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ट्रैवलिंग यात्रा सफर पर्यटन सफर शेर-शायरी मुहावरे गाने और वाक्य



ट्रैवलिंग यात्रा सफर सैर शेर-शायरी मुहावरे वाक्य



यूं आजकल पर्यटन ट्रैवलिंग का शौक काफी बढ़ गया है। हर किसी को दुनिया घूमने का शौक़ नहीं होता, पर जिन्हें होता है वो ही जानते हैं कि जगह जगह घूमना क्या होता है। घमुक्कड़ ही पर्यटन के लिये यात्रा की असली क़ीमत समझते हैं।  घूमने-फिरने से हमें जो भी मिलता है वो पढ़ने लिखने या फिर क़िताबें पढ़ कर नहीं पा सकते। 

चाहे धार्मिक कारण हो, चाहे ज्ञान की उत्कंठा हो, व्यापार के लिये हो या फिर पर्यटन के लिये ही यात्रा हो, अनंत काल से मनुष्य यात्रा कर ही रहा है। अलग अलग भाषाओं में पर्यटन के कारण जन मानस में कुछ बाते, वाक्य, मुहावरे, कवितायें, गाने, शेर-शायरी लोगों के दिलो दिमाग में बैठ गई हैं।  

इसी घुमक्कड़ी, पर्यटन, ट्रैवलिंग और सफर पर आधारित कुछ बातें, वाक्य, शेर-ओ-शायरी, फिल्म गाने और संवाद इत्यादि का हिंदी भाषा में संकलन हम यहां आपके लिए लेकर आएं है जो आपको काफी पसंद आएगा, ऐसी उम्मीद है। Travelling Tourism Sher Shayari Status Quotes Songs in Hindi. आप अपनी टिप्पणी के माध्यम से पर्यटन के अपने पसंद की ऐसी ही लाइनें, गाने वगैरह साझा कर सकते हैं।


 ट्रैवलिंग और टूरिज्म से संबंधित  शेर-शायरी, मुहावरे, कहावतें, गाने, वाक्य, Status and Quotes का ये संकलन अपने आप में पूर्ण संकलन नहीं है। जैसे जैसे नई बाते पता लगती जायेंगी यहां पर समय समय पर अद्यतन (Update) किया जाता रहेगा। 

देखें - पर्यटन और घूमने फिरने पर आधारित और ब्लॉग पोस्ट

पर्यटन से संबंधित शब्द/Words


  • यात्रा (Yatra) – To Travel
  • यात्री (Yatri) – Traveller
  • पर्यटक (ParyaTaka) – Tourist
  • पर्यटन ( ParyaTan) – Tourism
  • पथिक (Pathik) – That on the road
  • प्रवासी (Pravasi) – Living in another country
  • सफर (Safar) - यात्रा To Travel
  • मुसाफिर (MusaFir) - यात्री Traveller
  • घूमना (GhumNa) – यात्रा To Travel
  • फिरना (FirNa) – To Travel
  • घुमक्कड़ (Ghumakkar) - मुसाफिर/यात्री Traveller
  • घुमक्कड़ी (Ghumakkari) - यात्रा To Travel
  • भ्रमण (Bhramarh) - यात्रा To Travel 


देखें - भारत के राज्यों के पर्यटन विभागों की टैगलाइनें

Travelling and Tourism Status in Hindi

पर्यटन/यात्रा/सफर की हिंदी कहावतें/वाक्य/विचार


  • किसी जगह के बारे में ज़िन्दगी भर सुनने से अच्छा है कि एक बार उसे जाकर खुद देख लो।
  • बहुत हो गया काम काज, चल यार कहीं घूम के आते हैं।
  • दुनिया एक किताब है, और जो यात्रा नही करते है वे केवल एक पन्ना पढ़ते है।  
  • जिन्दगी जीने का असली मजा यात्रा में ही हैं।  
  • हजारों मील की यात्रा भी एक कदम से शुरू होती है।
  • सत्य से पराजित होने के पूर्व झूठ आधी दुनिया की यात्रा कर लेता है।  
  • आपकी यात्रा सफल और सुखद हो।
  • वही सबसे तेज चलता है, जो अकेला चलता है। 
  • समय किसी की प्रतीक्षा नहीं करता।
  • जिंदगी, जिंदादिली का नाम है, मुर्दादिल क्या ख़ाक जिया करते हैं।
  • धीरे चलोगे तो बार बार मिलेंगे, नहीं तो हरिद्वार में मिलेंगे।
  • कोस कोस पर पानी बदले, चार कोस पर वाणी।
  • मियाँ की दौड़ मस्जिद तक।
  • सफलता एक निरंतर यात्रा है न की एक मंजिल।
  • ख़ुशी एक सफर है, ना कि मंजिल।
  • हजार मील का सफर भी एक कदम से ही आरंभ होता है।
  • यात्रा के अंत तक पहुंचना अच्छा है, लेकिन अंत में वो यात्रा ही है जो मायने रखती है।
  • आओ संग में एक कहानी बनाते हैं, चलो कहीं घूम के आते हैं।
  • एक किताब पढ़ने से जितना सीखते हैं, उससे हजार गुना यात्रा करने से सीखते हैं।
  • इंसान के यात्रा करने के जुनून ने ही उसे चांद तक पहुंचा दिया।
  • आप खुशी को नहीं खरीद सकते हैं, लेकिन यात्रा के लिये हवाई जहाज का टिकट खरीद सकते हैं, ये खुशी खरीदने के बराबर है।
  • सबसे अच्छी यात्रायें सबसे अच्छे प्यार की तरह होती हैं, जिसका वास्तव में अंत नहीं है।
  • सही मार्ग पर चलना यात्रा है और बिना लक्ष्य के गलत राह पर चलना भटकना है।
  • यात्रा हर कोई करता है पर कुछ लोग पूरी दुनिया की यात्रा करते हैं और कुछ लोग सिर्फ घर से ऑफिस तक ही यात्रा करते हैं।
  • हर किसी को दुनिया घूमने का शौक़ नहीं होता, पर जिन्हें होता है वो इसकी असली क़ीमत समझते हैं।
  • पहुंचने से अधिक जरूरी ठीक से या्त्रा करना है -- गौतम बुद्ध
  • यात्रा करने पर हम सबसे ज्यादा सीखते हैं।
  • सफ़र सिर्फ मंजिलों तक पहुंचने के लिए नहीं होते बल्कि उन तमाम जगहों से गुजरने के लिए भी होते हैं जो मंजिल के रास्ते में पड़ती हैं..! - ममता शर्मा
  • चरैवेति चरैवेति॥ (चलते रहो, चलते रहो) - एक संस्कृत वाक्य/विचार


पर्यटन पर हिंदी मुहावरे


  1. नौ सौ चूहे खाके बिल्ली हज को चली
  2. जैसा देश वैसा भेष
  3. अधर में लटकना या झूलना
  4. गधे के सिर से सींग की तरह गायब होना
  5. छूमंतर होना।
  6. उड़न छू होना
  7. कभी नाव गाडी पर, कभी गाडी नाव पर
  8. परमश्वर की माया, कहीं धूप, कहीं छाया
  9. बहती गंगा में हाथ धोना
  10. रफ़ू-चक्कर होना
  11. नौ दो ग्यारह हो जाना
  12. चम्पत होना
  13. ठहर-ठहर के चलिए, जब हो दूर पडाव
  14. देर आयद ,दुरुस्त आयद
  15. हरी झंडी दिखाना
  16. दूर के ढोल सुहावने (होते/लगते हैं)
  17. हवा से बातें करना
  18. आसमान पर चड़ना
  19. गंगा नहाना
  20. घाट घाट का पानी पीना
  21. लौट के बुद्धू घर को आये


बोलचाल के पर्यटन यात्रा शब्द


भारत के जनमानस में कुछ शब्द और बोल यात्रा से संबंधित इस तरह के बन गये हैं कि वो रोजाना की बोलचाल में बहुत ही ज्यादा प्रयोग होते हैं। इन सब बोल शब्दों को वाक्यों मे प्रयोग करके बोला जाता है और इन सबके मतलब को सब समझते है। जब आप यात्रा करते हुये भारत की जनता से घुले मिलेंगे तो आप को ये सब सुनाई देंगे। आइये देखें ऐसे ही 10 बोल -
  1.  मछली बाजार - सब अस्त व्यस्त होना (Unorganized)
  2. भेड़ चाल - बिना सोचे किसी की बात के मानना (Herd Mentality)
  3. कछुआ चाल - बहुत ही धीरे धीरे काम करना (Slow Motion)
  4. घोड़े की तरह भागना - बहुत तेज दौड़ना (Walk like a Horse)
  5. चंपत होना - भाग जाना या गायब हो जाना (To hide)
  6. पतली गली से निकल - चुपचाप निकल जाना (Exit Silently)


Travelling Yatra Tourism Status Quotes in Hindi


पर्यटन पर संस्कृत विचार/वाक्य


  • चरैवेति चरैवेति॥  - चलते रहो, चलते रहो
  • पर्यटन् पृथिवीं सर्वां, गुणान्वेषणतत्परः। - जो गुणों की खोज में तत्पर है,वे लोग सारी पृथिवी घुमते है।
  • हदये सुखसम्पत्तिः पदे पर्यटनं फलम्। - उनके मन में सुख, संपत्ती और पैरों में पर्यटन होता है।
  • यस्मिन्प्रचीर्णे च पुनश्चरन्ति; स वै श्रेष्ठो गच्छत यत्र कामः। - जो लोग सामनेआए हुए (मार्ग) पर चलते है, वह श्रेष्ठ होते है और उनको अभीष्ट प्राप्त होता है।
  • चरन्ति वसुधां कृत्स्नां वावदूका बहुश्रुताः। - बुद्धीमान् और वाक्-कुशल लोग, सारी पृथ्वी घुमते है।
  • चरन्मार्गान्विजानाति  - पथिक व्यक्ति को मार्ग पता चलता है।
  • आस्ते भग आसीनस्य, ऊध्वर्स्तिष्ठति तिष्ठतः। शेते निपद्यमानस्य, चराति चरतो भगः। - बैठे हुए मनुष्य का सौभाग्य बैठा रहता है, उठ कर खडे होने वाले व्यक्ति का सौभाग्य भी उठ कर खड़ा हो जाता है,लेटे हुए मनुष्य का सौभाग्य सोया रहता है, और चलने वाले व्यक्ति का सौभाग्य उसके साथ- साथ चल पड़ता है।
  • चरन् वै मधु विन्दति, चरन् स्वादुमुदुम्बरम्। सूयर्स्य पश्य श्रेमाणं, यो न तन्द्रयते चरन्। - जो सदा श्रमशील, गतिशील हैं, वो सदा मधुपान (शहद/ अमृत / परिश्रम का सुफल) करते हैं, कर्मयोगी को सदा श्रेष्ठ कर्म का श्रेष्ठ परिणाम मिलता है। देखो, सूर्य कितना, कर्मशील और सृजन शील है, पल भर भी जो दूसरों के कल्याण के लिये अपने श्रम से कभी विमुख नही हैं ।
  • अन्योन्यवीर्यनिकषाः पुरुषा भ्रमन्ति। - एक दुसरे की पहचान जो वीरता से करते है, वे लोग घुमते है।
  • दुःखं हन्तुं सुखं प्राप्तुं ते भ्रमन्ति मुधाम्बरे। - वे आकाश में मुग्ध रूप से, दुःख भुलने के लिये और सुख के प्राप्ति के लिये घूमते (उडते) है (हमारी तरह)।
  • हृदि श्रीर्मस्तके राज्य पादे पर्यटनं फलम्। - उनके मन में संपत्ति, सिर के उपर राज्य (का दायित्व) और पैरों में पर्यटन होता है।
  • योजनानां सहस्त्रं तु शनैर्गच्छेत् पिपीलिका।  - शनैः शनैः ही सही, सतत चलते रहने पर, चींटी जैसी छोटी सी जीव भी सहस्रों योजन की यात्रा पूरी कर लेती है।
  • यस्तु संचरते देशान् यस्तु सेवेत पण्डितान् ।
  • तस्य विस्तारिता बुद्धिस्तैलबिन्दुरिवाम्भसि ॥ - भिन्न देशों में यात्रा करने वाले और विद्वानों के साथ संबंध रखने वाले व्यक्ति की बुद्धि उसी तरह बढ़ती है, जैसे तेल की एक बूंद पानी में फैलती है।


ट्रैवलिंग पर बॉलीवुड हिंदी फिल्म गाने


     

  1. ज़िन्दगी एक सफ़र है सुहाना यहाँ कल क्या हो किसने जाना (फिल्म अंदाज - सुने/देखें)
  2. जिंदगी का सफर है ये कैसा सफर कोई समझा नही कोई जाना नही (फिल्म सफर - सुने/देखें)
  3. मुसाफिर हूँ यारों, ना घर है ना ठिकाना, मुझे चलते जाना (फिल्म परिचय सुने/देखें)
  4. यूं ही चला चल राही, कितनी हसीन है ये दुनिया (फिल्म स्वदेस - देखें/सुनें)
  5. सुहाना सफर और ये मौसम हसीं (फिल्म मधुमती - देखें/सुनें)
  6. दुनिया की सैर कर लो (फिल्म  Around the World एराउंड द वर्ल्ड - देखें/सुनें)
  7. चला जाता हूँ किसी की धुन में धड़कते दिल के तराने लिए (फिल्म मेरे जीवन साथीदेखें/सुनें)
  8. वहां कौन है तेरा मुसाफिर जाएगा कहां, दम ले ले घड़ी भर (फिल्म गाइडदेखें/सुनें)
  9. हम हैं राही प्यार के... जो भी प्यार से हम उसी के हो लिये (फिल्म नौ दो ग्यारहदेखें/सुनें)
  10. क्या मौसम है, चल कहीं दूर निकल जायें (फिल्म दूसरा आदमी देखें/सुनें)
  11. चल सैर गुलशन की तुझको कराऊं (फिल्म चरणों की सौगन्ध देखें/सुनें)
  12. उड़ें, खुले आसमान में ख्वाबों के परिंदे (फिल्म जिन्दगी न मिलेगी दुबारा देखें/सुनें)
  13. चलो ना, ढूंढे शहर नया, जहां मुस्कराहटे हैं बिखरी... (फिल्म जिन्दगी न मिलेगी दुबारा देखें/सुनें)
  14. हम जो चलने लगे, चलने लगे हैं ये रास्ते (फिल्म जब वी मेट देखें/सुनें)
  15. किसी मंजर पर में रूका नहीं, कभी खुद से भी मैं मिला नहीं.. फिर से उड़ चला (फिल्म रॉकस्टार देखें/सुनें)
  16. धुआं छंटा खुला गगन मेरा, नयी डगर नया सफर मेरा...रूबरू (फिल्म रंग दे बसंती देखें/सुनें)
  17. धीरे चलना है मुश्किल जो जल्दी ही सही.. हम चले बहार में.. गुनगुनाती राहो में (फिल्म पीकू देखें/सुनें)
  18. आंखो मे सपने लिये, घर से हम चल तो दिये, जाने अब ये राहें ले जायेंगी कहां... तन्हा दिल.. (गायक शान देखें/सुनें)
  19. सफर.. कैसा है ये सफर, मंजिलों की न है कोई खबर (गायक भुवन बाम देखें/सुनें)
  20. ये हसीं वादियां ये खुला आसमां.. आ गये हम कहां... (फिल्म रोजा देखें/सुनें)
  21. यूं ही कट जाएगा सफर साथ चलने से,के मंजिल आयेगी नजर साथ चलने से  (फिल्म हम हैं राही प्यार के देखें/सुनें)
  22. जरा होले होले चलो मोरे साजना, हम भी पीछे हैं तुम्हारे (फिल्म सावन की घटा देखें/सुनें)
  23. मैं निकला गड्डी लेके, एक मोड़ आया (फिल्म गदर देखें/सुनें)
  24. घूमें बंजारे घूमें गलियां ये बेचारे (फिल्म फगली देखें/सुनें)
  25. ओ बन्देया, ढूंढ़े है क्या? राहें तेरी, हैं घर तेरा। चलना वहां खुद तक कहीं पहुंचे जहां (फिल्म नोटबुक देखें/सुनें)
  26. रूक जाना नहीं तू कहीं हार के, कांटों पे चलके मिलेंगे साये बहार के। ओ राही ओ राही, ओ राही ओ राही।। (फिल्म इम्तिहान देखें/सुनें)
  27. चल अकेला, चल अकेला, चल अकेला
    तेरा मेला पीछे छूटा राही चल अकेला

    हज़ारों मील लम्बे रास्ते तुझको बुलाते
    यहाँ दुखड़े सहने के वास्ते तुझको बुलाते
    है कौन सा वो इंसान यहाँ पे जिस ने दुख ना झेला
    चल अकेला ...
    - (फिल्म संबंध देखें/सुनें)
  28. निकले थे कहां जाने के लिये, पहुंचेंगे कहां, मालूम नहीं। अब अपने कदमों को, मंजिल का निशां मालूम नहीं।। (फिल्म बहू-बेगम देखें/सुनें)

और देखें - कुछ प्रसिद्ध हिंदी फिल्म सीन

पर्यटन पर बॉलीवुड हिंदी फिल्म संवाद/वाक्य



  1. रास्ते की परवाह करूंगा तो मंजिल बुरा मान जायेगी - फिल्म वंस अपोन ए टाइम इन मुंबई
  2. 22 तक पढाई 25 तक नौकरी 26 पे छोकरी 30 पे बच्चे 60 पे रिटायरमेंट और फिर मौत का इंतज़ार… ऐसी घिसी-पिटी ज़िन्दगी थोड़े ही जीना चाहता हूँ - फिल्म ये जवानी है दीवानी
  3. मैं उड़ना चाहता हूं, दौड़ना चाहता हूं, गिरना भी चाहता हूं, बस रुकना नहीं चाहता - फिल्म ये जवानी है दीवानी
  4. एक ही शहर एक ही घर एक ही कमरे में, तू अपनी सारी लाइफ काट देगी? सोच कर डर नहीं लगता - फिल्म ये जवानी है दीवानी
  5. मुझे पहाड़ो में जाना है, फिर से हिमालय देखना है, बाइक राइड, सनराइज, बोनफायर जलाना है - फिल्म ये जवानी है दीवानी - फिल्म रॉकस्टार
  6. जहां से तुम मुझे लाये हो, मैं वहां वापस नहीं जाना चाहती, पर ये रास्ता बहुत अच्छा है, मैं चाहती हूं कि ये रास्ता कभी खतम न हो - फिल्म हाईवे
  7. शादी के बाद न, हम पहाड़ों में रहेंगे, मुझे पहाड़ बहुत पसंद हैं। रियली! - फिल्म जब वी मेट
  8. हम लोगों को हर साल एक ना एक बार गोवा जरूर आना चाहिये - फिल्म दिल चाहता है
  9. पिघले नीलम से बहता हुआ ये सामान, नीली  नीली सी खामोशियां, ना कहीं है जमीन ना कहीं आसमां, सरसराती हुई टहनियां, पट्टियां कह रही हैं कि बस एक तुम हो यहां - फिल्म जिन्दगी न मिलेगी दोबारा
  10. दिन का पूरा फायदा उठाओ, मेरे दोस्त पहले इस दिन को पूरी तरह जियो फिर 40 के बारे में सोचना - फिल्म जिन्दगी न मिलेगी दोबारा
  11. मुझे यहाँ से कही दूर ले चल हार्दिक मुझे एक ब्रेक चाहिए, हमें एक ब्रेक चाहिए - फिल्म गो गोवा गौन


और देखें - सदाबहार हिंदी फिल्म डॉयलाग

Travelling Safar Sher Shayari


सफर ट्रैवलिंग शेर-ओ-शायरी



ज़िदगी किसी के लिये एक सुहाना और किसी के लिये मुश्किल सफ़र है। हम ताउम्र जीवन के अंजाने रास्ते पर चलते रहते हैं। शायरों और कवियों/गीतकारों ने जिंदगी रे सफ़र को अपने ढंग से समझा है और अपनी शायरी व कविताओं में ढाला है। पेश है 'सफ़र' पर मशहूर शायरों के कुछ चुनिंदा शेर -

सैर कर दुनिया की गाफिल, जिंदगानी फिर कहाँ?
ज़िंदगी गर कुछ रही तो, नौजवानी फिर कहां?
- राहुल सांकृत्यायन

दुनिया-दुनिया सैर सफर थी शौक की राह तमाम हुई,
इस बस्ती में सुबह हुई थी, इस बस्ती में शाम हुई।।
- सज्जाद बाकर रिज्वी

मैं अकेला ही चला था जानिब-ए-मंज़िल मगर
लोग साथ आते गए और कारवाँ बनता गया

- मजरूह सुल्तानपुरी

जिनमें अकेले चलने के हौसले होते हैं
एक दिन उन्हीं के पीछे काफिले होते हैं

भीड़ का हिस्सा बनूं ये फितरत नहीं है मेरी 
मुझे आदत है अपने काफिले खुद बनाने की


मशहूर हो जाते हैं वो जिनकी हस्ती बदनाम होती है
कट जाती है जिंदगी सफ़र में अक्सर जिनकी मंजिलें गुमनाम होती हैं


किसी को घर से निकलते ही मिल गई मंज़िल
कोई हमारी तरह उम्र भर सफ़र में रहा
-अहमद फ़राज़

न जाने कौन सा मंज़र नज़र में रहता है
तमाम उम्र मुसाफ़िर सफ़र में रहता है

-निदा फ़ाज़ली

ज़िंदगी है मुख़्तसर आहिस्ता चल
कट ही जाएगा सफ़र आहिस्ता चल
- शाहीन ग़ाज़ीपुरी

मुझे ख़बर थी मेरा इन्तजार घर में रहा
ये हादसा था कि मैं उम्र भर सफ़र में रहा

-साक़ी फ़ारुक़ी

गर फिरदौस बर रुए ज़मीं अस्त,
हमीं अस्तो, हमीं अस्तो, हमीं अस्त
-
जहांगीर ने कश्मीर के बारे में फारसी में कहा था -  अर्थात अगर धरती पर कहीं स्वर्ग है तो यहीं है, यहीं पर है और सिर्फ यहीं पर है

सफर हो शाह का या काफिला फकीरों का
शजर मिजाज समझते हैं राहगीरों का


उम्र को हराना है तो शौक जिंदा रखिये,
घुटने चलें या न चलें मन उड़ता परिंदा रखिये

जिंदगी यूँ हुई बसर तन्हा
काफिला साथ और सफर तन्हा 

- गुलजार

काफिले इस राह पर आते रहे जाते रहे
राहबर सब को मसाफत का सिला देता रहा
- कतील शिफाई

मजरूह काफिले की मिरे दास्तां ये है
रहबर ने मिल के लूट लिया राहजन का साथ
- मजरूह सुल्तानपुर

आंख रहजन नहीं तो फिर क्या है
लूट लेती है काफिला दिल का 
- जलील मानिकपुरी

हुजूम ऐसा कि राहें नजर नहीं आतीं
नसीब ऐसा कि अब तक तो काफिला न हुआ
- अहमद फराज

किन मंजिलों लुटे हैं मोहब्बत के काफिले
इंसां जमीं पे आज गरीब-उल-वतन सा है

मैं खुद भी शामिल नहीं सफर में
पर लोग कहते हैं, काफिला हूं मैं

- वसीम बरेवली

मुझ को चलने दो, अकेला है अभी मेरा सफर
रास्ता रोका गया तो काफिला हो जाउँगा
- वसीम बरेवली

खुशबू का काफिला ये बहारों का सिलसिला
पहुंचा है शहर तक तो मेरे घर भी आयेगा

- मंसूर उस्मानी

तुम्हारा क्या तुम्हें आसां बहुत रास्ते बदलना है
हमें हर एक मौसम काफिले के साथ चलना है
- जलील आली

आप इक और नींद ले लीजिये
काफिला कूच कर गया कब का

- जौन एलिया

मंजिलों से कह दो किसी और की हो जायें
के अब तुझे पाने की हसरत नहीं रही

मिलते गये हैं मोड़ हर मुकाम पर
बढ़ती गई हैं दूरियां मंजिल जगह जगह
- सूफी तबस्सुम

राह में उस की चलना है ऐश करा दें कदमों को
चलते जायें चलते जायें यानी खातिर-ख्वाह चलें 
- जौन एलिया

लीजिये क्यूं अहसान किसी काफिले क
सफर में जब तन्हा ही जाना पड़ता है

कुछ मेरे बाद और भी आयेंगे काफिले
काटे ये रास्ते से हटा लूं तो चैन लूं
- तसव्वुर किरतपुरी

वो जीवन में क्या आये, बदल गयी जिंदगी हमारी,
वरना सफ़र-ए-जिंदगी कट रही थी, धीरे-धीरे

दिल से मांगी जाए तो, हर दुआ में असर होता है
मंजिलें उन्हीं को मिलती हैं, जिनकी जिंदगी में सफ़र होता है

घूमना है मुझे सारा जहां, तुम्हें अपने साथ ले कें,
बनानी हैं बहुत सी यादें, हाथों में तुम्हारा हाथ ले के

मंजिल बड़ी हो तो, सफ़र में कारवां छूट जाता है,
मिलता है मुकाम तो, सबका वहम टूट जाता है

सफ़र-ए- जिंदगी का तू अकेला ही मुसाफिर है,
बेगाने हैं ये सब जो अपनापन जताते हैं,
छोड़ जाएँगे ये साथ इक दिन तेरा राहों में, 
वो जा आज खुद को तेरा हमसफ़र बताते हैं

इन अजनबी सी राहों में, जो तू मेरा हमसफ़र हो जाये,
बीत जाए पल भर में ये वक़्त, और हसीन सफ़र हो जाये


बीत जाएगा ये सफ़र भी दर्द की राहों का,
मिलेगा साथ जब खुशियों की बाहों का,
बढ़ाते रहना कदम, मत रुकना कभी,
होगा रुतबा तेरा जैसे शहंशाहों का

रहेंगे दर्द जिंदगी में, तो ख़ुशी का इंतजाम क्या होगा?
निकल पड़े हैं जो बदलने खुद को,
न जाने इस सफ़र का अंजाम क्या होगा?

मशहूर हो जाते हैं वो,
जिनकी हस्ती बदनाम होती है,
कट जाती है जीवन सफ़र में अक्सर,
जिनकी मंजिलें गुमनाम होती हैं

मुकम्मल होगा सफ़र एक दिन,
बस दिल में ताजा जज़्बात रखना,
तमाम मुश्किलें आएंगी लेकिन,
अपने काबू में हर हालत रखना


दिल से मांगी जाए तो,
हर दुआ में असर होता है,
मंजिलें उन्हीं को मिलती हैं,
जिनकी जिंदगी में सफ़र होता है

वो जीवन में क्या आये, बदल गयी जिंदगी हमारी,
वरना सफ़र-ए-जिंदगी कट रही थी, धीरे-धीरे


सफ़र जो धूप का किया तो तजुर्बा हुआ...
वो जिंदगी ही क्या जो छाँव छाँव चली

आओ संग में एक कहानी बनाते हैं,
चलो कहीं घूम के आते हैं!


ज़ख्म कहां कहां से मिले हैं, छोड़ इन बातों को,
ज़िंदगी तू तो बता, सफर और कितना बाकी है

डर हम को भी लगता है रास्ते के सन्नाटे से
लेकिन एक सफ़र पर ऐ दिल अब जाना तो होगा 

- जावेद अख़्तर

है कोई जो बताए शब के मुसाफ़िरों को 
कितना सफ़र हुआ है कितना सफ़र रहा है
- शहरयार

अपनी मर्ज़ी से कहाँ अपने सफ़र के हम हैं
रुख़ हवाओं का जिधर का है उधर के हम हैं
-निदा फ़ाज़ल

सफर का एक नया सिलसिला बनाना है
अब आसमान तलक रास्ता बनाना है
तलाशने हैं अभी हम-सफर भी खोए हुए
कि मंजिलों से उधर रास्ता बनाना है
- शहबाज ख्वाजा

मिरे शौक-ए-सैर-ओ-सफर को अब नए
इक जहां की नुमूद कर
तिरे बहर ओ बर को तो रख दिया है कभी का
मैं ने खंगाल कर

- असलम महमूद

न जाने कैसा रिश्ता है रहगुजर का कदमों से
थक के बैठ जाऊं तो रास्ता बुलाता है
- शकील आजमी

मुसीबतें लाख आएंगी जिंदगी की राहों में,
रखना तू सबर,
मिल जाएगी तुझे मंजिल इक दिन
बस जारी रखना तू सफ़र।

उम्र बीत गयी लेकिन सफ़र ख़त्म न हुआ,
इन अजनबी सी राहों में जो खुद को ढूँढने निकला।

है नसीबों में सफ़र तो मैं कहीं भी, क्यूं रुकूं?
छोड़ के आया किनारे, बह सकूं जितना बहूं
दिन गुज़रते ही रहे, यूं ही बेमौसम
रास्ते थम जाये पर रुक न पायें हम
- फिल्म मलंग के गाने मलंग का एक मुखड़ा

कोई मंजिल नहीं बाकी है मुसाफिर के लिये
अब कहीं और नहीं जायेगा, घर जायेगा।
- असलम फारूखी

इस सफर में नींद ऐसी खो गई,
हम न सोए रात थक कर सो गई।

- राही मासूम रजा

घर से निकले हैं, हम सफर में हैं
कहिये मंजिल से इंतजार करे।

रास्ते कहां खत्म होते हैं, जिन्दगी के सफर में,
मंजिलें तो वही हैं जहां ख्वाहिशें थम जायें।


हज़ारों उलझनें राहों में ,और कोशिशें बेहिसाब ।
उसी का नाम हैं ज़िंदगी ,चलते रहिए जनाब।

हम लोग जाने कैसे मसाफिर हैं वरना यार
दो चार - ढोकरों में संभल जाना चाहिये।
- शकील आजमी

सफर में अब के अजब तजरबा निकल आया
भटक गया तो रास्ता निकल आया।
- राजेश रेड्डी

मंजिलें भी जिद्दी हैं, रास्ते भी जिद्दी हैं,
देखते हैं कल क्या हो, हौंसले भी जिद्दी हैं।


निकले थे कहां जाने के लिये, पहुंचेंगे कहां, मालूम नहीं।
अब अपने कदमों को, मंजिल का निशां मालूम नहीं।
- साहिर लुधियानवी

अदम की जो हकीकत है वो पूछो अहल-ए-हस्ती से
मुसाफिर को तो मंजिल का पता मंजिल से मिलता है।।

- दाग देहलवी

ये हम ही आ गये मुश्किले सफर मे,
बहुत आसां था मंजिल तक पहुंचना।
- संजू शब्दिता

हमने तमाम उम्र अकेले सफर किया
हम पर किसी खुदा की इनायत नहीं रही

- दुष्यंत कुमार

जुस्तुजू खोए हुओं की, उम्र भर करते रहे
चांद के हमराह हम, हर शब सफर करते रहे
- परवीन शाकिर

मकाम तक भी हम अपने पहुंच ही जायेंगे
खुदा तो दोस्त है दुश्मन हजार राह में हैं
थकें दो पांव तो चल सर के बल न ठहर 'आतिश'
गुल-ए-मुराद है मंजिल में खार राह में है

- हैदर अली आतिश

मंजिल मिलेगी भटक कर ही सही,
गुमराह तो वो हैं जो घर से नकले ही नह
- मिर्जा गालिब

ये आरजू थी कि हम उम्र के साथ साथ चलें
मगर वो शख्स वो रास्ता बदलता जाता है

- नोशी गिलानी

मैं लौटने के इरादे से जा रहा हूं मगर,
सफर सफर है मेरा इंतजार मत करना...
- साहिल सहरी नैनीताली


जिन्दगी दी है तो जीने का हुनर भी देना,
पांव बख्शे हैं तो तौफीक-ए-सफर भी देना

- मेराज फैजाबादी


सफर में धूप तो होगी जो चल सको तो चलो
सभी हैं भीड़ में तुम भी निसल सको तो चलो
- निदा फाजली


ये आंसू ढूँड़ता है तेरा दामन
मुसाफिर, अपनी मंजिल जानता है

- असद भोपाली

मैं लौटने के इरादे से जा रहा हूं मगर,
सफर सफर है मेरा इंतजार मत करना...
- साहिल सहरी नैनीताली


सैर ओ सफर करें जरा, सिलसिला गुमां चले,
हम तो चले, कहां चले, बात ये है, कहां चले..???

- जौन एलिया


सफर हया का पुर-लुफ्त है मगर ऐ दोस्त,
मुसीबतें भी उसी रहगुजर में रहती हैं... !!!
- मनीश शुक्ला


कभी दो चार कदमो का सफर तय नहीं हो पाता
कभी मालों से लम्बा फासला कुछ भी नहीं होता

- तरुणा मिश्रा


न थके हैं पांव कभी, न ही हिम्मत हारी है
मैंने देखे हैं दौर कई और आज भी सफर जारी है...


इतना आसान था क्या उसका सफर से जाना,
मेंने सोचा ही नहीं साथ में चलते चलते।



जिससे पैरों के निशां भी नहीं छोड़े पीछे
उस मुसाफिर का पता भी नहीं पूछा करते.. 
- गुलजार


घर में बेचैनी हो तो अगले सफर की सोचना
फिर सफर नाकाम हो जाये तो घर की सोचना।

- शुजा खावर


मुझ को चलने दो अकेला है अभी मेरा सफर,
रास्ता रोका गया तो काफिला हो जाउँगा।
- वसीम बरेलवी


गुजर जाते हैं खूबसूरत लम्हें यूँ ही
मुसाफिर की तरह,
यादें वहीं खड़ी रह जाती हैं,
रुके रास्तों की तरह



हम-सफर चाहिये हुजूम नहीं,
इक मुसाफिर भी काफिला है मुझे
- अहमद फराज


दो चार रोज ही तो मैं मेरे शहर का था,
वरना तमाम उम्र तो मैं भी सफर का था।

जन्नत में भी कहां सुकून मिल सका मुझे,
ओहदे पे वहां भी कोई तेरे असर की था।


मंजिल पे पहुँचने की तुझे लाख दुआएं,
आनंद बस पड़ाव तेरी रहगुजर का था।। 

- आनन्द कुमार द्विवेदी


सोचा था तुझ से दूर निकल जायेंगे कहीं,
देखा तो हर मकाम तिरी रह गुजर में है।
- अज्ञात


भला वो लोग क्या जानें सफर की लज्जतों को,
जिन्हें मंजिल मिली हो ठोकरें खाने से पहले।

- अकील नोमानी


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Manisha रविवार, 9 अगस्त 2020

बाढ़ आपदा प्रबंधन पर कैसे ध्यान दें और क्या करें? 


आजकल भारत में मानसून की बारिश का मौसम है। भारत के मौसम विभाग ने अप्रैल माह में ही बताया था कि भारत में इस बार अच्छी बारिश होगी। ऐसे में स्वाभाविक है कि इस समय वर्षा होगी कहीं कम और कहीं ज्यादा।

जहां ज्यादा बारिश होगी वहां बाढ़ का भी खतरा रहेगा। इस बाढ़ को लेकर हम हर साल समाचार पत्रों में और टीवी पर देखते रहते हैं। ये बाढ़ लोगों की जान और माल को भारी नुकसान पहुंचाती है। ऐसी खबरों को हर साल देख कर मन में ख्याल आता है कि शायद बाढ़ प्रबंधन पर कोई भी ध्यान नहीं दे रहा है। तो हमें बाढ़ आपदा प्रबंधन पर कैसे ध्यान देना चाहिये और क्या करें?

Flood Management
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बाढ़ ग्रस्त क्षेत्र


इस समय भारत में बिहार, असम, अरुणाचल प्रदेश एवं उत्तर-पूर्व के कई क्षेत्रों में बिहार की बयावह स्थिति है। इसी बाढ़ के बीच मानसून की वजह से और रोजाना होने वाली और बारिश भी प्रशासन के सामने चुनौती बनी हुई है। भारी बारिश से देश के कई अन्य इलाकों भी में हाल खराब है।

मुंबई, दिल्ली, गुजरात, राजस्थान के कई इलाकों में भी बारिश होने से पानी भरने से कई जगहों पर बाढ़ आई हुई है।

ऐसे में मौसम विभाग द्वारा काफी इलाकों में भारी से भारी बारिश का अलर्ट जारी किया गया है। इससे हालात और खराब होने की संभावना है।

वर्तमान में भारत के कई क्षेत्रों के बारे में लगभग पहले से ही पता होता है कि बरसात के मौसम में थोड़ी सी ठीक बारिश होने पर बाढ़ आ सकती है। अब तो हालत ये हो गई है बाढ़ आपदा प्रबंधन न होने की वजह से बड़े बड़े शहरो जैसे कि चेन्नई, मुंबई, अहमदाबाद, श्रीनगर कहीं भी अचानक बाढ़ आ जाती है और जान माल का भारी नुकसान होता है।

भारत में प्रमुख बाढ़ क्षेत्रों में गंगा-ब्रह्मपुत्र-मेघना और बिहार में नेपाल से लगता हुआ क्षेत्र जिसमें कोसी नदी का डूब क्षेत्र शामिल है। देश में नदियों के बहाव से आने वाली कुल बाढ़ का करीब 60 प्रतिशत इसी क्षेत्र में आती है।

देश के बाढ़ की सर्वाधिक आशंका वाले क्षेत्रों में पंजाब, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, दिल्ली, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, बिहार और पश्चिम बंगाल के हिमालयी नदियों के थाले में आने वाले क्षेत्र शामिल हैं। जम्मू कश्मीर, पंजाब के कुछ हिस्से, हरियाणा, पश्चिम उत्तर प्रदेश और हिमाचल प्रदेश को कवर करने वाले कुछ उत्तर-पश्चिमी नदी थालों में भी बाढ़ की आशंका रहती है। झेलम, सतलुज, व्यास, रावी और चेनाब मुख्य नदियां हैं जो इस क्षेत्र में बाढ़ का कारण बनती हैं।

मध्य प्रदेश, उड़ीसा, आंध्र प्रदेश और महाराष्ट्र मध्यवर्ती एवं प्राय:द्वीपीय नदी थालों के अंतर्गत आते हैं, जहां नर्मदा, ताप्ती, चम्बल और महानदी जैसी नदियां बाढ़ लेकर आती हैं। गोदावरी, कृष्णा, पेन्नार और कावेरी में भी भारी बाढ़ आने से विस्तृत भूभाग जलमग्न हो जाते हैं और बाढ़ की समस्या आमतौर पर गंभीर होती है।
राष्ट्रीय बाढ़ आयोग द्वारा संकलित आंकड़ों के अनुसार देश में करीब चार करोड़ हेक्टेयर भूमि ऐसी है, जिसमें बाढ़ की आशंका रहती है। औसतन हर वर्ष करीब 80 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में वार्षिक बाढ़ आती है, जिससे करीब 37 लाख हेक्टेयर फसल क्षेत्र प्रभावित होता है।

एक अनुमान के अनुसार, देश में 60 प्रतिशत से अधिक नुकसान नदियों में आने वाली बाढ़ के कारण होता है। 40 प्रतिशत क्षति भारी वर्षा और तूफानों के कारण होती है। हिमालयी नदियां देश में होने वाले कुल नुकसान में करीब 60 प्रतिशत योगदान करती हैं।

प्रायद्वीपीय नदी थालों में अधिकतर क्षति चक्रवातों के कारण और हिमालयी नदियों में करीब 66 प्रतिशत नुकसान बाढ़ से और 34 प्रतिशत भारी वर्षा के कारण होता है। राज्यवार अध्ययन से पता चलता है कि देश में बाढ़ से करीब 27 प्रतिशत क्षति बिहार में, 33 प्रतिशत उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड मेें तथा 15 प्रतिशत पंजाब और हरियाणा में होती है।

भारत में अधिकतर बाढ़ भारी वर्षा या पर्वतीय और नदी धारा क्षेत्रों में बादल फटने के कारण आती है। एक दिन में करीब 15 सेंटीमीटर वर्षा होने पर नदियां उफनने लगती हैं। यह धारणा पश्चिमी घाटों के पश्चिमी तटवर्ती क्षेत्रों, असम और उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल और भारत के गंगा के मैदानों को प्रभावित करती है।

क्या बाढ़ का कारण बारिश है?


भारत में आने वाली विभिन्न आपदाओं में बाढ़ सर्वाधिक सामान्य है और इसके संकट बार बार आते रहते हैं। परंपरागत दृष्टि से यह कहा जाता है कि बाढ़ आने के लिए भारी वर्षा जिम्मेदार है।

यह बात भारत के संदर्भ में विशेष रूप से लागू होती है जहां कृषि क्षेत्र के लिए मानसून अनिवार्य है। यह सार्वभौमिक सत्य है कि बाढ़ भारी वर्षा के कारण आती है, जबकि समूचे वर्षा जल को धारण करने की प्राकृतिक जलमार्गों की क्षमता से अधिक जल गिरता है।

परंतु, कुछ अन्य तथ्य भी हैं, जो यह सुझाव देते हैं कि बाढ़ हमेशा भारी वर्षा से ही नहीं आती है। हाल ही में यह नई और गंभीर आयाम वाली धारणा सामने आई है कि बाढ़ में मानव का भी योगदान है, जो मानव निर्मित आपदा में परिणत होता है।

इस तरह बाढ़ के दो पहलू हैं - प्राकृतिक और मानव निर्मित। मानव निर्मित घटक अत्यंत खतरनाक है जो प्राकृतिक घटकों के साथ मिल कर प्राकृतिक आपदा को अधिक घातक आयाम प्रदान करता है।

बाढ़ का कारण बनने वाले अप्राकृतिक घटकों में धरती का तापमान बढऩा, पर्यावरणीय ह्रास, नगरीय और खेती संबंधी उपयुक्त योजना का अभाव, उपलब्ध जमीन के प्रत्येक इंच पर अमीर होने का लालच, विशेषकर ऐसे क्षेत्रों में, जो वर्षा ऋतु के दौरान जल निकासी का मार्ग प्रदान करते हैं, आदि प्रमुख हैं।

अन्य अप्राकृतिक घटकों में तूफान या उष्णकटिबंधीय चक्रवात, सुनामी या सामान्य नदी स्तरों से ऊंची लहरें उठना शामिल हैं, जिनके कारण मुख्य रूप से तटवर्ती क्षेत्रों में भारी मात्रा में पानी जमा हो जाता है और व्यापक क्षेत्र डूब जाते हैं।

बांधों को क्षति पहुंचाने वाले भूकंप, खुश्क मौसम के दौरान भी, निम्नवर्ती धारा क्षेत्र में बाढ़ का कारण बन सकते हैं। लेकिन यह कोई नियमित घटना नहीं है और कभी-कभार ऐसा हो जाता है।

इधर हाल में मौसम वैज्ञानिकों को मानसून की पद्धति में अनियमितता का आभास हुआ है, जिसे देखते हुए यह आपदा घटक और भी चिंताजनक हो गया है।

वर्षा का मौसम तीन से चार महीने की अल्पावधि में अधिक संकेंद्रित रहता है, जिससे इन महीनों में नदियों में विनाशकारी बाढ़ आती है। कई बार देखा गया है कि पूरे महीने की बारिश उस क्षेत्र में 1-2-3 दिन में ही लगातार गिर जाती है, इससे क्षेत्र विशेष का बारिश का औसत तो बना रहता है लेकिन खूब सारी बारिश एक साथ होने से वहां पर बाढ़ आपदा का खतरा बन जाता है।

एक नया आयाम और भी है, जो पिछले कुछ वर्षों से दिखाई दे रहा है, कि बेमौसम की बरसातें होती हैं और यहां तक कि मॉनसून की जो परंपरागत अवधि है, उसमें भी बदलाव दिखाई देता

बाढ़ में योगदान करने वाले अन्य घटकों में नदी तल में वृद्धि, जो गाद और रेत जमने के कारण होती है, शामिल हैं, क्योंकि बरसों तक नदियों की सफाई के लिए कोई अभियान नहीं चलाया जाता है।

हिमालयी नदियां अपने साथ भारी सामग्री लेकर चलती हैं, जिसमें गाद और रेत की मात्रा बहुत अधिक होती है, जो अंतत: निचले जलग्रहण क्षेत्रों में जमा हो जाती है। नतीजतन नदियों की जलवहन क्षमता कम हो जाती है और निकटवर्ती क्षेत्रों में बाढ़ आ जाती है।

कई बार लोग नदियों के किनारे के क्षेत्रों में घर और अन्य निर्माण कर लेते हैं इससे भी नदी को बारिश के पानी को निकालने के लिये अधिक जगह नहीं मिल पाती है। नदियों में जल के मुक्त प्रवाह में तटबंधों, नहरों और रेलवे संबंधी परियोजनाओं के निर्माण के कारण भी रुकावट पैदा होती है।

2013 की उत्तराखण्ड की विनाशकारी बाढ़ इसी कारण से थी। इसका एक और गंभीर उदाहरण झेलम नदी है, जिसके किनारों पर श्रीनगर और अन्य कस्बेे स्थित हैं। दीर्घावधि वर्षा से नदी में आने वाले आकस्मिक और भारी जलप्रवाह को झेलम नियंत्रित नहीं रख पाती है, क्योंकि पिछले 5 दशकों से नदी क्षेत्र में एकत्र गाद और रेत की सफाई के लिए कोई प्रयास नहीं किए गए हैं।

बाढ़ के अन्य कारण


बाढ़ का एक बहुत बड़ा कारण नदी तल में वृद्धि, जो गाद और रेत जमना है, शामिल है, क्योंकि बरसों तक नदियों की सफाई के लिए कोई अभियान नहीं चलाया जाता है। हिमालयी नदियां अपने साथ भारी सामग्री लेकर चलती हैं, जिसमें गाद और रेत की मात्रा बहुत अधिक होती है, जो अंतत: निचले जलग्रहण क्षेत्रों में जमा हो जाती है।

नतीजतन नदियों की जलवहन क्षमता कम हो जाती है और निकटवर्ती क्षेत्रों में बाढ़ आ जाती है। नदियों में जल के मुक्त प्रवाह में तटबंधों, नहरों और रेलवे संबंधी परियोजनाओं के निर्माण के कारण भी रुकावट पैदा होती है। पिछले कई दशकों से नदी क्षेत्रो में एकत्र गाद और रेत की सफाई के लिए कोई प्रयास नहीं किए गए हैं।

वनों की कटाई का प्राकृतिक जलवायु परिवर्तन पर प्रत्यक्ष प्रभाव पड़ता है, जिससे वैश्विक तापमान में इजाफा हो रहा है। पर्वतीय ढलानों पर वनों के काटने से मैदानों की ओर नदियों के प्रवाह में रुकावट आती है, जिससे उनकी जलवहन क्षमता पर असर पड़ता है, जिससे पानी तेजी से नीचे की तरफ आता है।

वनों के ह्रास के कारण भूमि कटाव की समस्या भी पैदा होती है क्योंकि वृक्ष पर्वतों की सतह को बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं और तेजी से नीचे आने वाले वर्षा जल के लिए प्राकृतिक बाधाएं पैदा करते हैं। नतीजतन नदियों का जलस्तर अचानक बढ़ जाता है, जिससे बाढ़ आती है।

शहरी क्षेत्रों में बाढ़ का मूल कारण यह है कि ग्रामीण क्षेत्रों से शहरों में अंधाधुंध पलायन हो रहा है, जिससे आवास और वाणिज्यिक गतिविधियों के लिए भूमि पर दबाव बढ़ता है। जमीन, विशेषकर ऐसे क्षेत्रों जो नदियों और उनकी सहायक नदियों के बाढ़ के पानी की परंपरागत निकासी का स्रोत होते हैं, पर अतिक्रमण रोकने में नगर प्राधिकारियों और यहां तक कि सरकारों की विफलता और अधिकतर मामलों में जटिलता से शहरों में अभूतपूर्व बाढ़ आती है।

देश के अधिकांश बड़े शहरों को जलभराव के खतरे का सामना करना पड़ रहा है। इसके कारणों में कुप्रशासन, आयोजना का अभाव, भूमि के अतिक्रमण संबंधी भ्रष्टाचार और अंधाधुंध अनधिकृत निर्माण शामिल है।

चेन्नई और श्रीनगर में पिछले दिनों आई अभूतपूर्व बाढ़ इसी तरह की बर्बरता का उदाहरण है। इससे पहले मुम्बई में भी इन्हीं कारणों से बाढ़ आई थी। आवास और आर्थिक कारणों के लिए बुनियादी ढांचे के निर्माण के नाम पर अनियोजित वाणिज्यीकरण से शहरों में प्राकृतिक आपदाओं को सहने की क्षमता कम होती जा रही है।

वर्तमान बाढ़ आपदा प्रबंधन


वर्तमान में कटाव नियंत्रण सहित बाढ़ प्रबंधन का विषय राज्‍यों के क्षेत्राधिकार में आता है। बाढ़ प्रबंधन एवं कटाव-रोधी योजनाएँ राज्‍य सरकारों द्वारा प्राथमिकता के अनुसार अपने संसाधनों द्वारा नियोजित, अन्‍वेषित एवं कार्यान्वित की जाती हैं। इसके लिये केंद्र सरकार राज्‍यों को तकनीकी मार्गदर्शन और वित्तीय सहायता प्रदान करती है।

पिछले कई बर्षों से देखने में आया है कि बाढ़ के पैटर्न में निश्चित रूप से परिवर्तन हुआ है, जो वर्षा की बदलती पद्धति से सम्बद्ध है। दशकों पहले मानसून मॉडल की तुलना में परिवर्तन स्पष्ट रूप से दृष्टिगोचर हो रहा है।

प्रौद्योगिकी उन्नयन के चलते मौसम विशेषज्ञ या जिन्हें हम लोकप्रिय रूप में वैदरमैन कहते हैं, वे आज मानसून या अन्य मौसम स्थितियों की भविष्यवाणी लगभग शत प्रतिशत यथार्थ रूप में कर देते हैं। भारत का मौसम विभाग अब लगभग सही भविष्यवाणी कर पा रहा है। इससे केंद्र और राज्य, दोनों ही सरकारों को निश्चित रूप से आपदा प्रबंधन कार्रवाइयों को अंजाम देने के लिए पर्याप्त समय मिल जाता है।

इससे न केवल असामान्य भारी वर्षा के कारण आने वाली बाढ़ से बल्कि बारिश की कमी के कारण पडऩे वाले सूखों से भी लोगों को निजात दिलाने की तैयारी जा सकती है।

परंतु, वैज्ञानिक साधनों से वर्षा पद्धतियों पर नियंत्रण करना या ऐसा कोई डिजाइन तैयार करना संभव नहीं है। अत: बाढ़ प्रबंधन के लिए परिवर्तित वर्षा पद्धतियों के अनुरूप बहु-आयामी रणनीति अपनाने की आवश्यकता है।

वनों के ह्रास को रोकने के लिए केंद्र और राज्य सरकारों द्वारा गंभीर प्रयास किए जा रहे हैं। अनेक हिमालयी राज्यों में पिछले दशकों के दौरान वनों का राष्ट्रीयकरण किया गया है ताकि पेड़ों की अंधाधुंध कटाई पर रोक लगाई जा सके।

सभी स्तरों पर पौधे लगाने या वनरोपण के व्यापक अभियान चलाना भी सही दिशा में एक कदम है। बाढ़ नियंत्रण के संदर्भ में इन उपायों का अपेक्षित लाभ तभी मिल सकता है जबकि वैज्ञानिक अध्ययनों के आधार पर सतत और दीर्घावधि योजना के अनुसार ये प्रयास जारी रखे जाएं।

अतिक्रमण रोकने में नगर प्राधिकारियों और यहां तक कि सरकारों की विफलता और अधिकतर मामलों में जटिलता से शहरों में अभूतपूर्व बाढ़ आती है। देश के अधिकांश बड़े शहरों को जलभराव के खतरे का सामना करना पड़ रहा है। इसके कारणों में कुप्रशासन, आयोजना का अभाव, भूमि के अतिक्रमण संबंधी भ्रष्टाचार और अंधाधुंध अनधिकृत निर्माण शामिल है।

चेन्नई और श्रीनगर में पिछले दिनों आई अभूतपूर्व बाढ़ इसी तरह की बर्बरता का उदाहरण है। इससे पहले मुम्बई में भी इन्हीं कारणों से बाढ़ आई थी। आवास और आर्थिक कारणों के लिए बुनियादी ढांचे के निर्माण के नाम पर अनियोजित वाणिज्यीकरण से शहरों में प्राकृतिक आपदाओं को सहने की क्षमता कम होती जा रही है।

यदि सम्बद्ध अधिकारियों ने निहित स्वार्थों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की होती और बाढ़ से होने वाली आकस्मिकताओं के लिए निवारक उपायों की पूरी तरह तैयारी की होती तो ऐसी आपदाओं को रोका जा सकता था।

ये निहित स्वार्थ नगर योजनाकारों, नौकरशाहों और यहां तक कि राजनीतिज्ञों की भी मिलीभगत होते हैं। इस तथ्य से इंकार नहीं किया जा सकता कि मकान की जरूरत या अन्य कारणों से आम नागरिक भी इसमें एक घटक बनते हैं।

तो ये ऊपर लिखे हुये जो भी वर्तमान बाढ़ आपदा प्रबंधन के उपाय किये जा रहे हैं वो अपर्याप्त हैं। सरकारें बाढ़ प्रबंधन को लेकर देर से जागती हैं और संबंधित जिलों को प्रशासनिक अधिकारियों के भरोसे छोड़ देती हैं। ज्यादा हालात खराब होने पर सरकारों के मुखियाओं द्वारा हैलीकॉप्टर से दौरा कर के कुछ बाढ़ सहायता राशि की घोषणा कर दी जाती हैं और उसके बाद धीरे धीरे सब भुला दिया जाता है और ये सिलसिला साल दर साल चलता रहता है।

जबकि होना तो ये चाहिये कि वर्तमान बाढ़ प्रबंधन जिस पर कोई ध्यान नहीं दे रहा है को केवल बाढ़ प्रबंधन के विशेषज्ञों के द्वारा ही किया जाना चाहिये।

बाढ़ आपदा प्रबंधन के लिये और क्या किया जा सकता है


बाढ़ नियंत्रण एक ऐसा विषय है, जिसके लिए कोई स्पष्ट विधायी दायरा तय नहीं किया जा सकता। एक विषय के रूप में यह देश की किसी भी विधायी सूची अर्थात् केंद्रीय, राज्य या समवर्ती सूची में शामिल नहीं है।

यह अलग विषय है कि जल निकासी और तटबंध संबंधी मुद्दों का उल्लेख राज्य सूची की द्वितीय सूची की प्रविष्टि संख्या 17 के रूप में किया गया है। इसका यह निहितार्थ है कि बाढ़ को रोकना और उसका मुकाबला करना मुख्य रूप से राज्य सरकारों का दायित्व है। कई राज्यों ने बाढ़ संबंधी मुद्दों से निपटने के प्रावधानों के साथ कानून बनाए हैं।

केंद्र सरकार मुख्य रूप से परामर्शी क्षमता में भूमिका अदा करती है अथवा राज्यों के राहत और पुनर्वास प्रयासों में पूरक मदद करती है।

एक विस्तृत टिप्पणी के अनुसार वर्तमान में बाढ़ प्रबंधन की देखरेख के लिए दो स्तरीय प्रणाली कायम है। राज्य के स्तर पर जल संसाधन विभाग, बाढ़ नियंत्रण बोर्ड और राज्य तकनीकी परामर्शी समितियां स्थापित की गई हैं।

केंद्रीय व्यवस्था के अंतर्गत संगठनों का एक नेटवर्क शामिल है और बाढ़ प्रबंधन के बारे में परामर्श देने के लिए समय समय पर विशेषज्ञ समितियों का गठन किया जाता है।

ये व्यवस्था कागजों मे तो अच्छे से काम कर रही है परंतु हमारे अनुसार बाढ़ आपदा प्रबंधन के लिये ये किया जाना चाहिये ---

  • अधिक समन्वय पर ध्यान देते हुए केंद्र, राज्य तंत्र को अधिक सुदृढ़ करने की आवश्यकता है। यह व्यवस्था एक सतत और निरंतर प्रणाली के रूप में होनी चाहिए, न कि केवल आपदा के समय काम करने वाली प्रणाली। 
  • आधुनिक प्रौद्योगिकी के सहारे संकट प्रबंधन नेटवर्क हेतु ढांचे का निर्माण करना चाहिये। अब तो भारत के पास खुद के मौसम सेटेलाइट भी हैं। इसरो (ISRO) की सहायता से अंतरिक्ष से अच्छी गुणवत्ता की फोटो लेकर उनका विश्लेषण विशेषज्ञों द्वारा किया जाना चाहिये।
  • पर्यावरण के मोर्चे पर नई चुनौतियों और कुप्रशासन के मुद्दों को देखते हुए राज्यों के लिए यह कठिन है कि वे स्वयं बाढ़ प्रबंधन की योजना बनाएं। केंद्र और राज्य सरकारों को एक संयुक्त योजना के जरिए विभिन्न बाढ़ नियंत्रण उपायों को अंजाम देना  चाहिए। 
  • तटबंधों, बाढ़ रोकने वाली दीवारों, रिंग बांधों, बाढ़ नियंत्रण जलाशयों के निर्माण से बाढ़ के लिये व्यवस्था की जानी चाहिये ताकि नीचे जाने वाले पानी के प्रवाह को नियंत्रित करने के लिए सुरक्षित सीमाओं के भीतर बाढ़ के जल की कुछ मात्रा को अस्थाई तौर पर एकत्र किया जा सके।
  • एक अन्य महत्वपूर्ण उपाय में नदी चैनलों और सतही नालों में सुधार और नदी किनारों पर भूमि कटाव रोकना शामिल है। इससे भले ही पूरी तरह बाढ़ रोकना संभव न हो, लेकिन बाढ़ के पानी को फैलने से रोकने में अवश्य मदद की जा सकती है।
  • उदाहरण के तौर पर मैं ये बताना चाहुंगी कि दुनिया के सभी बड़े देशों और शहरो को देखना चाहिये कि उन्होंने अपने यहां आने वाली बाढ़ आपदा का प्रबंधन कैसे किया। 
  • अगर आप बैंकाक, लंदन, मास्को, न्यूयार्क, शंघाई इत्यादि शहरों को देखेंगे तो पायेंगे कि वहां पर नदियों को गहरा कर कर के दोनों ओर के किनारों पर पक्का कर दिया गया है और साथ ही जमीन को नदी से निकाल कर वहां निर्माण कार्य किया गया है जिससे नदी में पाना बना रहता है और वो कटाव भी नहीं कर पाती है।
  • ऐसी गहरी करी गई नदियों में जल यातायात भी यात्रियों और सामान को ढोने के लिये किया जाता है। 
  • यही करने से काफी हद तक हम बाढ़ की समस्या से बच सकते हैं यानी कि नदियों कि सफाई कर के उनको गहरा करते रहना चाहिये।
  • वर्तमान में प्रचलित परिस्थितियों और नई चुनौतियों को देखते हुए यह जरूरी है कि बाढ़ प्रबंधन को एक पृथक विषय के रूप में देखना उचित होगा। यह जरूरी है कि बाढ़ नियंत्रण और प्रबंधन प्रणाली को सुदृढ़ बनाया जाए लेकिन उतना ही महत्वपूर्ण यह भी है कि इसे पर्यावरणीय ह्रास, वैश्विक तापमान और विभिन्न स्तरों पर कुप्रशासन के संदर्भ में भी देखा जाए।
  • बाढ़ प्रबंधन के प्रति किसी भी दृष्टिकोण में इन सभी महत्वपूर्ण घटकों को शामिल किया जाना चाहिए। बाढ़ प्रबंधन केवल पुराने सिंचाई और बाढ़ नियंत्रण विभागों के माध्यम से नहीं किया जा सकता। 
  • शहरी बाढ़ का मुख्य कारण निहित स्वार्थी तत्वों द्वारा भूमि का अतिक्रमण करना और बरसात के मौसम से पहले अग्रिम आयोजना का अभाव है। शहरों के निकट नालों और नालियों की सफाई को उच्च प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
  • ग्रामीण क्षेत्रों में भी नदियो को गहरा करके बाढ़ आपदा का प्रबंधन किया जा सकता है। 
  • जैसा कि वर्तमान में जो वृक्षारोपण वगैरह का सरकारी कार्यक्रम चलता रहता है, उसको ठीस से देखने की जरूरत है। केवल वृक्षारोपण उद्देश्य न होकर पेड़ को बड़ा करने का उद्देश्य होना चाहिये।


अधिक ध्यान बाढ़ से संबंधित दीर्घावधि योजना पर केंद्रित किया जाना चाहिए ताकि निवारक और राहत पहलुओं को भी शामिल किया जा सके।

लोग कह सकते हैं कि ये तो बहुत मंहगा समाधान है, लेकिन अगर हम भारतीय अपने आप को दुनिया के विकसित देशों में देखते हैं तो हमें पक्के समाधान निकलने ही होंगे भले ही वो मंहगे हों।

मुझे यहां पर आपके विचारों और टिप्पणियों का स्वागत रहेगा ताकि हम लोग परंपरागत बाढ़ प्रबंधन की बजाए कुछ अलग उपाय करके बाढ़ आपद प्रबंधन की दिशा में विचार विमर्श कर सकें।

Manisha सोमवार, 27 जुलाई 2020

हिंदी को बढ़ावा देने के लिये हम सब क्या करें?


भारत सरकार की राजभाषा नीति के अनुसार हिंदी को राजभाषा का दर्जा प्राप्त है। सरकार हिंदी को बढ़ावा देने के लिये हर साल 14 सितम्बर को हिंदी दिवस का सभी सरकारी कार्यालयों में आयोजन करती है। सरकार तो हिंदी को बढ़ावा देने के लिये जो कुछ कर सकती है वो करती है पर हिंदी को बढ़ावा देने के लिये सबसे ज्यादा ये जरुरी है कि हम हिंदी भाषी लोग भी कुछ प्रयत्न करें।

हिंदी को बढ़ावा


ये बात सर्वमान्य है कि हिंदी को हम हिंदी वालों ने ही छोड़ दिया है। हमें हिंदी से तो प्यार है लेकिन नौकरी के बाजार में अंग्रेजी की महत्ता देखकर हम सब हिंदी के प्रति उदासीन होते जा रहे हैं। जबकि हमें हिंदी को ही हर क्षेत्र में बढ़ाना चाहिये।

ध्यान रहे कि आजादी के आन्दोलन में हिंदी का बहुत बड़ी योगदान है, बहुत लोगों ने अपनी कुर्बानी दी है।

चलिये अंग्रेजी की जो महत्ता आज के जमाने में है वो तो रहेगी ही और समय के साथ कम भी होगी, लेकिन तब तक हम कुछ छोटे छोटे उपाय करके अपने अपने लेवल पर हिंदी को थोड़ा थोड़ा बढ़ावा तो दे ही सकते हैं।

हिंदी को बढ़ावा देने के विभिन्न उपाय



आइये देखें कि किन छोटे छोटे उपायों से हिंदी को बढ़ावा दे सकते हैं -


  1. अगर हम कोई व्यवसाय करते है तो हम कोशिश कर सकते हैं कि समस्त साइन बोर्ड, नाम पट्टिकायें, काउन्टर बोर्ड, सूचना पट्ट आदि को हिंदी में अवश्य ही लिखें भले ही साथ में आप अंग्रेजी या अन्य किसी भाषा में भी लिखवा लें। महाराष्ट्र में सरकार ने हर बोर्ड पर मराठी में लिखने का नियम बना रखा है जिससे हिंदी वालों को भी वहां कुछ पढ़ने में दिक्कत नहीं आती है (मराठी देवनागरी लिपि में लिखी जाती है)। जबकि अगर आप लखनऊ जायें तो आप देखेंगे कि दुकानों के बोर्ड अधिकांशतः अंग्रेजी में लिख हुये हैं।
  2. सभी पपत्रो, दस्तावेजों, मुद्रित सामग्री तथा अन्य लेखन सामग्री को हिंदी में मुद्रित (प्रिंट) करवाया जाये।
  3. हो सके तो व्यवसायिक और व्यक्तिगत पत्रो को हिंदी में ही लिखा जाये।
  4. विजिटिंग कार्ड पूर्ण रुप से आकर्षक हिंदी में लिखे जायें। अगर पूर्ण रुप से हिंदी में लिखना संभव नहीं है तो कुछ तो हिंदी मे होना ही चाहिये (कम से कम आप का नाम तो आकर्षक हिंदी में हो सकता है)।
  5. संभव हो तो कंप्यूटर पर यूनीकोड एनकोजिंड वाली टाईपिंग सीख लीजिय। यकीन मानिये हिंदी टाइपिंग सीखना बहुत ही आसान है, आप 2-3 दिन में ही अच्छी खासी टाइपिंग सीख जायेंगे।
  6. लिखने में आसान हिंदी पा प्रयोग करें ताकि सभी लोग समझ सकें।
  7. अच्छी हिंदी जानने वाले कभी कभी उन लोगों की कठिनाई नहीं समझ नहीं समझ पाते जिन्होंने हाल ही में थोड़ी बहुत हिंदी सीखा है। ऐसे लोगों की कठिनाई का पूरा ध्यान रखना चाहिये और अपने पांडित्य का प्रदर्शन नहीं करना चाहिये।
  8. हिंदी का वाक्यों में संस्कृत के कठिन शब्दों का अनावश्यक प्रयोग न करें।
  9. हिंदी के वाक्यों में अंग्रेजी की वाक्य संरचना से बचें अर्थात वाक्य रचना हिंदी भाषा की प्रकृति के अनुसार ही होनी चाहिये। वह अंग्रेजी मूल का अटपटा अनुवाद नहीं होना चाहिये।
  10. जहां कहीं भी यह लगे कि पढ़ने वाले को हिंदी में लिखे किसी शब्द या पदनाम को समझे में कठिनाई हो सकती है, तब कोष्ठक में अंग्रेजी रुपान्तर भी लिख देना उपयोगी रहेगा।
  11. अगर आप को हिंदी में लिखने में कठिनाई या झिझक है तो इसके लिये शुरूआत छोटी-छोटी टिप्पणियों को हिंदी में लिख कर करनी चाहिये। आप हिम्मत करेंगे तो धीरे-धीरे सब हिंदी में काम करने लगेंगे।
  12. खास बात ये है कि हमें अंग्रेजी में सोचकर हिंदी में नहीं लिखना चाहिये। कोशिश यह होनी चाहिये कि हिंदी में ही सोच कर हिंदी में  लिखें।
  13. हिंदी मे लिखते समय शब्दों के लिये अटकिये मत, किसी भी शैली के लिये रुकिये नहीं और अशुद्धियों से घबरायें नहीं।
  14. कोशिश करें कि मौलिक रुप से हिंदी लेखन करें। अंग्रेजी से हिंदी अनुवाद का सहारा बहुत कम लेना चाहिये क्योंकि दोनों भाषाओं की शैली अलग-अलग है। खासकर मशीनी अनुवाद जैसे कि गूगल अनुवाद में काफी गलतियां हो सकती हैं। ऐसी मशीनी भाषा से बचें।
  15. हो सकता है कि शुरू में हिंदी में काम करने में आपको झिझक महसूस हो सकती है किन्तु काम करते-करते आप देखेंगे कि अंग्रेजी की तुलना में हिंदी सरल भाषा है, इसमें समय बचता है, हिंदी भाषा हमारी अभिव्यक्ति को स्पष्ट और प्रभावी बनाती है।


तो हम सब को प्रण लेना चाहिये कि हम हिंदी में ही काम करेंगे और हिंदी को बढ़ावा देने के सभी प्रकार के उपाय करेंगे ताकि हमारी प्यारी हिंदी भाषा का प्रसार और प्रचार हो सके।

Manisha रविवार, 26 जुलाई 2020

खेल की संस्कृति बढ़ाने की जिम्मेदारी सरकार की है


भारत सरकार के खेल मंत्री किरन रिजिजू को लगता है कि भारतीयों में खेल की समझ न के बराबर है इसके लिये उनके खेद है। माननीय  मंत्री जी का कहना है कि भारत में खेल संस्कृति को बढ़ावा देने की जरूरत है। उन्होंने ये भी कहा कि आम भारतीयों में और यहां तक कि संसद के सदस्यों को भी खेलों जी ज्यादा समझ नहीं है। मंत्री जी को मलाल  है कि भारतीय समाज में खेल ज्ञान बहुत कम है। केवल क्रिकेट के खेल को ही अधिकांश भारतीय जानते हैं

मंत्री जी बात तो आपकी कुछ हद तक सही है पर आपको ये भी मानना पड़ेगा कि खेल की संस्कृति बढ़ाने की जिम्मेदारी आप ही की है। आप ही लोग केवल क्रिकेट के खेल को बढ़ाते हो। क्या कारण है कि भारत के हर जिले और शहर में ढंग के स्टेडियम तक नहीं हैं? क्यों भारत के अधिकांश स्टेडियमों में हॉकी के खेल के लिये एस्ट्रो टर्फ नहीं है?

ये एक मानी हुई बात है कि खेलों में भारत को प्रतिभायें छोटे शहरों, कस्बों और गांवों से ही मिलती हैं। लेकिन वहां पर उनको ढंग की खेल सुविधाओं का अभाव ही मिलते है। मंत्री जी, खेलों की सुविधाओं को छोटी जगह तक ले जाओ फिर देखो कैसे खेलो को बढ़ावा मिलता है।

आप को ये याद दिला दूं कि हरियाणा को लड़को ने मुक्केबाजी (बॉक्सिंग) कुश्ती और झारखण्ड की लड़कियों ने हॉकी में सुविधाओं के बल पर पदक लाने शुरु किये तो कैसे एकदम से वहां प्रतिभाये भी विकसित होने लगीं और खेलों को लेकर लोगों में विश्वास भी पैदा हुआ।

मंत्री जी, खेलों की संस्कृति का विकास खेलों की जबर्दस्त सुविधाओं के बूते ही हो सकता जो कि केवल सरकार ही कर सकती है।

Manisha बुधवार, 15 जुलाई 2020

प्लाज्मा थैरेपी क्या है? Plasma Therapy Kya Hai?


आजकल आप सब लोग प्लाज्मा थैरेपी का नाम बहुत सुन रहे हैं। दरअसल कोरोना की महामारी से जो कोहराम मचा है, उसमें अभी तक कोई इलाज न होने की वजह से बड़ी संख्या में लोगों की जान जा रही हैं। कुछ डाक्टरों ने अपने अस्पतालों मे प्लाज्मा थैरेपी के द्वारा कोरोना के इलाज में कुछ सफलता का दावा किया हैं। दिल्ली में तो भारत का पहला प्लाज्मा बैंक भी बनाया गया है। तो ऐसे में आप के भी मन में आता होगा कि पता करें कि आखिर प्लाज्मा थैरेपी क्या है (Plasma Therapy Kya Hai)?

Manisha सोमवार, 13 जुलाई 2020

भारतीय संविधान का निर्माण कैसे हुआ?


भारत देश में सबसे ऊंचा पद भारतीय संविधान का है। सरकार, सुप्रीम कोर्ट, राष्ट्रपति, प्नधानमंत्री कोई भी इससे ऊपर नही है। सब इसके दायरे में रहकर काम करना होता है।

भारत के वर्तमान संविधान को बनाने के लिये आजादी के पहले से ही प्रयास किये जा रहे थे। दरअसल अंग्रेजी सरकार को ये पता था कि उन्हें जल्दी ही भारत को छोड़ना ही होगा। इसलिये उन्होंने भारत के संविधान के निर्माण के लिये काम करना शुरु कर दिया था। हम सब को ये पता होना चाहिये कि भारत के संविधान का निर्माण कैसे हुआ (Bharat ke samvidhan ka nirman kaise hua)?

Manisha शनिवार, 11 जुलाई 2020

भारत के राज्यों के पर्यटन विभागों की टैगलाइनें


भारत के सभी राज्य और भारत सरकार सभी यह प्रयास कर रहे हैं उनके यहां पर्यटन का विकास हो जिससे लोगों को रोजगार मिले और आर्थिक तरक्की हो सके। इस दिशा में काम करते हुये भारत सरकार पर्यटन मंत्रालय एवं विभिन्न राज्यों के पर्यटन विभागों ने अपनी वेबसाइटों, विज्ञापनों इत्यादि में बहुत ही रोचक टैगलाइनें (Taglines) या नारे बनाकर पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करके लुभाने की कोशिश की है।

ये नारे कहीं कहीं तो बहुत ही लोकप्रिय हो गये हैं जैसे कि गुजरात पर्यटन विभाग के ब्रांड अंबेसडर (Brand Ambassador) या उत्पाद दूत प्रसिद्ध फिल्म अभिनेता अमिताभ बच्चन के द्वारा कहा गया नारा 'कुछ दिन तो गुजारो गुजरात में ' बहुत ही प्रसिद्ध हुआ। एक और उदाहरण राजस्थान की टैग लाइन 'पधारो म्हारे देस' का है जो कि लोगों की जुबान पर चढ़ गया है।
भारत के राज्यों के पर्यटन विभागों की टैगलाइनें और नारे Indian Tourism department Taglines


पर्यटन विभागों की टैगलाइन्स की सूची


हमने यहां पर भारत के राज्यों के पर्यटन विभागों की टैगलाइन्स की लिस्ट यानी की सूची बनाने की कोशिश की है। हमें उम्मीद थी कि शायद भारत के राज्यों ने पर्यटन नारे हिंदी भाषा या संस्कृत भाषा में बनाये होंगे पर हमारा अंदाजा गलत निकला। अधिकांश पर्यटन टैगलाइन अंग्रेजी भाषा में हैं।

एक और महत्वपूर्ण बात ये है कि अधिकांश राज्यों की पर्यटन विभागों की वेबसाइटों के हिंदी संस्करण नहीं हैं। आप हिंदी मे उस राज्य की पर्यटन जानकारी प्राप्त नहीं कर सकते।

खैर, यहां पर इनको यह सोच कर नजरअंदाज किया जा सकता है कि शायद भारत के राज्य विदेशी पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करना चाहते होगें। देसी पर्यटक के लिये शायद इन्हें लगता होगा कि ये लोग इतना खर्चा नहीं करते हैं तो इनको लुभाने की आवश्यकता ही क्या है?


अधिकांश राज्यों के पर्यटन विभागों द्वारा उनकी सार्वजनिक क्षेत्र की पर्यटन कंपनियों राज्य पर्यटन विकास निगम (State Tourism Development Corporation) के माध्यम से पर्यटकों को होटल बुकिंग, टैक्सी बुकिंग, खरीददारी आदि की सुविधाये प्रदान की जा रही हैं। अगर हमें किसी राज्य के इन पर्यटन विकास निगमों के भी टेगलाइन मिले तो इसी यहां सूची में शामिल किया गया है। जिन राज्यों के पर्यटन विभागों की कोई टैगलाइन हमको नहीं मिली उसको यहां पर खाली छोड़ दिया गया है। जब कभी ये राज्य अपना कोई पर्यटन नारा बनायेंगे तो उसे यहां अद्यतन (Update) किया जायेगा।

तो लीजिये देखिये मई 2021 तक अद्यतन की गई भारत के राज्यों के पर्यटन विभागों की टैगलाइनों की लिस्ट -

  1. भारत सरकार पर्यटन मंत्रालय (Ministry of Tourism, GoI) - अतिथि देवो भव: (Incredible India! Atithi Devo Bhava)
  2. अंडमान एवं निकोबार (Andaman & Nicobar)  - Emerald. Blue. And You
  3. आंध्र प्रदेश (Andhra Pradesh) - Everything Possible
    • Andhra Pradesh Tourism Development Corporation (APTDC) - The more you see it. The more you love it...
  4. अरूणाचल प्रदेश (Arunachal Pradesh)  - Gateway to Serenity
  5. आसाम (Assam) - Awesome Assam
  6. बिहार (Bihar) - Blissful Bihar
  7. चंडीगढ़ (Chandigarh) - The City Beautiful
  8. छत्तीसगढ़ (Chhattisgarh)  - Full of Surprises
  9. दादरा - नागर हवेली और दमन एवं दीव  (Dadra Nagar Haveli and Daman & Diu)  - Small is Big
  10. गोवा (Goa)  - See More. Be More.
  11. गुजरात (Gujarat)  - कुछ दिन तो गुजारो गुजरात में
  12. हरियाणा (Haryana) - Come, holiday with us!
  13. हिमाचल प्रदेश (Himachal Pradesh
  14. जम्मू और कश्मीर (Jammu and Kashmir) - See J&K in a new light
    • Jammu & Kashmir Tourism Development Corporation (JKTDC) - Proud to serve you
  15. लद्दाख (Ladakh
  16. झारखण्ड (Jharkhand)  - Nature's hidden jewel
  17. कर्नाटक (Karnataka Tourism) - One State. Many Worlds
  18. केरल (Kerala) - God's own Country
  19. लक्षद्वीप (Lakshadweep
  20. मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh)  - The heart of Incredible India
  21. महाराष्ट्र (Maharashtra)  - Maharashtra Unlimited
  22. मणिपुर (Manipur
  23. मेघालय (Meghalaya)  - Check into Nature
  24. मिजोरम (Mizoram
  25. नागालैण्ड (Nagaland)  - Land of Festivals
  26. दिल्ली (Delhi
  27. ओडिशा (Odisha) - India's Best Kept Secret
  28. पुडुचेरी (Puducherry) - Peaceful Puducherry - Give time a break
  29. पंजाब (Punjab) - India begins here
  30. राजस्थान (Rajasthan) - पधारो म्हारे देस! The Incredible State of India
  31. सिक्किम (Sikkim) - Sikkim, where Nature smiles
  32. तमिलनाडु (Tamil Nadu) - Enchanting Tamil Nadu - Experience Yourself
  33. त्रिपुरा (Tripura)  - Tripura: Where Culture Meets Nature
  34. उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) - यूपी नहीं देखा तो कुछ नहीं देखा
  35. उत्तराखण्ड (Uttarakhand) - Simply Heaven
  36. पश्चिम बंगाल (West Bengal) - Experience Bengal - The Sweetest part of India

हिंदी भाषी राज्यों के पर्यटन नारे भी अंग्रेजी में हैं।

यहां नीचे 👇 कमेंट टिप्पणी कर के बताइये आपको किस राज्य का पर्यटन नारा सबसे अच्छा लगा।

Manisha शुक्रवार, 3 जुलाई 2020

अच्छा वीडियो सम्मेलन सॉफ्टवेयर कैसा हो? Achcha Video Conference Software Kaisa ho?


कोरोना की महामारी के प्रकोप के चलते जब से पूरी दुनिया में लॉकडाउन हुआ है, लोगों को अपने घरों में रहना पड़ रहा है उससे लोगों को एक दूसरे से काट दिया है।  सभी लोग अपने परिवार के करीबी और संबंधियो से नहीं मिल पा रहे हैं। सामाजिक रुप से सब लोग अलग थलग पड़ गये हैं।

अधिकांश कंपनियों ने अपने कर्मचारियों को घर से काम करने को बोल दिया है। इस कोरोना कोविद -19 की वजह से पूरी दुनिया भर में हुये लॉकडाउन में छोटे और मध्यम आकार के व्यवसायों के साथ-साथ बड़े बड़े कॉरपोरेट भी सबसे ज्यादा प्रभावित हुये हैं। 

खुदरा क्षेत्र की शटडाउन, एक जगह से दूसरी जगह जाने के अंतर-राज्य परिवहन और वैश्विक यात्रा के बंद होने ने कॉर्पोरेट क्षेत्र की व्यापार करने की क्षमता पर व्यापक प्रभाव डाला है। 


हालांकि दुनिया के तमाम देशों ने और भारत में भी चरणबद्ध तरीके से प्रतिष्ठान खोलने शुरू कर दिए गये हैं। अब कॉरपोरेट्स को अपने ग्राहकों और विक्रेताओं के साथ बेहतर तरीके से संवाद करने, जुड़ने और सहयोग करने के लिए इस तरह से काम करना है कि काम कम से कम समय में हो, कम से कम लागत में हों और भौगोलिक स्थिति की कोई सीमा न हो। 


वीडियो कोन्फ्रेंस सम्मेलन सॉफ्टवेयर Video Conference Software


वीडियो सम्मेलन सॉफ्टवेयर क्या है


ऐसे कोरोना वाले कठिन समय में वीडियो कोन्फ्रेंस या वीडियो सम्मेलन सॉफ्टवेयर (Video Conference Software) बड़े काम के साबित हुये हैं। इन वीडियो सम्मेलन सॉफ्टवेयरों के जरिये लोग अपने पारिवारिक संबंधियो, पारिवारिक मित्रों या फिर अपने आस पड़ोस के लोगों से लॉकडाउन के घर में रहने के निर्देश का पालन करते हुये सभी लोगों के साथ संपर्क रख पा रहे हैं।

हम यहां पर ये जानने की कोशिश करेंगे कि अगर वीडियो कोन्फ्रेंस सॉफ्टवेयर की प्रयोग करना हो तो वो कैसा हो, वीडियो सम्मेलन सॉफ्टवेयर की क्या क्या विशेषतायें हों आदि आदि।

वीडियो सम्मेलन सॉफ्टवेयर छोटे बड़े सभी व्यवसायिक प्रतिष्ठानों और कॉरपोरेट्स के लिये भी वरदान साबित हुये हैं। वीडियो सम्मेलन सॉफ्टवेयर की कंपनियों की इस प्रकार की मदद करने के लिए प्रतिबद्ध हैं जिससे उन्हें डिजिटल सहयोग का उपयोग करके अपने व्यापार की निरंतरता को बनाए रखने में मदद मिले क्योंकि वीडियो सम्मेलन सॉफ्टवेयर भौगोलिक सीमाओं के पार व्यापार करने का साधन है। 

वीडियो सम्मेलन सॉफ्टवेयर कंपनियों को आंतरिक कर्मचारियों के साथ-साथ उनके बाहरी विक्रेताओं और ग्राहकों के साथ बैठकें, प्रशिक्षण, व्यवसाय समीक्षा, योजना सत्र आदि के संचालन के समाधान के लिए एक पूर्ण सुविधा प्रदान करता है।

वीडियो सम्मेलन कॉन्फ्रेंसिंग सॉफ्टवेयर ऑडियो, वीडियो और टेक्स्ट डेटा प्रसारित करने के लिए कंप्यूटर नेटवर्क का उपयोग करके विभिन्न साइटों पर दो या अधिक प्रतिभागियों के बीच लाइव कॉन्फ्रेंस शुरू करने और संचालित करने की सुविधा प्रदान करता है। अधिकांश वीडियो सम्मेलन कॉन्फ्रेंसिंग सॉफ़्टवेयर उपयोगकर्ताओं को संवाद करने और साझा करने और फ़ाइलों पर काम करने में सहयोग करने देते हैं। ये एक बहुत ही कारगर तकनीक है जिसका विकास हम सब के फायदे के लिये हो रहा है। हालांकि अभी भी इसमें विकास की और संभावना और गुंजाइश बाकी है।



वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग सॉफ्टवेयर का उपयोग कौन करता है?


सभी प्रकार और आकारों के व्यवसाय और कंपनियां और सामान्य जन भी अपनी सोसाइटी, रिश्तेदारी और मित्र मंडली में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग सॉफ़्टवेयर का  उपयोग करते हैं। यह अलग-अलग स्थानों में कई शाखाओं या कंपनियों के उपर के स्तर के प्रबंधन के लिए बहुत ही शक्तिशाली चेक-इन साधन साबित होता है। 

इन वीडियो सम्मेलन सॉफ्टवेयरो का उपयोग व्यवसायों को उनकी संभावनाओं का विस्तार करने और यात्रा की आवश्यकता के बिना कर्मचारियों के साथ जांच करने या कोई जानकारी लेने के लिए भी किया जाता है। यहां तक कि छोटे, मध्यम या बड़े आकार के व्यवसाय अपने साझेदारों, हितधारकों और व्यापार की नयी संभावनाओं से जुड़ने के लिए अपने दैनिक कार्यों में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग का उपयोग करते हैं।

इसके अलावा वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग उपकरण कभी-कभी शिक्षकों को उनके छात्रों के साथ जोड़ने के लिए एक माध्यम के रूप में या फिर ऑनलाइन शिक्षण प्लेटफार्मों या शिक्षण प्रबंधन के लिये प्रयोग होते हैं। ये सब वीडियो सम्मेलन सॉफ्टवेयर ऑनलाइन सीखने के माहौल के लिए बहत ही अधिक उपयोगी हैं, जो अक्सर फ़ाइल साझाकरण, मतदान और व्हाइटबोर्डिंग क्षमता प्रदान करते हैं ताकि सीखने का एक प्रभावी ढंग का वातावरण बन सके। 

सरकार मे भी वीडियो सम्मेलन सॉफ्टवेयर की प्रभावी ढंग से प्रयोग हो रहा है। आप सब ने देखा होगा कि किस प्रकार भारत के प्रधानमंत्री भारत के सभी राज्यों के मुख्यमंत्रियों के साथ वीडियो सम्मेलन करके कोरोना वायरस से लड़ने के लिये बातचीत कर रहे हैं। प्रशासन में भी रोजाना वीडियो सम्मेलन सॉफ्टवेयर की मदद से बैठकें की जा रही हैे और महतिवपूर्र सरकारी काम निपटाये जा रहे हैं। भारत के हर जिला प्रशासन, राज्य सचिवालय और केन्द्र सरकार के सभी  मंत्रालयों और महत्वपूर्ण विभागों में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग की सुविधा चल रही है जिससे समय और पैसे की भी बचत हो रही है।


प्रसिद्ध वीडियो सम्मेलन सॉफ्टवेयर (Famous Video Conference Software's)


भारत में जब 25 मार्च को अचानक से कोरोना को चलते लॉकडाउन लगाया तो लोगों ने वीडियो कोन्फ्रेंस सम्मेलन सॉफ्टवेयरों को खोजना शुरु कर दिया। अचानक से किसी ने जूम वीडियो सम्मेलन सॉफ्टवेयर को खोज लिया और  बस सब लोग इसी का प्रयोग करने लगे। हालांकि बाद में चीन का उत्पाद होने और खराब निजता सुरक्षा के चलते भारत के गृह मंत्रालय ने इसका प्रयोग न करने की सलाह दी तब लोगों ने अन्य वीडियो सम्मेलन सॉफ्टवेयरों को खोजना शुरू किया। 

अब लोग गूगल, माइक्रोसॉफ्ट, स्काइप, सिस्को इत्यादि कंपनियों के तमाम वीडियो सम्मेलन सॉफ्टवेयरों  का प्रयोग कर रहे हैं।


हालांकि कई मुफ्त वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग विकल्प भी उपलब्ध हैं, जो स्वतंत्र रूप से काम करने वालों, परामर्शदाताओ  या अन्य स्व-नियोजित व्यक्तियों के लिए एक आकर्षक वीडियो सम्मेलन साधन बनते हैं। वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग सॉफ्टवेयरों के मुफ्त संस्करण आमतौर पर ऐसे कम कम क्षमताओं वाले विकल्प होते हैं, जो एकल उपयोगकर्ताओं के लिए थोड़ी कम व्यापक कार्यक्षमता प्रदान करते हैं लेकिन काम चल जाता है।

यहां पर हमने कुछ प्रसिद्ध वीडियो सम्मेलन सॉफ्टवेयरों की सूची हमने बनाने की कोशिश की है। आप को जो भी पसंद हो उस वीडियो कोन्फ्रेंस सॉफ्टवेयर का अपने काम में उपयोग कर सकते हैं।


लाइव वीडियो कोन्फ्रेंस सम्मेलन Live Video Conference

अच्छे वीडियो सम्मेलन सॉफ्टवेयर की विशेषतायें


तो आप को जब यह देखना हो कि कौन सा वीडियो सम्मेलन सॉफ्टवेयर प्रयोग करें, उस से पहले ये आपको ये जानना जरूरी है कि एक अच्छा वीडियो कांफ्रेंस सॉफ्टवेयर कैसा हो, उसकी क्या विशेषतायें होनी चाहिये? हमारे विचार में एक अच्छे वीडियो सम्मेलन सॉफ्टवेयर में ये सारी विशेषतायें होनी चाहिये -

    • विंडोज, एपल, एन्ड्रायड, लाइनक्स आदि सभी कंप्यूटरों पर उपलब्ध होना
    • किसी भी प्रकार के उपकरण जैसे मोबाइल, टैब इत्यादि पर भी उपलब्ध होना
    • कई लोगों के साथ मल्टी पार्टी ऑडियो और वीडियो सम्मेलन की सुविधा देना
    • पहले से मौजूद वीडियो कांफ्रेंस सिस्टम के साथ जुड़ाव और एकीकरण
    • बैठकों की रिकॉर्डिंग करने की सुविधा प्रदान करना
    • एन्क्रिप्टेड डेटा ट्रैफ़िक के साथ अत्यधिक सुरक्षित होना
    • डाटा की गोपनीयता और सुरक्षा प्रदान करना
    • प्रस्तुतियों, पीडीएफ फाइलों और स्क्रीन आदि के रूप में सामग्री साझा करने की सुविधा देना
    • सहयोगी कार्यों के लिए टीमों और कार्य स्थान का निर्माण
    • भारत के इंटरनेट और भारत के टेलीफोन नंबर पर आवाज (जब कि इंटरनेट उपलब्ध नहीं है) की सुविधा देना
    • सफेद बोर्डिंग यानी कि कुछ लिख कर दिखाने की क्षमता देना
    • 100% उपस्थिति और भागीदारी के लिए सभी लोगों के पूर्ण सेट की दृश्यता सुनिश्चित करने वाली एकल खिड़की पर देखने की सुविधा देना
    • एन्क्रिप्टेड और सुरक्षित डाटा के यातायात का आवागमन
    • वीडियो की बहुत ही अच्छे स्तर की कांफ्रेंस सुविधा देना जिससे लोगो को वीडियो सम्मेलन के बाद संतुष्टि हो
    • वीडियो को बन्द करके खाली ऑडियो को प्रयोग करने की सुविधा देना
ये तो थीं साधारतया उपलब्ध होने वाली विशेषतायें जो कि एक अच्छे वीडियो सम्मेलन सॉफ्टवेयर में होनी ही चाहिये।    

वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग सॉफ्टवेयर के साथ होने वाली समस्यायें  


वीडियो सम्मेलन सॉफ्टवेयर के साथ सबसे आम मुद्दों में से एक उसकी कॉल गुणवत्ता है। यानी कि कितनी आसानी से आप किसी के साथ वीडियो सम्मेलन कर सकते हैं। उसकी गति कितनी है? वो कितनी कम बैंडविड्थ पर इंटरनेट पर काम कर सकता है। वीडियो सम्मेलन सॉफ्टवेयर अपने आप में मजबूत हो सकता है पर इस पर वीडियो या ऑडियो की गुणवत्ता शामिल लोगों की इंटरनेट गति पर अत्यधिक निर्भर होती है। 

अत: किसी संभावित हताशा या परेशानी से बचाने के लिये यह महत्वपूर्ण है कि वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग सॉफ़्टवेयर का उपयोग करते समय उपयोगकर्ताओं के पास विश्वसनीय इंटरनेट तक पहुंच हो और साथ ही साथ उसकी गति और गुणवत्ता वहुत अच्छी हो। नहीं तो लोगों को आपस में एक दूसरे से बातचीत के दौरान बहुत सारे व्यवधान होते रहेंगे।


वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग सॉफ्टवेयर के मुख्य लाभ


हमने देखा कि कंपनियों द्वारा अपने व्यवसाय में या फिर ऑनलाइन के माध्यम से पढ़ाई और कोचिंग के लिये या फिर लोगों द्वारा सामाजिक जुड़ाव के लिये वीडियो सम्मेलन सॉफ्टवेयर बहुत ही काम के हैं और इसके बहुत से लाभ और फायदे हैे जिसका लाभ सभी ले रहे हैं। मुख्य तौर पर एक अच्छे वीडियो सम्मेलन सॉफ्टवेयर से ये लाभ होते हैं (और भी अन्य कई लाभ हो सकते हैं) -

    1. सस्ते लंबी दूरी और अंतर्राष्ट्रीय संचार विकल्पों के साथ धन और संसाधनों को बचाता है।
    2. भौगोलिक बाधाओं को दूर करता है और अपनी टीम से दूरी को कम करके मऑनलाइन मिलजुल कर काम करने की सुविधा देता है।
    3. स्क्रीनशेयरिंग और फ़ाइल साझाकरण के माध्यम से आपस में मिलजुल कर काम करने की की अनुमति देकर टीम सहयोग को बढ़ाता है।
    4. लोगों को अपने कार्यालय में आराम से बैठे बैठे से बैठकों में शामिल होने की अनुमति देकर यात्रा की लागत को कम करता है।


निष्कर्ष


निष्कर्ष के तौर पर हम कह सकते हैं कि वीडियो सम्मेलन सॉफ्टवेयर अब लोगों की जरुरत बन गये हैं। अब कोरोना वायरस के माहौल में तो आम लोगों का भी ध्यान इन वीडियो कॉन्फ्रेंस सॉफ्टवेयरों की तरफ गया है और लोगों ने बहुत से विविध तरीकों से इनको प्रयोग करना आरम्भ कर दिया है। हाल ही मैंने वीडियो सम्मेलन सॉफ्टवेयर के द्वारा कई कवि सम्मेलनों और गोष्ठियों में भाग लिया और कुल मिलाकर ये एक मजेदार अनुभव रहा।

तो अब हम ये कह सकते हैं कि वीडियो सम्मेलन सॉफ्टवेयर एक बहुत ही अच्छी तकनाकि पहल है जो हमारे काम की आवश्यकता बनते जा रहे हैं और हम सब को ये अच्छी तरह से परख कर कि एक अच्छा वीडियो सम्मेलन सॉफ्टवेयर कैसा हो, उसके प्रयोग करके जांच लेने कि आवश्यकता है ताकि बाद में किसी कांफ्रेंस के बीच में कोई परेशानी न हो।

आप लोग भी कमेंट कर के बताये कि आपका अच्छा वीडियो सम्मेलन सॉफ्टवेयर पर अनुभव कैसा रहा?

Manisha सोमवार, 29 जून 2020

कोरोना मास्क से अपना ब्रांड चमका रही हैं कंपनियां Corona Mask become Brand Tool for Fashion Companies


Fashion houses have turned Coronavirus face masks as branding tools and made them power billboards for brand logos.

कोरोना की महामारी के बीच कोरोना वायरस से बचने के लिये चेहरे पर हमेशा एक मास्क या हिंदी में कहें तो आवरण या नकाब को लगाने का सरकार की ओर से लोगों को निर्देश है।

लोगबाग भी इस कोरोना की गंभीरता को समझ रहे हैं और जब भी घर से बाहर निकल रहे हैं तो चेहरे पर मास्क लगा कर जा रहे हैं।
जैसा कि हमारे प्रधान मंत्री जी ने भी कहा था कि विपदा में भी संभावना देखनी चाहिये, लगता है इस बात को दुनिया भर की फैशन कंपनियों ने समझ लिया है और चेहरे पर लगाने वाले मास्क को ही अपना ब्रांड प्रसिद्ध करने का जरिया बना लिया है।

Corona Mask become Brand tool कोरोना मास्क से अपना ब्रांड चमका रही हैं कंपनियां


लगभग हर बड़ी फैशन एक्सेसरीज़ सामान बनाने वाली कंपनी इस समय चेहरे पर लगाने वाले मास्क बना रही हैं।

इन नकाबों पर वो अपने लोगो (Logo) को इस तरह से लगा रही हैं कि वो मास्क पर खास तौर पर चमके।

इस तरह से फैशन कंपनियां अदृश्य रुप से अपनी बांड वैल्यू या ब्रांड ताकत बढ़ा रही हैं।

भारत में बड़ी कंपनियों के ब्रांडेड सामान को खरीद कर प्रयोग करने वालों की तादात अच्छी खासी है। भारत में ब्रांड अपनी हैसियत दिखाने का एक मौका है। लोग अपने आप को समाज में स्थापित हुआ दिखाने के लिये बड़े ब्रांड का सामान लेकर उस को दिखाने में पड़े रहते हैं।

बड़ी अंतर्राष्ट्रीय और भारतीय कंपनियां इस बात को जानती और पहचानती हैं इसलिये उन्होंने कोरोना की महामारी के दौरान मास्क लगाने के मौके को अपनी ब्रांड इमेज बढ़ाने के रुप में लिया है।

भारत की लगभग हर फैशन और कपड़े बनाने बनाने वाली कंपनी इस समय मास्क बना रही है।

Corona Mask as Branding Tool for Fashion Companies


लोगों के लिये भी कोरोना मास्क एक मौका लेकर आया है जब कि वो ब्रांडेड मास्क लगा कर अपनी माली हालत और हैसियत का प्रदर्शन कर सकते हैं। भारत के लोगों मे ब्रांडेड सामान को लेकर जबर्दस्त आकर्षण है।

सामने वाले व्यक्ति की पहली निगाह आपके चेहरे पर ही जाती है जो कि उसकी आंखों के ठीक सामने ही होता है। ऐसे में स्वाभाविक है कि वो आपके मास्क को और उस पर लगे ब्रांड के लोगो (Logo) के देख ले।

भारत में अगर आप देखें तो प्रसिद्ध कंपनी लेवि (Levis), गिरोडानो (Girodano), वाइल्डक्राफ्ट (Wildcraft), पूमा (Puma), आदीदास (Adidas), बनाना रिपब्लिक (Banana Republic), एसेल वर्ल्ड (Essel World), निनोश्काइंडिया (NinoshkaIndia) जैसी बड़ी नामी गिरामी और अन्य छोटी बड़ी लगभग सभी फैशन, पोषाक और परिधान बनाने वाली कंपनियां इस मैदान में उतर चुकी हैं।

ब्रांड की प्रसिद्धि के अलावा मुनाफा भी इस मास्क बनाने के धंधे में उतरने का एक कारण है। मास्क बहुत ही कम लागत में बन जाता है और कंपनियां तो अपने बचे हुये कपड़े से ही मास्क बना देती हैं।

फैशन कंपनियों के मास्क 150 रूपये से लेकर 500 रूपये तक में मिल रहे हैं जिससे आप अंदाजा लगा सकते हैं कि किस कदर मुनाफे का धंधा है मास्क बनाना।

नकली सामान बनाने वाले भी बड़ी कंपनियों के मास्क की नकल बाजार में ले आये हैं।

मास्क नकली हो या असली, फैशन कंपनियों के ब्रांड की पहचान तो कोरोना काल में चेहरे का मास्क से बढ़ ही रही है। इसलिये कोरोना मास्क से अपना ब्रांड चमका रही हैं फैशन कंपनियां।

Manisha रविवार, 21 जून 2020

कोरोना काल में बहुत कुछ बदलेगा - स्वचालित नल लगाने होंगे

आपके मैं एक उदाहरण से बताना चाहूंगी कि कोरोना के समय और इसके बाद कैसे हम लोगों की दुनिया छोटी छोटी बातों में बदल जायेगी। 

Fully Automated Tap पूर्ण स्वचालित नल
हमारी सोसाइटी के क्लब में कुछ समय पहले तक जब कि कोरोना का कोई नाम भी नहीं जानता था तब इस क्लब के वाश रुम (सार्वजनिक शौचालय) में एक पूर्ण स्वचालित नल लगा था जिसके आगे हाथ करने से पानी लगभग एक मिनट तक अपने आप निकलता रहता था।

वो अच्छा चल रहा था पर कुछ दिनों के बाद उसके संवेदक (सेंसर) में कुछ खराबी आ गई और इन नलों ने काम करना बंद कर दिया।

तो इन के स्थान पर जो नये नल लगाये गये वो स्वचालित तो थे पर ऐसे थे कि पहले उन्हें दबाना पड़ता है और फिर उसमें से आने वाला पानी लगभग एक मिनट बाद बंद हो जाता है। इस व्यवस्था से भी किसी को कोई परेशानी नहीं थी और सब ठीक चल रहा था।


लेकिन अब मार्च के महीने में होली के आस पास से जब लोग कोरोना वायरस को लगकर जागरूक होने लगे और लोगों को यह हिदायत सरकार द्वारा दी गई कि उन्हें अपने हाथों को बार बार साबुन से धोना है और वो भी बीस सेकंड तक। 

अब इस नल पर अगर आप अपना हाथ धोने को लिये आते हैं
Automated Tap स्वचालित नल
तो पहली बात तो ये कि आपको इस नल को छूकर चलाना पड़ेगा, दूसरी बात जब आप हाथ गीला करके 20 सेकन्ड तक अपना हाथ साबुन से रगड़ते रहते हैं तब तक नल का स्वचालिच संवेदक उसको बंद कर देता है और फिर साबुन को हाथ से हटाने के लिये पानी के लिये नल को फिर से छू कर चलाना पड़ता है। 

इस कोरोना काल में वैसे ही हर कोई कुछ भी छूने से डर रहा है वहां पर नल वो भी सार्वजनिक शौचागार में तो बिलकुल ही अस्पृश्य बन जाता है।

अब लोग फिर से वहां पर पूर्ण स्वचालित नल की मांग कर रहे हैं।

ये तो मैंने एक उदाहरण दिया है। ऐसे कितनी ही जगह इस बात की आवश्यकता महसूस की जा रही होगी।

मैंने अब इस बात को महसुस किया है कि कोरोना काल के बाद स्वचालित वस्तुऔं और मशीनों की मांग ज्यादा बढ़ेगी और लोग अपने को सुरक्षित रखने के क्रम में किसी वस्तु या व्यक्ति को छूने से परहेज कर रहे हैं और शायद करते भी रहेंगे।  

 

Manisha शनिवार, 20 जून 2020

घिसी पिटी भारतीय नीतियां जिनसे भारत को घाटा हो रहा है


जब से भारत ने अंग्रेजों से स्वाधीनता प्राप्त करी है तब से ही हम भारत के लोग एक ऐसी काल्पनिक दुनिया की सोच में रहते हैं जहं पर सब कुछ अच्छा होता है और सारे देश और वहां के लोग सीधे और सच्चे होते हैं। इन्हीं ख्यालों में हमने कुछ नीतियां और जुमले बनाये हुये हैं और समय समय पर उनकी बात करते रहते हैं।


आजादी के बाद से दुनिया कहां से कहां पहुंच गई पर हम अभी भी इन्हीं नीतियों और जुमलों के जाल में फंसे हुये हैं। एक-आधा नीति को शायद हमने छोड़ा होगा या नई कोई नीति बनाई होगी वर्ना तो बस पुराने रिकार्ड की तरह हम हमेशा वही बातें दोहराते रहते हैं।


Outdated Indian Policies घिसी पिटी भारतीय नीतियां


घिसी पिटी नीतियां और जुमले


आइये आपको बताते हैं ऐसी ही कुछ घिसी पिटी नीतियां और जुमले जो भारत में चलती हैं -

  1. हम दुनिया के जिम्मेदार लोकतांत्रिक देश हैं - जब आप पिट गये और कोई कार्रवाई न करने का बहाना है
  2. वसुधैव कुटुंबकम - इस का फायदा उठा कर सब देशों के लोग अवैध तरीके से भारत में रह रहे हैं
  3. पंचशील और हिंदी-चीनी भाई भाई - ये बात तो 1962 में ही पिट गई
  4. गुट निरपेक्षता नीति - अब  ये तो बिलकुल ही समाप्त होने को आई लेकिन हम अभी भी इसका जिक्र करते रहते हैं
  5. गुजराल डॉक्टरिन - पाकिस्तान हमेशा फायदा उठाता है
  6. पहले परमाणु हथियारों का प्रयोग न करने की नीति - तो क्या जब हमारे ऊपर कोई परमाणु बम गिर जायेगा तब हम प्रयोग करेंगे तो हमें उससे पहले भयानक नुकसान तो हो चुका होगा
  7. भारत ने आज तक किसी देश पर हमला नहीं किया - ये बात हम बार बार बताते हैं पर इसको भारत के दुश्मन भारत की कमजोरी समझते हैं
  8. भारत सब को साथ लेकर चलना चाहता है - अरे भाई सबको कभी साथ नहीं लिया जा सकता, पहले अपना फायदा देखो
  9. भारत समस्या का समाधान बातचीत और शांति से चाहता है - बातचीत और शांति से तो आजतक अपनी बढ़त को गंवाया ही है, बेहतर है एक-दो बार अशांति से भी समस्या समाधान निकालें
  10. पाकिस्तान की जनता तो शाति चाहती है पर वहां के शासक नहीं - अरे भाई जनता तो यहां से ही गई है न, जो कि साथ नहीं रहना चाहती थी, शासक तो राजनीतिक लोग होते हैं वो लोगों की नब्ज पहचानते हैं, अगर जनता भारत के साथ शांति से रहना चाहेगी तो कोई भी शासन में हो वो वाेट लेने के लिये जनता की बात को ही मानेगा। असल ये है कि पाकिस्तानी जनता ही भारत विरोधी है
  11. दुनिया के लोकतांत्रिक देशों को एक साथ आना चाहिये - अगल अलग परिस्थितियों और भौगोलिक स्थिति के अनुसार सब देश निर्णय लेते हैं
  12. हम अहिंसा को मानने वाले देश हैं - यही तो सारी कमजोरी का कारण है
  13. आतमकवाद को कई धर्म नहीं है - बताइये? क्या सचमुच?
  14. हम विश्व आध्यात्मिक गुरू हैं - हो सकता है कभी रहे हों या वास्तव में हों पर दुनिया तभी मानेगी जब हम आर्थिक और सामरिक तौर पर भी सशक्त हों


और भी कई ऐसी नीतियां और जुमले जिन्हें हम ढो रहे हैं।

अच्छा हो यदि हम इन रुमानी बातों से निकल कर ठोस धरातल पर होने वाले घटनाकृम को देख कर नीतियां बनायें और भारत देश को सशक्त बनायें।

Manisha शुक्रवार, 19 जून 2020