगी
       बाहर निकालो मर जायेगी।

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▶  पोशम्पा भाई पोशम्पा,
       सौ रुपये की घडी चुराई।
       अब तो जेल मे जाना पडेगा,
       जेल की रोटी खानी पडेगी,
       जेल का पानी पीना पडेगा।
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▶  आलू-कचालू बेटा कहाँ गये थे,
       बन्दर की झोपडी मे सो रहे थे।
       बन्दर ने लात मारी रो रहे थे,
       मम्मी ने पैसे दिये हंस रहे थे।
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▶  आज सोमवार है,
       चूहे को बुखार है।
       चूहा गया डाक्टर के पास,
       डाक्टर ने लगायी सुई,
       चूहा बोला उईईईईई।
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▶  झूठ बोलना पाप है,
       नदी किनारे सांप है।
       काली माई आयेगी,
       तुमको उठा ले जायेगी।
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▶  चन्दा मामा दूर के,
       पूए पकाये भूर के।
       आप खाएं थाली मे,
       मुन्ने को दे प्याली में।
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▶  तितली उड़ी,
       बस मे चढी।
       सीट ना मिली,
       तो रोने लगी।
       ड्राईवर बोला,
       आजा मेरे पास,
       तितली बोली ” हट बदमाश “।
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▶  मोटू सेठ,
       पलंग पर लेट ,
       गाडी आई,
       फट गया पेट
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SarkariNaukri Blog शनिवार, 28 मई 2016
लू लगने से मृत्यु क्यों होती है?
log-loo-lagne-se-mar-rahe-hain देश में इन गर्मियों में तापमान औसत रुप से 45 डिग्री के आस पास पहुंच गया है और कई हिस्सों में में तो 47 से 51 डिग्री तक तापमान है। रोजाना तापमान के उच्चतम रिकार्ड बन रहे हैं।  जोधपुर के फलोदी में तापमान 51 डिग्री सेल्सियस रहा जो कि देश में 1951 के बाद सबसे ज्यादा है।  इस भयंकर गर्मी में जबर्दस्त लू चल रही है और दिल्ली से आंध्रप्रदेश तक सैकड़ो लोग लू लगने से मर रहे हैं। मौसम विभाग ने लोगों को सचेत करते हुये ऑरेंज एलर्ट जारी किया है और सुबह 11 बजे से दोपहर के बाद 3 बजे तक बाहर धूप में बहुत जरुरी होने पर ही बाहर सावधानी से निकलने की सलाह दी है।

हम सभी धूप में घूमते हैं फिर कुछ लोगो की ही धूप में जाने के कारण अचानक मृत्यु क्यों हो जाती है? आइये देखें
  • हमारे शरीर का तापमान हमेशा 37° डिग्री सेल्सियस होता है, इस तापमान पर ही हमारे शरीर के सभी अंग सही तरीके से काम कर पाते है।
  • पसीने के रूप में पानी बाहर निकालकर शरीर 37° सेल्सियस टेम्प्रेचर मेंटेन रखता है, लगातार पसीना निकलते वक्त भी पानी पीते रहना अत्यंत जरुरी और आवश्यक है।
  • पानी शरीर में इसके अलावा भी बहुत कार्य करता है, जिससे शरीर में पानी की कमी होने पर शरीर पसीने के रूप में पानी बाहर निकालना टालता है।( बंद कर देता है )
  • जब बाहर का टेम्प्रेचर 45° डिग्री के पार हो जाता है और शरीर की कूलिंग व्यवस्था ठप्प हो जाती है, तब शरीर का तापमान 37° डिग्री से ऊपर पहुँचने लगता है।
  • शरीर का तापमान जब 42° सेल्सियस तक पहुँच जाता है तब रक्त गरम होने लगता है और रक्त मे उपस्थित प्रोटीन पकने लगता है I( जैसे उबलते पानी में अंडा पकता है )
  • स्नायु कड़क होने लगते है इस दौरान सांस लेने के लिए जरुरी स्नायु भी काम करना बंद कर देते हैं।
  • शरीर का पानी कम हो जाने से रक्त गाढ़ा होने लगता है, ब्लडप्रेशर low हो जाता है, महत्वपूर्ण अंग (विशेषतः ब्रेन ) तक ब्लड सप्लाई रुक जाती है।
  • व्यक्ति कोमा में चला जाता है और उसके शरीर के एक- एक अंग कुछ ही क्षणों में काम करना बंद कर देते हैं, और उसकी मृत्यु हो जाती है।
बचने के लियो क्या करें? 
  • गर्मी के दिनों में ऐसे अनर्थ टालने के लिए लगातार थोडा थोडा पानी पीते रहना चाहिए, और हमारे शरीर का तापमान 37° मेन्टेन किस तरह रह पायेगा इस ओर ध्यान देना चाहिए।
  • कृपया 12 से 3 के बीच ज्यादा से ज्यादा घर, कमरे या ऑफिस के अंदर रहने का प्रयास करें।
  • कृपया स्वयं को और अपने जानने वालों को पानी की कमी से ग्रसित न होने दें।
  • किसी भी अवस्था मे कम से कम 3 ली. पानी जरूर पियें।किडनी की बीमारी वाले प्रति दिन कम से कम 6 से 8 ली. पानी जरूर लें।
  • जहां तक सम्भव हो ब्लड प्रेशर पर नजर रखें। किसी को भी हीट स्ट्रोक हो सकता है।
  • ठंडे पानी से नहाएं।
  • मांस का प्रयोग छोड़ें |
  • फल और सब्जियों को भोजन मे ज्यादा स्थान दें।
  • एक बिना प्रयोग की हुई मोमबत्ती को कमरे से बाहर या खुले मे रखें, यदि मोमबत्ती पिघल जाती है तो ये गंभीर स्थिति है।
  • शयन कक्ष और अन्य कमरों मे 2 आधे पानी से भरे ऊपर से खुले पात्रों को रख कर कमरे की नमी बरकरार रखी जा सकती है।
  • अपने होठों और आँखों को नम रखने का प्रयत्न करें।

हीट वेव (लू) कोई मजाक नही है। बचाव में ही सावधानी है। कुछ दिन धूप में बाहर न निकलें।

SarkariNaukri Blog शुक्रवार, 20 मई 2016
अपने बैंक से परेशान होने पर बैंकिंग लोकपाल योजना में शिकायत कीजिये
बैंकिंग  लोकपाल योजनाआम तौर पर हम भारतीयों की सरकार और सरकारी संस्थाओं से कोई खास उम्मीद नहीं होती है। इसी लिये सरकारी क्षेत्र के बैंकों में आम भारतीय अपना खाता खोल ले ये ही बड़ी बात होती थी और है, बाकि अच्छी सेवा उसे मिले और उसके भी कुछ अधिकार हैं, इसके बारे में कोई उम्मीद कोई नहीं रखता था।  पिछली सदी के 90 के दशक के आरम्भ में भारतीय बैंको को प्रतियोगित्मक बनाया गया और भरत में कई विदेशी और निजी बैंकों ने अपनी सेवा  आरम्भ की। इन बैंकों ने अपनी विभिन्न नई प्रकार की सेवाओं और उत्पादों से ग्राहकों को तेजी से अपनी ओर खींचा।  सरकारी क्षेत्र के बैंक अभी भी नहीं चेते और उनकी सेवाओं की हालत अभी भी खस्ता ही है, पर कुछ सुधार शुरू हुआ है।

ऐसे में ग्राहकों को बैंको द्वारा   अच्छी सेवा न  दी जाने की स्थिति में कोई शिकायत होने पर ग्राहक कहां जाये? क्या करे?   ये एक बड़ा सवाल था।   बैक ग्राहकों को शिकायत  के लिये एक मंच देने के लिये भारतीय रिजर्व बैंक ने बैंकिंग  लोकपाल योजना लागू की है। इस योजना मे अगर आपको अपने बैंक में बैंकिंग  लेन-देन और कारोबार के बारे  में कोई शिकायत है या आप बैंकिंग सेवाओं में कोई कमी महसूस करते हैं, जैसे कि
  • लिखित आश्वासनो को पूरा न करना
  • वित्तीय उत्पादों/सेवाओं के विक्रय के समय बैंक द्वारा प्रमुख शर्तों को उजागर न करना
  • बैंकिंग सेवाओं और अन्य वित्तीय उत्पादों से संबंधित प्रभारों और शर्तों को स्पष्ट रुप से न बताना
  • भारतीय रिजर्व बैंक के दिशा निर्देशों का पालन ल करना
  • ग्राहकों के प्रति बैं की प्रतिबद्धता संबंधी संहिता, जैसे कि भारतीय बैंकिंग संहिता और मानक बोर्ड द्वारा जारी की गई है, का पालन न करना
तो कृपया अपनी शिकायत के निवारण के लिये पहले अपनें बैंक से समर्क करें,  यदि एक महीने में आपकी शिकायत का निवारण नहीं होता या आप बैंक से प्राप्त जवाब से संतुष्ट नहीं हैं तो आप अपने बैंक के लिये भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा नियुक्त किये गये बैंकिंग लोकपाल से संपर्क कर सकते हैं। वे आपकी शिकायत के निवारण में सहायता करेंगे।  बैंकिंग लोकपाल को  आप डाक/फैक्स द्वारा लिखित शिकायत करें। बैंकिंग लोकपाल को शिकायत करने में कुछ भी खर्चा नहीं करना पड़ता है।

ध्यान रहे कि बैंकिंग लोकपाल को शिकायत करते समय अपनी शिकायत से संबंधित ये बातें अवश्य बतायें - (1) नाम, पता, मोबाइल ऩंबर और ईमेल आईडी (2) जिस बैंक के बारे में शिकायत है उसकी शाखा /  कार्यालय का नाम और पता (3) पूरी शिकायत का विवरण (4) इसके कारण हुये नुकसान का स्वरूप और इसकी मात्रा।

बैंकिंग लोकपाल के बारे में और जानने के लिये http://www.bankingombudsman.rbi.org.in पर अंग्रेजी  में जानकारी के लिये और https://www.rbi.org.in/commonman/Hindi/scripts/againstbank.aspx पर हिंदी में जानकारी के लिये जायें और अगर किसी बैक से कोई शिकायत हो तो इस पर जा कर अपनी शिकायत इलेक्ट्रानिक रुप से दर्ज कर सकते हैं।

SarkariNaukri Blog सोमवार, 9 मई 2016